बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर: अपनी पसंदीदा खिलाड़ी को दें वोट

बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर, BBC ISWOTY

2022 के 'बीबीसी स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर' के दावेदारों के नामों की घोषणा कर दी गई है. यह इस अवार्ड का चौथा साल है.

2022 के लिए दिए जाने वाले अवार्ड के पाँच दावेदारों की सूची में वेटलिफ़्टर मीराबाई चानू, कुश्ती खिलाड़ी साक्षी मलिक और विनेश फोगाट, बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु और मुक्केबाज़ निख़त ज़रीन हैं.

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बीबीसी न्यूज़ की इंडिया प्रमुख रूपा झा ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा, "यह अवार्ड भारतीय महिला खिलाड़ियों की लगन और जीवट का सम्मान करता है और विभिन्न खेलों में उनकी कामयाबियों का जश्न मनाता है."

उन्होंने कहा, "हमें इस बात की बहुत ख़ुशी है कि इस साल से हम बीबीसी इंडियन पैरा-स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर का अवार्ड शुरू करने जा रहे हैं. इसका मक़सद महिला पैरा-एथलीटों के संघर्ष और उनकी सफलताओं का सम्मान करना है."

घोषणा के दौरान क्रिकेट खिलाड़ी अंजुम चोपड़ा ने कहा, "पिछले कुछ सप्ताह महिला क्रिकेट के लिहाज़ से काफ़ी अच्छे रहे. सब कुछ बदल गया, इसका कितना प्रभाव पड़ेगा, इसके लिए हमें प्रतीक्षा करनी होगी और देखना होगा."

अंजुम चोपड़ा

इस बार के दावेदारों में दो बॉक्सर भी मौजूद हैं. भारत के स्टार बॉक्सर विजेंदर सिंह ने इस बार के दावेदारों पर कहा, "मैरी कॉम, निखत ज़रीन और साक्षी मलिक - ये सभी बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं. मेरा मानना है कि महिलाएं हमसे दो क़दम आगे हैं."

पैरा-एथलीट और 2018 के एशियन पैरा गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट एकता भ्याण ने कहा कि बीबीसी का आयोजन महिला पैरा-खिलाड़ियों का सम्मान करके एक बहुत ही अच्छा संदेश दे रहा है कि विकलांग लोगों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और उनकी कामयाबियों का भी जश्न होना चाहिए.

एकता भ्याण ने कहा, "खिलाड़ियों को इस तरह की पहचान मिलने से लोगों में जागरूकता बढ़ती है, और पैरा-खेलों को उनकी सही जगह मिलती है. मुझे आशा है कि इस आयोजन की वजह से पैरा खिलाड़ियों को मुक़ाबला करने और आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे, इससे विकलांग लोगों का हौसला बढ़ेगा और वे खेलों में हिस्सा लेने की ओर कदम बढ़ाएँगे."

विजेंदर सिंह

ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय बॉक्सर विजेंदर सिंह बेनीवाल ने कहा कि उन्हें बहुत ख़ुशी है कि बीबीसी के ज़रिए देश के लोगों को महिला खिलाड़ियों की कामयाबियों की शानदार कहानियों के बारे में पता चल रहा है.

विजेंदर सिंह ने कहा, "हमारी महिला खिलाड़ियों ने अपने दमखम को बार-बार मैदान में साबित किया है. वो असली फ़ाइटर हैं. वे वाक़ई सम्मान की हक़दार हैं, उनका जितना सम्मान किया जाए, वह कम ही होगा. मैं महिला खिलाड़ियों को सम्मानित करने के बीबीसी के इस क़दम का स्वागत करता हूँ."

BBC ISWOTY, बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर

आप बीबीसी की भारतीय भाषाओं की वेबसाइटों- बीबीसी हिंदी, बीबीसी मराठी, बीबीसी पंजाबी, बीबीसी गुजराती, बीबीसी तमिल, बीबीसी तेलुगु या बीबीसी स्पोर्ट्स- में से किसी पर जाकर अपने पसंदीदा भारतीय महिला खिलाड़ी के लिए वोट कर सकते हैं.

वोटिंग 20 फ़रवरी 2023 की रात 11.30 बजे (भारतीय समयानुसार) तक की जा सकती है और विजेता के नाम की घोषणा 5 मार्च 2023 को दिल्ली में एक समारोह के दौरान की जाएगी.

सभी नियम-शर्तें और गोपनीयता की सूचना वेबसाइट पर हैं.

नतीजे की घोषणा बीबीसी भारतीय भाषाओं की वेबसाइट्स और बीबीसी स्पोर्ट्स वेबसाइट पर भी की जाएगी.

जिस महिला खिलाड़ी को सबसे अधिक पब्लिक वोट मिलेंगे वो बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर चुनी जाएँगी.

बीबीसी स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर के दावेदारों से मिलें-

वीडियो कैप्शन, मीराबाई चानू: बाँस से वेटलिफ्टिंग की प्रैक्टिस करने से देश के लिए मेडल जीतने का सफ़र

मीराबाई चानू

वेटलिफ़्टिंग चैम्पियन मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक 2021 में सिल्वर मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर खेलों के इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया.

इसके बाद वे वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप 2022 में सिल्वर और बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में गोल्ड मेडल जीतीं.

2016 के रियो ओलंपिक खेलों में भार नहीं उठा सकने के बाद खेलों को लगभग अलविदा कर चुकीं मीराबाई ने वहाँ से एक लंबा सफ़र तय किया है.

उन्होंने वर्ल्ड वेटलिफ़्टिंग चैंपियनशिप 2017 में गोल्ड मेडल जीत कर अपनी योग्यता साबित की.

देश के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में चाय बेचने वाले पिता के घर में पैदा हुईं मीराबाई चानू को अपने खेल करियर के शुरुआती चरण में बहुत अधिक आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा.

लेकिन वे सभी बाधाओं को सफलतापूर्वक पार करती हुई चैंपियन बनीं. मीराबाई चानू पिछले वर्ष बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर का अवार्ड जीत चुकी हैं.

वीडियो कैप्शन, साक्षी मलिक: पितृसत्ता से लड़कर ओलंपिक में मेडल जीतने की कहानी

साक्षी मलिक

साक्षी मलिक ओलंपिक में मेडल जीतने वालीं भारत की पहली महिला कुश्ती खिलाड़ी हैं.

उन्होंने 2016 के रियो ओलंपिक में 58 किलो भार वर्ग में कांस्य पदक हासिल करके यह इतिहास रचा था.

वे ओलंपिक मेडल जीतने वालीं चौथी भारतीय महिला खिलाड़ीं बनी थीं.

साक्षी को हमेशा से खेलों में दिलचस्पी थी और जब ये पता चला कि उनके दादा भी एक पहलवान थे तो उन्हें इससे और प्रेरणा मिली.

रियो ओलंपिक में लाजवाब प्रदर्शन करने के बाद साक्षी का करियर एकदम से औंधेमुंह नीचे की ओर चला गया लेकिन उन्होंने 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर चौंका देने वाली वापसी की.

साक्षी मलिक पहले भी कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत और कांस्य पदक जीत चुकी हैं.

वीडियो कैप्शन, विनेश फ़ोगाट: हार, चोट और ताने... लेकिन इस पहलवान को कोई तोड़ ना सका

विनेश फोगाट

कुश्ती में विनेश फोगाट दो वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं.

वे कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स दोनों में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान भी हैं.

विनेश कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीन गोल्ड मेडल हासिल कर चुकी हैं, हालांकि ये मेडल अलग-अलग वज़न वर्ग में आए थे. कॉमनवेल्थ गेम्स में वे बीते वर्ष 2022 में 53 किलो भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीती थीं.

विनेश महिला पहलवानों के उस परिवार से आती हैं जहाँ उनकी चचेरी बहनें गीता और बबीता फोगाट ने भी कई अंतरराष्ट्रीय मेडल जीते हैं.

वीडियो कैप्शन, पीवी सिंधु: भारत की इकलौती महिला खिलाड़ी जिसने ओलंपिक में दो बार जीता मेडल

पीवी सिंधु

बैडमिंटन खिलाड़ी पुसरला वेंकट सिंधु (पीवी सिंधु) ओलंपिक खेलों में दो व्यक्तिगत मेडल हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं.

टोक्यो में मिला कांस्य उनका दूसरा ओलंपिक मेडल था- वे रियो ओलंपिक 2016 में सिल्वर जीती थीं.

सिंधु ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में गोल्ड मेडल जीता था. इससे पहले सिंधु ने बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (बीडब्ल्यूएफ़) वर्ल्ड टूर फ़ाइनल्स 2021 में सिल्वर मेडल जीता था.

सिंधु ने 2019 में वर्ल्ड चैंपियनशिप गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय बनने का ऐतिहासिक कारनामा किया था. वे सितंबर 2012 को 17 साल की उम्र में ही बीडब्ल्यूएफ़ वर्ल्ड रैंकिंग के टॉप-20 खिलाड़ियों में पहुँच गईं थीं.

2019 में उन्होंने सर्वाधिक वोट हासिल कर पहला बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ़ द ईयर अवार्ड जीता था.

वीडियो कैप्शन, निख़त ज़रीन, जो बॉक्सिंग की दुनिया में भारत के भविष्य का चेहरा हैं

निख़त ज़रीन

2011 में जूनियर वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप जीत चुकीं निख़त ज़रीन महिलाओं की वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2022 में गोल्ड मेडल जीत चुकी हैं.

निख़त बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के फ़्लाइवेट वर्ग मुक्केबाज़ी में भी गोल्ड जीतीं.

उन्होंने 2022 का अंत भारत में नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल करने के साथ किया. ज़रीन को उनके पिता ने इस खेल में डाला क्योंकि वे अपनी ऊर्जावान बेटी की ताक़त को दिशा देना चाहते थे.

12 साल की उम्र में बॉक्सिंग के कारण आंखों के चारों ओर हुए काले धब्बों पर रिश्तेदारों के व्यंग्य से उनकी मां चिंतित नहीं हुईं.

निख़त के पिता ने उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया. तब से निख़त ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

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