पेरिस ओलंपिक: महिला बॉक्सिंग विवाद में अब तक हमें क्या पता है और क्या नहीं?

पेरिस ओलंपिक

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इमेज कैप्शन, पेरिस ओलंपिक में बॉक्सिंग का ये मुक़ाबला गुरुवार को अल्जीरिया की ईमान ख़लीफ़ और इटली की एजेंली करिनी के बीच हुआ था
    • Author, सीन केर्न्स
    • पदनाम, बीबीसी स्पोर्ट

पेरिस ओलंपिक में गुरुवार हुए बॉक्सिंग के एक मुक़ाबले ने बड़ा विवाद पैदा कर दिया है. ओलंपिक में अल्जीरिया की महिला बॉक्सर ईमान ख़लीफ़ पर आरोप लगा कि वो पुरुष हैं और महिलाओं के मुक़ाबले में खेल रही हैं.

इटली की बॉक्सर एजेंला करिनी ने उनके साथ मुक़ाबले को 46 सेकेंड में ही छोड़ दिया था और ये कहते हुए रिंग से बाहर आ गई थीं कि वो अपनी जान बचा कर वापस आई हैं.

इसके बाद से कहा जाने लगा कि ख़लीफ़ में पुरुषों में पाए जाने वाले हार्मोन टेस्टोस्टोरेन का स्तर ऊंचा है और इस लिहाज से ओलंपिक में उनका महिला बॉक्सिंग में खेलना गै़र-कानूनी है.

हालांकि इस पूरे मामले में जेंडर को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है. आइए जानते हैं क्या है ये पूरा मामला और अब तक जो हुआ उसके बारे में हमें क्या पता है और क्या नहीं.

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दरअसल अल्जीरिया की बॉक्सर ईमान ख़लीफ़ और ताइवान की बॉक्सर लिन यु-तिंग को पिछले साल वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप से ये कह कर बाहर कर दिया गया था कि वो जेंडर एलिजिबिलिटी टेस्ट में नाकाम रही हैं.

लेकिन पेरिस ओलंपिक में दोनों को खेलने की अनुमति दे दी गई.

पेरिस ओलंपिक में 25 वर्षीय ख़लीफ़ 66 किलो वर्ग में इटली की एजेंला करिनी को हराकर क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुकी थीं. वहीं लिन 57 किलो वर्ग में उज़्बेकिस्तान की सितोरा तुर्दिबेकोवा को हराकर अंतिम आठ में पहुंची हैं.

2023 में इन दोनों महिला बॉक्सरों को अयोग्य करार दिए जाने के बाद पेरिस ओलंपिक में उन्हें खेलने के लिए दी गई मंजूरी अब विवादास्पद बन गई है.

इस फै़सले को लेकर कुछ लोग इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी यानी आईओसी की आलोचना कर रहे हैं.

दूसरी ओर, गुरुवार को ईमान ख़लीफ़ के ख़िलाफ़ अपना मैच सिर्फ 46 सेकेंड में छोड़ कर बाहर आने वाली एजेंला करिनी ने उनसे माफी मांगी है. करिनी ये कह कर रिंग से बाहर आ गई थीं कि अपनी जान बचाने के लिए वो मुक़ाबला ख़त्म कर रही हैं.

वहीं ख़लीफ़ ने कहा था कि वो गोल्ड जीतने के लिए आई हैं किसी से भी लड़ सकती हैं.

अतीत में ओलंपिक के बॉक्सिंग मुक़ाबलों के आयोजक रहे इंटरनेशनल बॉक्सिंग एजेंसी (आईबीए) ने भी ख़लीफ़ और लिन को महिला प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेने की मंज़ूरी देने के लिए आईओसी की खुलकर आलोचना की है.

इस मामले को समझने के लिए कुछ सवालों के जवाब जानने जरूरी हैं-

जन्म के समय ख़लीफ़ लड़की थीं या लड़का?

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ख़लीफ़ हमेशा महिला वर्ग में खेलती रही हैं. इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी ने उन्हें महिला खिलाड़ी के तौर पर मान्यता दी है.

शुक्रवार को इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी के प्रवक्ता मार्क एडम्स ने कहा,''अल्जीरिया की बॉक्सर ख़लीफ़ लड़की पैदा हुई थीं. उनका रजिस्ट्रेशन लड़की के तौर पर हुआ है. वो महिला के तौर पर अपनी जिंदगी जी रही हैं. उन्हें महिला माना गया और उनके पासपोर्ट में उनका जेंडर महिला है.''

उन्हें कहा, ''ये ट्रांसजेंडर का मामला नहीं है. इस मामले में कुछ भ्रम रहा है और लोगों को कहा गया कि एक पुरुष एक महिला से मुकाबला कर रहा है. जबकि ऐसी कोई बात नहीं है. इस मामले में पूरी सहमति है कि कोई पुरुष महिला से नहीं लड़ रहा था.''

ख़लीफ़ ने अल्जीरिया में एक लड़की के तौर पर बड़े होने के अनुभवों का जिक्र किया है. उन्होंने बताया है कि कैसे लड़कों के साथ फुटबॉल खेलते समय उनके साथ भेदभाव होता था.

मार्च 2024 में उन्होंने कहा था, ''अपने रास्ते में अड़चनों को न आने दें. ऐसी किसी भी बाधा को हटाने की कोशिश करें. मेरा सपना गोल्ड मेडल जीतने का है और मैं चाहती हूं कि अल्जीरिया में जो वंचित बच्चे और लड़कियां हैं उन्हें मेरी जीत से प्रेरणा मिले.''

इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि ख़लीफ़ खुद का परिचय एक महिला के अलावा किसी अन्य रूप में देती हैं.

ख़लीफ़ का अब तक का बॉक्सिंग करियर कैसा रहा है?

बॉक्सिंग

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25 साल की ख़लीफ़ पिछले आठ साल से बॉक्सिंग कर रही हैं.

वह 19 साल की उम्र में एमेच्योर मुकाबलों में उतरी थीं. 2018 में वो वर्ल्ड चैंपियनशिप में 17वें स्थान पर रही थीं. 2019 में महिलाओं के लिए हुई वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में वो 19वें स्थान पर रहीं.

पहली बार वो ओलंपिक में 2020 के टोक्यो ओलंपिक से आईं. वहां 60 किलो वर्ग में लड़ते हुए हुई वो क्वार्टर फाइनल में आयरलैंड की केली हैरिंगटन से 5-0 से हार गईं. हैरिंगटन ने उस प्रतिस्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता था.

इसके बाद वह वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीतने वाली पहली अल्जीरियाई मुक्केबाज़ बन गईं. 2022 में आयरलैंड की एमी ब्रॉडहर्स्ट से हारने के बाद उन्हें सिल्वर मेडल मिला था.

ब्रॉडहर्स्ट अब ब्रिटेन का प्रतिनिधित्व करती हैं. इसके बाद ख़लीफ़ ने 2022 की अफ्रीकन चैंपियनशिप जीतीं और उसी साल मेडिटेरेनियन गेम्स में भी विजयी रहीं.

2023 में अरब गेम्स में उन्होंने 66 किलो वर्ग का गोल्ड मेडल जीता. सेनेगल में हुए अफ्रीकन ओलंपिक के फाइनल में मोज़ाम्बिक की अलसिंदा पंगुआना को हराकर उन्होंने 2024 के ओलंपिक खेलों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की थी.

अब तक ख़लीफ़ ने 51 मैच खेले हैं. इनमें से उन्हें 42 में जीत मिली हैं. नौ मुक़ाबलों में वो हारी हैं. 42 जीतों में छह उन्होंने नॉकआउट से जीते हैं.

करिनी पर ख़लीफ़ की जीत विवाद में क्यों?

इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी के प्रवक्ता मार्क एडम्स

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इमेज कैप्शन, इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी के प्रवक्ता मार्क एडम्स ने कहा है कि ख़लीफ़ महिला के तौर पर आईओसी की प्रतिस्पर्धाओं का हिस्सा रही हैं

करिनी पर जीत के बाद ख़लीफ़ की जो आलोचना हो रही है और वो ज्यादातर इस बात पर आधारित है कि उन्हें भारत (नई दिल्ली) में 2023 में आयोजित वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में अयोग्य करार दिया गया था.

चीन की यांग ल्यु के ख़िलाफ़ गोल्ड मेडल मुकाबले में उतरने से पहले ही वो इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन के जेंडर एलिजिबिलिटी टेस्ट में फेल हो गई थीं.

पहले तो उन्होंने इसके ख़िलाफ़ स्पोर्ट्स आर्बिट्रेशन कोर्ट में अपील की लेकिन बाद में वापस ले ली.

रूस की अगुवाई वाले इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन ने कहा, ''खलीफ़ महिलाओं की प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आईबीए नियमों के मुताबिक़ पात्रता के मानदंडों को पूरा नहीं करतीं.''

आईबीए के नियमों के अनुसार, ''बॉक्सर अपने ही जेंडर के बॉक्सरों के ख़िलाफ़ लड़ेंगे, यानी महिला बनाम महिला और पुरुष बनाम पुरुष.''

''अगर किसी इंसान में XX क्रोमोसोम है तो तो आईबीए के मुताबिक़ महिला और किसी में XY क्रोमोसोम है तो वो पुरुष है.''

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इंटनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन ने इस बात से इनकार किया है कि ख़लीफ़ के टेस्टोस्टेरोन लेवल की जांच हुई थी.

हालांकि गुरुवार को बीबीसी के खेल संपादक डैन रोन के साथ एक इंटरव्यू में आईबीए के सीईओ क्रिस रॉबर्ट्स ने कहा, ''दोनों मामलों यानी ख़लीफ़ और लिन के मामलों में XY क्रोमोसोम पाए गए.''

रॉबर्ट्स ने कहा कि इस जांच में अलग-अलग पहलू थे जिनके मुताबिक़ ख़लीफ़ का शरीर जैविक तौर पर पुरुष शरीर नहीं था.

दूसरी ओर इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी ने जांच की सटीकता पर संदेह जताया है.

कमेटी के प्रवक्ता पार्क एडम्स ने कहा, ''हमें पता नहीं कि प्रोटोकॉल क्या था. हमें ये भी पता नहीं कि टेस्ट सटीक था या नहीं. हम नहीं जानते कि हमें जांच पर भरोसा करना चाहिए या नहीं.''

उन्होंने कहा, ''जांच होने और इसकी सटीकता और उस प्रोटोकोल को स्वीकार करने में अंतर है.''

हालांकि बीबीसी अभी तक ये पता नहीं कर पाया है कि जेंडर एलिजिबिलीटी टेस्ट में किन चीजों की जांच की जाती है.

इंटरनेशल बॉक्सिंग एसोसिएशन के फैसले के बाद ओलंपिक बॉक्सिंग नियमों में क्या बदलाव हुआ है?

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पिछले मुकाबलों के उलट टोक्यो ओलंपिक में बॉक्सिंग प्रतियोगिता का आयोजन आईबीए के बजाय इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी ने किया था.

इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी ने 2019 में वित्तीय मामलों प्रशासन, नैतिकता, रेफरी और फैसलों पर उठाई गई चिंताओं को देखते हुए इंटरनेशनल बॉक्सिंग कमेटी को सस्पेंड कर दिया था.

इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी की ओर से तय जरूरी सुधारों को लागू करने में नकाम रहने पर 2023 में इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन से स्पोर्ट्स की वर्ल्ड गवर्निंग बॉडी का दर्जा छीन लिया गया.

एक अपील के बाद अप्रैल 2024 में कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा गया है.

इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी ने इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन का दर्जा ख़लीफ़ और ताइवान की लिन यु-तिंग को 2023 विश्व चैंपियनशिप से बाहर करने के फैसले के चार महीने बाद खत्म किया था.

इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी ने 2021 में ''लैंगिक पहचान और लैंगिक भिन्नता के आधार पर निष्पक्षता,समावेश और गैर-भेदभाव' पर एक पर एक फ्रेमवर्क जारी की थी.''

इस दस्तावेज़ में दस नियम नहीं दस सिद्धांत दिए गए थे. कहा गया था कि राष्ट्रीय खेल निकायों को एथलीटों को चयन करते समय इनका पालन करना होगा.

इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी ने कहा, ''वो खेलों में किसी भी ऐसे एथलीट की भागीदारी का समर्थन करता है, जो उनके इंटरनेशनल फेडरेशन की ओर से स्थापित ओलंपिक खेलों में प्रतिस्पर्धा पात्रता के मानदंडों को पूरा करता है. आईओसी किसी ऐसे एथलीट के साथ लिंग पहचान या यौन विशेषताओं के आधार पर भेदभाव नहीं करेगा, जिसने अपने आईएफ यानी इंटरनेशनल फ़ेडरेशन के जरिये से क्वालीफाई किया है.''

बॉक्सिंग में कैसी जांच होती है

2019 में ओलंपिक में डोपिंग नियंत्रण की जिम्मेदारी इंटरनेशनल टेस्टिंग एजेंसी को सौंप दी गई.

आईओसी ने कहा है कि वो डोपिंग उत्पादों का इस्तेमाल करते या इन्हें मुहैया कराए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के ख़िलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस अपनाएगा.

जांच में किसी एथलीट के टेस्टोस्टेरोन के स्तर की जांच की जाती है.

आईबीए के सीईओ ने कहा है , "ऐसी कई महिलाएं हैं जिनमें पुरुषों की तुलना में टेस्टोस्टेरोन का स्तर अधिक है. इसलिए टेस्टोस्टेरोन की जाँच कोई जादू की छड़ी है, ये विचार सही नहीं है. "

सवाल ये है कि क्या बहस अब इस मामले में ट्रांसजेंडर पहलू को लेकर हो रही है.

नहीं, इस बात के कोई संकेत नहीं है कि ख़लीफ़ को ट्रांसजेंडर या इंटरसेक्सुअल के तौर पर पहचान दी जा रही हो.

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