विनेश के साथ करोड़ों भारतीयों का सपना कैसे एक झटके में टूट गया

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विनेश के साथ करोड़ों भारतीयों का सपना कैसे एक झटके में टूट गया

काश वक़्त को थामने की कोई मशीन होती, तो करोड़ों भारतीय उस वक़्त को थाम लेना चाहते जब विनेश ने पेरिस ओलंपिक के फ़ाइनल में जगह बनाई थी.

सपने टूटने की कोई आवाज़ नहीं होती, काश, इसे सुनने का कोई यंत्र होता तो अभी विनेश के सीने से सबसे तेज़ आवाज़ सुनाई दे रही होती.

विनेश पोगाट

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दुख को मापने का कोई पैमाना नहीं होता, अगर ये तय होता तो विनेश के दुख के आगे वो भी छोटा पड़ जाता.

कोई चंद घंटों में कैसे सड़क के संघर्ष से सितारा बनता है और फिर रातभर में वही सितारा कैसे गर्दिश में चला जाता है, इसे समझने के लिए विनेश के साथ गुज़रे कुछ घंटे ही काफी हैं. अपने हर एक विरोधी को पछाड़ते हुए, वो जैसे-जैसे मुस्कुराते हुए आगे बढ़ रही थीं, तो लग रहा था कि कोई ज़ख़्म है जिसे वो एक-एक कर जीत के मरहम से भरती जा रही हैं. लेकिन किसे पता था कि अंतिम पड़ाव से पहले उन्हें एक ऐसा ज़ख़्म मिलेगा जो टीस बनकर शायद हमेशा सालता रहे.

स्क्रिप्ट और आवाज़ः नवीन नेगी

वीडियो एडिटिंगः शाहनवाज़ अहमद

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