नीरज चोपड़ा: पानीपत के गांव से पेरिस ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने तक, कैसा रहा सफ़र

नीरज चोपड़ा

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पेरिस ओलंपिक के पुरुष जेवलिन थ्रो में (भाला फेंक) भारत के नीरज चोपड़ा ने सिल्वर मेडल जीता है. वो ओलंपिक में लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल जीतने से चूक गए.

पाकिस्तान के अरशद नदीम ने इतिहास रचते हुए गोल्ड मेडल जीता और नया ओलंपिक रिकॉर्ड भी बनाया. अरशद नदीम ने 92.97 मीटर का थ्रो फेंका.

वहीं नीरज चोपड़ा का बेस्ट थ्रो 89.45 मीटर का रहा और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा.

छह राउंड में वो पांच बार फाउल हुए और एकमात्र दूसरे राउंड में उन्होंने 89.45 मीटर का थ्रो किया.

2020 टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड जीतकर नीरज चोपड़ा ने इतिहास रचा था.

लेकिन अब पेरिस ओलंपिक में अशरद नदीम ने इतिहास रचा और वह गोल्ड मेडल जीतने वाले पाकिस्तान के पहले एथलीट बन गए हैं.

जेवलिन थ्रो में ब्रॉन्ज़ मेडल ग्रेनाडा के एंटर्सन पीटर्स ने 88.54 मीटर के स्कोर के साथ जीता है.

माना जा रहा था कि जर्मनी के वेबर कड़ी चुनौती देंगे लेकिन वो 87.40 मीटर के स्कोर के साथ छठे नंबर पर रहे.

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जीत की खुशी और बधाई

सिल्वर मेडल जीतने के बाद नीरज चोपड़ा के गांव में ख़ुकी लहर दौड़ गई.
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पीएम मोदी

नीरज चोपड़ा कीइस जीत के साथ ही हरियाणा के सोनीपत में नीरज चोपड़ा का गांव जश्न में डूब गया.

नीरज चोपड़ा की मां ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "हमारा तो सिल्वर ही गोल्ड के जैसा है और जिसका (अरशद नदीम) गोल्ड आया है वो भी हमारा ही लड़का है, मेहनत करता है."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई देते हुए सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, "नीरज उत्कृष्टता के साक्षात रूप हैं! बार-बार उन्होंने अपनी श्रेष्ठता दिखाई है. भारत में इस बात से खुशी है कि उन्होंने एक और मेडल अपने नाम कर लिया है. सिल्वर जीतने पर उन्हें बधाई. वो आनेवाले अंसख्य एथलीटों को अपने सपने पूरे करने और देश को गौरवान्वित करने के लिए प्रेरित करते रहेंगे."

नीरज चोपड़ा के सिल्वर मेडल के साथ ही खेलों के इस महाकुंभ में भारत के पांच मेडल हो गए हैं.

गुरुवार को ही भारतीय हॉकी टीम ने स्पेन को हराकर लगातार दूसरी बार ओलंपिक में कांस्य पदक जीता.

पाकिस्तान के अरशद नदीम का रिकॉर्ड

अरशद नदीम

पाकिस्तान के जेवलिन थ्रोवर अरशद नदीम ने दूसरे ही राउंड में 92.97 मीटर का थ्रो कर सबको चौंका दिया.

इसके बाद के राउंड में वो अपने ही बनाए इस रिकॉर्ड को नहीं तोड़ पाए. हालांकि छह में से वो सिर्फ़ एक राउंड में ही फाउल हुए.

यह उनके करियर का भी सर्वश्रेष्ठ और ओलंपिक का अबतक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है. और यह रिकॉर्ड अबतक का छठा सबसे बड़ा रिकॉर्ड है.

इससे पहले टोक्यो ओलंपिक में, नदीम ने 84.62 मीटर का थ्रो किया था. साल 2022 में अरशद नदीम ने 90.18 मीटर के थ्रो के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स में रिकॉर्ड क़ायम किया था.

जेवलिन थ्रो का विश्व रिकॉर्ड चेक गणराज्य के यान ज़ेलेनी के नाम है, जिन्होंने साल 1996 में जर्मनी में होने वाले मुक़ाबलों में 98.48 मीटर की दूरी पर जेवलिन थ्रो किया था.

नीरज चोपड़ाः पानीपत के गाँव से शुरू हुई कहानी

नीरज चोपड़ा

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बीबीसी न्यूज़ संवाददाता वंदना ने 2021 में नीरज चोपड़ा पर एक कहानी की थी.

उसमें उन्होंने नीरज चोपड़ा के शुरुआती जीवन के बारे में विस्तार से बताया था-

नीरज की कहानी शुरू होती है पानीपत के एक छोटे से गाँव से. यहाँ लड़कपन में नीरज भारी भरकम होते थे- क़रीब 80 किलो वज़न वाले. कुर्ता पायजामा पहने नीरज को सब सरपंच कहते थे.

फ़िटनेस ठीक करने के हिसाब से वो पानीपात में स्टेडियम जाने लगे और दूसरों के कहने पर जेवलिन में हाथ आज़माया. और वहीं से सफ़र शुरू हुआ.

बेहतर सुविधाओं की तलाश में नीरज पंचकुला शिफ्ट कर गए और पहली बार उनका सामना राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों से हुआ. उन्हें बेहतर सुविधाएं मिलने लगीं.

जब राष्ट्रीय स्तर पर खेलने लगे तो ख़राब क्वॉलिटी वाली जेवलिन की बजाय हाथ में बढ़िया जेवलिन आ गई. धीरे-धीरे नीरज के खेल में तब्दीली आ रही थी.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमके

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जब 2016 में भारत पीवी सिंधु और साक्षी मलिक के मेडल का जश्न मना रहा था तो एथलेक्टिस की दुनिया में कहीं और एक नए सितारे का उदय हो रहा था.

ये वही साल है, जब नीरज ने पोलैंड में U-20 विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता.

जल्द ही ये युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छाने लगा.

नीरज चोपड़ा ने गोल्ड कोस्ट में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में 86.47 मीटर के जेवलिन थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता तो 2018 में एशियाई खेलों में 88.07 मीटर तक जेवलिन थ्रो कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था और स्वर्ण पदक भी जीता.

जिस कलाई से थ्रो करते हैं, 12 साल पहले चोटिल हुई थी

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लेकिन 2019 नीरज चोपड़ा के लिए बेहद मुश्किलों भरा रहा. कंधे की चोट के कारण वे खेल नहीं पाए और सर्जरी के बाद कई महीने तक आराम करना पड़ा. फिर 2020 आते-आते तो कोरोना के चलते अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ नहीं हो पाईं.

हालांकि ये पहली बार नहीं है, जब घायल होने की वजह से नीरज को इस कदर परेशानी हुई हो.

2012 में जब वो बास्केटबॉल खेल रहे थे, तो उनकी कलाई टूट गई. वही कलाई जिससे वो थ्रो करते हैं. तब नीरज ने कहा था कि एक बार उन्हें लगा था कि शायद वे न खेल पाएँ.

लेकिन नीरज की मेहनत और उनकी टीम की कोशिश से वो उस पड़ाव को भी पार गए.

आज की तारीख़ में भले उनके पास विदेशी कोच हैं, बायोमैकेनिकल एक्सपर्ट हैं, पर 2015 के आस-पास तक नीरज ने एक तरह से ख़ुद ही अपने आप को ट्रेन किया, जिसमें घायल होने का ज़्यादा ख़तरा बना रहता है. उसके बाद ही उन्हें अच्छे कोच और दूसरी सुविधा मिलने लगी.

खेल के लिए नॉनवेज खाना शुरू किया

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खिलाड़ियों को मैदान में केवल अपना सर्वश्रेष्ठ ही नहीं देना होता है बल्कि मैदान के बाहर भी बहुत संघर्ष करना पड़ता है, ख़ासकर अपनी डाइट और फ़िटनेस रूटीन को लेकर.

यही कारण है कि नीरज चोपड़ा को जिम में घंटों बिताने पड़ते हैं.

एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि लोडिंग फ़ेज़ में वो एक दो नहीं बल्कि 7-8 घंटे तक जिम करते हैं.

उन्होंने कहा था, "मैं 4000 से 5000 कैलोरी लेता हूं."

जेवलिन तो नीरज का पैशन है पर बाइक चलाने का भी नीरज को बहुत शौक है और साथ ही हरियाणवी रागिनियों का भी. पंजाबी गाने और बब्बू मान उनकी प्लेलिस्ट में रहते हैं.

कभी शाकाहारी रहे नीरज अपने खेल की वजह से नॉनवेज भी खाने लगे.

हालांकि वो गोलगप्पों को अपना पंसदीदा जंक फूड मानते हैं.

उनके लंबे बालों की वजह से सोशल मीडिया पर लोग उन्हें मोगली के नाम से भी जानते हैं. शायद लंबे बालों और फुर्तीलेपन की वजह से.

रियो ओलंपिक में खेलने से नीरज चूक गए थे क्योंकि उन्होंने क्वॉलिफ़िकेशन मार्क वाला थ्रो जब लगाया तब तक क्वॉलाफ़ाई करने की आख़िरी तारीख़ निकल चुकी थी.

ये नीरज के लिए दिल टूटने वाला अनुभव था. लेकिन टोक्यो में नीरज ने ऐसा नहीं होने दिया.

और टोक्यो के साथ पेरिस ओलंपिक में भी लगातार मेडल जीतकर इतिहास रचा.

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