विनेश फोगाट: जश्न की तैयारी से कैसे चुप्पी और मायूसी में डूबा ‘धाकड़ छोरी’ का बलाली गांव

इस गली में थोड़ा आगे बढ़ने पर बाएं तरफ विनेश फोगाट का घर है
इमेज कैप्शन, इस गली में थोड़ा आगे बढ़ने पर बाएं तरफ विनेश फोगाट का घर है
    • Author, अभिनव गोयल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, हरियाणा के बलाली गांव से

हरियाणा के चरखी दादरी जिले का बलाली गांव.

यहां दाखिल होते ही हर तरफ उस मायूसी को महसूस किया जा सकता था जो शायद बुधवार के दिन हर भारतीय खेल प्रेमी के जहन में चल रही थी.

अगर वक्त कुछ देर और साथ देता तो ये गांव अपनी बेटी की सबसे बड़ी कामयाबी का जश्न मना रहा होता.

लेकिन पेरिस ओलंपिक से आई विनेश फोगाट की ख़बर ने जश्न शुरू होने से पहले ही उसे उदास सन्नाटे में बदल दिया.

बुधवार सुबह 50 किलोग्राम महिला भार वर्ग स्पर्धा के फ़ाइनल मुक़ाबले से विनेश फोगाट को अतिरिक्त वजन होने के चलते डिस्क्वालिफाई कर दिया गया.

गोल्ड की दावेदार मानी जा रही विनेश के हिस्से सिल्वर मेडल भी नहीं आया और जिस स्पर्धा में वो एक रात पहले तक मज़बूती के साथ चल रहीं थीं, उसी स्पर्धा में वो बिना कोई मुक़ाबला हारे सबसे निचले पायदान पर पहुंच गईं.

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विनेश के घर का हाल

‘अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवान गीता, बबीता, विनेश, रितु खिलाड़ियों के गांव बलाली में आपका हार्दिक स्वागत है.’

बुधवार दोपहर गांव में कदम रखते हुए प्रवेश द्वार पर लिखे इन शब्दों को पढ़कर हमने आसानी से अंदाज़ा लगा लिया कि अब हम हरियाणा के उस गांव में आ गए हैं जिसकी पहचान ही उसकी बेटियों के नाम से है.

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कुछ दूर चले पर हमने पूछा, ‘विनेश फोगाट का घर कहां है?’

गांव के व्यक्ति ने अनमने ढंग से कहा, “घर तो ये सामने है लेकिन आपको वहां कोई नहीं मिलेगा, घर में विनेश की मां और भाभी हैं, पर वे किसी से बात नहीं करना चाहते .”

लेकिन हम विनेश के घर की तरफ बढ़े, जो गली में दूर से ही दिखाई देता है. बड़े से घर की पहली मंजिल पर लगे शीशों पर दूर से ओलंपिक के पांच छल्ले दिखाई देते हैं.

शायद ये छल्ले विनेश के उन्हीं ख्वाबों की झलक दिखाते हैं जिन्हें पूरा करने की कोशिश वे बीते नौ साल से कर रही हैं.

काफ़ी देर घर के बाहर इंतज़ार और कई बार आवाज़ लगाने के बाद भी घर से कोई बाहर नहीं आया. पड़ोसियों के पास भी कहने को कुछ नहीं था. सबकी जुबान पर बस यही था, “इस लड़की के साथ बहुत ग़लत हुआ.”

घर के बाहर हमसे मिलने आए विनेश के चचेरे भाई मंजेश फोगाट ने कहा, “सुबह से ही हम लोग आंखें गड़ाए बैठे हुए थे. देख रहे थे कि कब उनका ट्रायल वगरैह होगा. न्यूज़ पर देखा तो काफ़ी दुख हुआ. वो गोल्ड की प्रबल दावेदार थी. उसके बावजूद ऐसी घटना घटी, बहुत दुख की बात है.”

उन्होंने कहा, “हमने भी टूर्नामेंट लड़े हैं, जब भी बड़ा मैच होता है, वहां पर कोच और फिजियो की पूरी ज़िम्मेदारी होती है. दो घंटे पहले हमारे कोच हमारा वजन करते थे. 100 ग्राम ज़्यादा बता रहे हैं, अगर ऐसा था तो कोच और फिजियो क्या कर रहे थे. 100 ग्राम वजन तोड़ना कोई बड़ी बात नहीं होती. ये षड्यंत्र है.”

विनेश फोगाट के गांव बलाली का प्रवेश द्वार
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घर का दरवाजा खुलवाने की कोशिश

सात अगस्त की दोपहर करीब तीन बजे तेज रफ्तार से पुलिस की दो गाड़ियां विनेश का घर पूछते हुए गली में आकर रुकी.

पुलिस वाले आस-पास खड़े वाहनों को हटवाने लगे. पता करने पर जानकारी मिली कि मुख्यमंत्री, विनेश की मां से मिलना चाहते हैं और उसके लिए ही यह तैयारी की जा रही है.

शुरू में हमें लगा कि शायद इस मुश्किल वक्त में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी परिवार का ढांढस बंधाने के लिए आ रहे हैं, लेकिन हरियाणा पुलिस के एक जवान ने बताया, “हरियाणा नहीं पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान आ रहे हैं.”

चरखी दादरी में विनेश के परिवार से मिलने भगवंत मान आ रहे हैं? ये बात अटपटी सी लगी, लेकिन थोड़ा पता करने पर जानकारी मिली कि मुख्यमंत्री ज़िले में एक चुनावी सभा को संबोधित करने के लिए आए थे और लौटते हुए उन्हें विनेश के ओलंपिक से बाहर होने की ख़बर मिली.

लेकिन पुलिस के करीब आधा घंटा प्रयास करने के बाद भी विनेश की मां ने घर का दरवाजा नहीं खोला. काफी मशक्कत करने के बाद पुलिस के कहने पर परिवार से जुड़ा एक व्यक्ति दीवार से चढ़कर घर के अंदर दाख़िल हुआ और किसी तरह से दरवाजा खोला.

बावजूद इसके भी विनेश की मां, मुख्यमंत्री से मिलने के लिए तैयार नहीं हुई और आखिर में भगवंत मान गांव से तीन किलोमीटर दूर विनेश के ताऊ और रेस्लिंग कोच महावीर फोगाट से मिलकर वापस लौट गए.

इस बीच कई पत्रकारों की गाड़ी घर के बाहर आकर रुकती है, लेकिन कुछ ही देर में हर कोई अपने कैमरे से कुछ तस्वीरें लेकर लौटने लगता है.

काफी देर इंतज़ार करता देख एक कुछ गांव वालों ने हमें भी यह सलाह दी, “यहां कुछ नहीं मिलेगा, आप भी अकेडमी चले जाओ, वहां महावीर फोगाट जी मीडिया से बात कर रहे हैं.”

विनेश फोगाट का घर
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मीडिया से घिरे महावीर फोगाट

आखिर में हम भी रास्ता पूछते-पूछते महावीर फोगाट से मिलने रेसलिंग एकेडमी पहुंचे, जहां मीडिया का जमावड़ा लगा हुआ था.

वहां करीब दो दर्जन गुमसुम लोगों के बीच महावीर फोगाट बैठे थे. आंखों में मायूसी और चेहरे पर थकान लिए महावीर पिछले कई घंटों से लगातार मीडिया से बात कर रहे थे.

कभी कोई पत्रकार उन्हें अपने चैनल पर लाइव के लिए कनेक्ट कर रहा था तो कोई उनका इंटरव्यू ले रहा था.

कमरे का माहौल ऐसा था जैसे कहीं मातम में आए हैं, रह रहकर हुक्के की गड़गड़ाहट कानों में तेज सुनाई पड़ती थी. सबके चेहरों पर बस एक ही बात का दुख था कि ‘विनेश के साथ ग़लत हुआ है.’

महावीर फोगाट से बातचीत करने के लिए पत्रकारों की लाइन में लगने के बाद जब हमारा नंबर आया तो उन्होंने कहा, “विनेश फाइनल में पहुंच गई थी. हमने बहुत तैयारी की हुई थी. पटाखे और मिठाई सब तैयार थे. सुबह समाचार मिला कि उसे डिस्क्वालिफाई कर दिया. बहुत दुख हुआ.”

उन्होंने कहा, “मैं उस कोच को ज़िम्मेदार मानता हूं जिसे उसकी डाइट पर ध्यान रखना था, वजन कम है या ज़्यादा ये देखना था…मैं कोच की लापरवाही मानता हूं. 200 ग्राम तो उसके सर पर बाल थे, अगर वो उसे ही कटवा देता तो वजन पूरा हो जाता. ये बात दिमाग़ में नहीं आई और मेरा संपर्क भी नहीं हो पाया.”

महावीर फोगाट (सबसे दाएं)
इमेज कैप्शन, महावीर फोगाट (सबसे दाएं)

बजरंग पुनिया ने क्या कहा?

इससे पहले बुधवार सुबह नौ बजे हमने सोनीपत में बजरंग पूनिया से बात की थी. इस समय तक ओलंपिक से विनेश के बाहर होने की खबर सामने नहीं आई थी और सेमीफ़ाइनल में उनकी जीत को लेकर खुद बजरंग पुनिया भी बहुत खुश थे.

इंटरव्यू में वे बार-बार कह रहे थे कि आज विनेश गोल्ड लाएगी और सेमीफ़ाइनल की जीत उन लोगों के मुंह पर बिना कहे तमाचा है जिन्होंने हमारा साथ नहीं दिया.

बुधवार सुबह बात करते हुए बजरंग पूनिया ने भी विनेश फोगाट के वजन को लेकर चिंता ज़ाहिर की थी.

उन्होंने कहा था, "कोई भी खिलाड़ी पहले खुशी नहीं मनाता है. पहले वेट कम करना है. 50 किलोग्राम से वेट को नीचे लाना मुश्किल होता है. लड़कों का वेट जल्दी कम होता है. लड़कों को पसीना ज़्यादा आता है. लड़कियों को बहुत मुश्किल होती है. उन्हें 50 किलोग्राम से नीचे अपना वज़न लाने में मुश्किल होती है."

बजरंग पूनिया ने ये भी कहा था, "पिछले छह महीने से वह अपना वज़न कम करने के लिए लगातार कोशिश कर रही थीं. थोड़ा पानी और एक रोटी-दो रोटी चल रहा था. वजन कम करना बहुत मुश्किल होता है."

हालांकि बजरंग पूनिया ने ये भी कहा, "विनेश फोगाट का वहां खड़ा रहना ही हमारे लिए मेडल है."

हमें संगीता फोगाट का इंटरव्यू भी करना था, जो बजरंग पूनिया की पत्नी हैं और विनेश फोगाट की बहन. बजरंग खुद उनको लाने के लिए गए लेकिन थोड़ी देर में ही हमें बताया गया कि इंटरव्यू नहीं हो पाएगा.

दुखी आवाज में बस इतना कहा गया, 'उनका मन ठीक नहीं है.'

ये वही समय था जब बजरंग पुनिया और परिवार को विनेश फोगाट के ओलंपिक से डिस्क्वालिफाई की जानकारी मिली थी.

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