यौन उत्पीड़न से लड़ने के बाद महिला पहलवानों का ओलंपिक दांव

विनेश फोगाट

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इमेज कैप्शन, प्रदर्शन करने वाली महिला पहलवानों में से एक विनेश फोगाट ने पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालिफ़ाई किया है (फाइल फोटो)
    • Author, दिव्या आर्य
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

रीतिका हुड्डा शायद ओलंपिक तक पहुंच ही ना पातीं.

वो उन पांच महिला पहलवानों में से एक हैं, जिन्होंने इस साल पेरिस ओलंपिक के लिए क्वॉलिफ़ाई किया है.

नेशनल और एशियन गेम्स में बार-बार हारने के बाद 22 साल की रीतिका का आत्म-विश्वास लड़खड़ा रहा था.

अपना खेल बेहतर करने के लिए उन्हें ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की ज़रूरत थी, पर भारत में दंगल थम गए थे.

पिछले साल भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष रहे बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे. बृजभूषण इन आरोपों से इनकार करते हैं.

खेल मंत्रालय ने उन्हें तो नहीं हटाया, पर शुरुआती जांच में यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून के प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने के बाद पूरे कुश्ती महासंघ प्रशासन को बर्खास्त कर रोज़मर्रा के काम की देखरेख के लिए एक 'ऐड-हॉक कमेटी' बना दी थी.

ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था.

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रीतिका ने देश के सबसे प्रतिष्ठित पहलवानों को बृजभूषण के इस्तीफे की मांग उठाने के लिए राजधानी दिल्ली की सड़कों पर प्रदर्शन करते देखा.

इनमें भारत के लिए ओलंपिक मेडल जीतने वाली पहली और इकलौती महिला पहलवान साक्षी मलिक भी शामिल थीं, जो उनकी प्रेरणा स्रोत रही हैं.

पहलवानों के प्रदर्शन की ख़बर दुनियाभर में फैली. ख़ासतौर पर तब, जब उन्होंने देश की नई संसद तक मार्च करने की कोशिश की और पुलिस ने उन्हें ‘अनुमति’ ना होने के आरोप में हिरासत में ले लिया.

रीतिका हुडा
इमेज कैप्शन, रीतिका हुड्डा ने पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालिफ़ाई किया है

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने पहलवानों के साथ किए गए व्यवहार की निंदा की और उनकी शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग की.

रोहतक में रीतिका के घर पर जब हम साथ बैठे तो वो बोलीं, “बहुत दुख के दिन थे वो. जो हो रहा था उसकी वजह से भी और जो नहीं हो रहा था, उस वजह से भी.”

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कैसे हो ओलंपिक की तैयारी?

हर साल अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति, ओलंपिक खेलों के लिए क्वालिफ़ाई करने के लिए कुछ प्रतियोगिताओं को चिन्हित करती है.

उनमें लड़ने के लिए पहलवानों को ट्रायल्स में रैंकिंग प्वाइंट्स जुटाने होते हैं, नेशनल स्तर की प्रतियोगिताएं जीतनी होती हैं और कुश्ती महासंघ की सहमति हासिल करनी होती है.

पर इन सभी दंगलों में हिस्सा लेने की जगह, रीतिका के सामने थे खाली दिन, खाली हफ्ते और खाली महीने.

उन्होंने बताया, “हम ट्रेनिंग करते रहे पर ट्रायल ही नहीं हो रहे थे. अगर हम दंगल ना करें तो अपनी खामियां कैसे जानेंगे? हर वक्त डर बना रहता था कि जब सब दोबारा शुरू होगा तो हमारी तैयारी पूरी नहीं पड़ेगी.”

भारत के लिए ये चिंता की बात थी, क्योंकि अब तक ओलंपिक के एकल खेलों में जीते गए कुल 24 पदकों में से एक-चौथाई से ज़्यादा कुश्ती से आए हैं.

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आखिरकार, प्रदर्शन शुरू होने के करीब एक साल बाद, दिसंबर 2023 में कुश्ती महासंघ के चुनाव हुए.

पहलवानों ने खेल मंत्री से बृजभूषण से जुड़े लोगों को चुनाव में हिस्सा लेने से रोकने की मांग की थी.

बृजभूषण ने खुद चुनाव में हिस्सा नहीं लिया, क्योंकि वो अधिकतम अवधि (तीन बार) के लिए अध्यक्ष पद पर पहले ही रह चुके थे. लेकिन उनके करीबी संजय सिंह लड़े और बहुमत से जीते भी.

यौन उत्पीड़न के खिलाफ़ आवाज़ उठाने वाली महिला पहलवानों ने इस पर गुस्सा और दुख जताया, और उसी दिन की गई एक प्रेस वार्ता में ओलंपिक पदक जीतने वाली साक्षी मलिक ने रुंधे गले से कुश्ती छोड़ने का एलान कर डाला.

6 महीने बाद अब जब मैंने उनसे दोबारा बात की तो साक्षी बोलीं, “आज भी मैं जब उस पल को याद करती हूं तो आंखें नम हो जाती हैं. कुश्ती मुझे ऐसी ऊंचाइयों पर ले गई, मुझे इतना प्यार और इज़्ज़त दिलाई, और मुझे उसे ही छोड़ना पड़ा.”

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यौन उत्पीड़न के आरोपों का असर

साक्षी के इस कदम से युवा पहलवान सकते में आ गईं. लेकिन जल्द ही, वो वापस दंगल लड़ने को तैयार थीं.

हरियाणा की 20 वर्षीय तनु मलिक ने बताया, “मैंने साक्षी मलिक को ओलंपिक मेडल जीतते देखा था तो मुझे हिम्मत हुई कि मैं भी कुश्ती करूं, मेरे नाम से मेरे गांव का नाम रोशन हो. फिर जब टीवी पर उन्हें रोते हुए देखा, तो मन में सोचा कि वो हमारे लिए इतना लड़ीं तो अब हम कैसे हार मान सकते हैं.”

उस दिन से तनु ने तय किया वो और मेहनत करेंगी.

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साल 2016 में साक्षी के ओलंपिक मेडल के बाद हरियाणा में महिला कुश्ती को नई ऊर्जा मिली. मां-बाप अपनी बेटियों को कुश्ती में बढ़ावा देने लगे और राज्य में महिलाओं के अलग अखाड़े खुलने शुरू हो गए.

ऐसे ही एक, युद्धवीर अखाड़े में तनु की ट्रेनिंग तड़के साढ़े चार बजे शुरू हो जाती है.

पांच घंटे के सेशन में अलग-अलग तरह के व्यायाम और दंगल के दांव-पेंच सीखने के अलावा, पचास किलो के ट्रक के टायर को उठाना भी शामिल होता है.

खाना खाने और थोड़े आराम के बाद शाम चार बजे से फिर पांच घंटे का सेशन होता है.

यहां मुझे 12 से 22 साल की लड़कियां मिलती हैं. ज़्यादातर यहीं पर रहती हैं.

एक बड़े कमरे में एक के साथ एक लगे बिस्तरों पर सोती हैं और खाली वक्त में बेहतर बॉडी बनाने के लिए ज़रूरी डायट पर खूब बहस होती है.

जो बात वो नहीं करना चाहतीं, वो है अखाड़ों में कथित यौन उत्पीड़न और कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष पर लगे आरोपों के बारे में.

पहलवान
इमेज कैप्शन, कोच सीमा के साथ युद्धवीर अखाड़े के पहलवान

लेकिन कुश्ती के इसी ढांचे में, उसके कायदे कानून के तहत करियर बनाने वाली इन महिलाओं में हौसले की कमी नहीं.

इनकी कोच सीमा खरब के मुताबिक़, उम्मीद के उलट प्रदर्शनों के बाद, अखाड़े में लड़कियों की तादाद कम नहीं हुई.

उन्होंने कहा, “प्रदर्शनों ने युवा पहलवानों को ये भरोसा दिलाया कि आवाज़ उठाना मुमकिन है, उस पर सही कार्रवाई होगी और सिस्टम के अंदर उन्हें समर्थन मिल सकता है.”

डर और विश्वास

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इमेज कैप्शन, कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष संजय सिंह
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मई 2024 में दिल्ली की एक अदालत ने बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न, पीछा करने, धमकाने और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप तय किए. इस साल 26 जुलाई को बृजभूषण के ख़िलाफ़ मुक़दमा शुरू होगा.

इस दौरान संजय सिंह ने कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष का कार्यभार संभाल लिया है.

बीबीसी से मुलाकात में उन्होंने ये माना कि वो बृजभूषण को पिछले 30 साल से अच्छे से जानते हैं, लेकिन अपने काम में उनकी दखलंदाज़ी से इनकार किया.

उनका दावा था कि पहलवानों ने उन्हें अध्यक्ष के तौर पर स्वीकार कर लिया है और दोबारा शुरू हुई कुश्ती प्रतियोगिताओं में उनका “बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना” इसकी पुष्टि करता है.

संजय सिंह ने कहा, “ना किसी को बेवजह तरजीह दी जाएगी, ना किसी के साथ भेदभाव किया जाएगा. हर पहलवान मुझे प्रिय है. मैं भी दो बेटियों का पिता हूं, मैं समझता हूं उन्हें क्या चाहिए.”

लेकिन तनु मलिक जैसी युवा पहलवानों के लिए डर से लड़ना अब इस खेल का ज़रूरी हिस्सा बन गया है.

तनु बोलीं, “आसान नहीं है. मां-बाप हमेशा डरते हैं कि बेटी को कैसे अकेले भेज दें. पर विश्वास करते हैं और भेजते हैं. विश्वास नहीं करेंगे तो कैसे चलेगा. ये तो लड़ने से पहले ही हार मानने जैसा हो जाएगा.”

कई पहलवान ऐसे भी हैं जो ज़्यादा नाउम्मीदी महसूस करते हैं. उनके लिए ये प्रदर्शन बहुत महंगे साबित हुए.

पूरा साल बर्बाद

शिक्षा खरब
इमेज कैप्शन, शिक्षा खरब

एशियन चैम्पियनशिप में गोल्ड जीतने वाली शिक्षा खरब ने कहा, “ट्रेनिंग में हुई रुकावट और कुश्ती प्रतियोगिताएं थमने से कई युवा पहलवानों का पूरा साल बर्बाद हो गया.”

लेकिन साक्षी मलिक को कोई मलाल नहीं.

उन्होंने कहा, “सबसे ज़रूरी है कि हम लड़ें. मुझे नहीं लगता कि अब किसी खेल संघ में कोई ऐसा बर्ताव कर पाएगा. अब उन्हें पता है कि उत्पीड़न करेंगे तो इसका परिणाम भुगतना पड़ सकता है.”

रीतिका का ये पहला ओलंपिक है. दुनिया के सबसे अच्छे पहलवानों से दंगल करने को लेकर थोड़ी घबराहट है पर हौसले की कमी नहीं है.

साक्षी मलिक
इमेज कैप्शन, छोटूराम अखाड़े में साक्षी मलिक की तस्वीर लगी है.

वो कहती हैं, “मैं साक्षी दीदी के अखाड़े में ही ट्रेनिंग करती हूं. वो हमेशा कहती थीं कि जीत और हार ज़रूरी नहीं है, बस अपनी मेहनत पर भरोसा करो. तो मैं वहीं कर रही हूं.”

रीतिका के छोटूराम अखाड़े में भारत के झंडे को कंधों पर लिए हुए साक्षी मलिक की मुस्कुराती तस्वीर लगी है.

रीतिका कहती हैं, “मुझे बस अब ओलंपिक मेडल जीतना है. क्या पता एक दिन मेरी तस्वीर भी मेरे अखाड़े की दीवार पर होगी.”

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