साक्षी मलिक: ‘मैं भारतीय कुश्ती संघ की अध्यक्ष बनना चाहूंगी’

- Author, सर्वप्रिया सांगवान
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
“पहले मैं डरती थी कि अगर मैं भारतीय कुश्ती संघ की अध्यक्ष बनने को लेकर सोचूंगी तो लोग आरोप लगाएंगे. वे कहेंगे कि ये लोग इसलिए ही विरोध कर रहे थे क्योंकि ये अपना कब्ज़ा चाहते हैं, लेकिन अब मैं कहूंगी कि हां, मैं क्यों नहीं बन सकती! मैं अनुभवी हूं, मुझे जानकारी है, पढ़ी-लिखी हूं. मैं क्यों नहीं संभाल सकती अपने कुश्ती संघ को.”
ओलंपिक पदक विजेता रेसलर साक्षी मलिक ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में कहा कि उन्हें मौका मिला तो वे ज़रूर कुश्ती संघ को संभालना चाहेंगी.
हालांकि, फ़िलहाल आम चुनाव लड़ने को लेकर उन्होंने पूरी तरह से इनकार कर दिया.
साक्षी मलिक पिछले एक साल से अपने साथी पहलवानों विनेश फ़ोगाट और बजरंग पूनिया के साथ यौन उत्पीड़न मामले में अभियुक्त बृजभूषण शरण सिंह के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रही हैं.
उनकी मांग थी कि भारतीय कुश्ती संघ से बृजभूषण शरण सिंह या उनके सहयोगियों को दूर रख कर मामले की जांच हो.
लेकिन दिसंबर 2023 में हुए चुनाव में बृजभूषण शरण सिंह के पाले के व्यक्ति संजय सिंह नए अध्यक्ष चुने गए. इसके तुरंत बाद साक्षी ने प्रेस कांफ़्रेस में हमेशा के लिए कुश्ती छोड़ देने का एलान कर दिया.
ये एक ऐसा कदम था जो शायद ही कभी भारत के इतिहास में देखने को मिला हो. इसलिए कई लोगों को उम्मीद है कि साक्षी वापस कुश्ती की ओर लौटेंगी लेकिन साक्षी ने वापसी करने से इनकार कर दिया.
उन्होंने कहा, “मैं ऐसे माहौल में नहीं खेल सकती जहां अब भी वे लोग मौजूद हैं जिन पर इतने गंभीर आरोप लगे हैं. इसके अलावा, पिछले एक साल से हम संघर्ष कर रहे हैं और हम ट्रेनिंग नहीं कर पाए हैं. डाइट नहीं है. मानसिक तनाव है. अपनी बात रखने के लिए कभी यहां जा रहे हैं, कभी वहां.”
सरकार ने आश्वासन पूरा नहीं किया

इमेज स्रोत, @SAKSHIMALIK
लेकिन क्या उन्होंने कुश्ती छोड़ने का फ़ैसला पहले ही कर लिया था या नतीजे आने के बाद भावुकता में लिया गया फ़ैसला था?
उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया हुआ था कि बृजभूषण शरण सिंह का कोई आदमी संघ का अध्यक्ष नहीं बनेगा, लेकिन जब फ़ैसला आया तो मन बहुत उदास हुआ और लगा कि इतनी लड़ाई लड़ने का भी कोई फ़ायदा नहीं हुआ. इसलिए उन्होंने सोचा कि इस सिस्टम में रह कर वे रेसलिंग नहीं कर सकतीं.
हालांकि, उन्हें अब भी सरकार से उम्मीद बाकी है.
भारतीय कुश्ती संघ चुनाव के नतीजे के अगले दिन खेल मंत्रालय ने चयनित फ़ेडरेशन को सस्पेंड कर दिया था.
लेकिन बीती 26 फ़रवरी को सस्पेंड किए जा चुके भारतीय कुश्ती संघ ने सीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप 2024 और एशियन ओलंपिक गेम्स क्वालीफायर के ट्रायल करवाने को लेकर एक सर्कुलर जारी कर दिया.
इसके ख़िलाफ़ साक्षी मलिक, विनेश फ़ोगाट और बजरंग पूनिया ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की.
कल गुरुवार को हाई कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि ट्रायल सिर्फ़ एड-हॉक कमेटी ही करेगी.
संजय सिंह के वकील ने कोर्ट को बताया कि वे अपना सर्कुलर वापस ले रहे हैं.
अध्यक्ष बनने पर क्या बदलाव करेंगी साक्षी?

इमेज स्रोत, @BAJRANGPUNIA
इस लड़ाई के दूसरे दो चेहरे बजरंग पूनिया और विनेश फ़ोगाट 2024 पेरिस ओलंपिक की तैयारियों में जुटे हैं. फिर साक्षी ने ही क्यों कुश्ती को अलविदा कह दिया?
वे कहती है कि ये सबके अपने स्वभाव पर निर्भर करता है.

अगर साक्षी भारतीय कुश्ती संघ की अध्यक्ष बन जाती हैं तो वे क्या बदलाव करना चाहेंगी?
इस सवाल पर उन्होंने कहा, "हमारे समय में सीधे तौर पर स्पॉन्सर्स भी नहीं मिलते थे. पहले संघ के पास जाओ, वो आधा पैसा खाएंगे और फिर कुछ हम तक पहुंचे तो पहुंचे. तो बच्चे कैसे आगे बढ़ेंगे."
"मेडल जीतने के बाद तो खिलाड़ी अपना सब कर लेता है लेकिन फंड उन तक पहुंचना चाहिए जो बच्चे गांव में, अपने अखाड़ों में कुश्ती कर रहे हैं. तो मैं उस पर काम करूंगी.’
‘मैंने क़ुर्बानी दी अपनी कुश्ती के लिए’

इमेज स्रोत, ANI
लेकिन क्या उनका कुश्ती छोड़ना सिस्टम से हार जाने का एक उदाहरण बनेगा या इतिहास में मज़बूती की निशानी के तौर पर देखा जाएगा?
इसके जवाब में वे कहती हैं कि चाहे अब तक न्याय नहीं मिला है लेकिन हमने इतना ज़रूर कर दिया है कि अगली बार कोई कुश्ती संघ में शोषण करने से पहले कई बार सोचेगा कि उसके ख़िलाफ़ भी आवाज़ उठ सकती है.
‘कोई त्यागना नहीं चाहता लेकिन मैंने ये क़ुर्बानी दी है अपनी कुश्ती के लिए.’

इमेज स्रोत, BBC
साक्षी मलिक 2016 समर ओलंपिक में 58 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीत चुकी हैं. ऐसा करने वाली वे भारत की पहली महिला रेसलर बनीं.
2014 कॉमनवेल्थ गेम में रजत पदक जीत चुकी हैं. फिर 2015 एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में उन्होंने कांस्य पदक जीता. 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुकी हैं.
इसके अलावा भारत सरकार उन्हें पद्मश्री से भी नवाज़ चुकी हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)













