पेरिस ओलंपिक में विनेश फोगाट: महिलाओं के लिए वज़न घटाना कितना मुश्किल

विनेश फोगाट

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    • Author, चंदन कुमार जजवाड़े
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

पेरिस ओलंपिक में भारतीय पहलवान विनेश फोगाट को ज़्यादा वज़न की वजह से अयोग्य घोषित कर दिया गया.

विनेश फोगाट बुधवार को अपना फ़ाइनल मुक़ाबला खेलने वाली थीं, लेकिन सुबह उनका वज़न किया गया तो तय वज़न से 100 ग्राम ज़्यादा था.

खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने संसद में इस मुद्दे पर कहा, “भारतीय रेसलर विनेश फोगाट को पेरिस ओलंपिक में तय वज़न से 100 ग्राम ज़्यादा होने की वजह से बाहर होना पड़ा है.”

विनेश 50 किलोग्राम कैटेगरी में खेल रही थीं. मुक़ाबले के लिए उनका वज़न 50 किग्रा होना ज़रूरी था.

विनेश फोगाट के अयोग्य करार दिए जाने के बाद यह बहस भी चल पड़ी है कि क्या एक दिन में वज़न कम या ज़्यादा हो सकता है.

इस मुद्दे से जुड़ा एक अन्य सवाल ये भी है कि क्या महिलाओं के लिए वज़न कम करना पुरुषों के मुक़ाबले ज़्यादा मुश्किल है?

विनेश फोगाट ने 53 किलोग्राम वज़न वर्ग को छोड़कर इस बार 50 किलोग्राम वर्ग में हिस्सा लिया था. इसके लिए उन्होंने अपना वज़न कम किया था.

भारतीय ओलंपियन बजरंग पूनिया ने बीबीसी को बताया है कि विनेश फ़ोगाट ने वज़न कम करने के लिए कड़ी मेहनत की है.

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वज़न कम करना महिलाओं के लिए ज़्यादा मुश्किल?

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पूनिया के मुताबिक़, “लड़की और लड़के में वज़न कम करने में काफ़ी अंतर होता है. लड़कों को पसीना ज़्यादा आता है तो उनका वज़न जल्दी कम हो जाता है. विनेश पिछले छह महीने से थोड़ा पानी ले रही थीं और एक-दो रोटी खा रही थीं.”

फ़ाइनल मुक़ाबले के पहले भी विनेश फोगाट ने वज़न को कम करने की कोशिश की थी, लेकिन आख़िर में उनका वज़न तय भार से ज़्यादा ही रहा.

पेरिस ओलंपिक में भारतीय दल के मेडिकल टीम का नेतृत्व करने वाले डॉक्टर दिनशॉ पर्दीवाला ने बताया, "विनेश के लिए 1.5 किग्रा फूड ज़रूरी था. क्योंकि वे तीन मैच खेल चुकी थीं. इसलिए उनको पानी और खाने की ज़रूरत थी. सेमीफ़ाइनल मैच के बाद उनका वज़न 2.7 किग्रा ज़्यादा था."

"वज़न कम करने में जो समय चाहिए होता है उतना समय हमारे पास नहीं था. हमने उनका वज़न कम कराने की पूरी कोशिश की."

दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रोफ़ेसर नवल के. विक्रम ने लोगों के वज़न से जुड़े मुद्दों पर काफ़ी अध्ययन और काम किया है.

डॉक्टर नवल कहते हैं, “मैं नहीं मानता कि वज़न कम करने में महिलाओं की क्षमता और पुरुषों की क्षमता में कोई अंतर होता है. लेकिन दोनों की शारीरिक बनावट में फर्क होता है और महिलाओं में वज़न बढ़ने की कई वजह होती हैं.''

डॉक्टर नवल पसीना निकलने को इतना बड़ा फ़ैक्टर नहीं मानते हैं कि उससे महिला और पुरुष को अपना वजन कम करने में बड़ा फर्क पड़ता हो.

हालांकि डायटिशियन और वेलनेस एक्सपर्ट दिव्या प्रकाश कहती हैं कि शरीर से पानी निकलेगा तो वज़न कम होगा ही होगा. अगर आपने एक लीटर पसीना बहाया है तो आपका वज़न क़रीब एक किलोग्राम कम हो जाएगा.

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एक दिन में वज़न कम या ज़्यादा हो सकता है?

दिव्या प्रकाश के मुताबिक़- पीरियड्स के दौरान महिलाओं का वज़न बढ़ता ही है. यह 700 ग्राम से 1 किलोग्राम तक बढ़ सकता है. हालांकि यह अलग-अलग महिलाओं के शरीर और उनके कामकाज पर निर्भर करता है.

दिव्या कहती हैं कि यह एक निजी मामला है इसलिए इसके बारे में ज़्यादा कुछ नहीं कहा जा सकता है कि किसी का वज़न क्यों बढ़ा.

पसीना निकालना वज़न कम करने का एक तरीका होता है, लेकिन वज़न हमेशा धीरे-धीरे कम करना सुरक्षित होता है. नहीं तो शरीर में पानी की कमी हो सकती है.

"विनेश फोगाट ने शायद इतना पसीना बहा दिया कि उनका शरीर डिहाइड्रेट हो गया और उन्हें हास्पिटल में भर्ती कराना पड़ा.”

पसीना निकलने में शरीर के सर्फेस एरिया की बड़ी भूमिका होती है. पुरुष के शरीर का सर्फेस एरिया ज़्यादा होता है इसलिए उन्हें पसीना ज़्यादा निलकता है.

एक्सपर्ट के मुताबिक़ एक पुरुष जितना दौड़कर 300 कैलोरी बर्न कर सकता है उनती देर में महिला केवल 180 कैलोरी बर्न कर पाएगी.

इसके अलावा महिलाओं का शरीर पुरुषों के मुक़ाबले कम एथलेटिक होता है यानी उनके अंदर 'लिन मसल्स' कम होती है, इससे उनका बीएमआर (बेसल मेटाबॉलिक रेट) ज़यादा होता है.

दिव्या प्रकाश के मुताबिक़ यह भी महिलाओं के वज़न बढ़ने या वज़न के कम करने की गति धीमा करता है.

महिलाओं में वज़न बढ़ना या घटना उनके शरीर और हार्मोन में हो रहे बदलावों पर निर्भर करता है.

एम्स हॉस्पिटल के डॉक्टर नवल के मुताबिक़ महिलाओं में पीरियड्स शुरू होने के बाद, गर्भवती होने, बच्चे के जन्म और पीरियड्स के बंद होने तक कई बार हार्मोन में बदलाव होता है, जो पुरुषों में नहीं होता है.

महिलाओं और पुरुष के शरीर में एक और अंतर फ़ैट (चर्बी) की मात्रा की होती है. एक ही उम्र और वज़न के पुरुष में मांसपेशियाँ ज़्यादा होती हैं, जबकि महिलाओं में पुरुषों के मुक़ाबले फ़ैट ज़्यादा होता है.

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पुरुष का शरीर महिलाओं से अलग

फ़ोर्टिस हॉस्पिटल के सी-डीओसी के चेयरमैन अनूप मिश्रा कहते हैं कि महिलाओं में हर उम्र में वज़न को कम करना मुश्किल नहीं होता है. महिला अगर 20-25 साल की हो और अगर उसमें फ़ैट ज्यादा न हो.

"उम्र बढ़ने के साथ ही महिलाओं में हार्मोन बदलते हैं इसलिए उनको वज़न कम करने में मुश्किल हो सकती है. जहाँ तक पसीने की बात है तो पुरुषों में भी कम पसीना निकल सकता है, इससे वज़न कम करने में ज़्यादा फर्क नहीं पड़ता है."

अनूप मिश्रा के मुताबिक़ अगर हम तरल पदार्थ का सेवन कम कर दें और पेशाब ज़्यादा करें तो यह वज़न कम करने में पसीना बहाने से ज़्यादा कारगर होता है.

उनके मुताबिक़ महिलाओं में पीरियड्स के पहले और उसके बाद फ्लूड शिफ़्ट ज़्यादा होता है और ऐसे समय में उनका वज़न ज़्यादा बढ़ सकता है.

अगर आप ज़्यादा तरल पदार्थ ले रहे हैं और ज़्यादा कैलोरी वाला खाना खा रहे हैं, इससे एक दिन में वज़न 1.5 किलो तक बढ़ सकता है.

माना जाता है कि एक पिज़्ज़ा में आमतौर पर 1800 कैलोरी, एक पेस्ट्री में 400 कैलोरी, एक समोसे में क़रीब 250 कैलोरी ऊर्जा होती है. ऐसे में कोई इंसान ज़्यादा पानी पी ले और ज़्यादा कैलोरी वाला भोजन कर ले तो उसका वज़न फ़ौरन बढ़ सकता है.

जबकि जानकारों को मुताबिक़ किसी इंसान को एक किलो वज़न कम करने के लिए 7200 कैलोरी बर्न या कम करना ज़रूरी होता है.

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