लाइव, सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी ने क्या कहा

दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया.

सारांश

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  • नारंगी होंठ वाले बंदर की नई प्रजाति
  • एक कबूतर को ऑक्सीजन देकर बचाया गया
  • सोनम वांगचुक के अनशन का 20वां दिन
  • भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन
  • सोनम वांगचुक से मिले अरविंद केजरीवाल
  • इटली की पीएम इस फ़ैसले पर क्या बोलीं?
  • 28 जून से अनशन पर हैं सोनम वांगचुक

लाइव कवरेज

रौनक भैड़ा

  1. सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी ने क्या कहा

    संजय सिंह और डिंपल यादव

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    इमेज कैप्शन, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और समाजवादी पार्टी की लोकसभा सांसद डिंपल यादव (फ़ाइल फ़ोटो)

    दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया.

    इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने दावा किया है कि जंतर-मंतर पर छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया.

    मामले पर आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि वांगचुक की मांग सुनने की बजाय उन्हें जबरन अस्पताल ले जाया गया है.

    उन्होंने एक्स पर लिखा, "ये क्या गुंडागर्दी चल रही है? मोदी जी ये सत्ता का अहंकार लंबे समय तक नहीं चलता. जिस युवा पर लाठी चला रहे हो, यही आपका तख़्त उखाड़ेगा. एक शख़्स जो पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर है, उनकी मांगें सुनने के बजाय उनको जबरन गिरफ़्तार करके अस्पताल में भर्ती करा दिया गया."

    समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान को कुचला जा रहा है.

    उन्होंने एक्स पर लिखा, "सोनम वांगचुक जी को जबरन हटाना सिर्फ एक कार्रवाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान को कुचलना है. भाजपा सरकार को अब शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं- यह तानाशाही है."

    शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत में लोकतंत्र को जबरन तोड़ा जा रहा है और सरकार छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध को भी बर्दाश्त नहीं कर रही है.

    आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए लिखा, “कितनी शर्म की बात है! पूरी दुनिया देख रही है कि भारत में लोकतंत्र को ज़बरदस्ती और बेहयाई से तोड़ा जा रहा है. अब तो छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध भी बर्दाश्त नहीं किए जा रहे, सिर्फ इसलिए कि मंत्री नाकाबिल है.”

    वहीं, जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है.

    गौरतलब है कि सोनम वांगचुक 28 जून से अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे हैं. शनिवार को उनकी भूख हड़ताल 21वें दिन में प्रवेश कर चुकी है.

  2. डोनाल्ड ट्रंप की कनाडा को टैरिफ़ की धमकी, बोले- प्रदूषित हवा की क़ीमत वसूलेंगे

    डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह जानबूझकर की गई लापरवाही है (फ़ाइल फ़ोटो)

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर नए टैरिफ़ लगाने की धमकी दी है. उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा जंगलों की देखभाल में लापरवाही बरत रहा है, जिससे अमेरिका को प्रदूषित हवा का सामना करना पड़ रहा है.

    उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर वह जल्द ही कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से बात करेंगे और जवाब मांगेंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि कनाडा की इस कथित लापरवाही के जवाब में नए शुल्क (टैरिफ़) लगाए जा सकते हैं.

    ट्रंप ने शुक्रवार देर रात ट्रुथ सोशल पर लिखा, "हम कनाडा को इसके लिए ज़िम्मेदार मानते हैं कि वह अपने जंगलों की सही तरीके से देखभाल नहीं कर रहा है. इसकी वजह से अमेरिका में गंदी, प्रदूषित और हानिकारक हवा आ रही है. इस हवा की क्वालिटी ख़तरनाक है और बिल्कुल स्वीकार नहीं की जा सकती. मैं आज प्रधानमंत्री से बात करूंगा और पूछूंगा कि वे इस बारे में क्या करने वाले हैं."

    उन्होंने लिखा, "यह जानबूझकर की गई लापरवाही है और अब यह हर साल होने वाली बात बनती जा रही है. इससे अमेरिका को अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है. इस प्रदूषण की क़ीमत भी कनाडा पर अभी लगाए जा रहे टैरिफ़ में जोड़नी होगी."

    न्यूयॉर्क में प्रदूषित हवा

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    इमेज कैप्शन, कनाडा के भीषण जंगलों में लगी आग के कारण अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी में धुआं छा गया

    यह बयान ऐसे समय आया है जब कनाडा में सैकड़ों जंगलों में आग लगी हुई है और उसका धुआं उत्तरी अमेरिका के बड़े हिस्से में फैल गया है.

    शुक्रवार तक कनाडा में जंगलों में लगी आग की क़रीब 888 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जिनमें से अधिकांश पर अब भी क़ाबू नहीं पाया जा सका है. इनमें से 190 से अधिक घटनाएं केवल ओंटारियो प्रांत की हैं.

    उधर, प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पहले ही कह चुके हैं कि जलवायु परिवर्तन से निपटना कनाडा और अमेरिका दोनों की साझा ज़िम्मेदारी है.

    वहीं, ट्रंप के बयान के बाद कनाडा के आपात प्रबंधन मंत्री ने कहा कि दोनों देश प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए लगातार संपर्क में रहते हैं और सहयोग का लंबा इतिहास साझा करते हैं.

    उन्होंने 1982 के अग्निशमन समझौते और 2025 जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान हुए आपदा सहयोग समझौते का भी उल्लेख किया.

  3. सोनम वांगचुक बोले- शरीर का 20 फ़ीसदी हिस्सा ख़त्म हो चुका है

    सोनम वांगचुक

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    इमेज कैप्शन, जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 28 जून से अनशन पर हैं

    दिल्ली के जंतर-मंतर पर जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शनिवार (18 जुलाई) को 21वें दिन में प्रवेश कर गई.

    वांगचुक 28 जून से अनशन पर हैं. इस बीच उन्होंने शुक्रवार देर रात सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी स्वास्थ्य स्थिति और आंदोलन को लेकर बात की.

    वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि अनशन के दौरान उनके शरीर का क़रीब 20 फ़ीसदी हिस्सा ख़त्म हो चुका है, लेकिन उनका दिमाग़ अब भी पूरी तरह से काम कर रहा है.

    उन्होंने कहा, "मैं अभी भी ज़िंदा हूं. मेरे शरीर का लगभग 20 फ़ीसदी हिस्सा चला गया है. शरीर के फ़ैट्स के बाद अब मसल्स (मांसपेशियां) भी जा चुके हैं. इसके बाद अंदरूनी ऑर्गन जाएंगे और आख़िर में दिमाग़. लेकिन अभी वो नौबत नहीं आई है. आज 20वां दिन ख़त्म हो रहा है और मैं साबित कर सकता हूं कि मेरा दिमाग़ बिल्कुल ठीक काम कर रहा है."

    "यहां बहुत से लोग पूछते हैं कि आंदोलन की वजह से क्या केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा होगा या कोई जवाबदेही तय होगी? मैं आपसे पूछता हूं, भारत की जनता को अपने बच्चों की जान और शिक्षा ज़्यादा प्यारी है या प्याज़? भारत में जनता के आंदोलन की ताक़त से तीन बार सरकारें गिरी हैं. 1980 में केंद्र सरकार गिरी, 1998 में दिल्ली और राजस्थान की सरकारें गिरीं, वो आंदोलन सिर्फ़ प्याज़ की क़ीमतों को लेकर था."

    वांगचुक ने कहा कि इस बार मुद्दा प्याज़ नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य और जीवन का है. उन्होंने दावा किया कि इस साल नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के कारण 20 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की है. उन्होंने सवाल किया कि क्या इस मुद्दे पर भी शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा नहीं होना चाहिए.

    उन्होंने लोगों से 20 जुलाई को प्रस्तावित शांतिपूर्ण संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की.

    वांगचुक ने कहा, "20 जुलाई को मेरे साथ संसद की ओर मार्च कीजिए. हमारी असली ताक़त आपकी संख्या है. मैं अकेला, भूखा और एक साधारण इंसान हूं. ताक़त आप लोगों की है. हम सिर्फ़ छात्रों के लिए जवाबदेही की मांग कर रहे हैं."

    वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दावा किया कि वांगचुक पर हमला करने की कोशिश की गई. उनके अनुसार, वांगचुक की ओर कोई वस्तु फेंकी गई, हालांकि इस घटना में उन्हें कोई चोट नहीं लगी.

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  4. फ़ॉकलैंड बैनर विवाद: अर्जेंटीना के समर्थन में अमेरिका ने क्या कहा

    फ़ॉकलैंड से जुड़ा बैनर लिए अर्जेंटीना की टीम

    इमेज स्रोत, Sebastian Frej/Getty Images

    इमेज कैप्शन, सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने फ़ॉकलैंड द्वीप से जुड़ा एक बैनर लहराया था

    फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप-2026 में फ़ॉकलैंड द्वीप से जुड़े बैनर को लेकर विवादों में घिरी अर्जेंटीना की टीम के समर्थन में अब व्हाइट हाउस उतर आया है.

    व्हाइट हाउस ने टीम के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का बचाव करते हुए कहा कि खिलाड़ियों को अमेरिका में ऐसे बयान देने का अधिकार है.

    दरअसल, सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने एक बैनर लहराया था, जिसमें लिखा था कि "फ़ॉकलैंड अर्जेंटीना का है."

    इस बैनर के ज़रिए अर्जेंटीना ने फ़ॉकलैंड द्वीप पर अपने दावे को दोहराया, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया.

    मामले में फ़ीफ़ा अर्जेंटीना के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है. माना जा रहा है कि खिलाड़ियों का यह कदम फ़ीफ़ा के उस नियम का उल्लंघन है, जिसके तहत राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं की जा सकती है.

    पत्रकारों से बातचीत में शुक्रवार को व्हाइट हाउस फ़ीफ़ा टास्क फ़ोर्स के प्रमुख एंड्रयू जूलियानी ने कहा कि टीम को अमेरिका में "ऐसे बयान देने का मौका और अधिकार" मिला है.

    उन्होंने अमेरिकी संविधान के पहले संशोधन का हवाला देते हुए कहा, "हम अमेरिका में अपने पहले संशोधन के तहत मिले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकारों पर विश्वास करते हैं."

    जूलियानी के इस बयान से विवाद और गहरा सकता है. वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कार्यालय डाउनिंग स्ट्रीट ने भी फ़ीफ़ा से पूरे मामले की जांच कराने की मांग का समर्थन किया है.

    गौरतलब है कि फ़ॉकलैंड द्वीप दक्षिण-पश्चिम अटलांटिक महासागर में स्थित एक ऐसा इलाक़ा है, जिस पर ब्रिटेन का नियंत्रण है. इस द्वीप की संप्रभुता को लेकर ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है.

  5. नमस्कार!

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