हमारे पालतू जानवर इतने मोटे क्यों होते जा रहे हैं?

कुत्ता

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, जुलेस मोंटैग
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर

पिछले साल तक बोरिस कभी भी पोर्क चॉप खाने से इनकार नहीं करता था. गर्मियों के दिनों में वो आइसक्रीम भी बहुत चाव से खाता था.

वहीं, गर्मियों में उसे भुना हुआ बीफ़, पोर्क, भुने आलू और कई तरह की सब्ज़ियां खाना पसंद था. बोरिस पांच बरस का कैवेलियर किंग चार्ल्स स्पैनियल नस्ल का कुत्ता है.

जब बोरिस की मालकिन एनीमैरी फॉर्मे ने उसे पीडीएसए पेट फिट क्लब में भर्ती कराया, तब तक उसका वज़न 28 किलो हो चुका था, जो तय मानक से दोगुना था.

पीडीएसए पेट फिट क्लब पालतू जानवरों को मोटापे से लड़ने में मदद करता था.

यहां आते-आते बोरिस का हाल ये था कि उसे कार में बिठाने के लिए दो लोगों को हाथ लगाना पड़ा. उसके एक पांव को गठिए ने जकड़ लिया था.

मोटापे की वजह से बोरिस को सांस लेने में भी मेहनत करनी पड़ रही थी.

कुत्ता

इमेज स्रोत, PDSA

पालतू जानवरों का मोटापा

क़रीब छह महीने की डाइटिंग और नियमित रूप से कसरत के बाद बोरिस का वज़न 7 किलो घट गया है.

उसने सैडी नाम के लैब्राडोर नस्ल के कुत्ते के साथ मिलकर मोटापा घटाने का मुक़ाबला जीता है.

ऐसा नहीं है कि मोटापे ने सिर्फ़ बोरिस को जकड़ा है. दुनिया भर में पालतू जानवरों का मोटापा बढ़ रहा है.

आज की तारीख़ में 22 से 44 फ़ीसदी तक पालतू जानवर मोटापे के शिकार हैं और ये तादाद लगातार बढ़ रही है.

ज़्यादा वज़न वाले कुत्तों के मालिक उन्हें तला भुना ख़ूब खिलाते हैं. इसके अलावा खाने की मेज पर बचा खाना भी पालतू कुत्तों के सुपुर्द कर दिया जाता है.

इसी तरह पालतू मोटी बिल्लियों के मालिक उन्हें घुमाने ले जाने, उनके साथ खेलने के बजाय उन्हें खाने-पीने की चीज़ें देकर ख़ुश करते हैं.

कुत्ता

इमेज स्रोत, Getty Images

मोटापे के शिकार

अगर किसी कुत्ते के मालिक मोटे हैं, तो कुत्ता भी मोटापे का शिकार होगा. वैसे मोटापा सिर्फ़ घरेलू जानवरों को नहीं हो रहा. इसके शिकार जंगली जानवर भी हो रहे हैं.

जबकि न तो उन्हें ज़्यादा खाना दिया जा रहा है, न उनके वर्ज़िश करने में कमी आई है.

अब अगर, जानवर मोटापे के शिकार हो रहे हैं, तो ज़रूर कोई न कोई कारण है, जिसे खोजा जाना ज़रूरी है.

कहीं इसका ताल्लुक़ इंसानों में बढ़ती मोटापे की बीमारी से तो नहीं? आज दुनिया में क़रीब 1.9 अरब लोगों का वज़न औसत से ज़्यादा है.

इन में से 65 करोड़ लोग मोटापे के शिकार हैं. ये दुनिया की कुल वयस्कों की आबादी का 13 फ़ीसद बैठता है.

1975 के बाद से दुनिया में मोटे लोगों की तादाद तीन गुनी बढ़ गई है. आज पांच साल से कम उम्र के चार करोड़ से ज़्यादा बच्चे मोटापे के शिकार हैं.

कुत्ता

इमेज स्रोत, Getty Images

कुत्तों की ये मिसाल

सबसे ज़्यादा वज़नदार कुत्ते लैब्राडोर नस्ल के होते हैं. एलेनोर रैफन कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में जानवरों की डॉक्टर और रिसर्चर हैं.

वे कहती हैं कि लैब्राडोर में मोटापे के कुछ ऐसे जीन हैं, जो उनका वज़न औसत से कम से कम दो किलो बढ़ा देते हैं.

एलेनोर कहती हैं, "जब इन कुत्तों के मालिक किचन में होते हैं, तो ये भी वहीं मंडराते रहते हैं. अक्सर उन्हें खाने के टुकड़े मिल जाते हैं. वो लगातार खाते रहते हैं."

"मज़े के लिए नहीं, बल्कि उन्हें भूख लगी होती है. कुत्तों को इतनी भूख लगने की वजह पीओएमसी नाम का एक जीन होता है. कुत्तों की ये मिसाल इंसानों के लिए भी सबक़ है."

हर वक़्त भूख का एहसास होते रहने के पीछे क़ुदरती कारण हैं. ऐसा हम अपने जीन्स की वजह से महसूस करते हैं. और ये जीन हमें विरासत में मिलते हैं.

अच्छी ख़बर ये है कि जैसे हमारे ज़्यादा खाने का कारण हमें जानवरों पर रिसर्च से पता चला, वैसे ही जानवरों की मिसाल से हम मोटापा भी घटा सकते हैं.

मोटापा

इमेज स्रोत, Getty Images

मोटापा बढ़ जाता है...

फार्म में पाले जाने वाले जानवरों को एंटीबायोटिक दिए जाते हैं, ताकि वो कम खाकर भी ज़्यादा वज़न बढ़ा लें.

अब ब्रिटेन समेत कई देशों ने जानवरों को एंटीबायोटिक देने पर रोक लगा दी है.

तो, अगर एंटीबायोटिक से जानवर मोटे किए जा रहे हैं, तो क्या इन्हें लेने से इंसानों में भी मोटापा बढ़ता है?

इस सवाल का जवाब आप की आंतों में छुपा है. इंसान की आंतों में अरबों-खरबों की तादाद में बैक्टीरिया, वायरस, प्रोटोज़ोआ, फफूंद और दूसरे सूक्ष्म जीव रहते हैं.

इनका सीधा ताल्लुक़ हमारे वज़न से होता है. अगर किसी चूहे को मोटे लोगों की आंत से निकालकर बैक्टीरिया दिए जाते हैं, तो उनका मोटापा बढ़ जाता है.

ऐसा कई तजुर्बों में देखा गया है. हमारे शरीर में मौजूद इन कीटाणुओं के कम या ज़्यादा होने से हमें पेट में जलन से लेकर टाइप-2 डायबिटीज़ तक की बीमारियां हो सकती हैं.

जानवरों का मोटापा

इमेज स्रोत, Getty Images

जीन में गड़बड़ी

आख़िर इन कीटाणुओं का हमारे शरीर में संतुलन बिगड़ता कैसे है? इसकी एक वजह हमारे जीन में गड़बड़ी होती है.

लेकिन, जानवरों पर हुई रिसर्च से पता ये चला है कि ज़्यादा मीठी चीज़ें और खाने को स्वादिष्ट बनाने के लिए मिलाए जाने वाले केमिकल भी इसके लिए ज़िम्मेदार हैं.

पैदा होने के छह महीने के भीतर नवजातों को एंटीबायोटिक देने पर उनके मोटे होने का ख़तरा बढ़ जाता है.

दिल की बीमारी के लिए अगर छह हफ़्ते तक लगातार एंटीबायोटिक लिया जाता है, तो उससे भी मोटापा बढ़ जाता है.

पर, ये रिसर्च पढ़कर आप अगर एंटीबायोटिक फेंकने वाले हैं, तो ज़रा ठहरिए.

इन रिसर्च से ये साबित नहीं होता कि हमारे पेट के बैक्टीरिया के बैलेंस बिगड़ने के पीछे एंटीबायोटिक ही होते हैं.

जानवरों का मोटापा

इमेज स्रोत, Getty Images

मौसम के हिसाब से...

कुछ एंटीबायोटिक ज़रूर हमारे भीतर के कीटाणुओं की आबादी पर असर डालते हैं. और ये कीटाणु सीधे तौर पर मोटापे के लिए ज़िम्मेदार होते हैं.

इस मुश्किल से निपटने के लिए इंसान की आंतों में स्वस्थ कीटाणुओं का ट्रांसप्लांट करने जैसे प्रयोग हो रहे हैं, जो अभी शुरुआती दौर में हैं.

घरेलू जानवर ही नहीं, जंगली जानवर भी मोटे हो रहे हैं, पर, उनके मोटापे का ताल्लुक़ मौसम के हिसाब से खान-पान की उपलब्धता से ज़्यादा है.

अमरीका की रॉकी पर्वतमाला में पायी जाने वाली गिलहरी की एक नस्ल में भारी मात्रा में मोटापे की बीमारी देखी गई है.

ये गर्मियों में ढेर सारा खाना खाकर सर्दियों में सोई रहती हैं. लेकिन, अब ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से ये गिलहरियां एक महीने पहले ही शीत निद्रा से बाहर आ जाती हैं.

यानी इनके खाने के लिए एक महीने का समय और बढ़ गया है. इसी से ये मोटी हो रही हैं. इन गिलहरियों का वज़न औसत से 300 ग्राम ज़्यादा होता देखा गया है.

छोड़िए YouTube पोस्ट, 1
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 1

मोटापा बढ़ाने का कारण

इसके अलावा रोशनी के प्रदूषण और अनिद्रा की वजह से भी जानवर मोटे हो रहे हैं. इंसानों में भी मोटापे के पीछे ये कारण देखे गए हैं.

जो लोग लगातार रोशनी में रहते हैं, उनका औसत वज़न ज़्यादा देखा गया है. कुछ पैकेजिंग में मिलने वाले केमिकल भी मोटापा बढ़ाने का कारण हो सकते हैं.

जैसे कि ओस्ट्रोजेन हारमोन के स्राव पर असर डालने वाला केमिकल बिस्फेनॉल ए या बीपीए.

ये खाने के कैन, कुछ हार्ड प्लास्टिक और रसीद और टिकट छापने में इस्तेमाल होने वाले काग़ज़ में पाया जाता है.

यूरोप में तो पॉलीकार्बोनेट से बनी बच्चों के दूध पीने की बोतलों में बीपीए के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है.

यहां हम आप को आगाह कर दें कि केवल इन्हीं कारणों पर ग़ौर कर के हम मोटापे पर क़ाबू नहीं पा सकते.

वीडियो कैप्शन, आख़िर क्यों ज़रूरी है पूरी नींद लेना?

सॉफ्ट ड्रिंक और ज़्यादा फैट

मोटापे की बड़ी वजह प्रोसेस्ड फूड है. जंक फूड और बड़े-बड़े बर्गर व पिज़्ज़ा खाने का सीधा ताल्लुक़ मोटापा बढ़ने से है.

खान-पान में चीनी का ज़्यादा इस्तेमाल भी हमारा मोटापा बढ़ा रहा है. इसके अलावा सॉफ्ट ड्रिंक और ज़्यादा फैट वाले स्नैक को खाने से भी मोटापे में इज़ाफ़ा हो रहा है.

खान-पान के कारोबार में लगी कंपनियां अक्सर ऐसे रिसर्चर से रिसर्च कराती हैं, जो उनसे जुड़े होते हैं.

इन रिसर्च में अक्सर ये बता दिया जाता है कि जंक फूड खाने या मीठी चीज़ें खाने से मोटापा नहीं होता.

ऐसे बहुत से वैज्ञानिक हैं जो कोका-कोला, पेप्सिको, मैक्डोनाल्ड्स और मार्स जैसी बड़ी कंपनियों से ताल्लुक़ रखते हैं.

मोटापे से जुड़े इनके रिसर्च पर कितना भरोसा किया जाए, ये आप ख़ुद सोचिए. शहरों में रहने वाले जानवर भी प्रोसेस्ड फूड के शौक़ीन हो जाते हैं. वो जंक फूड खाने लगते हैं.

मोटापा दूर करने का नुस्खा

पेड़ों से फल तोड़ कर खाने से ज़्यादा आसानी से ये चीज़ें उन्हें मिल जाती हैं. थाईलैंड में एक बंदर हाल ही में इंटरनेशनल स्तर पर चर्चित हुआ था.

सैलानी उसे लगातार कुछ न कुछ खाने को देते रहते थे. वो बंदर इतना मोटा हो गया था कि उसके लिए हिलना-डुलना भी दूभर हो गया था.

एलेनोर रैफन और उनके साथी रिसर्चर अब ये देख रहे हैं कि जानवरों के मोटापे से क्या हमें इंसानों का मोटापा दूर करने का नुस्खा मिल सकता है.

हमें मोटापे के शिकार जानवरों की भी मदद करनी होगी.

क्योंकि मोटापे की वजह से जानवरों को आर्थराइटिस, कैंसर, दिल और फेफड़ों की बीमारी के अलावा डायबिटीज़ जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं.

ज़्यादा वज़न होने पर कुत्तों की उम्र भी औसत से दो-ढाई साल कम हो जाती है.

मोटापा एक सामाजिक समस्या

जानवरों को मोटापे से बचाने के लिए उन्हें नियमित रूप से कसरत करानी होगी. उनके खान-पान पर ध्यान देना होगा.

ऐसा खाना खिलाना होगा, जिससे वो लंबे वक़्त तक पेट भरा हुआ महसूस करें. मोटापा कमज़ोर इरादे का नतीजा नहीं है. खान-पान की आदतों का ताल्लुक़ हमारे जीन से है.

ये जानवरों में भी होता है और इंसानों में भी. तो, इसके लिए किसी को नीचा नहीं दिखाया जाना चाहिए. जानवर ज़्यादा खाते हैं, क्योंकि वो भूख महसूस करते हैं.

इसलिए मोटे कुत्तों के लिए उनके मालिकों को भी नहीं कोसा जाना चाहिए. असल में मोटापा एक सामाजिक समस्या है, जिसके शिकार हमारे पालतू जानवर भी हो रहे हैं.

मालिकों को कई बार नहीं महसूस होता कि उनके पालतू कुत्ते या बिल्ली मोटे हो रहे हैं. इसी तरह बहुत से मां-बाप को नहीं लगता कि उनके बच्चे मोटापे के शिकार हैं.

मोटापे के लिए सामाजिक-आर्थिक कारण भी ज़िम्मेदार होते हैं. जिन बस्तियों में हरे-भरे इलाक़े कम होते हैं. वर्ज़िश के संसाधन कम होते हैं, वहां के लोग ज़्यादा मोटे होते हैं.

छोड़िए YouTube पोस्ट, 2
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 2

समाज की हालत

इसलिए मोटापे से निपटने के लिए नीतियों में भी व्यापक बदलाव की ज़रूरत महसूस की जा रही है. क्योंकि ये एक समाज की हालत को दर्शाता है.

उधर, बोरिस को तो मोटापे से छुटकारा मिल गया है. बोरिस की मालकिन एनीमैरी फॉरमॉय कहती हैं कि बोरिस उनके पिता का सबसे अच्छा दोस्त था.

उनकी मौत पिछले साल जुलाई में हो गई थी. तब एनीमैरी ने वादा किया था कि वो पिता के लिए बोरिस को चैम्पियन बनाकर ही रहेंगी.

बोरिस और एनीमैरी ने वो वादा निभाया है. आज बोरिस को गठिया से निजात मिल गई है. अब उसकी सांस लेने की दिक़्क़त भी ख़त्म हो गई थी.

जिस तरह बोरिस ने मोटापे पर जीत हासिल की, वो हमें बहुत सारे सबक़ सिखाने वाला है.

छोड़िए YouTube पोस्ट, 3
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 3

(बीबीसी फ़्यूचर पर मूल अंग्रेज़ी लेख पढ़ने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. बीबीसी फ़्यूचर को आप फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो कर सकते हैं.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)