'गन नंबर 6': कहानी एक क़ातिल पिस्टल की...

पिस्टल नंबर 6

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इमेज कैप्शन, जानकार बताते हैं कि हथियार नंबर छह से ब्रिटेन में सबसे ज़्यादा गोलियां चलाई गई हैं और सबसे ज़्यादा क़त्ल भी किए गए हैं
    • Author, असिता नागेश
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

गोली चलाने के बाद किसी पिस्टल या बंदूक़ के साथ क्या होता है?

ब्रिटेन में या तो वे गुम हो जाते हैं या फिर कभी कर्ज़ तो कभी किराये या फिर कभी एक्सचेंज के नाम पर एक हाथ से दूसरे हाथ होते हुए कभी न ख़त्म होने वाले सफ़र का हिस्सा बन जाते हैं.

ये कहानी एक ऐसे ही हथियार की है, 'गन नंबर 6.' पुलिस इसे इसी नाम से जानती है. किसी हथियार के इस्तेमाल पर नज़र रखने के लिए उसे एक स्पेशल नंबर दिया जाता है.

'गन नंबर 6' यानी 'सीज़ेड 75' एक सेमीऑटोमैटिक पिस्टल है जो दरअसल मेड इन चेक रिपब्लिक है.

पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक़ इस हथियार का इस्तेमाल ऐसे कई अपराधों में हुआ है जिनकी गुत्थी आज तक अनसुलझी है.

इस पिस्टल से जुड़े मामलों के तार भी आपस में जुड़े हुए नहीं हैं और कई मामलों में तो क्रिमिनल पकड़े ही नहीं जा सके.

हालांकि 'गन नंबर 6' पिछले एक दशक से 'खामोश' थी लेकिन हाल ही में बीबीसी की एक पड़ताल ने इस पिस्टल की जन्मकुंडली निकाल ली.

फ़िल्ममेकर ज़ैक बैटी, जॉर्जिना कैमालेरी और जेम्स न्यूटन ने नेशनल बलीस्टिक इंटेलीजेंस सर्विस (नाबिस) की मदद से 'गन नंबर 6' पर एक डॉक्युमेंट्री बनाई है.

नेशनल बलीस्टिक इंटेलीजेंस सर्विस के एक्सपर्ट्स का कहना है कि ब्रिटेन में इतनी ज़्यादा गोलियां और हत्याएं किसी और हथियार से नहीं हुए हैं.

पिस्टल नंबर 6

बर्मिंघम से शुरुआत

वो 23 फरवरी, 2003 की रात थी. घड़ी में तीन बज रहे थे कि तभी पुलिस स्टेशन के फोन की घंटी बजी. बर्मिंघम के एक नाइट क्लब के बाहर गोलियां चली थीं.

फोन करने वाले ने इतनी ही बताया. पुलिस जांच दल को घटनास्थल पर दो खाली कारतूल बरामद हुए लेकिन कोई और सुराग नहीं मिल सका और तफ़्तीश वहीं रुक गई.

एंडी हॉग उस ज़माने में वेस्ट मिडलैंड्स पुलिस के डिटेक्टिव चीफ़ इंस्पेक्टर हुआ करते थे.

वो बताते हैं कि न तो कोई गवाह सामने आया और न ही वो शख़्स जिस पर गोलियां चली थीं. गन नंबर 6 की कहानी बर्मिंघम की उसी गली से शुरू होती है.

"साल 2000 के बाद से हमने देखा कि गोली मार कर क़त्ल के मामले बढ़ने लगे और हमारे सामने वो लोग थे जो किसी डर की वजह से इस बारे में बात नहीं करना चाहते थे."

"हमारे पास कोई चश्मदीद नहीं था, खाली कारतूसों के अलावा एक भी ऐसा सुराग नहीं जिसकी कोई साइंटिफिक अहमियत हो, कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं था..."

"फोन करने वाले शख़्स का कोई पता नहीं था और सबसे बड़ी बात तो ये कि कोई ये कहने के लिए सामने नहीं आया कि उस रोज़ किसी ने मुझे गोली मारने की कोशिश की."

"केवल एक व्यक्ति ऐसा था जो ये जानता था कि वहां क्या हुआ था और क्यों हुआ था.... और वो वही शख़्स था जिसने पिस्टल की ट्रिगर दबाई थी."

"जिस किसी ने भी उस पिस्टल से गोली चलाई, उसने कभी भी पुलिस को इस हथियार के ठिकाने के बारे में नहीं बताया."

"इस पिस्टल का इस्तेमाल करने वाले बहुत से लोगों का तो आज तक कोई सुराग नहीं मिला है और कुछ क़त्ल के ज़ुर्म में उम्र क़ैद की सज़ा काट रहे हैं."

बर्मिंघम

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इमेज कैप्शन, इस पिस्टल से हुई ज़्यादातर शूटिंग के मामले बर्मिंघम के इलाके में ही रिपोर्ट हुए

वो क्राइम जिससे कहानी बदल गई...

हक़ीक़त में ब्रिटेन में अवैध हथियारों का केवल एक ही केंद्र रहा है, वो है छोटा स्कॉटिश टाउन डनब्लेन. ये 13 मार्च, 1996 की बात है.

थॉमस हैमिल्टन डनब्लेन एलीमेंट्री स्कूल में दाखिल हुए और वहां चल रही फ़ीजिकल एजुकेशन की क्लास में गोलियां चलानी शुरू कर दी.

केवल तीन मिनट में थॉमस हैमिल्टन ने एक टीचर और 16 बच्चों की जान ले ली. मरने वालों में ज़्यादातर पांच से छह साल के बच्चे थे.

इस नरसंहार के बाद हैमिल्टन ने अपने चार हथियारों में से एक से खुदकुशी कर ली. ब्रितानी इतिहास के सबसे जघन्य गोलीकांड डनब्लेन नरसंहार ने पूरी तस्वीर बदल दी थी.

दो साल के भीतर ब्रिटेन ने निजी इस्तेमाल के लिए छोटे हथियार रखने पर पाबंदी लगा दी. दुनिया भर हथियारों को लेकर ब्रिटेन जितने कड़े नियम क़ायदे शायद ही कहीं हैं.

हथियार रखने या खरीदने-बेचने के लिए ब्रिटेन में एक सख़्त प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है.

ऐसे में ये सवाल उठता है कि 'गन नंबर 6' जैसे हथियार ब्रिटेन की सड़कों पर आख़िर आते कहां से हैं

नॉर्थैम्पटन यूनिवर्सिटी से जुड़े हथियार विशेषज्ञ हेलेन पुले की राय में एक रास्ता तो हथियारों के वैध मालिकों या विक्रेताओं से इसे चुराकर हासिल करना है.

"कई बार तो हथियार विक्रेता पुरानी बंदूकों के शौकीन कलेक्टर्स के लिए भी इसे ख़ास तौर पर तैयार करते हैं, यानी उन्हें निष्क्रिय कर दिया जाता है."

"लेकिन अगर वे ग़लत हाथों में पड़ जाएं तो उन्हें फिर से इस्तेमाल के लायक बना लिया जाता है और वे एक बार फिर जानलेवा बन जाते हैं."

पिस्टल नंबर 6

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इमेज कैप्शन, ब्रितानी इतिहास के सबसे जघन्य गोलीकांड डनब्लेन नरसंहार ने पूरी तस्वीर बदल दी थी

'कम्युनिटी वीपन'

ताजा आंकड़ें बताते हैं कि इंग्लैंड और वेल्स में इस समय तक़रीबन 586,000 हथियार ऐसे हैं जो सरकारी रिकॉर्ड में इस्तेमाल के लायक बंदूक के तौर पर दर्ज हैं.

एक अनुमान के मुताबिक़ इसमें से 600 हथियार हर साल चुरा ली जाती है और ये चोरी उनके पास से होती है जिन्होंने इसे वैध रूप से खरीदा हो.

इसमें कोई दो राय नहीं कि चोरी किए गए हथियार अक़्सर ही काला बाज़ार में बिकने के लिए चले जाते हैं.

अवैध हथियार हासिल करने का एक तरीका ये भी है कि विदेशों से ब्रिटेन आने वाली बड़ी खेप में सेंधमारी की जाए और उससे इन्हें हासिल कर लिया जाए.

जानकार बताते हैं कि बाहर से आने वाले ये हथियार दुनिया के संघर्ष प्रभावित इलाकों से आते हैं, और कुछ तो बाल्कन देशों से.

इनमें से नाकाम हथियारों को दोबारा इस्तेमाल के लायक बना लिया जाता है. ये मिलिट्री ग्रेड के होते हैं और बड़े आपराधिक संगठन चोर रास्तों से इन्हें मंगाते हैं.

हथियार तैयार करने का आख़िरी तरीका होता है कि इंटरनेट पर इनके पुर्जे खोजे जाएं जो डार्क नेट पर मिल जाते हैं और फिर उन्हें असेंबल कर लिया जाता है.

हेलेन डीएनए और फिंगरप्रिट्स जैसे कोर टॉपिक्स पर काम कर चुकी हैं.

वे बताती हैं कि एक वक़्त था जब अपराध में ऐसी गाड़ियों का इस्तेमाल किया जाता था 'सामुदायिक कामों' के लिए होती थीं.

"ठीक इसी तरह से ऐसे हथियार भी होते हैं जो 'कम्युनिटी वीपन' की कैटगिरी में आते हैं. यानी इनकी खरीद-बिक्री नहीं होती बल्कि मिलजुलकर इसका इस्तेमाल करते हैं."

"इसी कम्युनिटी में किसी एक को इसके आख़िरी इस्तेमाल के बारे में पता होता है."

पिस्टल नंबर 6
इमेज कैप्शन, अहमद को लगी गोलियों में से एक 'गन नंबर 6' से चली थी

20 नवंबर, 2004 की एक सर्द रात

जब भी किसी गन या पिस्टल से फ़ायर किया जाता है तो गोली पर ऐसे निशान छूट जाते हैं जिनसे ये पता लगाया जा सकता है कि वो किसी हथियार से चलाई गई थी.

ये एक तरह का फिंगरप्रिंट होता है. यही वो सुराग था जिससे जांच अधिकारियों ने ये पता लगाया कि पिछले दो साल के दौरान 'गन नंबर 6' से सात बार गोली चलाई गई.

हालांकि इसमें किसी की मौत नहीं हुई थी लेकिन उन वारदात के मामले अभी भी अनसुलझे ही हैं. लेकिन नौवीं शूटिंग ने एक बार फिर से 'गन नंबर 6' को सुर्खियों में ला दिया.

वो 20 नवंबर, 2004 की एक सर्द रात थी. उस रोज़ बर्मिंघम के एक नाइट क्लब 'प्रिमॉनिशंस' के दरबान इशफाक़ अहमद अपनी ड्यूटी पर थे.

सुबह के साढ़े तीन बजे जॉनसन क्रू गैंग के लोगों ने बिना इंट्री फी दिए नाइट क्लब 'प्रिमॉनिशंस' में दाखिल होने की कोशिश की.

अहमद ने उन्हें रोकने की कोशिश की और बदले में उन्हें तीन गोलियां मारी गईं. अहमद को लगी गोलियों में से एक 'गन नंबर 6' से चली थी.

अहमद की उम्र उस वक़्त 24 साल थी. अगले साल दिसंबर में इस क़त्ल के लिए छह लोगों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई.

ये क़ातिल कम से कम 30 साल सलाखों के पीछे रहेंगे. लेकिन अहमद के क़त्ल में इस्तेमाल हुए 'गन नंबर 6' का फिर भी कोई सुराग नहीं मिला.

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इमेज कैप्शन, 'गन नंबर 6' का शिकार बने एंड्रूय हंटली की तस्वीर

'गन नंबर 6' का शिकार

आठ महीने बाद 23 जुलाई, 2005 को 'गन नंबर 6' की ख़बर एक बार फिर आई. इस बार ये केमार व्हिटेकर के हाथों में आई थी. वो 23 साल का एक ड्रग डीलर था.

इस बार 'गन नंबर 6' का शिकार बने शख़्स का नाम एंड्रूय हंटली था. हंटली ने भागने की कोशिश की लेकिन केमार से वो बच न सका. उसने रहम की भीख भी मांगी.

लेकिन केमार ने हंटली के सिर में दो गोलियां मारीं. मुक़दमा चला और केमार को भी अहमद के क़ातिलों की तरह वही सज़ा मिली. 'गन नंबर 6' एक बार फिर ग़ायब था.

इस बार चार बरस के लिए. एंडी हॉग के पास 'गन नंबर 6' के बार-बार गुमशुदा हो जाने का एक जवाब है.

"जब भी किसी हथियार का क़त्ल में इस्तेमाल होता है, वो एक ऐसी चीज़ बन जाती है जिसकी तलाश हर किसी को होती है. इसलिए कोई इसे अपने पास नहीं रखना चाहता."

"अगर आप क़त्ल में इस्तेमाल हुए हथियार के साथ पकड़े जाते हैं तो मुश्किल सवालों का सामना करना पड़ता है. इसका मालिक जल्द से जल्द इससे छुटकारा चाहता है."

"इसे कब्रिस्तानों में, बगीचों में दफ़्न कर दिया जाता है या फिर अपने जान-पहचान से बाहर के किसी शख़्स के पास इसे ठिकाने लगा दिया जाता है."

लेकिन 'गन नंबर 6' बार-बार ब्रिटेन की सड़कों पर लौट आता है.

पिस्टल नंबर 6
इमेज कैप्शन, केन हडसन ने लूट की एक वारदात में अपने बेटे को खो दिया था

पोस्ट ऑफ़िस मर्डर केस

हंटली की मौत के चार साल बाद 'गन नंबर 6' से एक बार फिर गोली चली. इस बार ये पिस्टल एक कुख्यात क्रिमिनट एन्सेल्म रिबेरा के हाथों में थी.

सेंट्र्ल बर्मिंघम से 45 मिनट की दूरी पर फ़ेयरफील्ड नाम के एक शांत से गांव में एन्सेल्म रिबेरा एक पोस्ट ऑफ़िस लूटने के इरादे से पहुंचे.

पोस्ट ऑफ़िस के इंचार्ज़ केन हडसन वॉकर वहीं अपने दो बच्चों और पत्नी के साथ रहते थे. उन्होंने बताया कि वे लोग सात बजे उठकर पोस्ट ऑफ़िस का काम निपटाते थे.

लेकिन नौ जनवरी, 2009 की उस सुबह केन की पत्नी ज्यूडी घर के किसी और काम में लग गईं.

ज्यूडी बताती हैं, हमें आज तक इस बात का अफसोस है कि काश कि उस रोज़ हमने खिड़की खोली होती तो हम उन्हें कार से बाहर निकलते हुए देख लेते.

केन की पत्नी जिनके बारे में बता रही थीं, वो हथियारबंद लोगों का गिरोह था जो उस दिन लूट के इरादे से फ़ेयरफील्ड आए थे.

उस दिन केन की ज़िंदगी में हाथों में बंदूक लिए लुटेरे त्रासदी की तरह आए थे. बंदूक की नोक पर केन का परिवार था लेकिन तभी उनका बड़ा बेटा क्रेग हॉल में दाखिल हुआ.

पिस्टल नंबर 6

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इमेज कैप्शन, मां-बाप को बचाने की कोशिश में क्रेग हडसन वॉकर उसी पिस्टल नंबर 6 से मारे गए थे

तभी एक गोली चली...

उनतीस साल के क्रेग ने हाथ में क्रिकेट का बल्ला लेकर मां को बचाने की कोशिश की, केन ने भी लुटेरों का मुक़ाबला किया लेकिन तभी एक गोली चली.

केन ने बताया, "क्रेग को गोली लग गई थी. मैंने क्रिकेट बैट के गिरने की आवाज़ सुनी. उन्होंने मेरे घुटने में गोली मारी. और फिर वे लोग वहां से चले गए."

केन और ज्यूडी ने क्रेग को बचाने की हर मुमकिन कोशिश की. लेकिन उन्हें मालूम था कि क्रेग मर चुका है. उसे सीने में गोली लगी थी.

गोली उसके एक फेफड़े और दिल में दाखिल हो गई थी. साल के आख़िर होते-होते क्रेग के कत्ल के लिए तीन लोगों पर मुकदमा चला.

अभियुक्तों में एन्सेल्म रिबेरा भी एक थे. मुकदमे की सुनवाई के दौरान जज ने रिबेरा और उसके साथियों को 'परजीवी अपराधी ' कहा था.

दस हफ़्ते के बाद उन लोगों को क़त्ल और क़त्ल की कोशिश के इलज़ाम में कसूरवार ठहराया गया. तीनों अपराधियों को उम्र कैद की सज़ा सुनाई गई.

पिस्टल नंबर 6

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इमेज कैप्शन, एन्सेल्म रिबेरा को कम से कम 34 साल जेल में गुजारने होंगे

कहानी एक क़ातिल की...

एन्सेल्म रिबेरा की पार्टनर रहीं एलीसन कोप बताती हैं, "मैं 19 बरस की थी, जब मैं पहली बार एन्सेल्म रिबेरा से मिली थी. तब वो 18 बरस का था."

"उसमें क़ातिल बनने जैसी कोई बात नहीं थी. वो दूर-दूर तक वैसा नहीं था. खामोश, शर्मीला और अनिश्चित. वो मेरा ख़्याल रखता था. एक भले दिल वाला शख़्स था."

"मैं इस बात से खुश थी कि रिबेरा जैसा कोई शख़्स मेरी ज़िंदगी में था. मैं और रिबेरा साथ रहने लगे और कुछ महीनों बाद पता चला कि मैं प्रेग्नेंट थी.

एलीसन कोप उस वक़्त 21 साल की थीं और वो नब्बे के दशक का दौर था. एलीसन गर्भवती थीं तभी रिबेरा चोरी के आरोप में गिरफ़्तार हुए.

हालांकि रिबेरी को छोटी सज़ा हुई थी और उन्हें कुछ ही हफ़्ते जेल में रहना पड़ा था लेकिन हालात बदल गए और रिबेरा पहले जैसे नहीं रह गए.

एलीसन बताती हैं, "मुझे याद है कि जेल जाने से पहले रिबेरा को क्राइम के बारे में उतना नहीं पता था जितना जेल से लौटने के बाद जानकारी थी."

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इमेज कैप्शन, एलीसन ने रिबेरा को छोड़ने का फ़ैसला कर लिया था

एक प्रेम कहानी का अंत

दस अगस्त, 1995 को एलीसन और एन्सेल्म रिबेरा के बेटे जोशुआ रिबेरा का जन्म हुआ. जोशुआ की पैदाइश के बाद शुरुआती महीने राज़ीखुशी से गुज़रे.

लेकिन जल्द ही हालात बदलने लगे. जोशुआ जब बहुत छोटा था तो रिबेरा एक बार फिर लूटपाट के आरोप में गिरफ़्तार हुए.

ये तय हो गया था कि रिबेरा और एलीसन का रिश्ता इसी मोड़ पर ख़त्म हो जाएगा.

एलीसन बताती हैं, "मैंने कहा कि सुनो... इस रिश्ते से मैं ऐसी बातों की उम्मीद नहीं करती हूं. मुझे तुम्हारी ज़रूरत है लेकिन इस तरह से नहीं..."

"लेकिन उस वक़्त तक रिबेरा ने ये तय कर लिया था कि उसे मुझसे ज़्यादा अपने तरीक़े की ज़िंदगी ज़्यादा अज़ीज है. इसलिए मैं इस रिश्ते से बाहर निकल आई."

जोशुआ जब सात बरस का था तो रिबेरा एक बार फिर गिरफ़्तार हुए. सुनवाई के बादद उन्हें सज़ा हो गई. ये कहानी यहीं ख़त्म नहीं होती है.

साल 2007 में एन्सेल्म रिबेरा रिहा हुए. दो साल बाद पोस्ट ऑफ़िस डकैती कांड हुआ रिबेरा और उनके साथियों के हाथों क्रेग की मौत हो गई.

पिस्टल नंबर 6
इमेज कैप्शन, 20 सितंबर, 2013 को एक दोस्त की याद में आयोजित एक कंसर्ट में किसी ने जोशुआ की सीने में खंजर उतार दिया

जोशुआ की जान

क्रेग के क़त्ल के समय जोशुआ केवल तेरह साल के थे. उन्हें ये समझने में लंबा वक्त लग गया कि उनके पिता क़ातिल भी हो सकते थे.

जब एलीसन ने जोशुआ को बताया कि रिबेरा को क़त्ल के ज़ुर्म में पुलिस ने गिरफ़्तार किया है तो वे रोने-चिल्लाने लगे. यहीं से मुश्किलें शुरू हईं.

अख़बारों में उनके पिता को क़ातिल बताया गया और इसका असर काफी हद तक जोशुआ पर पड़ा. लेकिन कुछ साल बाद हालात बेहतर हुए.

सोलह साल के जोशुआ को संगीत से मोहब्बत हो गई. रैप म्यूज़िक की धुन पर जोशुआ का जवान दिल धड़कने लगा. कामयाबी उनके कदम चूमने लगी.

एल्बम बिकने लगे, पैसा आया, ट्विटर पर फ़ॉलोअर बढ़े लेकिन तभी एक बार फिर कुछ ऐसा हुआ जिसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी.

20 सितंबर, 2013 को एक दोस्त की याद में आयोजित एक कंसर्ट में किसी ने जोशुआ की सीने में खंजर उतार दिया.

ये भी इत्तेफाक़ ही था कि जिस दोस्त की याद में ये कंसर्ट आयोजित किया गया था, साल भर पहले उसे भी किसी ने चाकू के वार से मार डाला था.

एलीसन अब पुरानी यादों के सहारे ज़िंदा हैं और नई नस्ल के बच्चों को हिंसा से दूर रहने के लिए प्रेरित करती हैं.

पिस्टल नंबर 6
इमेज कैप्शन, पिस्टल नंबर 6 एक मिलिट्री ग्रेड का हथियार है

मैक्सिमम डैमेज

वेस्ट मिडलैंड्स पुलिस की बलीस्टिक विशेषज्ञ गैरेथ कूपर कहते हैं, "नाइन एमएम की गोली मिलिट्री के इस्तेमाल के लिए डिजाइन की गई थी."

"ये गोली घूमते हुए अपने टार्गेट के भीतर दाखिल होती है. इससे जख़्म गहरा होता है. साफ़ लफ़्जों में कहें तो गन नंबर 6 एक ख़तरनाक़ जानलेवा मशीन है."

इस तरह के हथियारों का सड़कों पर यूं ही किसी के पास होना किसी के हक में नहीं हैं.

इस हथियार ने कई लोगों की ज़िंदगी तबाह की लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू ये भी है कि आज तक पुलिस इसे बरामद नहीं कर पाई.

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