वो पांच शहर जो 2019 में बड़े बदलाव देखेंगे

बीजिंग
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    • Author, टिम मैकडोनल्ड
    • पदनाम, बीबीसी कैपिटल

शहरीकरण ने पिछले 100 साल में धरती का नक्शा बदल दिया है. साल 1900 तक दुनिया में 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले सिर्फ़ 16 शहर थे.

ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन के मुताबिक अब धरती की आधी आबादी शहरों में रहती है.

300 सबसे बड़े शहरों की अर्थव्यवस्था वैश्विक उत्पादन के करीब आधे के बराबर है.

अर्थव्यवस्था को चला रहे शहर भी लगातार विकसित हो रहे हैं. सवाल है कि 2019 में किस शहर में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव हो सकते हैं?

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बेंगलुरू: सबसे तेज़ विकास

किस शहर की अर्थव्यवस्था सबसे तेज़ी से बढ़ेगी इसकी पहचान करना कठिन है.

किसी सांख्यिकीय विसंगति के कारण एक या दो शहर तालिका में शीर्ष पर पहुंच जाते हैं.

ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन के ग्लोबल मेट्रो मॉनिटर ने डबलिन को सबसे ऊपर रखा है, लेकिन यह वहां की स्थानीय आर्थिक गतिविधियों के कारण नहीं है. डबलिन में कई बैंकों सहित ढेरों कंपनियां हैं, मगर वे बस कागजों पर वहां मौजूद हैं.

ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने कहा है कि 2019 में त्रिपोली सबसे तेज़ी से आगे बढ़ेगा, लेकिन रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि लीबिया के सुरक्षा हालात को देखते हुए यह एक जोखिम भरा दांव है.

तो किस शहर में सबसे महत्वपूर्ण, सबसे ज़्यादा और टिकाऊ विकास हो रहा है?

ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के ग्लोबल सिटीज़ रिसर्च के प्रमुख रिचर्ड होल्ट का कहना है कि भारत का बेंगलुरू सबसे तेज़ी से बढ़ेगा.

मुद्रास्फीति समायोजित करने के बाद भी होल्ड ने 2019 में बेंगलुरू में 10.5 फीसदी विकास का अनुमान लगाया है.

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बेंगलुरू: ज़्यादा नौकरियां, ऊंची तनख़्वाह

बेंगलुरू सिलिकॉन वैली को भारत का जवाब है. देश की बड़ी टेक्नोलॉज़ी कंपनियां यहीं से चलती हैं.

तकनीक की समझ रखने वाले और कम लागत वाले कामगारों का फ़ायदा उठाने के लिए कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों के दफ्तर भी यहां हैं.

बायोटेक और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में मैन्यूफैक्चरिंग के क्षेत्र में भी बेंगलुरू ने अच्छी तरक्की की है.

यह शहर भारत के विकास का प्रमुख केंद्र रहा है लेकिन आने वाले वर्षों में यह और ऊंचाइयां छू सकता है.

होल्ट कहते हैं, "कुल मिलाकर बेंगलुरू में ज़्यादा नौकरियां हैं और ऊंची तनख़्वाह भी है. 2019 में यहां उपभोक्ता खर्च वास्तविक रूप से 10 फ़ीसदी या उससे अधिक बढ़ सकता है."

खर्च का ज़्यादातर हिस्सा शहर की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में मददगार होगा.

होल्ट का कहना है कि भविष्य में लागत बढ़ने से हो सकता है कि विकास का यह चक्र खतरे में पड़ जाए, लेकिन वैसी स्थिति आने में कई साल या शायद कई दशक लग जाएं.

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झोंगशानः व्यापार बढ़ेगा या घटेगा?

दिसंबर 2018 में अमरीका और चीन व्यापारिक कटुता को 90 दिनों के लिए रोकने पर राजी हुए. इससे बातचीत के दरवाजे खुले और जैसे को तैसा वाली नीतियों के दौर पर विराम लगा.

यह बातचीत सकारात्मक तरीके से आगे बढ़ेगी इसकी संभावना बहुत कम है.

झोंगशान
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अमरीका जुलाई 2018 से लेकर अब तक चीन से आने वाले 250 अरब डॉलर के सामान पर चुंगी लगा चुका है.

चीन में 110 अरब डॉलर के अमरीकी सामानों पर ड्यूटी लगाकर जवाब दिया है.

चीन के तटीय क्षेत्रों में बसे निर्यात आधारित मैन्यूफैक्चरिंग केंद्रों पर इसका बुरा असर पड़ सकता है, क्योंकि उनके सामान अमरीकी उपभोक्ताओं के लिए महंगे हो गए हैं.

एशियन ट्रेड सेंटर के कार्यकारी निदेशक देबोरा एल्म्स का कहना है कि इन केंद्रों में झोंगशान भी शामिल है.

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झोंगशानः व्यापारिक विवाद का साया

झोंगशान चीन के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी और मैन्यूफैक्चरिंग हब ग्वांडोंग प्रांत में मकाऊ से लगा हुए शहर है.

अमरीका के साथ व्यापारिक रिश्तों में कड़वाहट का असर पूरे ग्वांडोंग प्रांत के व्यापार और निवेश पर पड़ने वाला है. यहां की आबादी 10 करोड़ से ज़्यादा है.

यूएस चैंबर ऑफ़ कॉमर्स के एक ताज़ा सर्वे से संकेत मिले हैं कि ग्वांडोंग से कारोबार कर रही 70 फ़ीसदी अमरीकी कंपनियां अपने निवेश फ़ैसले में देरी कर रही हैं या वहां से निकल जाना चाहती हैं.

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तो झोंगशान कैसे बचेगा?

एल्म्स कहते हैं, "अमरीका को जाने वाले 70 फ़ीसदी निर्यात पर टैरिफ का असर पड़ा है. यहां से मशीनरी का निर्यात होता है, जो चीन से अमरीका जाने वाले सामानों में सबसे प्रमुख है. 2019 में यह शहर व्यापारिक विवाद में अग्रणी रहेगा."

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लंदन: ब्रेक्सिट की अनिश्चितता

लंदन यूरोप का सबसे बड़ा शहर है. यहां ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था के पांचवें हिस्से से ज़्यादा कारोबार होता है.

लंदन एक मुश्किल और बदलाव वाले साल से गुजर रहा है. ब्रिटेन यूरोपीय संघ से बाहर आने के लिए डील करने की कोशिश में है.

नये साल के अपने भाषण में प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने कहा है कि यदि पार्लियामेंट ने ब्रेक्सिट के उनके प्रस्ताव को मान लिया तो ब्रिटेन अपनी जगह बना लेगा.

लेकिन 29 मार्च की डेडलाइन में बहुत कम दिन बचे हैं. अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि पार्लियामेंट में प्रधानमंत्री को जरूरी समर्थन मिल जाएगा.

बिना समझौते के ब्रेक्सिट या दूसरे जनमत संग्रह की संभावनाओं को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है.

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लंदनः नये मौके

विशेषज्ञ कहते हैं कि अनिश्चितता से कोई मदद नहीं मिलेगी. ब्रिटिश मुद्रा पाउंड पर बहुत मार पड़ी है और शहर का प्रॉपर्टी बाज़ार भी बहुत नीचे चला गया है.

बैंक ऑफ़ इंग्लैंड ने यूरोपीय संघ के साथ डील नहीं होने पर मंदी की आशंका जताई है.

ब्रेक्सिट के कारण वित्तीय क्षेत्र में 75 हजार नौकरियां जा सकती हैं. इनमें लंदन के व्यापारिक केंद्र की 5 हजार नौकरियां शामिल हैं.

London, लंदन
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लंदन के कांटिनेंटल कंपीटिटर फ्रैंकफर्ट को लगता है कि उसे वित्तीय क्षेत्र की 10 हजार नौकरियों का नुकसान होगा. इसके अलावा 800 अरब यूरो (918 अरब डॉलर) की संपत्तियों पर भी असर होगा.

कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने मुख्यालय दूसरे देश में लेकर जाने पर विचार कर रही हैं.

ब्रेक्सिट के समर्थक इस डर को खारिज करते हैं. उनका कहना है कि ब्रेक्सिट ब्रिटेन को नई ऊंचाइयों पर लेकर जाएगा.

इस साल पता चलेगा कि कौन सही था और कौन गलत.

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बीजिंगः ऊंची उड़ान

इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन का अनुमान है कि चीन 2022 तक अमरीका को पीछे छोड़कर सबसे बड़ा एविएशन मार्केट बन जाएगा.

इस साल बीजिंग इस दिशा में बड़ा कदम उठाने वाला है. सितंबर 2019 के आसपास डैक्सिंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट खुल जाएगा.

पूरी तरह खुल जाने पर इस विशाल हवाई अड्डे से साल में 10 करोड़ यात्री आ-जा सकेंगे. इसका असर भी बड़ा होगा.

फर्स्ट ग्लोबल के एशिया फाइनेंस एडिटर एलिस टेलर का कहना है कि डैक्सिंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट घरेलू बाज़ार में ज्यादा प्रतियोगिता लाएगा. चाइना सदर्न और चाइना ईस्टर्न बीजिंग में एयर चाइना के प्रभुत्व को कम करने में सफल होंगे.

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बीजिंगः नये रास्ते पर

अगर आप एशिया में यात्रा कर रहे हैं या एशिया से अमरीका जा रहे हैं तो संभव है कि आपकी फ्लाइट बीजिंग में ठहरकर आगे बढ़े.

नये हवाई अड्डे में अंतराष्ट्रीय उड़ानों को नया रूप देने की झमता है क्योंकि बीजिंग बहुत अहम केंद्र बन गया है.

टेलर कहते हैं, "आप देखेंगे कि चीन के दोनों हवाई अड्डों से ज्यादा लोग जुड़ रहे हैं. हवाई कंपनियां लंबी दूरी की कनेक्टिंग फ्लाइट्स के किराये कम करने के लिए लागत लाभों का उपयोग करेंगी."

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जकार्ताः डूबेगा या बचेगा?

जकार्ता को 2019 में दुनिया के सबसे तेज़ी से डूबते शहर का तमगा मिल सकता है.

क्लायमेट चेंज फ़ॉर क्रिश्चियन एड की ग्लोबल लीड डॉ. कैथरीन क्रेमर ने डूबते शहरों पर एक रिपोर्ट तैयार की है.

वह कहती हैं, "जकार्ता में एक साथ कई कारण हैं- प्राकृतिक और मानवीय. समुद्र के बढ़ते जल-स्तर से यह शहर बहुत ही असुरक्षित है."

जकार्ता
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इंडोनेशिया की राजधानी नीची, तटीय और दलदली जमीन पर बसी है. एक और समस्या स्थानीय लोगों के भू-जल जल का इस्तेमाल करने की है.

पानी का बुनियादी ढांचा खराब होने का मतलब है विकल्प सीमित हो जाना. जब पानी बाहर आता है तो उसके ऊपर की जमीन डूब जाती है.

पिछले 10 साल में जकार्ता का उत्तरी हिस्सा 2.5 मीटर डूब चुका है. कुछ इलाके हर साल 25 सेंटीमीटर डूब रहे हैं.

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जकार्ताः असुरक्षित

जलवायु परिवर्तन शहर की चुनौतियों को और बढ़ाएगा. क्रेमर का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण जकार्ता में बार-बार और भयंकर रूप में बाढ़ और तूफान आ रहे हैं.

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"सतह का तापमान बढ़ने के कारण आपदाओं की तीव्रता और बारिश के पैटर्न में बदलाव का मतलब है कि मौसम ज्यादा बड़े ख़तरे खड़े कर रहा है."

(मूल लेख अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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