कितना गुलाबी रह गया है गुलाबी शहर जयपुर?

जयपुर

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    • Author, आभा शर्मा
    • पदनाम, जयपुर से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

सवाई राजा जयसिंह द्वितीय ने साल 1727 में जयपुर शहर बसाया था. इसे आप देश का पहला सुनियोजित स्थापत्य वाला शहर मान सकते हैं.

वर्ष 1876 में प्रिन्स ऑफ़ वेल्स के जयपुर आगमन के मौके पर तत्कालीन महाराजा राम सिंह ने उनके स्वागत के लिए पूरे शहर को गुलाबी रंग से सजाया था.

जयपुर

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इमेज कैप्शन, जयपुर का सांगानेरी गेट

जयपुर की चारदीवारी के सभी आठ प्रमुख दरवाजे- अजमेरी गेट, सांगानेरी गेट, घाटगेट, सूरज पोल, चाँद पोल, जोरावर सिंह गेट, गंगा पोल आदि गुलाबी रंग में रंग दिए गए थे.

साथ ही शहर के प्रमुख आकर्षण हवा महल, टाउन हॉल और चारदीवारी के सभी बाज़ार, दुकानें, हवेलियाँ, मंदिर आदि भी गुलाबी हो गए थे.

हवा महल

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इमेज कैप्शन, जयपुर का मशहूर हवा महल

जयपुर की चारदीवारी में आज भी इमारतों पर गुलाबी रंग की ही इजाज़त है. पर गुलाबी के कई रंग देखकर सैलानी चकित हो सकते हैं कि आखिर कौन सा गुलाबी रंग असली है?

किशनपोल बाज़ार

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इमेज कैप्शन, जयपुर का किशनपोल बाज़ार

समय के साथ बार-बार पुताई होने के कारण इमारतों में गुलाबी रंग के कई रूप देखने को मिल जाते हैं. कहीं हल्का, तो कहीं गहरा गुलाबी तो कहीं गहरा गेरुआ तो कहीं एकदम बदरंग. कहीं-कहीं तो एक ही इमारत की हर मंजिल पर एक अलग रंग मिलेगा.

जयपुर

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इमेज कैप्शन, जयपुर का जौहरी बाज़ार

हैरिटेज संरक्षण के प्रति जागरूकता की कमी कहिए, या आर्थिक तंगी या सरकारी अनदेखी, गेरुए (टेराकोटा) गुलाबी के अलावा भी कई रंग यहाँ देखे जा सकते हैं.

रामगंज बाज़ार

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इमेज कैप्शन, जयपुर का रामगंज बाज़ार

शहर के बुज़ुर्ग त्रिलोकी दास खंडेलवाल कहते हैं कि पुराना गुलाबी रंग अपनी रंगत खो चुका है और किशनपोल बाज़ार की इक्का-दुक्का इमारतों को छोड़कर ये रंग अब देखने को नहीं मिलता.

वक्त, मौसम के मिज़ाज़ और परत दर परत चढ़ते रंग ने जयपुर को अलग ही रंग में रंग लिया है. पर फिर भी यह और शहरों से बहुत ख़ास है.

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