वो शहर जिसने दुनिया को 'वक़्त' बेचा

वो शहर जिसने दुनिया को वक्त बेचा

इमेज स्रोत, Linda Laban

    • Author, लिंडा लबन
    • पदनाम, बीबीसी ट्रैवल

वक़्त से दिन और रात

वक़्त से कल और आज

वक़्त की हर शय ग़ुलाम

वक़्त का हर शय पे राज

वक़्त की पाबन्द हैं

आती-जाती रौनक़ें

वक़्त है फूलों की सेज

वक़्त है कांटों का ताज....

हमारी ज़िंदगी में सही वक़्त की अहमियत ये गीत बख़ूबी बयां करता है. वक़्त की पाबंदी को पेशेवर ज़िंदगी का बुनियादी उसूल माना जाता है. रेलगाड़ियों का चलना हो या हवाई जहाज़ का उड़ना, सब को वक़्त की पाबंदी माननी होती है. आप को दफ़्तर पहुंचना हो, या खाना खाना हो, सारे काम मुक़र्रर समय पर ही हों, तो ठीक माना जाता है. और ये पाबंदी हर ख़ास-ओ-आम पर लागू होती है.

लेकिन, हम आपको अगर ये बताएं कि आज से दो सौ-ढाई सौ साल पहले ऐसा नहीं था, तो शायद आप यक़ीन न करें.

लेकिन, हक़ीक़त यही है.

पूरी कहानी जुड़ी है घड़ियों से. आज हर हाथ और घर में दिखने वाली घड़ी कभी अमीरों का शौक़ थी. इसे कलाई पर नहीं पहना जाता था. ये वो दौर था, जब लोग जेब में घड़ियां लेकर चलते थे. और ये बहुत ही रईस लोगों की पहुंच में हुआ करती थीं.

सवाल ये उठता है कि जब घड़ियां थीं ही नहीं इतनी आम तो, वक़्त की पाबंदी का क्या था?

जनाब, तब समय के पाबंद होने को उतनी बड़ी बात नहीं माना जाता था, जितना आज.

वो शहर जिसने दुनिया को वक्त बेचा

इमेज स्रोत, Alamy

वाल्थम वाच कंपनी ने बदल दिया दुनिया का नज़रिया

लेकिन, एक कंपनी ने वक़्त को लेकर दुनिया का नज़रिया ही बदल दिया. इस कंपनी का नाम था वाल्थम वॉच कंपनी. उन्नीसवीं सदी में अमरीका के मैसाचुसेट्स राज्य के वाल्थम शहर में स्थापित हुई इस कंपनी ने घड़ियों को आम लोगों तक पहुंचाया था. इसने अमरीकी रेलगाड़ियों को समय पर चलना सिखाया. बाक़ी दुनिया को भी समय चक्र का पालन करने को मजबूर कर दिया.

यूं तो वाल्थम शहर और भी बड़ी कंपनियों जैसे बोस्टन मैन्युफैक्चरिंग कंपनी और मेत्ज़ मोटरकार कंपनी के लिए मशहूर हुआ. मगर, इसे सबसे ज़्यादा शोहरत मिली वाल्थम वॉच कंपनी की वजह से. इस शहर को 'द वॉच सिटी' यानी घड़ियों वाला शहर कहा जाने लगा.

उन्नीसवीं सदी के मध्य तक घड़ियां ख़ास लोगों की डिमांड पर बनाई जाती थीं. हर घड़ी का कल-पुर्ज़ा ख़ास उसके लिए बनाया जाता था. घड़ियां बनाने का तरीक़ा भी हर घड़ी के हिसाब से बदलता रहता था. इसमें समय भी लगता था और ये महंगा भी बहुत पड़ता था. यही वजह थी कि केवल रईस लोग ही घड़ियां रख पाते थे. दो घड़ियां एक जैसा समय बताएं, ये भी ज़रूरी नहीं हुआ करता था.

लेकिन वाल्थम वॉच कंपनी ने ये सब कुछ बदल डाला. घड़ियों की दुनिया में इंक़लाब ला दिया.

इसकी शुरुआत अमरीका के बोस्टन शहर के घड़ीसाज़ आरोन लुफ्किन डेनिसन ने की. वो तेज़ दिमाग़ का इंसान था. एक बार आरोन, मैसाचुसेट्स के दक्षिण-पश्चिमी इलाक़े में इस्थित स्प्रिंगफील्ड आर्मरी यानी हथियारों के कारखाने में गया. वहां उसने देखा कि हथियारों के कल-पुर्ज़े एक ही बराबर और एक ही डिज़ाइन के बनाए जाते थे. नतीजा ये होता था कि फटाफट ढेर सारे हथियार तैयार हो जाते थे.

तब आरोन ने सोचा कि अगर यही तरीक़ा घड़ियां बनाने में अपनाया जाए, तो कैसा रहेगा? एक ही तरह के कल-पुर्ज़े, डायल और सुइयां हों, तो फटाफट और तेज़ी से घड़ियां तैयार की जा सकेंगी. आरोन ने अपना आइडिया कुछ रईस निवेशकों को बेचा और वो उसकी कंपनी में पैसा लगाने के लिए तैयार हो गए.

वो शहर जिसने दुनिया को वक्त बेचा

इमेज स्रोत, Linda Laban

कारखानों में बनने लगी घड़ियां

आरोन ने बोस्टन वॉच कंपनी की स्थापना की. ये कंपनी रॉक्सबरी नाम के क़स्बे में स्थापित की गई. बाद में आरोन ने इसका नाम अमेरिकन वॉच कंपनी और आख़िर में जब वो कंपनी को वाल्थम ले आया, तो उसका नाम वाल्थम वॉच कंपनी (WWC) कर दिया.

आरोन डेनिसन ने पहली अमरीकी कंपनी बनाई, जो कारखाने में घड़ियां बनाती थी. इससे बड़े पैमाने पर एक जैसी घड़ियां तैयार की जाने लगीं. ढेर सारी घड़ियां कम ख़र्च में बनीं, तो उनकी क़ीमत भी घट गई. नतीजा ये हुआ कि कभी रईसों का शौक़ रही जेब घड़ियां अब हर शख़्स के पास नज़र आने लगीं. सभी घड़ियां एक ही समय बताती थीं, तो लोगों का वक़्त भी एक पटरी पर आ गया.

सोचिए, ये इंटरनेट की वजह से क़रीब आई दुनिया से दो सौ साल पहले की बात है. लाखों घड़ियां एक सा समय बताने लगीं और दुनिया का वक़्त एक ही चाल पर चलने लगा. हर घड़ी सटीक समय बताती थी. आरोन डेनिसन का हर शख़्स को समय बताने का सपना पूरा हुआ था.

अमरीका के मैसाचुसेट्स का वाल्थम शहर एक औद्योगिक इलाक़ा था. यहां उद्योगों के लगने की शुरुआत 1800 से हुई थी. सबसे पहले फ्रैंसिस कैबॉट लोवेल ने बोस्टन मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी की स्थापना की. इस कंपनी ने अंग्रेज़ों की कपड़ा मिलों की नक़ल कर के अमरीकी सरज़मीं पर ही कपड़े बनाने शुरू किए. फ्रैंसिस कैबॉट लॉवेल की मिल की इमारत में आज रिहाइश बना दी गई है.

इसके अलावा वहां पर चार्ल्स रिवर म्यूज़ियम ऑफ़ इंडस्ट्री ऐंड इनोवेशन यानी CRMII बना दिया गया है. हर साल मई के महीने में यहां द वॉच सिटी स्टीमपंक फेस्टिवल का आयोजन होता है. इसका मक़सद ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया के दौर में यहां उद्योगों की तरक़्क़ी का जश्न मनाया जाता है. लॉवेल मिल में बना म्यूज़ियम भी इस फेस्टिवल का हिस्सा होता है.

वो शहर जिसने दुनिया को वक्त बेचा

इमेज स्रोत, Linda Laban

वाल्थम वॉच की ख़ूबी

सीआरएमआईआई (CRMII) के कार्यकारी निदेशक बॉब पेरी कहते हैं कि, 'हमारे पास उस दौर की घड़ियां तो हैं ही, उनके कल-पुर्ज़े और घड़ियां बनाने के औज़ार भी हैं. वाल्थम वॉच कंपनी की सबसे बड़ी ख़ूबी ये थी कि उसकी बनाई घड़ियों के पुर्ज़े बदले जा सकते थे. इसी वजह से वाल्थम वॉच कंपनी उन्नीसवीं सदी में दुनिया की सबसे अहम घड़ी कंपनी बन गई थी.'

चार्ल्स नदी के किनारे सीआरएमआईआई से क़रीब पौन मील दूर है वाल्थम वॉच कंपनी का कारखाना. यहीं से वक़्त का इंक़िलाब दुनिया में आया था.

आज चार्ल्स नदी का इस्तेमाल मनोरंजन के लिए ज़्यादा होता है. लेकिन, कभी ये नदी उद्योग-धंधों की जीवनदायिनी हुआ करती थी. इसकी धारा आज भी कैबॉट लॉवेल मिल और वाल्थम वॉच कंपनी के कारखाने को एक डोर में पिरोती है. वाल्थम वॉच कंपनी के कारखाने की इमारत इतनी शानदार है कि आज दो सदी बाद भी ये नई ही दिखती है.

वो शहर जिसने दुनिया को वक्त बेचा

इमेज स्रोत, Linda Laban

यहां पर भी रिहाइशी अपार्टमेंट बना दिए गए हैं. कई कंपनियों ने यहां अपने दफ़्तर भी खोल लिये हैं और एक इटैलियन रेस्तरां भी यहां चलता है. इसी इमारत के एक हिस्से में वाल्थम वॉच कंपनी के सामानों का अजायबघर बनाया गया है. उस दौर के विज्ञापन और कर्मचारियों की तस्वीरें भी यहां रखी हैं.

आज तो पूरे इलाक़े में बहुत सी बस्तियां और इमारतें आबाद हो गई हैं. लेकिन 1825 में यहां पर केवल बोस्टन मैन्युफैक्चरिंग कंपनी और वाल्थम वॉच कंपनी की इमारतें खेतों में बनाई गई थीं.

इससे पहले अठारहवीं सदी में आस-पास के रईसों ने यहां अपने फॉर्म हाउस और रिजॉर्ट बनवाए थे.

इन ख़ूबसूरत रिहाइशों के अलावा उद्योगपतियों को जो दूसरी चीज़ खींच कर यहां लाई वो थी चार्ल्स नदी की कल-कल बहती धारा. इससे पनबिजली बनाने की अपार संभावनाएं थीं.

फिर डेनिसन जैसी सटीक वक़्त बनाने वाली घड़ी बनाना चाह रहे थे, उसके लिए साफ़ हवा की सख़्त दरार थी.

डेनिसन की घड़ियों ने बहुत जल्द दूसरी अमरीकी कंपनियों जैसे हैमिल्टन, एल्गिन मूवमेंट और इलिनॉय को बाज़ार से बाहर कर दिया.

वो शहर जिसने दुनिया को वक्त बेचा

इमेज स्रोत, Alamy

उस समय का आईफोन था वाल्थम

सीआरएमआईआई की इतिहासकार एमी कहती हैं, 'सटीक समय बताने में वाल्थम की घड़ियों का कोई मुक़ाबला नहीं था. 1940 के दशक तक वाल्थम का नाम किसी और घड़ी कंपनी से ज़्यादा जाना जाता था. ये अपने दौर की आईफ़ोन थी. हर किसी की ख़्वाहिश होती थी, वाल्थम की घड़ी रखने की.'

1860 के दशक में अमरीकी गृहयुद्ध ने इस घड़ी की मांग को और बढ़ा दिया. सस्ती वाल्थम घड़ियां यूनियन की सेना में बहुत लोकप्रिय थीं. उस वक़्त के अमरीकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के पास भी वाल्थम घड़ी हुआ करती थी.

बरसों तक प्रयोग करने के बाद तैयार हुई घड़ी ने समाज के हर तबक़े के बीच अपनी पैठ बना ली थी.

इलाक़े के एक और इतिहासकार मार्टी कोहेन बताते हैं कि वाल्थम की घड़ियां इतनी ज़्यादा बिकने लगीं और मशहूर हो गईं कि घड़ियों के लिए मशहूर स्विस कंपनियों ने वाल्थम के कारखाने की जासूसी के लिए गुप्तचर तक भेजे. स्विस कंपनियों ने भी वाल्थम की नक़ल कर के घड़ियां बनाईं और बेचने की कोशिश कीं. लेकिन, स्विस घड़ी कंपनियां इस में कामयाब नहीं हुईं.

1890 के दशक तक वाल्थम की घड़ी दुनिया में सबसे सटीक वक़्त बताने वाली घड़ी हुआ करती थी. अमरीका में हर रेलवे लाइन के स्टेशनों पर वाल्थम की घड़ियों के हिसाब से ही ट्रेनें चलती थीं.

लेकिन, जैसा कि हर कामयाबी के साथ होता है. वाल्थम वॉच कंपनी, बदलते वक़्त के साथ तालमेल बिठाने में नाकाम रही.

वो शहर जिसने दुनिया को वक्त बेचा

इमेज स्रोत, Linda Laban

एमी ग्रीन कहती हैं कि, 'उन्होंने भारी पैमाने पर घड़ियां बनाना सिखाया. मगर वाल्थम वॉच कंपनी ने ख़ुद को जेब घड़ी बनाने तक ही सीमित रखा. जेब घड़ियां सस्ती तो हो गईं, मगर उनकी लोकप्रियता घट रही थी क्योंकि हर बार समय देखने के लिए उन्हें जेब से निकालना पड़ता था.'

जहां अमरीकी गृह युद्ध ने वाल्थम वाच कंपनी को शोहरत दिलाई. वहीं एक और युद्ध ने इसे तबाह कर दिया. और ये था दूसरा विश्व युद्ध. जंग के दौरान इस घड़ी कंपनी के कारखानों में भी युद्ध के लिए ज़रूरी सामान बनाए जाने लगे.

मार्टी कोहेन कहते हैं, 'दूसरे विश्व युद्ध के दौरान वाल्थम कंपनी आम जनता के लिए कोई घड़ी नहीं बनाती थी. वो सेना के लिए गड़ियां और दूसरे हथियार बनाने लगी थी. इस दौरान आम लोगों को घड़ी पहनाने का काम फिर से स्विस कंपनियों के हाथ में आ गया.'

1957 में कंपनी के बंद होने तक इसके कारखाने में 4 करोड़ से ज़्यादा स्पीडोमीटर, कंपास और टाइम फ्यूज़ बनाए जा चुके थे. और ये मज़े की बात ये है कि सारा सामान, उन्नीसवीं सदी की मशीनों से लिया जा रहा था.

मार्टी कोहेन बताते हैं कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद वाल्थम वॉच कंपनी के मैनेजर चाहते थे कि वाल्थम वॉच कंपनी में और निवेश किया जाए. लेकिन, कंपनी के बोर्ड ने ऐसा करने से मना कर दिया. असल में कारखाने की मशीनें पुरानी पड़ चुकी थीं. नए दौर में आई नई तकनीक के इस्तेमाल के लिए पुरानी मशीनों की जगह वाल्थम वॉच कंपनी को नई मशीनों की ज़रूरत थी. मगर वाल्थम के बोर्ड ने इसकी इजाज़त नहीं दी.

वाल्थम वॉच कंपनी दिवालिया हो गई, उसे बेच दिया गया. उस का काम स्विस कंपनियों को दे दिया गया. लेकिन एक दौर में जो कल-पुर्ज़े घड़ियां बनाते थे, वो बाद में भी काम करते रहे.

2013 मे कोलोराडो की कंपनी वोर्टिक वाच कंपनी ने अमरीकी वाल्थम कंपनी की जेब घड़ी बनाने वाले औज़ारों से ही हाथ घड़ियां बनानी शुरू कीं.

वोर्टिक के सह-संस्थापक आरटी कस्टर कहते हैं, 'वाल्थम कंपनी के लोग बदलते दौर के साथ हाथ घड़ी बनाने के बजाय पुराने तरीक़े से चलते रहे और बेहतरीन जेब घड़ियां बनाते रहे. आज भी कंपनी के कई औज़ार काम में लाए जाने लायक़ हैं.'

आज मोबाइल के दौर में हमें समय जानने के लिए घड़ियों की ज़रूरत ही नहीं रह गई है. लेकिन, 100 साल से भी ज़्यादा पुराने पुर्ज़ों को जोड़कर नए दौर के लिए गड़ियां बनाने का सिलसिला जारी है.

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी ट्रैवल पर उपलब्ध है.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)