बर्लिन का ये नया और हाइटेक एयरपोर्ट वीरान क्यों है?

एयरपोर्ट, जर्मनी

इमेज स्रोत, Getty Images

    • Author, एमिली शुलदाइस
    • पदनाम, बीबीसी कैपिटल

विमानों के दरवाजे के साथ जुड़ने के लिए दर्जनों जेट ब्रिज तैयार खड़े हैं. डिज़िटल स्क्रीन पर उड़ान की सूचनाएं प्रदर्शित हो रही हैं. चमचमाते टर्मिनल को मुसाफ़िरों के आने का इंतज़ार है.

बर्लिन का ब्रांडनबर्ग विली ब्रैंड्ट एयरपोर्ट (BER) यूरोप के किसी भी दूसरे प्रमुख आधुनिक एयरपोर्ट की तरह दिखता है, बस एक बड़ी समस्या को छोड़कर.

यह एयरपोर्ट सात साल पहले खुलने वाला था, लेकिन यह आज भी सुनसान है. जर्मनी अपनी दक्षता और बेहतरीन इंजीनियरिंग के लिए जाना जाता है, लेकिन बात जब बर्लिन के नये भुतहा एयरपोर्ट की होती है, तब यह प्रतिष्ठा झूठी लगती है.

बार-बार हो रही देरी, ख़राब प्रबंधन और शुरुआती बजट से साढ़े तीन गुना से ज्यादा खर्च के कारण यह एयरपोर्ट बर्लिन के लोगों के बीच एक मज़ाक बनकर रह गया है. राजनेता, कारोबारी प्रमुख और स्थानीय निवासी, सभी इससे समान रूप से निराश हैं.

शहर, राज्य और संघ सरकार के खर्च पर बन रहे एयरपोर्ट की शुरुआती लागत दो अरब यूरो आंकी गई थी. लेकिन अब योजनाकारों ने बताया है कि अनुमानित लागत 7.3 अरब यूरो तक पहुंच जाएगी.

लागत इससे भी ज़्यादा बढ़ सकती है. यह इस बात पर निर्भर करेगा कि एयरपोर्ट को पूरा होने में कितना समय लगता है. जब तक यह एयरपोर्ट नहीं खुलता, तब तक इसके रखरखाव में हर महीने लाखों यूरो लगते रहेंगे.

बर्लिन के हर्टी स्कूल ऑफ़ गवर्नेंस के प्रोफ़ेसर एमिरेट्स और हवाई अड्डे पर 2015 की केस स्टडी के लेखक जॉब्स्ट फ़िडलर ने बीबीसी कैपिटल को बताया कि एक के बाद एक कई गलतियों ने इसे इस हाल में पहुंचाया है.

उन्होंने कहा, "इस एयरपोर्ट को जून 2012 में खुल जाना चाहिए था. उस समय ही इसकी लागत बजट को पार कर चुकी थी और समय खत्म हो रहा था. लेकिन कहानी अभी भी चल रही है."

जर्मनी, एयरपोर्ट

इमेज स्रोत, Getty Images

और कितना वक़्त लगेगा?

नये एयरपोर्ट की योजना 1989 में बर्लिन की दीवार गिरने के बाद बनाई गई थी.

यह साफ़ हो गया था कि जर्मनी की नई एकीकृत राजधानी को शीतयुद्ध के समय के दो हवाई अड्डों- टेगेल (पश्चिमी बर्लिन) और शोनफेल्ड (पूर्वी बर्लिन) की क्षमता से बड़े और आधुनिक एयरपोर्ट की जरूरत होगी.

नये एयरपोर्ट पर 2006 में काम शुरू हुआ. तब यह समझा जा रहा था कि नया एयरपोर्ट बन जाने के बाद टेगेल और शोनफ़ेल्ड, दोनों को बंद कर दिया जाएगा.

2010 की गर्मियों में गड़बड़ी का पहला बड़ा संकेत मिला जब राज्य और संघ नियंत्रित कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन- फ़्लूगाफेन बर्लिन-ब्रांडनबर्ग ने एयरपोर्ट चालू करने की तारीख़ अक्टूबर 2011 से जून 2012 तक बढ़ा दी गई.

2012 में लग रहा था कि एयरपोर्ट खोल दिया जाएगा. कार्यक्रम की योजना बना ली गई थी, जिसमें चांसलर एंगेला मर्केल को भी आना था. लेकिन जब एक महीने से भी कम समय रह गया, तब निरीक्षकों ने पाया कि अग्निशमन प्रणाली में खामियां हैं. इससे एयरपोर्ट खोलने का कार्यक्रम 2013 तक टाल दिया गया. पहले धुआं निकलने की प्रणाली में खामी पाई गई. फिर दूसरी बड़ी समस्याएं सामने आने लगीं.

प्रोजेक्ट एक, खामियां अनेक

90 मीटर से ज्यादा लंबे केबल को गलत लगा दिया गया था. 4000 दरवाजों पर गलत नंबर डाल दिए गए थे. एस्केलेटर हुत छोटे थे. चेक-इन डेस्क की इतनी कमी थी कि योजनाकारों ने प्रस्ताव रखा कि कुछ एयरलाइन कंपनियां टर्मिनल के सामने टेंट लगाकर यात्रियों की जांच कर लें. एयरलाइन कंपनियों ने इसका विरोध किया.

जर्मनी की संसदीय हवाई-अड्डा समिति में सोशल डेमोक्रेट्स के प्रवक्ता जोर्ग स्ट्रोएटर ने बीबीसी कैपिटल को बताया कि इस तरह की गलतियों ने और उनको नये सिरे से बनाने की जगह उनको ठीक करने के फ़ैसले ने लागत को आसमान तक पहुंचा दिया.

स्ट्रोएटर के मुताबिक 2012 में जब एयरपोर्ट नहीं खुला तो बिल्डिंग को पूरी तरह गिराकर सभी जटिल सुविधाओं को खत्म करने का फ़ैसला होना चाहिए था.

उन्होंने कहा, "अगर ऐसा हुआ होता तो एयरपोर्ट नई और कम जटिल सुविधाओं के साथ बहुत पहले से संचालित हो रहा होता."

जर्मनी, एयरपोर्ट

इमेज स्रोत, Getty Images

क्या स्ट्रोएटर सही हैं? एक बार जब इतनी सारी समस्याएं दिख गई थीं तो क्या बर्लिन एयरपोर्ट कॉर्पोरेशन को नये सिरे से शुरुआत नहीं करनी चाहिए थी?

यह "डूब लागत भ्रम" का एक अच्छा उदाहरण है. लोग (संगठन) जब किसी चीज में ढेर सारा समय और पैसा लगा चुके होते हैं और उसमें घाटा हो जाए तो वे उसे मानने से हिचकते हैं. तार्किक लगने पर भी वे ऐसा नहीं कर पाते.

ऐसा सिर्फ़ हाई-प्रोफाइल और बड़ी परियोजनाओं में नहीं होता, बल्कि सोचने का यह तरीका रोजमर्रा की ज़िंदगी में भी सामने आ सकता है.

जितनी ज्यादा देर होती गई, निरीक्षकों को उतनी समस्याएं मिलती गईं. जितनी बार तारीख़ आगे बढ़ाई गई, लगभग उतनी ही बार कॉर्पोरेशन के प्रमुख बदल दिए गए. एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के लिए किसी कॉन्ट्रैक्टर को ठेका देना की जगह कॉर्पोरेशन ने इसे ख़ुद ही करने का फ़ैसला किया था.

कॉर्पोरेशन के पास ऐसे काम का अनुभव नहीं था. फ़िडलर कहते हैं कि यह पहली बड़ी गलती थी, जिसका असर आगे चलकर हर जगह दिखा.

उन्होंने कहा, "ऐसे प्रोजेक्ट वे बार-बार नहीं बना रहे थे. इतने जटिल प्रोजेक्ट में उन्होंने कभी काम नहीं किया था. निगरानी करने वाली परिषद में राजनेता भरे थे. वे अपना काम सही से नहीं कर सके."

साख़ पर धब्बा

बंद पड़ा एयरपोर्ट लागत बढ़ा रहा है. कंस्ट्रक्शन कमेटी के प्रमुख एंजेलबर्ट लुटके डैलड्रप ने संसदीय अनुरोध के जवाब में बताया कि बंद एयरपोर्ट के रखरखाव पर हर महीने 90 लाख से लेकर एक करोड़ यूरो लग रहे हैं.

एयरपोर्ट कॉर्पोरेशन के मुताबिक इस खर्च में निर्माण, तकनीकी रखरखाव, सुविधा प्रबंधन और सुरक्षा सेवाएं शामिल हैं. कॉर्पोरेशन की प्रवक्ता कैथरिन वेस्टॉल्टर ने बताया कि निर्माण कार्यक्रम को देखते हुए मुख्य टर्मिनल बिल्डिंग में 300 से 500 लोग नियमित रूप से काम करते हैं.

जिस टर्मिनल में कभी कोई मुसाफ़िर नहीं पहुंचे, वहां की सफ़ाई, रखरखाव, मरम्मत और बिजली का खर्च इतना ज्यादा है कि इस बारे में सुर्खियां भी हास्यास्पद होती हैं.

कुछ और खराबियां

  • इस साल की शुरुआत में उड़ानों की सूचना देने वाले सभी 750 मॉनिटर बदलने पड़े, क्योंकि कई साल के इस्तेमाल से वे खराब हो रहे थे. इसमें 5 लाख यूरो का खर्च आया.
  • 2013 में कंप्यूटर की खराबी के चलते योजनाकार टर्मिनल की बत्तियां नहीं बुझा पा रहे थे.
  • एयरपोर्ट के स्टेशन को हवादार रखने के लिए सप्ताह के कामकाजी दिनों में खाली ट्रेनें दौड़ाई जाती हैं.

वेस्टॉल्टर के मुताबिक जहां भी संभव है लागत को कम रखने की कोशिश की जाती है, लेकिन सुरक्षा कारणों से कुछ खर्च जरूरी हैं. उन्होंने कहा, "हम लागत को कम से कम रखने के प्रति सबसे ज्यादा चिंतित हैं. हम हर मशीन को जितना संभव हो, उतना कम एनर्जी-लेवल पर चलाते हैं."

जर्मनी, एयरपोर्ट

इमेज स्रोत, Getty Images

पुराना गिराओ, नया बनाओ

कई लोगों का सुझाव है कि जर्मनी को इस प्रोजेक्ट को बंद करके नये सिरे से शुरुआत करनी चाहिए. इसी साल लुफ्थांसा के एक एक्जीक्यूटिव ने भविष्यवाणी की थी कि यह एयरपोर्ट कभी चालू ही नहीं हो पाएगा.

लुफ्थांसा के यूरोविंग बजट सब्सिडियरी के प्रमुख थॉर्स्टन डिर्स्क ने कहा था, "मेरी भविष्यवाणी है कि इसे गिरा दिया जाएगा और नया बनाया जाएगा." लगभग उसी समय जर्मन ब्रॉडकास्टर डॉयचे वेले ने ओपेड लिखा जिसमें कहा गया कि 'बर्लिन के आधे बने एयरपोर्ट को गिरा दो और नया बनाओ'.

अगर सब कुछ ठीक रहा तो एयरपोर्ट अब अक्टूबर 2020 में शुरू होगा. एयरपोर्ट कॉर्पोरेशन उसी लागत पर टिका है, जो उसने अक्टूबर 2018 में बताया था. हालांकि वो यह भी मान रहा है कि पावर केबल सिस्टम और सुरक्षा के पावर एंड लाइटिंग सिस्टम में कई तरह की गड़बड़ियां हैं.

एयरपोर्ट खोलने से पहले इसका गहन निरीक्षण भी होना है. इसकी शुरुआत अगले साल से होगी.

डैलड्रप ने बर्लिन की स्थानीय सरकार की एक सुनवाई में कहा, "सभी विशेषज्ञों ने मुझसे कहा है कि ब्रांडनबर्ग एयरपोर्ट में कोई कमी नहीं है. हम इसे ठीक कर लेंगे. मुझे विश्वास है कि यह अक्टूबर 2020 में काम करने लगेगा."

सबसे बड़ी ग़लती

हाल के वर्षों में डेडलाइन और बजट को पार करने वाला यह अकेला इंफ्ऱास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं है.

हैम्बर्ग में कंसर्ट हॉल एल्बफिलहार्मोनी को बनाने में अनुमानित लागत से 70 करोड़ यूरो ज्यादा खर्च हुआ. कंसर्ट हॉल की लागत 7.7 करोड़ यूरो रहने का अनुमान था, जबकि यह 78.9 करोड़ यूरो में बनकर तैयार हुआ.

इसी तरह स्टटगार्ट के नये मुख्य रेलवे स्टेशन की घोषणा 1995 में हुई थी, लेकिन यह 2021 से पहले तैयार नहीं होगा.

विशेषज्ञ कहते हैं कि वीरान पड़ा एयरपोर्ट जर्मनी की साख़ के लिए सबसे बड़ी शर्मिंदगी है. शहर और राज्य के संसाधनों की बर्बादी भी हो रही है.

फ़िडलर कहते हैं, "किसी एक प्रोजेक्ट में इतनी सारी गलतियां होना आसान नहीं है. यह प्रोजेक्ट ही सबसे बड़ी गलती है."

बीबीसी

ये भी पढ़ें:

(यह लेख बीबीसी कैपिटल की कहानी का अक्षरश: अनुवाद नहीं है. हिंदी पाठकों के लिए इसमें कुछ संदर्भ और प्रसंग जोड़े गए हैं. मूल लेख आप यहांपढ़ सकते हैं. बीबीसी कैपिटल के दूसरे लेख आप यहां पढ़ सकते हैं. )

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)