इसलिए लोग कहते हैं देश हो तो सिंगापुर जैसा

सिंगापुर

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    • Author, टिम मैकडोनल्ड
    • पदनाम, बीबीसी कैपिटल

उत्तरी सिंगापुर के ख़ातिब में लगभग 200 वॉलन्टियर एक हाउसिंग एस्टेट में कचरा तलाश रहे थे. उनमें बच्चे सहित कुछ परिवार और एक स्थानीय अस्पताल का व्यक्ति था.

"नॉर्थ वेस्ट ब्रिस्क वॉकिंग क्लब" के कुछ सदस्य भी वहां थे, जो एक जैसी टी-शर्ट पहने हुए थे. उनमें से कई बुज़ुर्ग थे.

कुछ लोगों ने झाड़ियों में सिगरेट के बट खोजे. कुछ ने टेबल के ऊपर छोड़े गए टिशू पेपर उठाए.

ईमानदारी से कहूं तो इसे स्वच्छता दिवस कहना असंगत लग रहा था. सब पहले से ही साफ़ था. किसी भी वॉलन्टियर का बोरा भरकर नहीं आया.

सिंगापुर में इसकी ही उम्मीद की जाती है. इस देश में साफ़-सफ़ाई को लेकर लंबे समय से जुनून रहा है.

अक्टूबर 2018 में सिंगापुर ने मील का पत्थर पार किया. इसके संस्थापक और पहले प्रधानमंत्री ली कुआन यू ने 50 साल पहले इसी महीने "कीप सिंगापुर क्लीन कैंपेन" शुरू किया था.

सिंगापुर में सफ़ाई अभियान पहले से ही चल रहा था, लेकिन ली का कैंपेन अलग था. इसमें सिंगापुर सरकार ने पहली बार सामाजिक नियंत्रण के तरीक़े के रूप में जुर्माने का प्रयोग किया.

सिंगापुर की आर्थिक तरक़्क़ी को इस कैंपेन की शुरुआती सफलता में रोड़ा समझा गया. किसी भी पैमाने पर सिंगापुर आज साफ़ है, लेकिन उन वजहों से नहीं जो आपके ज़हन में आती हैं.

ली कुआन यू

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साफ़ और हराभरा

यदि आप सिंगापुर में कचरे से भरे किसी ट्रक के पीछे-पीछे चलें तो आप तुरंत समझ जाएंगे कि इस शहर को लगातार क्यों साफ़ किया जाता है. कचरा गाड़ी की गंध आपको झटका लगाती है.

ठंडे जलवायु वाले शहरों में घरों का कचरा उठाने में थोड़ा अंतराल भी हो जाए तो चल जाता है. गर्म, आर्द्र, ऊष्णकटिबंधीय शहरों में तुरंत सफ़ाई करनी पड़ती है. घरेलू और व्यावसायिक कचरे का जमा होना बहुत ही ख़तरनाक हो सकता है.

पब्लिक हाइज़ीन काउंसिल के चेयरमैन एडवर्ड डिसिल्वा कहते हैं, "दूसरे देशों की तरह यहां कूड़े कर्कट का ढेर हो तो चूहे, मक्खियां और तिलचट्टे पैदा हो सकते हैं. ये सब बैक्टीरिया और रोगाणुओं के वाहक हैं."

मच्छरों का ख़तरा इनसे भी बड़ा है. सिंगापुर में मलेरिया नहीं होता, लेकिन बुरे साल में डेंगू के दसियों हज़ार मामले होंगे.

गंदगी से सफ़ाई की ओर

ली कुआन यू ने जब क्लीन एंड ग्रीन पॉलिसी लागू की तब उनके लक्ष्य बड़े थे.

यह उस बड़ी योजना का हिस्सा था जिसमें स्वास्थ्य क़ानूनों में परिवर्तन, रेहड़ पट्टी के दुकानदारों का हॉकर केंद्रों में स्थानांतरण, सीवेज़ सिस्टम का विकास और बीमारियों के नियंत्रण के उपाय शामिल थे.

इसी समय लोग कैम्पॉन्ग (लकड़ी की झोपड़ियों वाले मलय-शैली के गांव) से निकलकर बेहतर बुनियादी सुविधाओं वाले हाउसिंग एस्टेट में रहने लगे.

1968 में ली ने कहा था, "हमने निर्माण किया है, हमने प्रगति की है. लेकिन दक्षिण एशिया के सबसे साफ़ और हरित शहर के रूप में हमारी पोज़िशन से बढ़कर इस सफलता का कोई दूसरा हॉलमार्क नहीं है."

विज्ञापनों के अलावा सार्वजनिक शिक्षा के आयोजन कराए जाते थे. स्वास्थ्य अधिकारियों के व्याख्यान होते थे और सरकार मौक़े पर मुआयना करती थी.

ऐसी प्रतियोगिताएं भी थीं जिनमें सबसे साफ़ और सबसे गंदे दफ्तरों, दुकानों, फ़ैक्टरियों, सरकारी इमारतों, स्कूलों और सार्वजनिक वाहनों की पहचान होती थी.

सिंगापुर

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इस कैंपेन के बाद दूसरे कई कैंपेन चलाए गए. 1970 और 1980 के दशक के अभियानों मे सिंगापुर के लोगों से टॉइलेट, फैक्टरियां और बस स्टॉप साफ़ रखने का आग्रह किया गया.

1976 में यूज़ योर हैंड्स कैंपेन चला जिसमें छात्र, अभिभावक, शिक्षक, प्रिंसिपल और सरकारी कर्मचारी मिलकर वीकेंड पर स्कूल की सफाई करते थे. पेड़ लगाने की भी कई पहल हुई.

ली का उद्देश्य शहर को सिर्फ़ ख़ुशनुमा बनाना नहीं था. वो कहते थे कि स्वच्छ शहर मज़बूत अर्थव्यवस्था का निर्माण करेगा.

ली ने कहा था, "ये मानदंड मनोबल ऊंचा रखेंगे, बीमारियां घटाएंगे और इस तरह उद्योगों और पर्यटन में उच्च आर्थिक विकास के लिए ज़रूरी सामाजिक माहौल बनाएंगे. यह लोगों के लिए अच्छा होगा और अंत में सबको निजी लाभ भी होगा."

इन सभी कसौटियों पर सिंगापुर ने अच्छा प्रदर्शन किया है. लोगों की औसत उम्र 66 साल से बढ़कर 83 साल हो गई, जो दुनिया में सबसे ज़्यादा है.

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1967 में यहां आने वाले पर्यटकों की तादाद दो लाख से बस थोड़ी सी ज़्यादा थी जो 2018 की पहली तीन तिमाहियों में एक करोड़ के करीब तक पहुंच गई है.

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 1970 में 9.30 करोड़ अमरीकी डॉलर से बढ़कर 2010 में 39 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया.

2017 में सिंगापुर में 66 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया, जो दुनिया में पांचवे नंबर पर है.

कोई भी यह दावा नहीं करता कि यह सब एक अभियान से हुआ. लेकिन इसके स्वास्थ्य लाभों को समझा जा सकता है.

पर्यटक साफ़-सुथरी जगह पर लौटकर आना पसंद करते हैं. स्वच्छ गलियां विदेशी अधिकारियों को संकेत देती हैं कि यह शहर क़ानून का पालन कराने में सक्षम है.

सरकार के बजट में स्वच्छता अभियानों पर बहुत ज़्यादा खर्च नहीं है. उदाहरण के लिए, 2010 से 2014 के बीच सिंगापुर की राष्ट्रीय पर्यावरण एजेंसी ने गंदगी विरोधी अभियानों पर औसतन 30 लाख डॉलर प्रति वर्ष खर्च किए.

स्मार्ट बिन

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बढ़िया शहर

सिंगापुर में डिस्काउंट वाली दुकानों पर अक्सर टी-शर्ट टंगे होते हैं जिन पर लिखा होता हैः "सिंगापुरः एक बढ़िया शहर". इसके नीचे वे चीज़ें लिखी होती हैं, जिनके लिए जुर्माना लग सकता है.

यहां एक पुराना चुटकुला है कि सिंगापुर के लोगों को हंसने से ज्यादा आंखें घुमाना पसंद है. यह ग़लत नहीं है. सिंगापुर को अवांछित हरकतों पर पाबंदी लगाने की आदत है और हर पाबंदी को जुर्माने से जोड़ा जाता है.

1968 के कीप सिंगापुर कैंपेन में पहली बार नागरिकों के व्यवहार को जुर्माने से बदलने की कोशिश की गई थी. तब से इस शहर ने इसे ख़ुशी-ख़ुशी अपना लिया है.

अधिकारी गंदगी फैलाने के लिए हर साल दसियों हज़ार जुर्माना जारी करते हैं. कम से कम जुर्माना 300 सिंगापुर डॉलर (करीब 217 अमरीकी डॉलर) का है.

सिंगापुर को दाग़ रहित बनाने की कोशिश ली कुआन यू के समय शुरू हुई थी. वे व्यक्तिगत रूप से दख़ल देते थे. कुछ ग़लत दिखने पर वे मंत्रियों या अधिकारियों को नोट्स भेजते थे.

ली मानते थे कि छोटी बातें भी मायने रखती हैं और अगर मामूली ग़लतियों को नज़रअंदाज़ किया गया तो स्थिति पर प्रशासन का नियंत्रण ढीला होगा और लोग इसका फ़ायदा उठाएंगे.

सिंगापुर के क़ानून विदेशियों के लिए बहुत सख़्त लगते हैं. इसने च्युइंगम के आयात पर पाबंदी लगा दी थी (च्युइंगम रखना प्रतिबंधित नहीं है). डूरियन (तीखे गंध वाला उष्णकटिबंधीय फल) को लेकर ट्रेन में सफ़र करने पर और पब्लिक टॉइलेट में फ्लश ना करने पर भी जुर्माना है. हालांकि अब ज़्यादातर टॉइलेट्स में ऑटो फ्लश लगा दिए गए हैं.

थूकने और बिना इजाज़त किसी के वाई-फाई का इस्तेमाल करने पर भी जुर्माना है. 2009 में एक टैक्सी ड्राइवर पर अपने घर में सबके सामने कपड़े उतारने पर जुर्माना लगाया गया था. ई-सिगरेट सुलगाने पर पहले से जुर्माना है.

नागरिक और राजनीतिक अधिकारों के मामले में पश्चिमी देश अलग हैं. वहां दंड कठोर हैं और ड्रग्स से जुड़े अपराधों में मौत की सज़ा भी दी जाती है. लेकिन छोटे अपराधों को कम करने के लिए जुर्माना लगाने वाला सिंगापुर शायद अकेला देश है.

ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में पिछले वित्तीय वर्ष में पार्किंग फ़ाइन के रूप में 17.2 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (12.1 करोड़ अमरीकी डॉलर) वसूले गए थे. ब्रिटेन में इसी अवधि में 82 करोड़ पाउंड का जुर्माना वसूला गया.

सिंगापुर

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सिंगापुर में पार्किंग की समस्या कम है, क्योंकि यहां कार के स्वामित्व को सीमित रखने वाली नीतियां बनाई गई हैं.

व्यापक दृष्टिकोण में पश्चिम से समानताएं हैं. जॉर्ज केलिंग और जेम्स क्यू विल्सन ने 1982 में मशहूर निबंध "ब्रोकेन विंडोज़" (Broken Windows) लिखा था. इसमें कहा गया था कि टूटी खिड़कियां संकेत देती हैं कि किसी को परवाह नहीं है, इसलिए कुछ और खिड़कियों को तोड़ देने से कोई नुकसान नहीं होगा.

उपाय यह बताया गया था कि इससे पहले कि छोटे अपराध बड़ी समस्या बन जाएं, उनसे आक्रामक तरीक़े से निपटा जाए.

न्यूयॉर्क के पूर्व मेयर रूडी गुलियानी ने इसी एप्रोच से अपराध पर नियंत्रण किया था. सिंगापुर में यही एप्रोच परिचित लगता है.

जुर्माना कितना कारगर?

राष्ट्रीय पर्यावरण एजेंसी के अध्यक्ष लियाक तेंग लित के मुताबिक़ इस नीति ने काम किया.

जन जागरूकता अभियान के साथ दंडात्मक उपायों से परिवर्तन आया. लोग अपनी गंदगी ख़ुद ही साफ़ करने लगे. शहर साफ़ बन गया.

1961 में सिंगापुर के ब्रूम ब्रिगेड में 7000 दिहाड़ी मज़दूर थे. इनको सीधे स्वास्थ्य विभाग ने नियुक्त किया था. 1989 आते-आते वे सिर्फ़ 2100 रह गए.

तस्वीर बदल चुकी है. शहर अब पहले से ज़्यादा संपन्न है. कम पगार वाले मज़दूरों से सफ़ाई कराना ज़्यादा आसान है.

लियाक कहते हैं कि सिंगापुर इसलिए साफ़ नहीं है कि स्थानीय लोगों को जुर्माने से डर लगता है, बल्कि यह इसलिए साफ़-सुथरा है, क्योंकि सफ़ाई कर्मचारियों की फ़ौज़ इसे चमकाती रहती है. वही सिंगापुर को साफ़ रखते हैं.

लियाक कहते हैं, "सिंगापुर साफ़ शहर नहीं है. इसे साफ़ किया गया है."

राष्ट्रीय पर्यावरण एजेंसी में 56 हजार सफ़ाईकर्मी रजिस्टर्ड हैं. हज़ारों स्वतंत्र सफ़ाईकर्मी भी हैं जो रजिस्टर्ड नहीं हैं. इनमें से ज़्यादातर कम मज़दूरी पाने वाले विदेशी मज़दूर हैं या बुज़ुर्ग हैं. इसके मुक़ाबले ताईपेई में करीब 5000 सफ़ाईकर्मी ही हैं.

सफ़ाईकर्मियों की यह सेना सिंगापुर की संस्कृति को जिस तरह बदल रही है उससे एडवर्ड डिसिल्वा निराश भी हैं. इतने सफ़ाईकर्मी होने पर सिंगापुर के लोगों को लगने लगा है कि सफ़ाई किसी और का काम है.

सफ़ाईकर्मी

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आज सिंगापुर के लोग अक्सर खाना खाने के बाद अपनी थाली टेबल पर ही छोड़ देते हैं, क्योंकि वे इसे गंदगी फैलाना नहीं समझते या इसे सफ़ाईकर्मियों का काम समझते हैं.

डिसिल्वा कहते हैं कि छात्र अपना कचरा खुद नहीं उठाते, क्योंकि यह काम करने के लिए एक सफ़ाईकर्मी हमेशा मौजूद रहता है.

पब्लिक हाइज़ीन काउंसिल इस समस्या को स्थानीय स्कूलों में सुलझाने की कोशिश कर रही है.

डिसिल्वा की चिंता से लियाक भी सहमत हैं. वो कहते हैं, "सरकार आपके अपार्टमेंट को साफ़ करती है. आपके कॉरीडोर तक दिन में दो बार सफ़ाई होती है. अगर सफ़ाई सेवा इतनी अच्छी हो और आपका पड़ोसी वहां गंदगी फैलाए तो आप पड़ोसी को दोष नहीं देते, आप सफ़ाईकर्मी को दोष देते हैं."

व्यवहार में बदलाव

जापान, ऑस्ट्रेलिया या ब्रिटेन में इतने सस्ते सफ़ाईकर्मी उपलब्ध नहीं हैं. सिंगापुर में क़रीब 10 लाख विदेशी मजदूर हैं. उनके साथ स्थानीय बूढ़े मजदूर भी हैं. सफ़ाईकर्मियों को इन्हीं में से चुना जाता है.

लेकिन जैसै-जैसे आबादी बढ़ रही है और श्रम महंगा हो रहा है, इतने सारे सफ़ाईकर्मियों को काम पर लगाना महंगा होता जाएगा.

सफ़ाईकर्मी

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डिसिल्वा का कहना है कि सिंगापुर को साफ़-सुथरा बनाने का फ़ैसला मूल रूप से आर्थिक था. सार्वजनिक जगहों को साफ़ करना महंगा है. यह दूसरी आवश्यक गतिविधियों से पैसे खींचती है. सिंगापुर को अपना व्यवहार बदलना होगा.

सार्वजनिक स्थानों की सफ़ाई में सिंगापुर हर साल कम से कम 12 करोड़ सिंगापुर डॉलर (8.7 करोड़ अमरीकी डॉलर) खर्च करता है.

डिसिल्वा कहते हैं, "अगर आप लोगों में ऐसी आदत डालने में सफल हो गए कि वे कहीं भी अपना कचरा ना फेंक दें तो जो पैसा आप सफ़ाईकर्मियों पर खर्च करते हैं, उसके लाखों डॉलर स्वास्थ्य और शिक्षा को बेहतर करने में लगाए जा सकते हैं."

सफ़ाई अभियान

ली बी वाह स्थानीय सांसद हैं जो नी सून का प्रतिनिधित्व करती हैं. खातिब में सफ़ाई दिवस के मौक़े पर वह मौजूद हैं. वास्तव में, वो हर महीने कम से कम एक बार सफ़ाई अभियान में शामिल होती हैं. सफ़ाई के प्रति उनमें एक जुनून है.

स्थानीय सांसद

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इमेज कैप्शन, सांसद और अधिकारी भी सफ़ाई अभियानों में हिस्सा लेते हैं

ली न सिर्फ़ अपने क्षेत्र के लोगों को अपना कचरा ख़ुद साफ़ करने के लिए प्रेरित करती हैं, बल्कि किसी और के गंदगी फैलाने पर अधिकारियों को सूचित करने के लिए भी कहती हैं.

ली के मुताबिक नागरिक शिक्षा उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि जुर्माना. असल में, जुर्माना लगाना मुश्किल होता है क्योंकि इसके लिए एक अधिकारी और कम से एक नागरिक की मौजूदगी होनी चाहिए जो अपराध का गवाह हो.

ली कहती हैं, "उनको अभियान में शामिल होने के लिए राज़ी करना उन पर जुर्माना लगाने से बेहतर है."

ली के संसदीय क्षेत्र में साल में एक बार सफ़ाईकर्मी रहित दिवस होता है. उस दिन जिले के सभी सफ़ाईकर्मी अपनी झाड़ू रख देते हैं और स्थानीय नागरिक सफ़ाई करते हैं.

ली के मुताबिक यह एक उदाहरण है कि किस तरह समुदाय अच्छे के लिए बदलता है.

2013 में जब पहली बार यह कार्यक्रम हुआ था तब वॉलन्टियर्स ने 1430 किलो कचरा निकाला था. इस साल केवल 292 किलो कचरा जमा हुआ.

ली के मुताबिक यदि सिंगापुर में बहुत ज्यादा सफ़ाईकर्मी हो गए हैं और लोग अपना कचरा ख़ुद नहीं उठा रहे तो उनका क्षेत्र यह साबित करता है कि सुधार संभव है.

(मूल लेख अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैपिटल पर उपलब्ध है.)

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