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सोमवार, 16 जुलाई, 2007 को 13:15 GMT तक के समाचार
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क्या दमख़म दिखाएँगे दादा?

सौरभ गांगुली
भारत के सबसे सफल कप्तान रहे हैं सौरभ गांगुली
दो साल पहले जब सौरभ गांगुली को टीम से बाहर किया गया था, तो उस समय ऐसा लगा था कि उनका अंतरराष्ट्रीय करियर ख़त्म हो गया है. उस समय टीम के कोच रहे ग्रेग चैपल के साथ उनके विवाद ने काफ़ी सुर्ख़ियाँ बटोरी थी.

लेकिन गुरुवार को जब सौरभ गांगुली लॉर्ड्स में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पहले टेस्ट में उतरेंगे, तो ये दास्तां होगी एक क्रिकेट खिलाड़ी की शानदार वापसी की.

11 साल पहले क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले इसी मैदान पर सौरभ चंडीदास गांगुली ने अपना पहला टेस्ट मैच खेला था और पहले टेस्ट में ही शतक लगाकर ज़बरदस्त शुरुआत की थी.

हालाँकि उसके बाद से उनके क्रिकेट जीवन में काफ़ी उतार-चढ़ाव आ चुका है. किसी भी भारतीय क्रिकेटर से अलग सौरभ गांगुली का करियर हमेशा से मीडिया में चर्चा का विषय रहा है.

सौरभ गांगुली: टेस्ट रिकॉर्ड
जन्म: आठ जुलाई, 1972 (कोलकाता)
टेस्ट मैच: 93
टेस्ट रन: 5,563 ( औसत: 40.90)
शतक/अर्धशतक: 13/27
सर्वाधिक टेस्ट स्कोर: 173
टेस्ट विकेट: 26

सबसे ज़्यादा टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी करने वाले सौरभ गांगुली ने 49 टेस्ट मैचों में से भारत को 21 में जीत दिलाई. लेकिन भारत को शानदार सफलताएँ दिलाने वाले सौरभ गांगुली आजकल भारतीय टीम में एक सामान्य खिलाड़ी की तरह हैं.

कभी-कभार ही उनको कप्तान राहुल द्रविड़ को सलाह देते देखा गया है, वो भी शायद मांगे जाने पर. वर्ष 2005 में ग्रेग चैपल का वह विवादित ई-मेल मीडिया में लीक हुआ था, जिसमें उन्होंने एक खिलाड़ी और कप्तान के रूप में सौरभ गांगुली की क्षमता पर सवाल उठाए थे.

गांगुली की कप्तानी गई और फिर टीम से भी उनका पत्ता साफ़ हो गया हालाँकि ग्रेग चैपल ने स्पष्ट किया था कि मीडिया ने उनके मतभेद को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के चंद्रेश नारायणन कहते हैं, "ग्रेग चैपल के साथ विवाद के कारण सौरभ गांगुली की मुश्किलें और बढ़ीं. दरअसल उस समय वे ख़राब दौर से भी गुज़र रहे थे. ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ उन्होंने ज़रूर शतक लगाया था लेकिन उसकी कोई ख़ास गिनती नहीं हुई."

गांगुली के क्रिकेट करियर पर गहराई से नज़र रखने वाले चंद्रेश नारायणन मानते हैं कि कभी-कभी गांगुली के ढीले-ढाले रवैए के कारण भी उनका नुक़सान हुआ.

 ग्रेग चैपल के साथ विवाद के कारण सौरभ गांगुली की मुश्किलें और बढ़ीं. दरअसल उस समय वे ख़राब दौर से भी गुज़र रहे थे. ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ उन्होंने ज़रूर शतक लगाया था लेकिन उसकी कोई ख़ास गिनती नहीं हुई
चंद्रेश नारायणन, टाइम्स ऑफ़ इंडिया

लेकिन सच ये भी है कि क्रिकेट को लेकर गांगुली की सोच अच्छी रही है. नारायणन कहते हैं, "वर्ष 1991-92 में गांगुली सिर्फ़ 18 साल के थे लेकिन उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई टीम का बुरा हाल किया था. लेकिन उस समय भी गांगुली की छवि एक अहंकारी की हो गई थी. कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कहा कि उन्होंने मैदान पर खिलाड़ियों के लिए ड्रिंक्स ले जाने से मना कर दिया. उनका कहना था कि ये उनका काम नहीं है."

इस कारण सौरभ गांगुली को चार साल तक टीम से बाहर रहना पड़ा. वर्ष 1996 में जब उन्हें भारतीय टीम में फिर से जगह मिली तो मीडिया में ये चर्चा ज़ोर पर थी कि जगमोहन डालमिया के प्रभाव के कारण उन्हें मौक़ा मिला है.

लेकिन गांगुली ने सबको ग़लत साबित कर दिया. नारायणन कहते हैं कि लॉर्ड्स और फिर ट्रेंट ब्रिज में शतक लगाकर गांगुली एकाएक सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी के साथ आ गए.

अगले नौ साल तक गांगुली हमेशा टीम के साथ मौजूद रहे और भारत के सबसे सफल कप्तान भी बने. चंद्रेश नारायणन के मुताबिक़ गांगुली ने टीम को मज़बूत बनाया.

लेकिन वर्ष 2005 के शुरू में पाकिस्तान के साथ ड्रॉ टेस्ट सिरीज़ के बाद गांगुली पर सवाल उठने लगे. गांगुली ने उस सिरीज़ में सिर्फ़ 48 रन बनाए. ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ सिरीज़ के बाद तो गांगुली विवादों में ही आ गए और फिर कप्तानी द्रविड़ को मिल गई.

गांगुली के पहले टेस्ट शतक पर ताली बजाते राहुल द्रविड़

ऐसी स्थिति में गांगुली चाहते तो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अपना बोरिया-बिस्तर समेट सकते थे. लेकिन उन्होंने दूसरा तरीक़ा अपनाया- संघर्ष करने का. उन्होंने टीम में वापसी के लिए ज़ोर लगाना शुरू किया.

सुरेश रैना जैसे युवा खिलाड़ियों की नाकामी का भी गांगुली को फ़ायदा मिला. वर्ष 2006 में गांगुली को टीम में वापसी करने का मौक़ा मिला और वो भी 41 एक दिवसीय मैच और सात टेस्ट मैचों के बाद.

नारायणन बताते हैं, "भारतीय टीम उस समय बुरे दौर से गुज़र रही था. सौरभ को बुलाया गया और उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित भी की."

वापसी के बाद दक्षिण अफ़्रीका के ख़िलाफ़ टेस्ट मैच में गांगुली ने अर्धशतक लगाया. उसी सिरीज़ में गांगुली ने एक और अर्धशतक लगाया और फिर बांग्लादेश के ख़िलाफ़ शतक लगाकर अपनी वापसी का जश्न मनाया.

विश्व कप की नाकामी के बाद ग्रेग चैपल भी अब भारतीय टीम से अलग हो चुके हैं और एक बार फिर लॉर्ड्स में लौटे हैं सौरभ गांगुली.

अगर एक बार फिर सौरभ गांगुली लॉर्ड्स में शतक लगाते हैं, तो सबसे ज़्यादा ख़ुश होंगे कप्तान राहुल द्रविड़, जिन्होंने 11 साल पहले गांगुली के साथ ही अपना पहला टेस्ट मैच खेला था.

नारायणन मानते हैं कि गांगुली और द्रविड़ ने मिलकर भारतीय क्रिकेट का चेहरा बदला है. अब देखना है कि लॉर्ड्स में गांगुली क्या कुछ कर दिखाते हैं.

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