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सोमवार, 30 अप्रैल, 2007 को 06:26 GMT तक के समाचार
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गांगुली को बीसीसीआई की क्लीनचिट
सौरव गांगुली
बांग्लादेश के ख़िलाफ़ हुए मैच में सौरव गांगुली बहुत धीमे खेले थे
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने पूर्व भारतीय कप्तान को इन आरोपों से मुक्त कर दिया है कि वे किसी कंपनी के विज्ञापन अनुबंध के तहत धीमा खेल रहे थे.

हालाँकि सौरव गांगुली पर किसी ने खुले रुप से यह आरोप नहीं लगाया था लेकिन मीडिया में अज्ञात सूत्रों के हवाले से छपी ख़बरों के बाद इस मामले की जाँच की गई.

ख़बर है कि सौरव गांगुली ने ख़ुद ही बीसीसीआई के सामने यह प्रस्ताव रखा था कि उनके विज्ञापन अनुबंधों की जाँच कर ली जाए.

बीसीसीआई के अधिकारी राजीव शुक्ला ने बीबीसी से कहा, "आरोप आधारहीन पाए गए हैं और उनके अनुबंध में ऐसी कोई शर्त नहीं है."

उल्लेखनीय है कि विश्वकप से भारत के बाहर हो जाने के बाद से बीसीसीआई और खिलाड़ियों के बीच विज्ञापनों और अनुबंधों को लेकर विवाद चल रहा है.

सौरव गांगुली ने बांग्लादेश के ख़िलाफ़ मैच में 129 गेंदों में 66 रन बनाए थे जिसमें सिर्फ़ पाँच चौके शामिल थे. इसके बाद से गांगुली के धीमे खेल पर उँगलियाँ उठाई जा रही हैं.

भारत यह मैच बांग्लादेश के हाथों हार गया था.

शंका और आरोप

इस मामले की शुरुआत तब हुई जब भारत के एक टेलीविज़न कंपनी को दिए गए साक्षात्कार में बीसीसीआई के अध्यक्ष शरद पवार ने आशंका जताई थी कि विज्ञापन कंपनियों के करार के कारण खेल पर असर पड़ रहा है.

उन्होंने कहा था कि एक ही कंपनी के साथ कई खिलाड़ियों का अनुबंध होने से चयनकर्ताओं पर दबाव होने की आशंका बनी रहती है.

हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया था.

लेकिन इसके बाद मीडिया में ख़बरें प्रकाशित हुई थीं कि सौरव गांगुली विश्वकप में इसलिए धीमा खेल रहे थे क्योंकि उनकी एक कंपनी के साथ करार में लिखा हुआ है कि वे जितनी देर क्रीज़ पर रहेंगे, उन्हें उतना अधिक भुगतान किया जाएगा.

इस कंपनी का नाम प्यूमा बताया गया था, जो खेल सामग्री बनाती है.

राजीव शुक्ला ने बीबीसी को बताया कि बीसीसीआई अध्यक्ष के निर्देश पर उन्होंने सौरव गांगुली के विज्ञापन अनुबंध को पूरी तरह पढ़ा है और इसमें ऐसी कोई शर्त नहीं है, जैसा कि आरोप लगाया गया था.

राजीव शुक्ला ने कहा कि उन्होंने बीसीसीआई अध्यक्ष को इसकी सूचना दे दी है.

उन्होंने इस बात से इनकार किया कि बीसीसीआई अध्यक्ष पवार ने कभी किसी खिलाड़ी या कंपनी का नाम लिया था.

एक कंपनी के साथ कई खिलाड़ियों के अनुबंध के बाद उनको टीम में रखे जाने के दबाव के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसा कोई दबाव था नहीं लेकिन बीसीसीआई अध्यक्ष ने इसकी आशंका ही जताई थी.

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