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विज्ञापन मसले पर क्रिकेटरों को राहत! | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व कप में भारतीय टीम के ख़राब प्रदर्शन के बाद कई कड़े फ़ैसले लेने वाले बीसीसीआई के तेवर खिलाड़ियों के विज्ञापन मसले पर कुछ नरम नज़र आने लगे हैं. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने रविवार को कहा कि खिलाड़ियों को तीन से ज़्यादा विज्ञापन करने की अनुमति के मसले पर अध्यक्ष शरद पवार खिलाड़ियों से बातचीत करने के लिए तैयार हैं. इससे पूर्व, बीसीसीआई ने कहा था कि खिलाड़ी एक साल में अधिकतम तीन विज्ञापन कर सकते हैं और इसके लिए भी उन्हें पहले बोर्ड से अनुमति लेनी होगी. शुक्ला ने कहा कि बीसीसीआई की कार्यसमिति ने शरद पवार को विज्ञापन मसले पर खिलाड़ियों से बातचीत के लिए अधिकृत किया है. बोर्ड के उच्च सूत्रों के अनुसार पूर्व कप्तान कपिल देव की सलाह पर विज्ञापनों की संख्या तीन से बढ़ाकर पाँच की जा सकती है. शुक्ला ने कहा, "ऐसा नहीं है कि सब फ़ैसलों पर अंतिम मुहर लग गई है. बोर्ड का इरादा खिलाड़ियों को नुकसान पहुँचाने का नहीं है, लेकिन देश में इस मसले पर आम प्रतिक्रिया को देखते हुए कुछ प्रतिबंध लगाया जाना ज़रूरी था." विरोध राजीव शुक्ला भले ही मानते हों कि विज्ञापन मसले पर कुछ भी अंतिम नहीं हुआ है और इस फ़ैसले पर पुनर्विचार हो सकता है. लेकिन बीसीसीआई के एक और उपाध्यक्ष शशांक मनोहर का कहना है कि इस मसले पर बोर्ड पर न तो खिलाड़ियों के एजेंटों का दबाव है और न ही किसी तरह की क़ानूनी कार्रवाई की धमकी मिली है. मनोहर ने कहा, "मैं नहीं समझता कि विज्ञापन नीति पर किसी तरह के पुनर्विचार की ज़रूरत है. नियम और शर्तें तय कर दी गई हैं. खिलाड़ी इसे मानें या फिर न माने. ये बीसीसीआई का सिरदर्द नहीं है." यह पूछे जाने पर कि क्या ग्रेडिंग संबंधी अनुबंध को फिर से बहाल किया जा सकता है, उन्होंने कहा, "नहीं, ऐसा नहीं होगा." स्वस्थ चर्चा इस बीच, कप्तान राहुल द्रविड़ ने एक बयान जारी कर कहा है कि 'विवादित' मसलों पर बोर्ड और खिलाड़ियों के बीच स्वस्थ चर्चा की ज़रूरत है. द्रविड़ ने कहा कि ऐसा पैकेज़ तैयार किया जा सकता है जो खिलाड़ियों के हितों के साथ-साथ बोर्ड को भी मंजूर हो. उन्होंने कहा, "बोर्ड और खिलाड़ियों के हित एक-दूसरे से जुड़े हैं, अलग-अलग नहीं है. बोर्ड को हमेशा से ही खिलाड़ियों के हितों की परवाह रही है और मुझे यकीन है कि बोर्ड वक्त आने पर इस मसले पर खिलाड़ियों से चर्चा करेगा." कप्तान ने इस बात से इनकार किया कि विज्ञापन और अनुबंध मसले पर खिलाड़ियों और बोर्ड के बीच टकराव है. उन्होंने कहा, "इस पूरे मसले को खिलाड़ियों और बोर्ड के व्यावसायिक हितों की लड़ाई के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए. मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि बोर्ड और खिलाड़ियों के बीच किसी तरह का झगड़ा नहीं है." उन्होंने मीडिया और प्रशंसकों से इस पूरे मसले पर संयम बरतने का आग्रह किया. द्रविड़ ने कहा, "मैने इस मुद्दे पर रवि शास्त्री और कई खिलाड़ियों से बात की है और सबका ये मानना है कि बोर्ड के साथ स्वस्थ विचार विमर्श से सभी मसलों का समाधान हो सकता है." | इससे जुड़ी ख़बरें शास्त्री ने मैनेजर का पद स्वीकार किया07 अप्रैल, 2007 | खेल बीसीसीआई की बैठक का पूरा वक्तव्य07 अप्रैल, 2007 | खेल कड़े फ़ैसले, लेकिन द्रविड़ की कप्तानी बची07 अप्रैल, 2007 | खेल रवि शास्त्री संभाल सकते हैं ज़िम्मेदारी06 अप्रैल, 2007 | खेल कोच के सवाल उठाने से ठेस पहुँची: सचिन04 अप्रैल, 2007 | खेल भारतीय कोच ग्रेग चैपल ने इस्तीफ़ा दिया04 अप्रैल, 2007 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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