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बुधवार, 04 अप्रैल, 2007 को 03:51 GMT तक के समाचार
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कोच के सवाल उठाने से ठेस पहुँची: सचिन
सचिन तेंदुलकर
सचिन तेंदुलकर ने कहा है कि खिलाड़ियों के रवैये पर सवाल उठाने से ठेस पहुँची है
विश्व कप में हार के बाद उठे विवाद के बाद मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए अंग्रेज़ी दैनिक टाइम्स ऑफ़ इंडिया से विशेष बातचीत में कोच ग्रेग चैपल पर सवाल उठाए हैं.

उधर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सचिव निरंजन शाह ने समाचार माध्यमों से कहा कि खिलाड़ियों या फिर कोच को मीडिया से बात करने या ऐसी बयानबाज़ी से बचना चाहिए.

उनका कहना था कि ख़िलाड़ी या कोच बोर्ड के सामने अपनी बात रख सकते हैं और भारतीय क्रिकेट टीम के विश्व कप में प्रदर्शन और इससे जुड़े मुद्दों के बारे में छह और सात अप्रैल को बोर्ड की बैठक में चर्चा होगी.

इससे पहले सचिन तेंदुलकर ने कहा,'' मुझे बताएँ, पूरी दुनिया इस बारे में (हार और सुपर आठ से बाहर होने) बात कर रही है. लेकिन किसी ने हमारे बारे में नहीं सोचा. क्या उन्होंने इस बात का पता लगाने की सोची कि हमारे ऊपर क्या गुज़र रही है?''

उन्होंने कहा,'' मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता कि मैं कितना असहाय महसूस कर रहा हूँ. मुझे अपने कैरियर में कभी इतना बुरा नहीं लगा.''

 ऐसा नहीं है कि हम अपना बचाव कर रहे हैं. हम महसूस करते हैं कि हम टीम के रूप में ख़राब खेले और हम इसकी पूरी ज़िम्मेदारी लेते हैं. लेकिन सबसे ज्यादा तकलीफ़ तब होती है जब कोच हमारे रवैये पर सवाल उठाता है
सचिन तेंदुलकर

उनका कहना था,'' आपने कितने भी टेस्ट अथवा वनडे जीते हों लेकिन विश्व कप में जीत की बराबरी कोई नहीं कर सकता है. विश्व कप हमारा जुनून था, हमारा सामूहिक लक्ष्य था, हमारा ख्वाब था जो बिखर गया. और हम सभी लोग इससे निराश हैं.''

तेंदुलकर ने कहा,'' ऐसा नहीं है कि हम अपना बचाव कर रहे हैं. हम महसूस करते हैं कि हम टीम के रूप में ख़राब खेले और हम इसकी पूरी ज़िम्मेदारी लेते हैं. लेकिन सबसे ज्यादा तकलीफ़ तब होती है जब कोच हमारे रवैये पर सवाल उठाता है.''

सचिन का कहना था, ''मैंने 17 साल जी जान से खेला. किसी कोच ने कभी नहीं कहा कि मेरा रवैया सही नहीं था. इन वर्षों में क्रिकेट मेरी ज़िंदगी रहा है और हमेशा रहेगा.''

संन्यास पर बहस

दूसरी ओर सचिन तेंदुलकर को क्रिकेट खेलते रहना चाहिए या संन्यास ले लेना चाहिए इस पर ज़ोरदार बहस जारी है.

 आपने कितने भी टेस्ट अथवा वनडे जीते हों लेकिन विश्न कप में जीत की बराबरी कोई नहीं कर सकता है. विश्व कप हमारा जुनून था, हमारा सामूहिक लक्ष्य था, हमारा ख्वाब था जो बिखर गया. और हम सभी लोग इससे निराश हैं
सचिन तेंदुलकर

कुछ दिनों पहले भारतीय कोच ग्रेग चैपल के भाई इयन चैपल ने कहा था कि सचिन तेंदुलकर को अपना कैरियर किसी तरह बनाने की कोशिश करने के बदले संन्यास ले लेना चाहिए.

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल एथर्टन ने तो यहाँ तक कह दिया है कि "सचिन अब हीरो नहीं बल्कि कॉमिक हीरो हैं."

एथर्टन का कहना है कि सचिन की बल्लेबाज़ी अब ढलान पर है इसलिए उन्हें संन्यास ले लेना चाहिए.

इधर भारतीय टीम के पूर्व कप्तान कृष्णमचारी श्रीकांत का कहना है कि सचिन को अभी कुछेक साल तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलना चाहिए.

भारतीय टीम के पूर्व खिलाड़ी अजय जडेजा का कहना है कि सचिन एक महान खिलाड़ी हैं और उन्हें तय करने का मौक़ा दिया जाना चाहिए कि वे कब रिटायर होना चाहते हैं.

उन्होंने कहा, " जहाँ तक मैं सचिन को जानता हूँ, वे इस समय इतनी बुरी हालत में रिटायर नहीं होना चाहेंगे."

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