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भारत में स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रीय स्तर पर लोकतंत्र ख़ासा मज़बूत हुआ है, लेकिन गाँव-तहसील स्तर पर अलोकतांत्रिक व्यवहार और हिंसा की झलक मिलती है. प्रोफ़ेसर अचिन वनायक का विश्लेषण... | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय अर्थव्यवस्था के साठ साल के सफ़र के दौरान कई अहम पड़ाव आए. भारतीय अर्थव्यवस्था पर विस्तृत जानकारी पाने के लिए क्लिक करें. | हैदराबाद के अली मज़हर मानते हैं कि पिछले छह दशकों के दौरान भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति में बहुत कम सुधार हुआ है पर नई पीढ़ी बदल रही है. | आज़ादी के बाद भारत में आए बदलावों से सिनेमा उद्योग अछूता नहीं रहा है. हीरो और खलनायक से लेकर तकनीक तक बहुत कुछ बदला है. बीबीसी हिंदी विशेष. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||