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हेमा मालिनी के साथ एक मुलाक़ात | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'एक मुलाक़ात' में हम भारत के जाने-माने लोगों की ज़िंदगी के अनछुए पहलुओं से आपको अवगत कराते हैं. इस हफ़्ते हमारे शो में मेहमान हैं एक बहुत ही ख़ूबसूरत स्पेशल गेस्ट, मेरे और करोड़ों लोगों की पसंदीदा, ओरिजिनल ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी. अभी आपको मैंने ओरिजिनल ड्रीम गर्ल कहा, कैसे लगता है यह सुनकर? यह तो मेरे साथ जुड़ गया है. फ़िल्म में पब्लिसिटी के लिए मुझे इसी नाम के साथ इंट्रोड्यूस किया गया था, पर पता नहीं था कि लोगों के लिए सचमुच की ड्रीम गर्ल बन जाऊंगी. अब इतने साल से इस नाम के साथ रही हूँ, अब तो यह आदत बन गई है. मेरी माँ ने मेरे ऊपर ‘ड्रीम गर्ल’ नाम से एक फ़िल्म भी बनाई थी लेकिन अब मैं ड्रीम गर्ल नहीं हूं. तो क्या ड्रीम वूमन कह सकते हैं? हाँ, ड्रीम वूमन कह सकते हैं. जब आपको 'सपनों का सौदागर' से ओरिजिनल शोमैन राजकपूर ने हिंदी सिनेमा में ब्रेक दिया... नहीं, राज कपूर जी ने मुझे ब्रेक नहीं दिया था, वो सिर्फ़ इस फ़िल्म के हीरो थे. इस फ़िल्म के निर्माता अनंत स्वामी थे और उन्होंने दक्षिण की एक लड़की को हिंदी सिनेमा में ब्रेक देने का ख़तरा उठाया था. जिस समय मैंने यह फ़िल्म की मेरी उम्र सिर्फ़ 16 साल की थी. तब मुझे पता नहीं था कि उस समय इतनी बड़ी हस्ती के साथ काम करने के क्या परिणाम हो सकते हैं. आज जब मैं पीछे पलटकर देखती हूँ तो मुझे लगता है कि मैंने क्या किया. आपने अपनी पहली हिंदी फ़िल्म राज कपूर के साथ की थी और उनके बारे में कहा जाता है कि वो अपनी अभिनेत्रियों को बहुत स्पेशल ट्रीटमेंट देते थे. क्या आपको ऐसा महसूस हुआ? सबसे पहले मैं तो राज कपूर की आभारी हूँ कि वह एक ऐसी नई लड़की के साथ काम करने को तैयार हो गए, जिसे उस समय कुछ भी पता नहीं था. उनका मेरे साथ काम करने के लिए हाँ कहना ही बड़ी बात थी. जहाँ तक स्पेशल ट्रीटमेंट की बात है तो यह उनकी ख़ुद की फ़िल्मों में होता था, वह अपनी फ़िल्मों में अभिनेत्रियों को बहुत ही सुंदर तरीक़े से इंट्रोड्यूस करते थे, लेकिन मेरे साथ ऐसा नहीं था क्योंकि उस फ़िल्म में वो सिर्फ़ मेरे को-स्टार थे. लेकिन उन्होंने मेरे साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया और मुझे काफ़ी उत्साहित किया. राज कपूर पहले शख़्स थे जिन्होंने मेरा स्क्रीन टेस्ट लिया और आज जो हेमा मालिनी है उन्हीं की बदौलत है. स्क्रीन टेस्ट के बाद उन्होंने कहा कि इस लड़की में स्टार मटीरियल है. इसके बाद ही अनंत स्वामी मुझे फ़िल्म में लेने की हिम्मत कर पाए. फिर फ़िल्म के निर्देशक महेश कौल को बुलाया गया और इस तरह ‘सपनों का सौदागर’ बनी और ड्रीम गर्ल का जन्म हुआ. आप जब राज कपूर के साथ काम कर रही थीं तो आपको राज कपूर के बारे में कुछ स्पेशल महसूस हुआ, जैसे कि उनका फ़िल्मों पर और हीरोइनों पर काफ़ी प्रभाव होता था? मैं यह सब समझने के लिए तब बहुत छोटी थी. मेरी माँ ने बताया था कि राज कपूर बहुत बड़े हीरो हैं, मैं उनके बारे में सिर्फ़ इतना ही जानती थी. मुझे उनके साथ काम करने में कोई डर नहीं लगा क्योंकि मुझे इसके परिणाम के बारे में कुछ पता ही नहीं था. जितना निर्देशक कहते थे मैं करती थी. हो सकता है कि आज मैं उनके साथ काम करती तो डर लगता. वैसे तो आप किसी भी फ़िल्म में अपने को-स्टार के साथ ख़राब नहीं लगी हैं. मुझे आपकी पहली फ़िल्म जो याद है वो है ‘जॉनी मेरा नाम’, इसमें भी आप देव साहब के साथ एकदम परिपक्व अभिनेत्री की तरह दिखी हैं. ‘जॉनी मेरा नाम’ से जुड़ा कोई विशेष अनुभव? राज कपूर, देव आनंद और दिलीप कुमार तीनों उस समय के बड़े हीरो थे. राज जी के साथ काम करने के तुरंत बाद मुझे देव साहब के साथ काम करने का ऑफ़र मिल गया. मैंने उनकी कई फ़िल्में देखी थीं और इसलिए मैं उनके साथ काम करने के लिए बहुत उत्साहित थी. देव साहब उम्र में मुझसे बहुत बड़े थे, लेकिन बहुत स्मार्ट दिखते थे तो इस लिहाज़ से मैं खुश थी कि उन्होंने मेरे साथ काम करना मंज़ूर कर लिया है. यह फ़िल्म बहुत बड़ी हिट साबित हुई और देव साहब के साथ काम करने का अनुभव काफ़ी अच्छा रहा.
इस फ़िल्म के निर्देशक विजय आनंद थे और एक-एक गाना बहुत सलीके से फ़िल्माया गया था. मैंने ‘ओ मेरे राजा…’ गाने में ब्लू बॉर्डर वाली काली साड़ी पहनी थी जो उस समय काफ़ी प्रचलित हुई. आपने फ़िल्मों में आने से पहले क्लासिकल डांस की ट्रेनिंग ली थी या दोनों साथ-साथ चला? नहीं मैं पहले डांसर थी. बचपन से मेरी माँ की इच्छा थी कि मैं डांसर बनूँ. उन्होंने इसके लिए बहुत मेहनत की. भरतनाट्यम की ट्रेनिंग मेरी दिल्ली में ही शुरू हो गई थी और बाद में इसमें सुधार लाने के लिए हमलोग चेन्नई गए. वहाँ जब मैं स्टेज पर नृत्य करने लगी तो मद्रास फ़िल्म इंडस्ट्री के लोग पूछने लगे कि क्या मैं फ़िल्मों में काम करूंगी. इस तरह मैं फ़िल्मों में आई लेकिन मूल रूप से भरतनाट्यम की डांसर हूँ. उन दिनों एक्टिंग का कोई कोर्स तो होता नहीं था लेकिन डांस सीखने की वज़ह से मेरे पहले निर्देशक महेश कौल जैसा कहते थे वैसी एक्टिंग करने में कोई दिक्कत नहीं हुई. थोड़ी दिक्कत भाषा को लेकर हुई. हिंदी फ़िल्म में लोग चाहते थे कि मैं हिंदुस्तानी बोलूं और इसके लिए एक उर्दू का टीचर भी रखा गया. मैंने उनसे उर्दू लिखना और पढ़ना सीखा. उर्दू भाषा मुझे काफ़ी अच्छी लगती है. ('एक मुलाक़ात' बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के अलावा, बीबीसी हिंदी – मीडियम वेव 212 मीटर बैंड पर और शॉर्टवेव 19, 25, 41 और 49 मीटर बैंड पर - भारतीय समयानुसार हर रविवार रात आठ बजे प्रसारित होता है. दिल्ली और मुंबई में श्रोता इसे रेडियो वन एफ़एम 94.3 पर भारतीय समयानुसार रविवार दोपहर 12 बजे भी सुन सकते हैं.) तो थोड़ी सी उर्दू हमे भी सुनाइए. कोई शेर... ‘रज़िया सुल्तान’ देखिए. इसमें तो मैंने काफ़ी उर्दू बोला है. धर्मेंद्र का इस फ़िल्म में बिल्कुल काला मेकअप कर दिया गया था, कैसा लगा था आपको इसमें काम करके? मुझे कोई दिक्कत नही हुई थी, परेशानी तो धर्मेंद्र को हुई थी क्योंकि उनका काले रंग से मेकअप कर दिया गया था. रंग लगने के डर से मैं उन्हें अपने पास नहीं आने देती थी. कमाल अमरोही साहब ने बहुत अच्छी फ़िल्म बनाई थी और मुझे इसे करने का गर्व है. इससे पहले कि हम कार्यक्रम में आगे बढ़ें अपनी पसंद का एक गाना बताइए? ‘रज़िया सुल्तान’ फ़िल्म का लता जी का गाया गाना है, ‘ऐ दिले नादान…’ बहुत लोगों को फ़िल्मी करियर के लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ता है, लेकिन आपके फ़िल्मी जीवन की शुरुआत आराम से हुई और आप सफल भी बहुत जल्दी हो गईं. मैं पूरे गर्व के साथ कह सकती हूँ कि बहुत कम लोग मेरे जैसे सौभाग्यशाली हो सकते हैं. मैंने सुना है कि बहुत सी लड़कियों को फ़िल्मों में आने के लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ता है, लेकिन मुझे थोड़ा सा भी नहीं करना पड़ा. मुझे बस शुरू में थोड़ी दिक्कत हुई क्योंकि पहले मुझे दक्षिण भारतीय फ़िल्म के लिए मौक़ा मिला और उस समय मैं बहुत स्लिम थी. दक्षिण की फ़िल्मों में थोड़ी मोटी औरत चाहिए तो मुझे नहीं लिया गया. इससे मैं निराश हो गई कि आख़िर मेरे में क्या कमी थी कि मुझे नहीं लिया गया. मेरी कभी ये ख़्वाहिश नहीं थी कि मैं फ़िल्मों में आऊं और बड़ी हीरोइन बनूं, लेकिन जब मुझे नहीं लिया गया तो मैंने इसे चुनौती की तरह लिया और तय कर लिया कि अब तो करके दिखाना ही है. इसके बाद राज कपूर साहब के साथ काम करने का ऑफ़र मिला और मैंने इसमें बहुत दिल लगाकर काम किया. फ़िल्मों के बारे में जब बात होती है तो हीरोइन के शोषण और कास्टिंग काउच की भी बात होती है, पर क्या आपको कभी...? कोई मेरे नज़दीक भी नहीं आ सकता है. देखिए होता क्या है कि जब आप सफल होते हैं तो लोग आपके पास आने से भी डरते हैं, पर जब आप कुछ भी नहीं होते हैं तो लोग आपका शोषण करने की कोशिश करते हैं. ऐसे समय में बहुत सावधानी से रहना चाहिए क्योंकि तब मन उदास होता है और लगता है कि कैसे भी सफलता मिल जाए. ऐसी ही घड़ी में लड़कियाँ फिसल जाती हैं. इसलिए मैं हमेशा कहती हूँ कि ऐसे समय में लड़कियों के पैरेंट्स उनका साथ दें और समझाएं कि यही एक लाइन नहीं है. फ़िल्म में अगर सफलता नहीं मिल रही है तो बहुत सारे दूसरे काम हैं जिसे कर सकती हैं. बहुत सही बात कही आपने. अपनी फ़िल्मों में आप बहुत मर्यादित दिखी हैं, कभी अंग प्रदर्शन नहीं किया. यह सोची-समझी रणनीति थी या फिर रोल ही ऐसे मिले? उन दिनों कोई हीरोइन अंग प्रदर्शन करती भी नहीं थी. इसके लिए अलग लड़कियाँ वैंप हुआ करती थीं. मैं फ़िल्मों में मॉर्डन ड्रेस पहनती थी, लेकिन अंग प्रदर्शन नहीं करती थी. आपने बहुत सारे हीरो के साथ काम किए. धर्मेंद्र की बात तो हम बाद में करेंगे इसके अलावा अमिताभ, राजेश खन्ना, जितेंद्र, संजीव कुमार के साथ-साथ और भी कई अभिनेताओं के साथ भी आपने काम किया. सबसे अच्छा किसके साथ काम करना लगता था? मुझे सबके साथ काम करना अच्छा लगता था. जितेंद्र हमउम्र थे तो उनके साथ अच्छा लगता था. शत्रुघ्न सिन्हा बहुत हँसाते थे वो आज भी ऐसे ही हैं. दूसरे हीरो के साथ भी बहुत अच्छे संबंध रहे हैं. अमिताभ जी के साथ तो अभी तक काम करती रही हूँ.
सबके साथ बहुत कुछ सीखने को भी मिला है. आप उन्हें दूर से देखते हैं लेकिन कुछ न कुछ तो ज़रूर सीखते हैं. घर में कितनी भी समस्याएं हों हम सेट पर उसे लेकर नहीं आ सकते हैं क्योंकि पूरी तरह से क़िरदार में डूबना पड़ता है. शुरुआत में ही इतने सारे हीरो के साथ काम करने का मौक़ा मिला और सबसे कुछ न कुछ सीखा. अगर फिर धर्मेंद्र को छोड़ कर बात करें तो आपको क्या लगता है, आपकी जोड़ी किसके साथ सबसे अच्छी दिखती थी? मुझे लगता है मेरी जोड़ी सबके साथ अच्छी लगी. मैं यह हेमा मालिनी बनकर नहीं बोल रही हूँ. आज भी जब मैं देखती हूँ तो मुझे लगता है कि अमिताभ जी से लेकर शशि कपूर तक, सबके साथ मेरी जोड़ी अच्छी लगती थी. लेकिन राजेश खन्ना के साथ मुझे याद है वो गाना, ‘ज़िदगी एक सफर है सुहाना.....’ हाँ यह गानी काफ़ी अच्छा था. मुझे याद है कि राजेश खन्ना बहुत रिज़र्व रहते थे और मैं परेशान रहती थी कि उनके साथ कैसे काम कर पाऊंगी. राजेश खन्ना उस समय सबसे बड़े स्टार थे. बहुत दिनों बाद ‘अंदाज़’ में उनके साथ काम करने का मौक़ा मिला और अनुभव काफ़ी अच्छा रहा. बाद में हमने साथ में कई फ़िल्में कीं. तो इस गानें की कुछ पंक्तियाँ गाकर सुनाइए. ‘ज़िदगी एक सफ़र है सुहाना...’ क्या बात है ? आप तो बढ़ियाँ गा सकती हैं. ऐसा कुछ ख़ास नहीं है. क्लासिकल डांसर को संगीत सीखना पड़ता है ताकि ताल, भाव और राग का ज्ञान हो. इसलिए थोड़ा-बहुत गुनगुना लेती हूँ.
अच्छा ये बताइए ड्रीम गर्ल से ड्रीम वूमन, ड्रीम मॉम से ड्रीम ग्रैंड मॉम... हमेशा ख़ूबसूरत दिखने का कोई दबाव रहा क्या? शुरू में तो यह सुनना अच्छा लगता था और बाद में इसकी आदत पड़ गई. ऐसी आदत पड़ गई है कि अब कोई नहीं कहता है तो ऐसा लगता है कि शायद आज ठीक नहीं लग रही हूँ, लेकिन ये सब जन्मजात है और अगर आप इसकी देखभाल करें तो ग्रैंड मॉम बनने के बाद भी सुंदर लग सकती हैं. जीवन भर सुंदर दिखने का क्या टिप्स हैं? अगर ख़ूबसूरत हैं तो इसके लिए भगवान का शुक्रिया अदा करना चाहिए. योग करती हूँ, डांस करती हूँ और जब समय मिलता है तो वर्क आउट करती हूँ. खाना कम खाती हूँ और पानी खूब पीती हूँ. इस तरह तो थोड़ा सचेत रहेंगे तो सब ठीकठाक रहता है. गरम पानी पीती हैं क्या ? देव आनंद साहब अपने साथ हमेशा गरम पानी रखते हैं. स्लिम रहने के लिए गरम पानी बहुत अच्छा होता है. खाना खाने के बाद गरम पानी पीने से गैर-ज़रूरी चीज़ें निकल जाती हैं. इससे पहले कि कार्यक्रम का सफर आगे बढ़ाएं अपनी पसंद का एक और गाना बताइए ? मुझे गुलजार जी की ‘किनारा’ का गाना ‘नाम गुम जाएगा, चेहरा ये बदल जाएगा...’ बहुत पसंद है. इस फ़िल्म में मैंने एक अंधी लड़की का क़िरदार निभाया था और मेरे साथ जितेंद्र थे. अच्छा ये बताइए कि आपको धर्मेंद्र से या धर्मेंद्र को आपसे इश्क कैसे हुआ ? इसकी शुरुआत कैसे हुई? देखिए जो होना है तो वो होकर ही रहेगा. जब मैंने दुनिया में क़दम रखा तब से यह तय था कि मुझे धरम जी से और धरम जी को मुझसे प्यार होना है तो हम दोनों में प्रेम हुआ और हमने शादी कर ली. यह कहानी सबको पता ही है इसलिए इस बारे में बार-बार बात करने में कोई मज़ा नहीं है. भगवान ने सब योजना बना रखी थी और मैंने उसे स्वीकार कर लिया. लेकिन इसके लिए पहल किसने की? मैं कैसे पहल करती. पहल तो आदमी को ही करना पड़ता है. वैसे भी मैं काफ़ी शर्मीली थी. धर्मेंद्र जी काफ़ी हैंडसम थे और कोई भी लड़की उनपर मर मिटती. मैं उन्हें पसंद करती थी पर वो पहले से शादीशुदा थे इसलिए यह नहीं सोचा था कि शादी करूंगी. लेकिन यह सब हो गया. कभी किसी और से शादी करने के बारे में सोचा? बहुत सोचा लेकिन धरम जी ने किसी और के बारे में सोचने नहीं दिया. लगता है कि आप इससे बहुत नाराज़ हैं कि धर्मेंद्र जी ने आपको किसी दूसरे के बारे में सोचने नहीं दिया? नाराज़ नहीं, बल्कि खुश हूँ कि उन्होंने इतना प्यार दिया कि दूसरे के बारे में सोचने का मौक़ा ही नहीं मिला. मुझे याद है कि उस समय पत्रिकाओं में बहुत चर्चा होती थी कि आप किससे शादी करेंगी ? एक नाम जो बहुत निकल कर आता था वो संजीव कुमार का था. क्या इस मामले में कुछ दम था? देखिए एक लड़की जो शादी के काबिल है उसके लिए ढेर सारे प्रपोज़ल तो आएंगे ही. इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है. जितने भी हीरो थे वो सभी चाहते थे क्योंकि मेरा आचरण बहुत साफ़-सुथरा था. मुझे यह कहने में गर्व महसूस होता है कि मैं ऐसी लड़की थी जिसे कोई भी आदमी अपनी बीवी के रूप मे चाहेगा. लेकिन उस समय मुझे इस तरह के प्रपोज़ल से भी डर लगता था और आदमी इसे पसंद करते हैं. मैं आज भी दूसरों से अलग हूं. संजीव कुमार ने जो प्रपोज़ल रखा उसमें कुछ भी ग़लत नहीं है, लेकिन यह नहीं हो सका. संजीव जी एक ज़बर्दस्त अभिनेता थे लेकिन उनके साथ ‘सीता-गीता’ के बाद केवल एक और फ़िल्म कर पाई. इस मामले में इतना विवाद हो गया कि वो सजग हो गए. आज आप इस बारे में सोचती हैं? देखिए यह सोचने में कोई बुराई नहीं है कि इसके साथ शादी हुई होती तो क्या और उसके साथ शादी हुई होती तो क्या होता. चलिए यह मान लेते हैं कि जो कुछ भी हुआ वह सबसे अच्छा रहा. लेकिन दूसरा सबसे बेहतर क्या होता? यह मैं नहीं बताऊंगी. बीबीसी ‘एक मुलाक़ात’ का सफर आगे बढ़ाने से पहले अपनी पसंद का एक और गाना बताएं? अमिताभ बच्चन के साथ एक फ़िल्म की थी ‘सत्ते पे सत्ता’ उसका गाना है, ‘दिलबर मेरे...’ आपने कहा कि धर्मेंद्र पर तो कोई भी मर मिटती तो क्या उनके साथ पहली नज़र का प्यार था? नहीं, ऐसा नहीं था. मैं उन्हें सिर्फ़ पसंद करती थी क्योंकि वह बहुत अच्छे दिखते थे. वैसे मेरे समय के ज़्यादातर हीरो लंबे थे और अच्छे दिखते थे. आजकल के हीरो थोड़े छोटे होते हैं. मैंने धरम जी के साथ बहुत सारी फ़िल्में कीं और धीरे-धीरे क़रीब आए. क्या होता है कि आप जब लंबे समय तक किसी के साथ जुड़े रहते हैं तो भावनात्मक लगाव हो जाता है. आपने कहा कि उनके साथ लंबे समय तक रहीं, तो ऐसा तो नहीं है कि भावना में बह गईं ? बिल्कुल नहीं. मैं बह ही नहीं सकती क्योंकि मेरे माँ-बाप मुझे बहुत कंट्रोल में रखते थे. मुझे इस बात का गर्व है कि जब मुझे ज़रूरत थी मेरे माँ-बाप मेरे साथ थे.उसके बाद मेरे दोनों भाई हमेशा मेरा ख़याल रखते हैं. लोग कहते हैं कि पर्दे पर धर्मेंद्र जी के साथ आपकी जोड़ी गज़ब की लगती थी, तो इसके लिए कोई प्रयास किया कि सबसे अपने आप हो गया? नहीं यह सब अपने आप हुआ. हमने क़रीब 25 फ़िल्में साथ कीं और लगभग सभी हिट हुईं. होता क्या है कि जब आपकी फ़िल्में चलती हैं तो निर्माताओं को लगता है कि यह जोड़ी हिट है और इसे फ़िल्म में लो. धर्मेंद्र जी पर फ़िल्माया गया सबसे पंसदीदा गाना ? मेरे साथ की किसी फ़िल्म का कोई गाना तो मुझे याद नहीं आ रहा है. वैसे ‘मैं जट यमला...’ में उन्होंने अच्छा किया है, लेकिन ‘ब्लैकमेल’ का एक गाना ‘पल-पल दिल के पास’ काफ़ी अच्छा है. आपको अपने दौर में और आज के दौर में सबसे अच्छी अभिनेत्री कौन लगती है? मेरे साथ-साथ वालों में लीना चंदावरकर थी, मेरे से पहले सायरा बानो, आशा और शर्मीला थी. मेरे बाद रेखा, परबीन बॉबी और जीनत अमान थी. रेखा को मैं बचपन से जानती थी क्योंकि मैं जहाँ डांस सीखने जाती थी वहाँ वह भी आती थीं. मुझे जब पता चला कि रेखा मुंबई में फ़िल्म करने जा रही है तो शुरू में विश्वास नहीं हुआ. लेकिन उन्होंने बाद में ख़ुद को बहुत डेवलेप किया. अगर मैं आपको ड्रीम गर्ल का ताज़ देने के लिए कहूँ तो किसे चुनेंगी ? अपनी बेटियों का नाम मत लीजिएगा. मैं तो ऐश्वर्य राय कहूँगी. वह काफ़ी ख़ूबसूरत हैं और उनके पास सुंदर व्यक्तित्व है. आपने उनकी एक्टिंग देखी है ? उनकी फ़िल्में देखी है? हाँ, देखी है. मुझे पहले लगता था कि सौंदर्य प्रतियोगिताओं से आने वाली लड़कियाँ क्या अभिनय करेंगी, लेकिन इन लोगों ने ख़ुद को बहुत बढ़िया से डेवलेप किया है. बेटियाँ भी फ़िल्म लाइन में हैं. क्या उनको कोई ख़ास टिप्स देती हैं ? देखिए पहले वो मेरी बेटियाँ हैं तो मुझे पूरा अधिकार है कि उन्हें कुछ भी ग़लत करने से रोकूँ, लेकिन साथ ही यह भी ज़रूरी है कि हम उनके साथ दोस्त जैसा व्यवहार करें. बतौर अभिनेत्री ईशा देओल आपको कैसी लगती है ? ईशा एक अच्छी अभिनेत्री है, लेकिन कोई भी निर्देशक उसकी अभिनय प्रतिभा को उभारकर सामने नहीं ला सका है. वह क़रीब 20 फ़िल्म कर चुकी है. अब यह काम मैं ही उसके लिए फ़िल्म बनाकर करूंगी. मेरी बेटी होने के नाते लोग उसकी तुलना मेरे से करते हैं. यह ठीक नहीं है. वह आज की लड़की है, उसकी अपनी पहचान है और उस समय की हेमा मालिनी का प्रतिबिंब नहीं हो सकती है. मैं भी तो बदल चुकी हूँ. ईशा देओल पर फ़िल्माया गया अपनी पसंद का कोई गाना बताइए? ‘कैश’ में उसका गाना है, ‘ न पूछो…’ अब आप राजनीति में हैं. अगर आपको कोई राजनेता का रोल करने को मिले तो किसका करेंगी? अभी कोई अगर रोल देगा तो सोनिया गांधी का ही देगा. और रोल करने में क्या है किसी की भी नक़ल आसानी से की जा सकती है. अगर आपको छूट दे दी जाए तो अपनी फ़िल्म में किस राजनेता को लेंगी? देखिए, लालू जी ने तो पहले ही कह रखा है कि आपकी फ़िल्म में हम हीरो बनेंगे. अब हीरो के रोल में लेंगे या किसी और रोल में लेंगे यह सोचने की बात है लेकिन लेंगे ज़रूर.
लालू जी भी आप पर फ़िदा हैं. इसी कार्यक्रम में मैंने उनसे पूछा था कि आप ने एक बार कहा था कि बिहार की सड़कों को हेमा मालिनी के गालों की तरह चिकना बना दूँगा, तो लालू कहने लगे कि मैंने ऐसा नहीं कहा था, लेकिन हेमा मालिनी जी हैं बहुत सुंदर. अच्छा ये बताइए कोई ऐसी ख़्वाहिश है जो लगता है कि पूरी करनी है? देखिए मुझे बहुत सारी फ़िल्में बनानी हैं. मल्टीप्लेक्स आने के बाद फ़िल्म बनाने का तरीक़ा बदल गया है. आप मन मुताबिक कम ख़र्चे में फ़िल्म बना सकते हैं. मैं दो-तीन फ़िल्में बनाने की योजना बना रही हूँ. भगवान से प्रार्थना करती हूँ कि ये जल्दी पूरा हो जाए. मैं एक डांस इंस्टीट्यूट बनाने के लिए भी तड़प रही हूँ लेकिन मुंबई में किसी सरकार ने मुझे आज तक ज़मीन नहीं दी है. मैं यह इंस्टीट्यूट मुंबई में ही खोलना चाहती हूँ. इसके अलावा मैं चाहती हूँ कि मेरी दोनों बेटियाँ ठीक से सेटल हो जाएं, मुझे अच्छे दामाद मिलें और फिर नाती-नतिनी चाहिए. देखिए मैं बहुत रोमांटिक हूँ और इसके आगे भी ज़िंदगी है. तो क्या आजकल भी रोमांटिक हेमा मालिनी का किसी पर दिल आया हुआ है? हाँ, लेकिन बता नहीं सकती. जीवन में कोई पश्चाताप, सोचती हों कि काश ऐसा नहीं हुआ होता. ऐसा पश्चाताप तो किसी चीज़ को लेकर नहीं है. जीवन में कई चीज़ें उस समय मुश्किल लगती हैं लेकिन जैसे-जैसे समय गुज़रते जाता है और आप पीछे मुड़कर देखते हैं तो लगता है कि क्या हम इसी के लिए इतना रो रहे थे. ज़िदगी रंगों से भरा होता है. कोई तकलीफ़ आए तो उसका सामना करना चाहिए, भागना नहीं चाहिए. मैं बहुत सारे लोगों को देखती हूँ ख़ासकर पुरुषों में यह प्रवृत्ति होती है कि तकलीफ़ से भाग जाना चाहते हैं, लेकिन मैं कहती हूँ कि इसका समाना करने में ही मज़ा है. पुरुषों की बात चली है तो मैं यह पूछना चाहूँगा कि आप राजनीति में हैं और यह पुरुषों के वर्चस्व वाला क्षेत्र है. कहा जाता है कि इस क्षेत्र में बहुत अच्छे लोग नहीं होते हैं. आपका क्या अनुभव है? नहीं, मेरे साथ सबका व्यवहार बहुत अच्छा रहता है. बतौर कलाकार मेरी एक प्रतिष्ठा है और लोग इसका सम्मान करते हैं. वैसे यह बात भी ग़लत है कि राजनीति में अच्छे लोग नहीं है. अच्छा होने के लिए हीरो की तरह सुंदर होने की ज़रूरत नहीं है. कई लोग काफ़ी पढ़े-लिखे, समझदार और ज्ञानी हैं. मैं राजनीति का मज़ा ले रही हूँ. मेरी पृष्ठभूमि राजनीतिक नहीं है तो मैं ग़लती कर सकती हूँ, लेकिन कई लोग वहाँ मेरी मदद करने लिए तैयार रहते हैं. |
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