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'चक दे...' गर्ल्स के साथ 'एक मुलाक़ात' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'एक मुलाक़ात' में हम भारत के जाने-माने लोगों की ज़िंदगी के अनछुए पहलुओं से आपको अवगत कराते हैं. लेकिन एक मुलाक़ात में हमारे साथ पहली बार हैं एक से अधिक मेहमान. ये लोग एक ऐसी टीम के सदस्य हैं जिन्होंने पूरे भारत को हिलाकर रख दिया है. फ़िल्म ‘चक दे इंडिया’ फ़िल्म की वो चार चक दे गर्ल्स का जादू पूरे भारत के सर चढ़कर बोल रहा है. टीम की कप्तान विद्या, सबसे सीनियर खिलाड़ी बिंदिया, टीम की ख़ूबसूरत सेंटर फ़ॉरवर्ड प्रीति सबरवाल और टीम की दूसरी सेंटर फ़ॉरवर्ड कोमल चौटाला. हम शुरुआत करते हैं टीम की कप्तान विद्या से. जब फ़िल्म पर काम शुरू हुआ था तो विद्या क्या आपको लगता था कि फ़िल्म इतनी चर्चित और हिट होगी? जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी थी तो लगा था कि सफलता मिल सकती है. लेकिन यह फ़िल्म बॉलीवुड में बनने वाली दूसरी फ़िल्मों से बहुत अलग है इसलिए कुछ ठीक से नहीं कहा जा सकता था. फ़िल्म इतना अधिक लोकप्रिय होगी इसका अंदाज़ा भी नहीं था. जब फ़िल्म पूरी हुई तो मैंने इसका सेकेंड हाफ़ देखा. फ़िल्म के उस हिस्से में खेल बहुत अधिक देर तक है. वो हिस्सा ऊर्जा से इतना भरा हुआ है कि लोगों को उसे पसंद करना ही था. बिंदिया आपका चरित्र फ़िल्म में कई उतार-चढ़ाव से गुजरता है. आपको क्या लगता था कि दर्शक आपके चरित्र को कैसे जानेंगे. एक बुरी औरत के रूप में या टीम की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में? टीम की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के रूप में. मुझे जब अपनी भूमिका के बारे में पता चला तो लगा अब तो इसी तरह का काम मिला करेगा. लेकिन फिर मुझे अपने थिएटर के दिनों की एक बात याद आई कि कोई भी भूमिका अच्छी या बुरी नहीं होती और आपको चरित्र के साथ न्याय करना होता है. ('एक मुलाक़ात' बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के अलावा, बीबीसी हिंदी – मीडियम वेव 212 मीटर बैंड पर और शॉर्टवेव 19, 25, 41 और 49 मीटर बैंड पर - भारतीय समयानुसार हर रविवार रात आठ बजे प्रसारित होता है. दिल्ली और मुंबई में श्रोता इसे रेडियो वन एफ़एम 94.3 पर भारतीय समयानुसार रविवार दोपहर 12 बजे भी सुन सकते हैं.) लेकिन चरित्र मजबूत या कमज़ोर होता है और फ़िल्म में आपका चरित्र मज़बूत था. हाँ. यही सोचकर मैंने अपनी भूमिका निभाई. फिर बाद में जिन दृश्यों में मैं अच्छी लड़की की तरह सामने आती हूँ, उसमें मेरी पूरी कोशिश रही कि मैं लोगों को विश्वास दिला सकूँ कि मैं अच्छी लड़की हूँ. इस समय हमारे साथ देश की सबसे सुंदर फ़ॉरवर्ड खिलाड़ी प्रीति और कोमल भी हैं. प्रीति, फ़िल्म में पहले आपको वापस लौटने को कहा जाता है, फिर आप सबसे अधिक गोल करने वाली खिलाड़ी भी बनती हैं और एक मशहूर क्रिकेट खिलाड़ी को अस्वीकार भी करती हैं. कैसा रहा यह फ़िल्मी सफर? इस फ़िल्म के साथ सबसे ख़ास बात यही रही कि पूरी फ़िल्म खेल के इर्द-गिर्द ही घूमती है. लव स्टोरी जैसी चीजों को कोई जगह ही नहीं दी गई. जयदीप सर और शमित सर ने फ़िल्म का ग्राफ़ कभी कम होने ही नहीं दिया. मुझे जब वापस जाने को कहा जाता है और जब मैं क्रिकेट खिलाड़ी को छोड़ती हूँ उस दौरान कभी भी ग्राफ़ कम नहीं हुआ है. फ़िल्म में किसी भी चरित्र की निजी ज़िंदगी की कहानी बहुत अधिक नहीं दिखाई गई है. सिर्फ़ आपकी और विद्या की निजी ज़िंदगी से जुड़ी कुछ घटनाएँ दिखाई गई हैं? हाँ. कोमल आपको खेलते हुए कैसे लगा. आपके उस भैंस के पूँछ वाले डायलॉग की चर्चा हर जगह है? मुझे बहुत अच्छा लगा. (हँसते हुए) उस भैंस के पूँछ वाले डायलॉग का कॉपीराइट मैं जयदीप सर से ले चुकी हूँ. वो डायलॉग आप फिर दोहराएंगी. खेलने वाला खेल रहेगा, रेलने वाला फ़ेल रहेगा. जो ज़्यादा मरोड़े मूँछ, वो जाए चाट ले भैंस की पूँछ. अभी एक-दो दिन पहले किसी अख़बार में आपका फ़ोटो छपा था जिसमें आप बहुत ख़ूबसूरत सी लड़की नज़र आ रही थीं. लेकिन फ़िल्म में तो आपका चरित्र एक लड़के की तरह हरकत करने वाली लड़की का था. आप असल ज़िंदगी में कैसी हैं. बिल्कुल कोमल सी लड़की या थोड़ा ‘टॉम ब्वाय’ टाइप भी हैं? ये तो आप मेरे साथ वाली लड़कियों से ही पूछिए. (प्रीति, बिंदिया, विद्या बताती हैं) वो जब एक्टिंग कर रही होती है तब तो अलग बात है नहीं तो वो बहुत स्टाइलिश लड़की है. उसके नाखून मुझसे भी बड़े हैं. वो हील की चप्पलें पहनती है. बिंदिया आप अपनी पसंद का एक गाना बताइए. ‘चक दे इंडिया’ का ही गाना है मौला मेरे ले ली मेरी जान... विद्या, आप पर शाहरुख़ ख़ान ने फ़िल्म में कुछ अधिक ध्यान ही दिया. ये बताइए कि क्या सच में शाहरुख़ ख़ान बहुत ऊर्जावान हैं या नामचीन होने की वजह से उनके साथ ये बातें जुड़ गई हैं? मैं अब तक पाँच बार ‘चक दे इंडिया’ देख चुकी हूँ. हर बार शाहरुख़ ख़ान के लिए मेरा प्यार बढ़ता जाता है. क्या गजब की अदाकारी की है उन्होंने. फ़िल्म के अंतिम शॉट में वो बहुत बेहतरीन लगे हैं. वो बहुत लंबे समय तक ऐसे ही काम करते रहेंगे. एक इंसान के तौर पर भी उनका व्यक्तित्व बहुत चुंबकीय है. अगर आप उनसे दो मिनट मिलेंगे तो आपका उनसे दो घंटे के लिए मिलने का मन करेगा और दो घंटे मिलेंगे तो दो दिन और फिर दो साल तक मिलने का मन करेगा. हम अपने आपको बहुत भाग्यशाली मानते हैं क्योंकि हमने उनके साथ छह-आठ महीने गुजारे हैं. अरे भाई कोई कुछ कमियाँ भी बताइए. बिंदिया आपका क्या कहना है? नहीं. शाहरुख़ सच में जादूगर हैं. उनकी सबसे अच्छी बात यही है कि उन्हें पता है संघर्ष क्या होता है. उन्हें पता है कि डीटीसी बस में यात्रा करना कैसा होता है. वो लोगों को बहुत आसानी से उपलब्ध होते हैं. यही बात उन्हें जादूगर व्यक्तित्व देती है. वो सच में जनता से जुड़े आदमी हैं. मैंने भी उनके साक्षात्कार लिए हैं. उनमें गजब की समझदारी है. ऐसे ही कोई बात नहीं कह देते. आपका क्या कहना है प्रीति? हमारी उनसे पहली मुलाक़ात पहली स्क्रिप्ट रीडिंग के समय हुई थी. हम बहुत नर्वस थे. हम लोग ग़लतियों की वजह से घबराएँ नहीं इसलिए वो भी ग़लतियाँ कर रहे थे. उन्होंने हम सबसे अलग-अलग करके बात की और समझाया कि तुम लोगों को बहुत अभिनय करने की ज़रूरत नहीं है. बस जैसी हो वैसे ही काम कर दो. वो आप लोगों के अभिनय के बारे में कुछ लिखकर भी समझाते थे या ऐसे ही बता देते थे? वो नोट्स लेते थे. हम 16 लड़कियाँ पहली बार उनसे मिल रही थीं. उन्हें कैसे याद रहता. चलिए कुछ तो आम आदमी वाली बात भी है. नहीं तो आप लोग कह रही हैं कि वो जादूगर हैं? बिंदिया कहती हैं - ऐसी बात नहीं है. जब वो ऑस्ट्रेलिया में थे तो उन्होंने सबके लिए स्क्रैप बुक और फ़ोटो अलबम ख़रीदा था और ऑस्ट्रेलियन लड़कियों के लिए बारी-बारी से 15-15 लाइनें लिखी थीं. विद्या आप अपनी पसंद का एक गाना बताएँ. ‘चक दे इंडिया’ का एक गाना है बादल पर पाँव है या छूटा गाँव है, अब तो भई चल पड़ी अपनी ये नाव है... अब कैसा लग रहा है क्योंकि आप तो अब स्टार बन गए हैं. आपको सफलता मिल गई है? कुछ समझ नहीं आ रहा कि हो क्या रहा है. सोचने तक का ही समय नहीं मिल पा रहा. आज चारों तरफ हमारी माँग है. लेकिन अच्छा लग रहा है. इसी इंडस्ट्री में नाम बनाने के लिए कई साल मेहनत की लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा. अब एकदम से ही हम लोकप्रिय हो गए. बिल्कुल. बिंदिया क्या आपने ख़ुद को चुटकी काटी थी? अरे आपको कैसे पता. मैंने कई बार ऐसा किया. दस अगस्त की सुबह हम इनफ़िनिटी मॉल पर खड़े थे लेकिन कोई हमें पहचान नहीं रहा था जबकि हमारे पोस्टर चिपक चुके थे. हम सोच रहे थे कि वो दिन कैसा होता होगा जब लोग रातोंरात स्टार बन जाते हैं. रात के शो के बाद ही हम लोग फ़ोटो खिंचवा रहे थे और ऑटोग्राफ़ दे रहे थे. अभी मैं शिल्पा शेट्टी पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री देख रहा था. शिल्पा शेट्टी से पूछा गया कि कैसा लग रहा है इतना लोकप्रिय होने के बाद. उन्होंने कहा कि सारी उम्र हम लोकप्रियता हासिल करने के लिए मेहनत करते हैं. अब जब लोग ध्यान दे रहे हैं तो बुरा क्यों लगेगा. आप सब आगे के बारे में क्या सोचती हैं? प्रीति कहती हैं, शुरुआत तो अच्छी हो गई है. आगे हम लोग मेहनत करेंगे और अगर भाग्य अच्छा रहा तो बेहतर ही करेंगे. प्रीति आप तो बिल्कुल अलग दिखाई दे रही हैं. वहाँ तो एक मज़बूत खिलाड़ी लग रही थीं जबकि अब तो मॉडल की तरह दिख रही हैं? हॉकी खिलाड़ी की तरह दिखना था. इसलिए थोड़ा हट्टा-कट्टा दिख रही थी. कोमल आप इस लोकप्रियता का आनंद ले रही हैं? बिल्कुल. शाहरुख़ ख़ान के साथ का कोई ऐसा क्षण था जो आप हमारे साथ बाँटना चाहती हों? जब हम लोग ऑस्ट्रेलिया पहुँचे तो मेरी गर्दन में बहुत दर्द हो रहा था. मैं अपनी गर्दन हिला रही थी. शाहरुख़ सर को पता लग गया और उन्होंने मेरी गर्दन की मसाज की. टीम में सबसे पहले मुझे ही मसाज मिली थी. उन्हें भी गर्दन में दर्द रहता है. उन्होंने कहा कि मुझे पता है कि गर्दन में होने पर कितनी दिक्कत होती है. उन्होंने मुझे गर्दन की एक कसरत भी बताई थी. बहुत मजा आया था. कोमल अपनी पसंद का एक गाना बताएँ. चक दे, चक दे, एक हॉकी दूँगी रखके... कोमल आपकी मुस्कराहट बहुत अच्छी है इसे बनाकर रखिएगा. धन्यवाद. प्रीति, अपनी पसंद का एक गाना बताएँ. रंग दे बसंती का गाना रूबरू रोशनी है... इस फ़िल्म की तुलना लगान से हो रही है. लेकिन उसकी टीम इतनी ग्लैमरस नहीं थी. आप लोग जब शूटिंग कर रहे थे तो क्या आपको कुछ देशभक्ति वाली बात महसूस होती थी? (विद्या) फ़िल्म में जब हमें कप दिया जाता है तो बहुत अच्छा महसूस होता है. (प्रीति) मैच से पहले जब राष्ट्रगान बज रहा था तो लगा कि हम देश के लिए खेल रहे हैं और हमें यह मैच जीतना ही है. (बिंदिया) हम कल भारत की असली राष्ट्रीय हॉकी टीम की कप्तान ममता खरब के साथ ऑनलाइन थे. ममता कह रही थी कि जब भी राष्ट्र गान बजता है तो लगता है कि हम ही जीतेंगे. मैं जब फ़िल्म देखने गया तो दूसरे फ़िल्म हॉलों की तरह पिक्चर यहाँ भी हाउसफ़ुल थी.लोग फ़िल्म से बहुत जुड़ाव महसूस कर रहे थे? (प्रीति) ख़ासकर वो अंतिम 20 मिनट जब हमारे मैच शुरू होते हैं. मुझे कुछ लोगों ने फ़ोन करके कहा कि उन्हें ऐसे लग रहा है जैसे वो किसी स्टेडियम में बैठकर मैच देख रहे हों. (विद्या) मुझे एक अंकल-आंटी ने अंतिम गोल बचाने के लिए धन्यवाद दिया. तब लगा कि लोग फ़िल्म से कितना जुड़ाव महसूस कर रहे हैं. लोगों को पता है कि यह एक फ़िल्म है और ऐसा ही होना है फिर भी लोग कितना रोमांचित हैं फ़िल्म को लेकर. (बिंदिया) जब हम लोग दुबई में फ़िल्म के प्रीमियर के लिए गए हुए थे तो फ़िल्म के दौरान एक आदमी कहता है कि कितनी बुरी औरत है क्योंकि मैं अपनी एक खिलाड़ी को धोखा देती हूँ और जब मैंने टीम की तरफ़ से गोल किए तो लोगों ने खड़े होकर मेरे सम्मान में ताली बजाई. लोग सोच रहे थे कि ये लड़कियाँ एक दूसरे को गेंद क्यों नहीं पास कर रहीं. वैसे ही लोग सोच रहे थे कि ये लड़की कब सुधरेगी, ठीक है ये सीनियर खिलाड़ी है लेकिन इसको बुद्धि आ जाए. इससे पता लगता है कि अगर अच्छी फ़िल्म बनी हो तो वो लोगों को कैसे अपने साथ जोड़ लेती है? (प्रीति) जब अंतिम मैच में कोमल मुझे गेंद देती है और कहती है कि जा दिखा दे तो सबकी आँखें गीली हो जाती हैं. प्रीति, आपकी असल ज़िंदगी में भी क्या कोई ऐसा आदमी है जिसे आप कुछ दिखाना चाहती हैं. जानती हैं हम लोग ये भी सोच रहे थे कि ये खिलाड़ी कौन हो सकता है? नहीं. बिंदिया मेरा मानना है कि सबसे मज़बूत चरित्र आपका था. क्या आपने इसके लिए कोई तैयारी की थी? हमें इतना समय मिल गया कि हम अपने अंदर सुधार कर सके. एक साल का समय कम नहीं होता. जब शूटिंग पूरी हुई तब तक मैं असल ज़िंदगी में भी बिंदिया की तरह ही हो गई. सब लोग एक तरफ़ बैठते थे और मैं सड़ा सा मुँह लेकर एक जगह बैठने लगी थी. आपकी पसंद का एक और गाना. जयदीप साहनी की फ़िल्म का एक गाना है ये दुनिया ऊट पटांगा... विद्या, आपकी पसंद का एक और गाना. ओंकारा फ़िल्म का ओ साथी रे... मीठी आवाज़ वाली बिंदिया आप एक गाना और बता दीजिए. फ़िल्म ‘हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी’ का गाना है बावरा मन... विद्या आप टीम की कप्तान थीं. टीम में आपका पसंदीदा खिलाड़ी कौन था? (प्रीति और बिंदिया) इसका पसंदीदा खिलाड़ी टीम का कोच था. (विद्या) मैंने विद्या के चरित्र को ऐसे समझा कि वो एक आम भारतीय लड़की है जिसको अंतिम मौका मिला है अपने आपको साबित करने का. वो घर में झगड़ नहीं सकती. वो समझती है कि ये कोच कुछ अलग तरीके से ज़रूर सोचता है लेकिन टीम को अंतिम पड़ाव तक ले जा सकता है. बिंदिया आपको कौन पसंद था? मुझे मेरा, गुंजन लखानी और आलिया वाला ग्रुप अच्छा लगता था. लेकिन एक दर्शक के तौर पर कोमल चौटाला सबसे अच्छी लगती है और उसके बाद प्रीति सबरवाल अच्छी लगती है. कोमल में गजब का अल्हड़पन है और उसका चेहरा भी बहुत भोला है. मुझे एक फ़ोन आया और किसी ने मुझसे पूछा कि कोमल चौटाला फ़िल्म कलाकार है या हॉकी खिलाड़ी. प्रीति सबरवाल, आपका पसंदीदा खिलाड़ी? अगर कोमल चौटाला नहीं होती तो मेरे चरित्र में जान न आ पाती. मेरी एक लड़के के साथ एक कहानी चल रही थी लेकिन दूसरी कहानी कोमल के साथ थी जिसमें मैं अपनी चिढ़ कोमल पर निकालती हूँ. वही मेरा पसंदीदा चरित्र है.
प्रीति क्या आप सच में ऐसी हैं या टीम भावना के साथ रहने वाली हैं? (बिंदिया और विद्या) ये सबके साथ मिलकर रहने वाली लड़की है. आपकी पसंद का एक गाना. (विद्या) देवानंद की फ़िल्म ‘हमदोनों’ का गाना है अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं... कैसा लग रहा है इतनी सफलता मिलने के बाद. क्या कुछ बदल गया? (प्रीति) हम तो वैसे ही हैं. बस लोगों का रवैया बदल गया है. बहुत अच्छे से व्यवहार कर रहे हैं. लोग मिलकर कहते हैं कि हमने अच्छा काम किया. (बिंदिया) काफ़ी कुछ बदल गया है. पहले मेरी फ़िल्म रिलीज़ होने पर कोई फ़ोन नहीं आता था मुझे लेकिन अब तो बहुत फ़ोन आते हैं. मेरा तो फ़ोन घिस गया है. फ़िल्म में हमारी भूमिका ऐसी है कि लोगों को हमसे मिलने में झिझक भी नहीं होती. मैं उनके साथ बैठकर फ़िल्म देख सकती हूँ. वो आकर कहते हैं कि बहुत अच्छा काम किया है हम लोगों ने. विद्या आपका क्या कहना है? जैसा बिंदिया ने कहा कि फ़ोन बजना बंद नहीं हुआ है. बहुत अच्छा लगता है कि जब लोग कहते है कि आपने अच्छा काम किया है और वो हमें आगे भी काम करते हुए देखना चाहते हैं. प्रीति आपकी पसंद का एक और गाना. एक बार शूटिंग के दौरान दोपहर के खाने के बाद हम बैठे थे. तब तय हुआ कि हर आदमी एक आदमी गाना सुनाएगा. मैं परेशान हो गई. मैं हमेशा गाना सुनाने के नाम पर परेशान हो जाती हूँ. लेकिन किसी तरह बिंदिया को पकड़कर मैंने ..कभी-कभी मेरे दिल में ख़याल आता है...गाना गया था. |
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