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रविवार, 16 सितंबर, 2007 को 00:30 GMT तक के समाचार
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कैलाश खेर के साथ 'एक मुलाक़ात'

कैलाश खेर-फ़ाइल फ़ोटो
कैलाश खेर अपने पहले ही गाने अल्लाह के बंदे... से ही लोकप्रिय हो गए थे
बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'एक मुलाक़ात' में हम भारत के जाने-माने लोगों की ज़िंदगी के अनछुए पहलुओं से आपको अवगत कराते हैं.

एक मुलाक़ात में आज हमारे साथ हैं एक ऐसी शख़्सियत जिनकी आवाज़ का जादू पूरे देश में सिर चढ़कर बोल रहा है. जिन्होंने एक से एक बढ़िया, दिल को छू लेने वाले गाने हाल के दिनों में गाए हैं और वे आज की तारीख़ में भारत के सबसे लोकप्रिय गायकों में से एक हैं. हमारे बीच हैं मशहूर गायक कैलाश खेर.

आपकी आवाज़ ऐसी लगती है जैसे ये सीधे दिल और आत्मा से निकल कर आ रही हो. कैसे पाई ये आवाज़ आपने?

आवाज़ तो कुदरत की देन होती है. लेकिन ज़िंदगी से बहुत प्रेरणा मिली है. ज़िंदगी में बहुत थपेड़े खाए हैं. बहुत अनुभव लिए हैं. जिस तरह दूध को मथने पर मक्खन और छाछ अलग हो जाता है कुछ उसी तरह मेरा जीवन रहा है. इतने अनुभवों के बाद अब जो बचा है वो आत्मा से जुड़ा हुआ है. इसीलिए जब मैं गाता हूँ तो लगता है कि बिल्कुल आत्मा से गा रहा हूँ. मेरी ज़िंदगी के खट्टे-मीठे अनुभवों का निचोड़ मेरे गाने में दिखता है.

ऐसा लग रहा है जैसे आपकी ज़िंदगी के खट्टे-मीठे और सुख-दुख के अनुभवों में खट्टे और दुख भरे अनुभव अधिक हैं?

ऐसी बात नहीं है. किसी भी आदमी की ज़िंदगी में दुख थोड़ी देर के लिए भी आए तो ज़्यादा लगता है. लेकिन मैं दुख और सुख को बराबरी से लेता हूँ. पिछले साल मेरा एलबम ‘कैलाशा’ आया तो उसी समय मैं बहुत बीमार पड़ गया था. मुझे एआर रहमान के साथ का एक शो छोड़ना पड़ा जो अमरीका में हो रहा था. रहमान मुझसे फ़ोन करके पूछते हैं कि क्या तुम सच में बीमार हो या आना नहीं चाहते. मुझे लगा जब आपका समय होता है तो हर तरफ़ आपके नाम की लूट मची होती है. नहीं तो कोई पूछने भी नहीं आता.

मुझे तो लगता है कि आप गायक होने के साथ-साथ दार्शनिक भी हैं?

ऐसा नहीं है. बस जैसे आपके अनुभव रहे होते हैं वैसा ही आप बोलना शुरू कर देते हैं.

आपकी पसंद का एक गाना बताइए.

चली चली रे पतंग चली चली रे...और ज़िंदगी है क्या मेरी जान...

कैलाश खेर-फ़ाइल फ़ोटो
कहते हैं कि कैलाश खेर की गायकी में एक 'हीलिंग टच' है

आपकी किस्मत कैसे बदली?

मैं मेरठ का रहने वाला हूँ और यहीं दिल्ली के मयूर विहार में पला बढ़ा हूँ. मेरे माता- पिता आज भी वहीं रहते हैं. मेरी पढ़ाई भी यहीं से हुई. मैंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्राचार के माध्यम से पढ़ाई की और साथ ही संगीत भी सीखता रहा. संगीत भारती, गंधर्व महाविद्यालय जैसे संस्थानों से मैंने संगीत सीखा. लेकिन मैं यहाँ यह भी कहना चाहता हूँ कि संगीत ऐसी चीज़ है जो आपको कोई भी संस्थान सिखा नहीं सकता. संगीत जन्म के साथ आता है. बस आपको उसे पालना-पोसना होता है.

आपको कब पता चला कि आपके अंदर एक गायक मौजूद है?

मैं बचपन से ही फ़िल्म संगीत की जगह कुछ दूसरी ही तरह का संगीत सुना करता था. जो देश के विभिन्न अंचलों में गाया जाता है. जिस पर लोगों का बहुत ध्यान नहीं जाता. भारत के ही बहुत से लोगों को पता नहीं होगा कि छत्तीसगढ़ का लोक संगीत क्या है? मालवा में कौन सा संगीत बजता है? लांगा और मांगड़ियार कौन हैं?

मैं ऐसे संगीत की ललक में रहा हूँ. दुनिया में जो कोई कुछ टेढ़ा करता है या तो वो आउट हो जाता है या सुपर हिट हो जाता है. मैं भी टेढ़े वालों की लाइन में था. बाबा ने मुझे प्रवेश करने का टिकट दे दिया और बस बात बन गई.

आपके संघर्ष के दिनों का सबसे क़रीबी साथी कौन था जो आपके लिए हमेशा खड़ा रहता था?

मुझे लगता है कि वो साथी है परमात्मा जिसने मुझे हमेशा सहारा दिया है. मेरा परिवार जिसने मुझे ऐसे समय में समझा और साथ दिया जब मैं समाज में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा था. माँ आपको ऐसा हौसला देती है जो आपको ताक़त देता है. भाई महेश और बहन नूतन का भी बहुत सहयोग रहा.

 किसी भी आदमी की ज़िंदगी में दुख थोड़ी देर के लिए भी आए तो ज़्यादा लगता है. लेकिन मैं दुख और सुख को बराबरी से लेता हूँ. पिछले साल मेरा एलबम ‘कैलाशा’ आया तो उसी समय मैं बहुत बीमार पड़ गया था. मुझे एआर रहमान के साथ का एक शो छोड़ना पड़ा जो अमरीका में हो रहा था. रहमान मुझसे फ़ोन करके पूछते हैं कि क्या तुम सच में बीमार हो या आना नहीं चाहते. मुझे लगा जब आपका समय होता है तो हर तरफ आपके नाम की लूट मची होती है. नहीं तो कोई पूछने भी नहीं आता

आपकी पसंद का एक और गाना?

एआर रहमान और नुसरत फ़तह अली ख़ान साहब की ‘गुरूज़ ऑफ़ पीस’ नाम की एक एलबम आई थी. महबूब भाई के बोल थे. उसका गाना था चंदा सूरज लाखों तारे हैं जब तेरे हैं ये सारे, किस बात पर होती हैं ये तकरारें...

आपको कब लगा कि आपकी आवाज़ औरों से अलग है?

जब मैं संगीत सीखने लोगों के पास गया तो उनका कहना था कि मेरी आवाज़ अच्छी नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर मैं संगीत के क्षेत्र मे आना ही चाहता हूँ तो कुछ बजाना सीखूँ और गाने का इरादा छोड़ दूँ. मैंने बहुत दिन तक बजाना सीखा. कभी दो साल तक गिटार सीखता रहा. कभी तबला सीखा. लेकिन कुछ सीख नहीं पाया.

लेकिन जुनून था कि गाना सीखना है.

मैं सुनने वालों में अपने को बहुत अच्छा मानता हूँ. जिस तरह का संगीत मैं सुनना चाहता हूँ और सुनता हूँ. उसे सुनने वाले मेरी मानसिकता के अगर चार लोग भी हों तो वो भी बहुत है.

ये कौन सी मानसिकता है?

ऐसे लोग जो संगीत को मनोरंजन का साधन मानने के साथ-साथ आत्मचेतना का साधन मानते हैं. संगीत आपके जीवन में नौ रसों का संचार करा देता है. मृत को अमृत बना देता है.

कई लोग ऐसा कहते हैं आप जिस तरह का संगीत गाते हैं उसमें एक ‘हीलिंग टच’ है. अगर आदमी सुन ले तो उसे बहुत राहत मिलती है?

हाँ, ये बिल्कुल सही बात है. मुझे न्यूयॉर्क में एक डॉक्टर मित्र ने बताया कि दुनिया में ऐसे कई रोग हैं जिनका इलाज सिर्फ़ संगीत से हो सकता है. उन्होंने मुझे इस बात के लिए बधाई भी दी कि मेरा संगीत कुछ उसी तरीक़े का है. मेरे संगीत में संगीत और शब्दों का ऐसा सामंजस्य होता है कि लगता है जैसे आपको कोई बुला रहा है.

तो अपनी तरह के संगीत से कोई गाना बताएँ.

मेरा नया एलबम आया है ‘कैलाशा झूमो रे’. उसमें एक गाना है. जो एक सूफ़ी-रोमांटिक गाना है. सइयाँ, तू जो छू ले प्यार से, आराम से मर जाऊँ...आ जा चंदा बाँह में तेरे में गुम हो जाऊँ...

आप सूफ़ी संगीत अधिक गाते हैं. तो सूफ़ी संगीत गाने का फ़ैसला कैसे लिया?

मैं पहले शास्त्रीय संगीत सीखता था. मुझे लगा कि मैं शास्त्रीय संगीत ठीक से नहीं सीख पाऊँगा. मैं ऐसा कोई युवा शास्त्रीय संगीतकार नहीं जानता था जिसने अपनी जवानी में ही शास्त्रीय संगीत के माध्यम से दुनिया में बहुत नाम कमाया हो. इसमें बूढ़ा होना पड़ता है. बूढ़ा होने पर ही नाम के आगे पंडित और उस्ताद लगता है. ये राह मुझे बहुत कठिन लगी. मैं एक मध्यम वर्गीय परिवार से आता हूँ. मेरी अपनी ज़िम्मेदारियाँ थीं. पढ़ाई करने के बाद माता-पिता के सामने अपने आपको सिद्ध भी करना था कि मैं भी कुछ कर सकता हूँ. इन सभी परिस्थितियों को मैंने समझा और संगीत की इस विधा में गाना शुरू किया.

आप इन बंधनों को साथ लेकर सफल हुए या इन बंधनों को तोड़कर?

मैं इन बंधनों के साथ सफल हुआ. मैंने संगीत सुनते समय इन सभी चीज़ों का ध्यान रखा. इसलिए जब अपना रास्ता चुना तो बीच का रास्ता चुना. बीच के रास्ते में मैंने आध्यात्म का रास्ता चुना. लेकिन आध्यात्म जनता के बीच जाकर धार्मिक हो जाएगा और मैं भजन गायक हो जाऊँगा. पिता जी निर्गुणी भजन गाते थे. निर्गुण ही सूफ़ी संगीत है. मैंने भी अपने संगीत का स्वाद ऐसा ही बना लिया. मैं ऐसे गाने लगा जिनमें बात भी कही जाए और मनोरंजन भी हो. फिर मैंने कुमार गंधर्व, पंडित पलुस्कर, पंडित ओंकारनाथ ठाकुर, उस्ताद अमीर ख़ान के गाने सुने. आधुनिक संगीत और तकनीक के साथ सूफ़ी संगीत वाला फ़ॉर्मूला काम कर गया. मेरा पहला एलबम बहुत सफल रहा और दूसरे एलबम की भी रिपोर्ट अच्छी ही है.

आपकी पसंद का एक और गाना हो जाए.

मेरे ही एलबम का गाना है. तूने क्या कर डाला, मैं तो हो गई तेरी दीवानी...

आप पूरी तरह से डूबकर गाते हैं.

मैं तुकबंदी करके नहीं लिखता. परमात्मा के आशीर्वाद से शब्द अंदर से आते हैं. सबसे पहले मैं उसे फ़ोन में रिकॉर्ड कर लेता हूँ. मेरे एलबम का ‘सइयाँ’ गाना बहुत हिट हुआ है. दलेर मेंहदी ने फ़ोन करके कहा कि इस समय आप पर परमात्मा की पूरी कृपा है. आप संगीत में पूरी तरीके से डूबे हुए हैं. आपने बहुत सुरीला गाना गा दिया है.

आप गाने लिखते भी हैं, उसमें संगीत भी देते हैं और गाते भी हैं?

मैं आपको बताना चाहूँगा कि मेरे गाने के बोल जैसे मेरे दिन ख़ुशी से झूमें, गाए रात...में एकत्व का बोध है. इसमें प्रेमी और ईश्वर का पता ही नहीं चलता. दोनों एक से लगते हैं.

कैलाश खेर-फ़ाइल फ़ोटो
कैलाश खेर की गायकी को विदेश में भी ख़ासा सम्मान मिल रहा है

आपको सबसे पहला ब्रेक कब मिला?

मैं अपनी एलबम रिकॉर्ड कराने मुंबई गया था. वहाँ मुझे नरेश-परेश नाम के दो कंपोज़र मिले. उनके साथ मिलकर मैंने गाने रिकॉर्ड किए. लेकिन मेरे पास इतने पैसे नहीं थे कि मैं अपना एलबम प्रोड्यूस कर पाता. इसलिए मेरा एलबम नहीं निकल पाया. लेकिन नरेश-परेश ने मेरे रिकॉर्ड गानों को कई लोगों को सुनावाया. लोगों ने बहुत तारीफ़ की और मुझे विज्ञापनों में गाने का मौका मिला. मेरे शुरू के विज्ञापन ही बहुत चले. फिर विशाल-शेखर ने मेरी आवाज़ सुनी और मुझे ट्रायल के लिए बुलाया. वो गाना था अल्ला के बंदे...वो फ़िल्म का गाना जब एक साल बाद बाज़ार में आया तो बहुत लोकप्रिय हुआ और उसे बहुत से पुरस्कार वगैरह मिले और मैं अपने आपको थोड़ा-बहुत स्थापित कर सका.

आपको लगा था कि इस गाने से आप इतना मशहूर हो जाएंगे?

नहीं. मुझे तो लगा बस रिकॉर्ड करके भूल जाएंगे. और ये गाना कभी बाहर भी नहीं आएगा. क्योंकि मैंने सोचा फ़िल्म के गाने में बहुत से इंस्ट्रूमेंट और बड़े कलाकार होते हैं. एक गिटार पर गाया गाना कैसे फ़िल्म में जगह बना पाएगा. इसमें तो अरशद वारसी नाम का कोई आदमी है. मुझे कुछ पता ही नहीं था.

उसके बाद आपको और मौके मिले?

जब ये गाना बाहर भी नहीं आया था तभी फ़िल्म इंडस्ट्री के लोगों के बीच मेरा नाम हो चुका था. इस गाने के बाद आम जनता के बीच मैं मशहूर हुआ. मैंने एआर रहमान, आदेश श्रीवास्तव के साथ गाने रिकॉर्ड करने शुरू कर दिए थे. फिर धीरे-धीरे गाने सामने आए. देव, स्वदेस, मंगल पांडे के गाने आए और ख़ूब चले. लोगों को लगा कि ये सिर्फ़ एक गाने में कमाल दिखाने वाला सामान नही है. ये टिकने वाला सामान है.

आपका पसंदीदा संगीतकार कौन हैं?

शंकर-अहसान-लॉय, विशाल-शेखर, विशाल भारद्वाज बढ़िया काम कर रहे हैं. आजकल सलीम-सुलेमान भी बड़ा दबंग संगीत देर रहे हैं. नरेश-परेश भी मुझे बहुत पसंद हैं जिन्होंने मेरे दोनों एलबम बनाए. आज इन एलबमों के सभी गानों की मांग सिर्फ़ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बहुत होती है.

आपने जो भी फ़िल्मी गाने गाए हैं उनमें आपका सबसे पसंदीदा गाना कौन सा है?

मंगल पांडे फ़िल्म का गाना है. गाने में हमें दिखाया भी गया था. वो गाना है तेरा दीवाना हूँ मौला, तेरा परवाना हूँ मौला...

आपको मंगल पांडे में दिखाया गया, कॉरपोरेट में भी पर्दे पर दिखाया गया था. आपका अभिनय करने का मन नहीं करता?

नहीं, बिल्कुल नहीं. परमात्मा हमेशा से कुछ न कुछ करवा ही रहा है. मेरा तो मानना है कि जब से मैं आया हूँ तब से परमात्मा ही सब कुछ करवा रहे हैं और हम कठपुतली की तरह करते जा रहे हैं. जो हो रहा है वो मैं देख पा रहा हूँ बस. अभी हमारा एक वीडियो बना बमबबमबम...इसमें हम एक हाथ में डमरू लेकर नाच रहे हैं. शेखर सुमन ने कहा कि आप तो बिल्कुल शिव की तरह नाच रहे थे. लोगों को बहुत आश्चर्य हुआ.

आप इन लोगों को गंभीरता से तो नहीं लेते कि सच में ही मैं शिव हो रहा हूँ.

नहीं. अगर आप जागरुक हैं तो किसी और को बहुत गंभीरता से लेने की ज़रूरत है ही नहीं. मेरे लिए शिव सिर्फ़ एक धर्म के देवता नहीं हैं. वो मानवता के देवता हैं. दुनिया में कौन क्या कह रहा है पहले मैं उसकी बोलने की शक्ति को पहचानता हूँ. हम शब्दों के पार की स्थिति जानते हैं. कोई कुछ भी बोले मैं होश में हूँ. मेरा जो ये गाना बममबम है इसके माध्यम से मैंने अपने देश के गीत, संगीत और कला की परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की कोशिश की है. इस गाने में पार्वती शिव से ख़ुद को स्वीकार करने का आग्रह करती हैं.

 अगर आप जागरुक हैं तो किसी और को बहुत गंभीरता से लेने की ज़रूरत है ही नहीं. मेरे लिए शिव सिर्फ़ एक धर्म के देवता नहीं हैं. वो मानवता के देवता हैं. दुनिया में कौन क्या कह रहा है पहले मैं उसकी बोलने की शक्ति को पहचानता हूँ. हम शब्दों के पार की स्थिति जानते हैं. कोई कुछ भी बोले मैं होश में हूँ. मेरा जो ये गाना बममबम है इसके माध्यम से मैंने अपने देश के गीत, संगीत और कला की परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की कोशिश की है. इस गाने में पार्वती शिव से ख़ुद को स्वीकार करने का आग्रह करती हैं

आप इस गाने में कुछ अनूठी बात बताने वाले थे.

पॉल एकनफ़ोर्ड दुनिया के बहुत मशहूर डीजे हैं. उन्होंने माइकल जैक्सन और मैडोना जैसे कलाकारों के गाने प्रोड्यूस किए हैं. उन्होंने तेरी दीवानी...और ये गाना सुना तो बहुत ख़ुश हुए. अब वो मेरे गानों का रिमिक्स बनाने की कोशिश कर रहे हैं. भारत में अगर आप विदेश में सम्मानित होते हैं तो इस देश के लोग आपको और भी सम्मान से देखते हैं.

आपकी जो नई एलबम आई है उसका थीम क्या है?

मेरी नई एलबम का नाम ‘कैलाशा झूमो रे’ है. हमने इसमें प्यार और प्यार के जुनून को उकेरने की कोशिश की है. ऐसे गाने हैं जिसमें सिर्फ़ झूमना है.

आपका पसंदीदा कौन है?

दो गाने मुझे अधिक पसंद हैं. सइयाँ...और छाप तिलक सब छीनी...

आपको बॉलीवुड से जुड़े अब अच्छा-ख़ासा वक़्त हो चुका है. आपके हिसाब से फ़िल्मी दुनिया की एक अच्छाई और एक बुराई क्या है?

भारत की पूरी मूलभूत संस्कृति को एक धरातल पर उकेर कर दुनिया के सामने रख देना कोई सामान्य बात नहीं है. मगर हमें बॉलीवुड में ऐसा देखने को मिलता है. पूरी दुनिया में लोग आज बॉलीवुड को जानते हैं. आज बॉलीवुड एक पहचान बन चुका है. बॉलीवुड भारत-दर्शन करने के समान है.

इसकी बुराई क्या है?

जब आप बहुत मशहूर हो जाते हैं तो ऐसे बहुत से लोग मिल जाते हैं जो आपके अच्छे-बुरे का विश्लेषण करने लगते हैं. बॉलीवुड बहुत मशहूर है. यही इसकी बुराई है.

आप पूरी दुनिया में जाते रहते हैं. आपकी सबसे पसंदीदा जगह कौन सी है?

लोनावला. वहाँ हम जिस जगह जाते हैं वो बहुत ही प्यारी है. मुझे बहुत अच्छा लगता है.

लगता है ये कोई ख़ास जगह है जहाँ आप कुछ ख़ास लोगों के साथ जाते हैं?

हमारे एक दोस्त हैं अनिल पांडे. जिन्होंने सूरज हुआ मध्धम...गाना लिखा था. वो खंडाला में एक कुटी बनाकर रहते हैं. वहाँ हम गुफाओं में भी जाते हैं. बारिश के दिनों में तो वहाँ पहाड़ों से झरने गिरते दिखाई देते हैं.

आपकी पसंदीदा फ़िल्में कौन सी हैं?

मुझे फ़िल्में देखने का समय कम ही मिला. मैं अपने करियर को लेकर ही जूझता रहा. मैंने 12 साल की उम्र में ही घर छोड़ दिया था. मैंने 26 साल की उम्र आते-आते दिल्ली में क़रीब 20-22 घर बदले थे. अभी मैं 32 साल का हूँ. मुझे कुछ शौक़ करने का मौका ही नहीं मिला. अब मुझे ये चीज़ें समझ में अधिक आती हैं. लोग भी मुझे अब ‘हाई सोसाइटी’ में गिनते हैं. मैंने तो अपने को बदला नहीं. मैं हैरान होता हूँ कि देखो लोग समय के साथ कैसे बदल जाते हैं.

आप समय के साथ कितना बदले हैं?

मैं इतना बदला हूँ कि अब सोचता हूँ कि गहरी बातों पर ही अधिक सोचा जाए क्योंकि समय कम है. अब मैं सार्वजनिक जीवन का व्यक्ति हो चुका हूँ तो इसलिए सोचता हूँ कि कहीं मेरी वजह से किसी का दिल न दुख जाए.

आपकी पसंद का एक और गाना.

जावेद अख़्तर और नुसरत फ़तह अली ख़ान साहब का एक एलबम आया था ‘संगम’. उसका एक गाना है जिस्म दमकता, जुल्फ़ घनेरी.

ऐसी कोई फ़िल्म जिसने आप पर बहुत छाप छोड़ी हो?

कई फ़िल्में हैं. आमिर ख़ान साहब की ‘लगान’ है. मैं आमिर ख़ान के साथ ‘मंगल पांडे’ की शूटिंग कर रहा था. मैंने उनसे कहा कि मैंने आपकी कोई फ़िल्म नहीं देखी है. लेकिन ये जानता हूँ कि आप बहुत बेहतरीन इंसान और अभिनेता हैं. अपनी कोई फ़िल्म बताइए जो मैं ज़ल्दी से देख सकूँ. अगले दिन ही वो मेरे लिए लगान की डीवीडी ले आए. मैंने लगान 10-12 बार देखी और हर बार हिल गया. फ़िल्म के हर अभिनेता ने बहुत बढ़िया अभिनय किया है. एक फ़िल्म देखी थी ‘अब तक छप्पन’. उसमें मुझे सभी की एक्टिंग बहुत अच्छी लगी. ‘सरकार’ भी मुझे बहुत अच्छी लगी. मुझे ऐसी फ़िल्में बहुत अच्छी लगती हैं जिनमें सहजता के साथ अभिनय किया गया होता है.

आपने 26 साल तक संघर्ष किया. आपको क्या लगता है कि ज़िंदगी कितनी बदली है?

अब यही पता नहीं लगता कि कितना बदल गया. चार-पाँच साल से समय ही नहीं है. सभी तरफ से डिनर का अवसर मिल रहा है. अभी फ़्राँस के दूतावास ने अमिताभ जी को सम्मानित किया. भारत से गिने-चुने लोगों को बुलाया गया था. मैं भी शामिल था. लेकिन मैं नहीं जा पाया. फ़ोन करने राजदूत साहब से माफी मांगी. मैं उस दिन दिल्ली में था. परमात्मा ने डिनर का अवसर तो दिया लेकिन व्यस्त भी कर दिया.

आज आपके पास पैसा भी है. पैसे होने और नहीं होने से ज़िंदगी में कितना फ़र्क पड़ता है?

बहुत फ़र्क होता है. लल्लू और लालाराम में बहुत अंतर होता है. लोग सम्मान करने लगते हैं. बदलाव को मैं महसूस कर रहा हूँ.

मज़ा कर रहे हैं?

हाँ. संगीत क्षेत्र ही ऐसा है जिसमें आप भी मज़े करते हैं और आपके साथ जनता भी. कोई भी अपने काम से उतना अधिक उत्तेजित नहीं दिखता.

अपने समय के गायकों में आपको सबसे अधिक पसंद कौन है?

शंकर महादेवन और सोनू निगम का गाना पसंद आता है. फिर किसी-किसी का कोई-कोई गाना पसंद आता रहता है.

अगर मैं कहूँ कि आप अपना पसंदीदा को-सिंगर बताइए तो आप किसका नाम लेंगे?

ये कभी सोचा नहीं है. लेकिन मैं एआर रहमान के साथ गाना चाहता हूँ. उसमें संगीत के स्तर पर कुछ कमियाँ भी हों लेकिन वो पूरे दिल से गाते हैं. जो लोग अपनी गायकी में खो जाते हैं. मुझे ऐसे लोग अच्छे लगते हैं.

आपकी पसंद का एक और गाना?

‘दिल से’ फ़िल्म में एआर रहमान साहब का गाना है जिसे लता जी ने गाया है. जिया जले जान जले...वही सुनवा दीजिए. या फिर मेरी एलबम का सइयाँ… और छाप तिलक सब छीन ली… बजा दीजिए.

आप प्रेरणा कहाँ से पाते हैं?

सबसे अधिक प्रकृति से प्रेरित होता हूँ. उसके बहुत से रूप हैं. वो हमारे बीच पेड़, तूफान, बाढ़ आदि बनकर आती है.

जीवन के किसी भी क्षेत्र में संघर्ष कर रहे लोगों के लिए आपका क्या संदेश है?

उनसे मैं कहना चाहूँगा कि इस क्षेत्र में क़दम में रखने से पहले अपने आपको टटोल लें. ‘हारिए न हिम्मत, बिसारिए न राम’ का जाप करते हए आगे बढ़ें. जेल लगाकर, फटी जींस पहनकर कोई कलाकार नहीं बना जाता. जो दाना गलता है वही फल बनता है.

आपको अब तक सबसे दीवाना प्रशंसक कौन मिला?

एक कार्यक्रम के दौरान एक लड़की मिली जो कहने लगी कि अगर उसे मुझसे नहीं मिलवाया गया तो वो अपनी कलाई की नसें काट लेगी. मैं ये सुन रहा था. उससे तुरंत आकर मिला और कहा कि आगे से ऐसा मत कहना.

तो उस कलाई वाली लड़की से मुलाक़ात जारी है?

नहीं.

संगीत के अलावा किन चीज़ों से प्यार है?

मैं लिखता हूँ. मुझे चेहरे पढ़ने की बहुत आदत है. मैं लोगों की हरकतें देखता हूँ. लोग अख़बारों के आदी हो गए हैं वरना चेहरों पर क्या नहीं लिखा होता.

आपको अजीब नहीं लगता कि पहले संघर्ष करो, फिर ज़िम्मेदारी निभाओ.

यही सच है साहब. यही ज़िंदगी का निचोड़ है.

आपकी शादी हो चुकी है?

नहीं मेरी शादी अबतक नहीं हुई है. इस बारे में घर के बड़े ही सोचते हैं.

आपकी पसंदीदा अभिनेत्री?

मुझे रानी मुखर्जी की फ़िल्में अच्छी लगती हैं.

आपकी आने वाली फ़िल्में कौन सी हैं?

मैं जिन फ़िल्मों में गाने गा रहा हूँ वो हैं आ जा नच ले, तेरा नाम, भूलभुलैया और वनटूथ्री.

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