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सुनिधि चौहान के साथ 'एक मुलाक़ात' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी हिंदी सेवा के विशेष कार्यक्रम 'एक मुलाक़ात' में हम भारत के जाने-माने लोगों की ज़िंदगी के अनछुए पहलुओं से आपको अवगत कराते हैं. एक मुलाक़ात में हमारी मेहमान हैं आज के दौर की बहुत ही सफल पार्श्व गायिका सुनिधि चौहान. आप तो इतनी कम उम्र की लग रही हैं, मैंने ऐसा सुना है कि आप बहुत छोटी उम्र से गाने गा रही हैं. मैने चार साल की उम्र से गाना शुरू कर दिया था. लेकिन फ़िल्मों में 11 साल की उम्र में गाना शुरू किया. अभी 14 साल की हैं आप? अभी 23 साल की हूँ मैं. आपको कब पता लगा कि आप गा सकती है? मैं तो डांस में अधिक रुचि लेती थी. लेकिन मेरे मम्मी-पापा और उनके दोस्तों को लगा कि मैं अपनी गायकी में निखार लाकर अच्छी गायिका बन सकती हूँ. मेरी मम्मी-पापा ने बहुत मेहनत की. आपने सबसे पहले कहाँ गाया? सबसे पहले मैंने एक जागरण में गाया था. माता के सम्मान में दो गाने गाए थे. वहीं से लोगों को लगने लगा कि मुझे दूसरी जगहों पर भी गाना चाहिए. इस तरह मेरी मांग बढ़ती गई. जब कोई बड़े समारोह होते और उसमें बड़े स्टार आते तो मैं दिल्ली की तरफ से गाने वाले गायकों में होती. इन लोगों में मेरी ही उम्र सबसे कम होती थी. इस तरह मेरा काम के रोमांचक शुरूआत हुई. ('एक मुलाक़ात' बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के अलावा, बीबीसी हिंदी – मीडियम वेव 212 मीटर बैंड पर और शॉर्टवेव 19, 25, 41 और 49 मीटर बैंड पर - भारतीय समयानुसार हर रविवार रात आठ बजे प्रसारित होता है. दिल्ली और मुंबई में श्रोता इसे रेडियो वन एफ़एम 94.3 पर भारतीय समयानुसार रविवार दोपहर 12 बजे भी सुन सकते हैं.) फ़िल्मों में गाना कब शुरू हुआ? मैं मुंबई गई थी. वहाँ तबस्सुम जी ने मुझे कल्याण जी भाई से मिलवाया. मैंने उनकी अकादमी में डेढ़-दो साल संगीत सीखा और उस दौरान कई शोज़ किए. फिर कल्याण जी भाई ने मुझे फ़िल्म फ़ेयर पुरस्कार समारोह में गाने का मौक़ा दिया. जहाँ आदेश श्रीवास्तव जी की नज़र मुझ पर पड़ी और उन्होंने मुझे फ़िल्मों में काम दिया. उस समय मेरी उम्र 11 साल थी. क्या गाना गा दिया था उस समारोह में आपने जो आदेश श्रीवास्तव ने आपको ब्रेक दिया? मोरनी बागा में बोले आधी रात मा... मैंने ऐसा भी सुना है कि आप किसी टीवी शो में भी जीती थीं. ये फ़िल्म में गाने से पहले था कि बाद में? पहले. इसके बाद दो-तीन साल मैंने कुछ अधिक नहीं किया. क्योंकि मेरी आवाज़ न बड़े जैसी थी न छोटे बच्चे जैसी. बस कुछ आलाप किए थे. तभी पता लगा कि डीडी वन टीवी चैनल पर एक टैलेंट हंट शुरू हो रहा है जिसके फ़ाइनल में लता जी का आना होगा. मैं लता जी को आज भी पूजती हूँ. मैं उनसे मिलकर, उन्हें छूकर महसूस करना चाहती थी कि कैसा लगता है. मैंने उस कार्यक्रम में हिस्सा लिया. वैसे मैंने दिल्ली के कई शोज़ में हिस्सा लिया था और अब मन नहीं करता था. लेकिन लता जी की वजह से उसमें हिस्सा लिया और प्रतियोगिता जीत भी ली. लता जी के हाथों पुरस्कार लिया. तो आपने उन्हें छुआ? मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं आपको छू सकती हूँ और फिर उन्हें छुआ. मेरी आँखों में आँसू आ गए. उन्होंने मेरे आँसू पोछें और कहा कि जब कभी भी कोई ज़रूरत हो तो मुझे बताना. निधि से सुनिधि कैसे हुआ आपका नाम? कल्याण जी भाई के अकादमी से जो भी लोग निकले सबका नाम ‘स’ से शुरू होता था जैसे साधना सरगम, सोनाली वाजपेयी, सपना मुखर्जी. मेरा नाम भी निधि से सुनिधि चौहान हो गया. संगीत भी ‘स’ से शुरू होता है और सरगम भी ‘स’ से शुरू होती है. आपकी पसंद का एक गाना बताएँ. नई नहीं ये बातें हैं पुरानी कैसी पहली है ज़िंदगानी.... आपका पहला हिट गाना राम गोपाल वर्मा की फ़िल्म ‘मस्त’ से था. हाँ. राम गोपाल वर्मा जी की फ़िल्म थी. संदीप चौटा जी का संगीत था. उनसे मुझे सोनू निगम जी ने मिलवाया था. उससे पहले हीं कुछ भी नहीं थी. इस फ़िल्म से मेरी पहचान बनी. आदेश श्रीवास्तव ने कौन सा गाना गवाया था? ‘शस्त्र’ फ़िल्म का गाना था लड़की दीवानी, देखो लड़का दीवाना...लेकिन गाना चल नहीं पाया. 'मस्त' का कौन सा गाना था? रुकी-रुकी सी ज़िंदगी झट से चल पड़ी... आप बार-बार लता जी की बात कर रही हैं. उन्हें देवी के समान मानती हैं लेकिन आपकी आवाज़ और जिस तरह के गाने आप गाती हैं वो लता जी से अधिक आशा जी के क़रीब लगते हैं. हर आदमी का अपना एक आदर्श होता है. मेरी आदर्श लता जी हैं. पूरी दुनिया उनका लोहा मानती है. वैसे आशा जी के साथ अगर मेरा नाम लिया जाता है तो यह भी बड़ी बात है. मुझे भी सदाबहार गायिका कहा जा सकता है लेकिन आशा जी के साथ तुलना करना ठीक नहीं है. वो बहुत बड़ी गायिका हैं.
आप अच्छी तरह से गाती हैं और साथ ही मंच पर अच्छा प्रदर्शन भी करती हैं. ये कहाँ से सीखा? इसका पूरा श्रेय अपने पापा को देना चाहूँगी. मैं बिल्कुल सीधे खड़ी होकर फ़्रॉक पहनकर गाने गाती थी. मेरे पापा ने मुझे मंच पर हरकत में रहना सिखाया. ये सब बहुत धीरे-धीरे हुआ. मैं स्टेज़ पर बहुत शर्माती थी. मैं घर पर बहन के साथ नाचती गाती थी. पापा ने कहा कि स्टेज़ पर भी किया करो. अब तो सब कुछ बदल गया है. अब तो मैं भूल ही जाती हूँ कि मैं स्टेज़ पर हूँ. अब मैं जब स्टेज़ पर होती हूँ तो एक बंदर और चिड़िया की तरह हो जाती हूँ. मैं अपने आपको महसूस कर पा पाती हूँ. मैं आनंद महसूस करती हूँ. अपने काम में मेहनत के अलावा और क्या ज़रूरी है? फ़ोकस. आपको पता होना चाहिए कि आप क्या कर रहे हैं. आप कहाँ फ़ोकस कर रही हैं? गायकी पर. मैं बीच में भागती रहती हूँ. लेकिन मेरा फ़ोकस गायकी में बना रहता है. यही मेरी ज़िंदगी और प्यार है. मेरा वजूद ही संगीत है. अगर मैं गायिका नहीं होती तो भी गायिका होती. बस छोटी गायिका होती. स्टेज़ पर गाने के साथ परफ़ॉर्म भी करती हैं. कभी मन नहीं करता कि अभिनय भी करूँ? अभिनय का मन तो करता है. दरअसल मेरे पिता अभिनेता थे. उन्होंने 12 साल थिएटर किया है. उनसे बहुत कुछ सीखा है. लेकिन कभी गंभीरता से नहीं लिया. मैं जो कर रही हूँ उससे ख़ुश हूँ. जब मुझे रुचि होगी तो करने लगूँगी. अभी नहीं है. आपको श्रेया घोषाल कैसी लगती हैं? वो बहुत बेहतरीन गायिका हैं. बहुत अच्छा कर रही हैं. आपको उनसे कोई प्रतिद्वंदिता जैसी नहीं लगती? प्रतिद्वंदिता तो होनी ही चाहिए. अगर प्रतिद्वंदिता नहीं होगी तो आप और अधिक अच्छा करने की कैसे सोचेंगे. वैसे मैं और श्रेया घोषाल अलग-अलग तरह के गाने गाते हैं. उनमें जो गुण हैं वो मेरे में नहीं है और जो मुझमें है वो शायद उनमें न हो. इसलिए मेरी और उनकी कोई प्रतिद्वंदिता नहीं है. कोई ऐसा गाना जो किसी और ने गाया हो और आप गाना चाहती हूँ? फ़िल्म ‘ओंकारा’ का गाना है जो रेखा भारद्वाज ने गाया था. लाकड़ जलकर कोयला होय जाए जिया जले तो कुछ न होय न कोयला न राख..जिया न जलइयो रे... अगर आपको इसे बीड़ी जलइले से बदलने के लिए कहा जाता तो बदल लेतीं? अब तो बीती बात हो चुकी है. लेकिन मैं बीड़ी...ही गाती. सोनू निगम के अलावा पुरुष गायकों में से आपको सबसे अधिक पसंद कौन है? केके बहुत पसंद है. शान के कुछ गाने हैं. रूप कुमार राठौर भी अच्छा गाते हैं. उनका अनवर का मौला...गाना बहुत अच्छा था. सुखविंदर को मैं कैसे भूल सकती हूँ. अभी सुखविंदर ने चक दे इंडिया में एक गाना गाया है. वो तो उनके बाएँ हाथ का खेल था. उन्होंने बहुत ही कमाल के गाने गाए हैं.
किस अभिनेत्री के लिए आपकी आवाज़ सबसे अधिक उपयुक्त लगती है? किसी के लिए भी नहीं, क्योंकि मुझे पता है कि मैं गा रही हूँ. पता लग जाता है. हाँ मैं चाहती थी कि मैं माधुरी दीक्षित के लिए गाऊँ. लेकिन जब तक मैं इंडस्ट्री में आई तब तक वो जा चुकी थीं. वैसे मैंने उनके लिए इमामी के विज्ञापन के जिंगल्स गाए थे. मेरी किस्मत अच्छी है. अब मैंने उनके लिए उनकी आने वाली फ़िल्म आ जा नच लै का टाइटल गीत गाया है. आपके सबसे पसंदीदा अभिनेता-अभिनेत्री कौन से हैं? कमल हासन, शाहरुख़ ख़ान, आमिर ख़ान और अमिताभ बच्चन पसंद हैं. माधुरी दीक्षित की बहुत बड़ी प्रशंसक हूँ. रानी मुखर्जी भी पसंद हैं. पसंदीदा फ़िल्में? सदमा, अप्पू राजा, रंग दे बसंती, हे बेबी और अमेडियस. एक दिन में कितनी फ़िल्में देखती हैं? एक दिन में नहीं. हाँ 15 दिन में एक फ़िल्म देख लेती हूँ. अगर आप गायिका नहीं होतीं तो क्या बनतीं? कभी सोचा नहीं. लेकिन शायद खिलाड़ी बनती. चक दे देखने के बाद लगा कि फ़ुटबॉल के बाद मुझे यह खेल अच्छा लगेगा. बहुत बेहतरीन तरीके से महिला हॉकी को पेश किया गया है. हाँ. फ़िल्म के बाद हमारी टीम भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है. आपको इंडस्ट्री से जुड़े इतने साल हो चुके हैं. ये बताइए कि आपको इंडस्ट्री के सबसे अच्छी बात कौन सी लगती है? मुझे तो इंडस्ट्री से जुड़कर मिलने वाली शोहरत बहुत अच्छी लगती है. इसके अलावा कुछ भी नहीं है जो आपको अच्छा लगेगा. ज़िंदगी बहुत कठिन है यहाँ. मेहनत बहुत करनी पड़ती है. लेकिन इस मेहनत के बदले जो फ़ेम मिलती है वो अमूल्य है. तो आपको ठीक ठाक पैसा और नाम मिल गया है? मैं तो जितना सोचती थी उससे कहीं अधिक पैसा और नाम कमा चुकी हूँ. अब जनता का प्यार चाहती हूँ. अब लोगों की मुझसे अपेक्षाएँ बढ़ गई हैं. इसलिए लगता है कि काम को और बेहतर और अलग तरीके से करूँ. आपके अपने गाए गानों में से सबसे पसंदीदा गाना कौन सा है? फ़िल्म ‘माई ब्रदर निखिल’ का गाना है ले चले, ले चले ख़्वाबों के ये काफ़िले... आपको इंडस्ट्री की सबसे ख़राब बात कौन सी लगती है? आलोचना. अगर कोई किसी की ग़लत आलोचना करता है तो वो ठीक नहीं लगता है. वैसे मेरे घर में मेरी बहन ही मेरी सबसे बड़ी आलोचक है. वो मुझे जो कहती है तो मैं उस पर ध्यान देती हूँ. हर बार वो बात ठीक भी निकलती है. लेकिन इंडस्ट्री में लोग बहुत बार फ़ालतू बात करते हैं. लेकिन काम तो करना ही है. इंडस्ट्री के लोग कैसे हैं? कम ही अच्छे लोग हैं. अधिकतर ख़राब हैं. लेकिन कमल कीचड़ में ही खिलता है.
क्या यह बात ठीक है कि एक लड़की के लिए इंडस्ट्री अच्छी जगह नहीं है? हाँ, बिल्कुल. लेकिन मुझे यह सब देखना नहीं पड़ा. क्योंकि मैं बहुत छोटी थी और मेरे पापा मेरे साथ हुआ करते थे. जब तक मैं 15-16 साल की हुई तब तक मेरा नाम हो चुका था. ऐसा क्यों है कि यहाँ ख़राब लोग हैं? ख़राब लोग होंगे तभी तो अच्छे का पता लगेगा. आपको सीख मिलती है. एक बार मुझे एक संगीतकार ने कह दिया कि मैं बहुत ही घटिया किस्म की गायिका हूँ और वापस घर चली जाऊँ. उसकी इस बात को मैंने चुनौती की तरह लिया. और आज मैं उनके लिए भी गाने गाती हूँ. आपको कोई ऐसा प्रशंसक मिला है जो आपको और आपकी गायकी को पागलपन की हद तक पसंद करता हो? एक आदमी है. उसे वो सबकुछ मालूम है मेरे बारे में जो मुझे भी नहीं मालूम. उसे मेरे हर शो के बारे में पता है. उसे ये भी पता है कि मैंने किसी शो में कौन से कपड़े पहने थे और कौन सी लिपिस्टिक लगा रखी थी. ऐसे प्रशंसक होना बड़ी बात है. आप उससे मिलती हैं? नहीं. हाँ लेकिन कभी-कभी बात कर लेती हूँ. आपको सबसे अधिक ज़िंदगी के किन क्षणों में सबसे अधिक रोमांचित किया? ऐसा दो बार हुआ है. न्यूयॉर्क के एक शो में अमिताभ जी के पहले मेरा कार्यक्रम था. मैंने गाना गाया तो लोगों ने खड़े होकर मुझे सम्मान दिया था. उसके बाद अमिताभ जी आए और मुझे गोदी में उठा लिया और कहा अब हम क्या करें भाई. इस लड़की ने तो हम सबकी छुट्टी कर दी. और दूसरी बार जब लता जी के हाथों मुझे सम्मान मिला. और वो क्षण जो सबसे ख़राब लगते हों. याद नहीं. कोई पछतावा. कोई नहीं. |
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