टी20 वर्ल्ड जीतने के बाद बारबाडोस में भारतीय टीम ने क्या-क्या किया

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- Author, विमल कुमार
- पदनाम, ब्रिजटाउन (बारबाडोस) से
आख़िरकार, चैंपियन टीम इंडिया के खिलाड़ियों को बड़ी राहत और खुशी की ख़बर मिल ही गई.
शनिवार को वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम इंडिया के खिलाड़ियों को दो दिन के इतंज़ार के बाद ये ख़बर मिली कि वो यहां के स्थानीय समयानुसार मंगलवार शाम को एक विशेष चार्टड फ़्लाइट में वतन को लौटेंगे.
इसका मतलब ये है कि टीम इंडिया भारतीय समयानुसार बुधवार की रात को भारत पहुंचेगी.
ऐसा माना जा रहा है कि टीम के सभी खिलाड़ी और सपोर्ट स्टॉफ दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में रात बिताएंगे और अगले दिन सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात हो सकती है.
आपको ये बात दें कि 19 नवंबर, 2023 को जब ऑस्ट्रेलिया के हाथों टीम इंडिया वन-डे वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में हार गई थी तो खुद प्रधानमंत्री भारतीय खिलाड़ियों की हौसला अफ़ज़ाई के लिए अहमदाबाद के ड्रेसिंग रूम में पहुंचे थे.

अगले मिशन की तैयारी

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वैसे, सोमवार की रात को हुए टीम इंडिया का ख़ास डिनर सेशन में सभी खिलाड़ियों ने अपने परिवारवालों के साथ मिलकर बीसीसीआई सचिव जय शाह के साथ अपने अनुभव साझा किए.
विराट कोहली को कम ही लोगों ने इससे ज़्यादा खुश शायद पहले कभी देखा होगा.
आलम ये था कि जब वो डिनर के लिए अंदर जा रहे थे तो उनके साथ हुई पांच-सात मिनट की मुलाकात हुई जिसमें वे काफी देर तक मज़ाकिया अंदाज़ में बातचीत करते रहे. ऐसा लग रहा है कि मानो कोहली के ऊपर से एक चट्टान जैसा भार उठ गया है.
रोहित शर्मा भले ही कोहली की तरह एकदम से चहकते तो नहीं दिख रहें है और इसकी वजह ये हो सकती है कि उन्होंने पिछले दो साल में इस सपने को पूरा करने के लिए बहुत ज़्यादा वक़्त और ऊर्जा खर्च की है.
रोहित को देखकर ऐसा लगता है कि वो अभी से ही अगले मिशन की तैयारी में जुट गए हैं.
उनके मन के भाव ऐसे हैं जैसे वो ये कहना चाह रहें हो कि- यार ये तो सिर्फ़ एक शुरुआत है. असली चुनौती अब चैंपियस ट्रॉफ़ी और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप जीतने की है.
ख़ैर, बारबाडोस में हरिकेन के आने की ख़बर ने हर किसी को थोड़ा सचेत कर दिया था और सोमवार दोपहर तक खिलाड़ी होटल के बाहर गए ही नहीं.
राहुल द्रविड़ और रोहित शर्मा

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शाम के वक्त एक-दो खिलाड़ी होटल से बाहर निकलते हुए दिखे.
खिलाड़ियों के लिए राहत की बात ये भी रही कि अब होटल लॉबी में न तो भारतीय प्रंशसको की भीड़ जमा थी और ना ही मीडिया का जमावाड़ा.
संजू सैमसन, यशस्वी जायसवाल, रिंकू सिंह और खलील अहमद जैसे चार खिलाड़ियों को अब ज़िम्बॉब्वे जाना है.
ये चारों खिलाड़ी गुरुवार की शाम को दिल्ली से ही हरारे की फ्लाइट लेंगे जहां पर पहले से ही शुभमन गिल और उनके साथी पहुंच चुके हैं.
साउथ अफ्रीकी टीम भले ही ट्रॉफ़ी नहीं जीत पायी लेकिन उनके सारे खिलाड़ी रविवार को ही कैरेबियाई ज़मीं को छोड़ चुके थे.
यही हाल टीवी कॉमेंटेटर्स और विदेशी पत्रकारों का रहा जो अब तक अपने अपने घर पहुंच चुके हैं.
पिछले दो दिनों में बारबाडोस के हिल्टन होटल में अक्सर राहुल द्रविड़ और रोहित शर्मा को साथ में देखते हुए उनके चेहरे पर खुशी और संतुष्टि के भाव देखने को मिल जाते हैं.
मैदान के बाहर

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द्रविड़ और रोहित ने समंदर किनारे सूर्य कुमार यादव, कुलदीप यादव और विक्रम राठौड़ के साथ रविवार की दोपहर को करीब तीन घंटे साथ साथ बिताए.
पिछले दो साल में ना जाने कितने विदेशी दौरों पर राहुल द्रविड़ को मैदान के बाहर निजी तौर पर इतना वक्त बिताते नहीं कम ही लोगों ने देखा होगा.
एक बात तो तय है कि द्रविड़ के चेहरे पर इस टीम का साथ छूटने की बात भावुक करेगी, ख़ासकर कप्तान रोहित शर्मा के साथ उनकी जुगलबंदी.
रोहित ने निश्चित तौर पर अपने कोच को कम गंभीर और ज़्यादा मुस्कान बिखरेने के लिए मजबूर किया.
ये निश्चित बात है कि रोहित ने द्रविड़ से काफी क्रिकेट की बातें सीखी होंगी लेकिन मैदान के बाहर रोहित के बिंदास नज़रिये और जीवन के प्रति उनके खुले दर्शन ने द्रविड़ जैसे बेहद अनुशासित और एकदम हर समय गंभीर रहने वाली शख्सियत को काफी लचीला बनने में अपना किरदार निभाया है.
ऐसा माना जा रहा है कि इस दो दिन के दौरान बीसीसीआई के सचिव जय शाह ने कप्तान रोहित और विराट कोहली के अलावा कोच द्रविड़ के साथ भी भारतीय क्रिकेट की बेहतरी से जुड़े कई अहम मुद्दों पर उनके साथ गंभीर चर्चा की.
द्रविड़ की फीडबैक
उन्हें ये एहसास है कि भारतीय क्रिकेट में अब बदलाव का दौर शुरू हो चुका है क्योंकि टी-20 फॉरेमट से कोहली, रोहित के अलावा रवींद्र जडेजा ने संन्यास ले लिया है.
इन तीन दिग्गज़ों के अलावा आने वाले दो-तीन साल के अंदर रविचंद्रन अश्विन भी क्रिकेट को अलविदा कह सकते हैं.
और इसके लिए ज़रूरी है कि वक़्त रहते भविष्य के लिए ठोस रोडमैप तैयार हो.
द्रविड़ का कार्यकाल भले ही कोच के तौर पर आधिकारिक तौर पर ख़त्म हो गया हो लेकिन जय शाह उनके अनुभव और उनके सुझावों को काफी अहमियत देते हैं.
वैसे भी, बोर्ड द्रविड़ की फीडबैक को सबसे ज़्यादा तवज्जो देता है.
बहरहाल, चलते-चलते ये ज़रूर बताना चाहूंगा कि बहुत सारे खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टॉफ़ के लिए टूर्नामेंट ख़त्म होने के बाद अलग-अलग तीरके से ब्रेक लने का प्लान था. कुछ खिलाड़ी देर से भारत पहुंचने का मन बना चुके थे.
लेकिन, वर्ल्ड कप की जीत ने और उसके बाद एक साथ दिल्ली जाने की बात ने उनके निजी प्लान को भले ही बदल दिया हो लेकिन खिलाड़ी इससे बेहद खुश हैं और ज़रा सी भी शिकायत की मुद्रा में नहीं हैं.
और शिकायत करें भी तो कैसे क्योंकि उन्हें ये बखूबी एहसास है कि आईसीसी वर्ल्ड नहीं जीतने की कसक एक तरह पांडवों के तेरह साल के वनवास और अज्ञातवास की तरह ही थी.



















