टी-20 वर्ल्ड कप सेमीफ़ाइनलः टीम इंडिया की वो कमज़ोर कड़ी जो पड़ सकती है भारी

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टी-20 विश्व कप-2024 अब लगभग अपने आख़िरी पड़ाव पर है.
सेमीफ़ाइनल के पहले मुक़ाबले में अफ़ग़ानिस्तान दक्षिण अफ़्रीका के सामने बुरी तरह से लाचार दिखा. दक्षिण अफ़्रीका ने महज़ 56 रन पर पूरी टीम को आउट कर दिया और मैच नौ विकेट से अपने नाम कर लिया.
इसके साथ ही दक्षिण अफ़्रीका ने टी-20 के फ़ाइनल में अपनी जगह बना ली है.
अगर सेमीफ़ाइनल में भारत इंग्लैंड को हरा देता है तो दक्षिण अफ़्रीका का फ़ाइनल में सामना करना होगा.
29 जून को इस टूर्नामेंट का फ़ाइनल मैच खेला जाना है.
इंग्लैंड एक ऐसी टीम है, जिसने दो बार इस टी-20 वर्ल्ड कप ख़िताब पर अपना कब्ज़ा जमाया है.
इंग्लिश टीम 2010 और इसके ठीक पिछले टी-20 विश्व कप यानी 2022-23 के खिताब जीत चुकी है. वहीं भारत ने इस फॉर्मैट के सबसे पहले विश्व कप के ख़िताब पर 2007 में कब्ज़ा जमाया था.
लेकिन मौजूदा टूर्नामेंट की बात करें तो अभी तक भारतीय टीम ख़िताब की प्रबल दावेदार नज़र आ रही है.
इस टूर्नामेंट में भारत अभी तक अजेय रहा है. ग्रुप टीम में केवल पाकिस्तान ही एक ऐसी टीम थी, जिसे भारत के ख़िलाफ़ एक मज़बूत दावेदार माना जा रहा था.
हालांकि पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत पहले बैटिंग करते हुए भले ही लड़खड़ाया हो लेकिन शानदार बॉलिंग की बदौलत टीम जीतने में कमयाब रही.
वहीं सुपर-8 मुक़ाबले में भी भारत के सामने ऑस्ट्रेलिया के तौर पर एक ख़तरनाक टीम थी.
यह वही ऑस्ट्रेलियाई टीम है, जिसने 19 नवंबर 2023 को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में लगभग 1.5 लाख दर्शकों को ख़ामोश कराते हुए भारत को हराकर 50 ओवरों के विश्व कप ख़िताब पर कब्ज़ा जमाया था.
लेकिन भारत ने टी-20 विश्व कप में कप्तान रोहित शर्मा की शानदार बैटिंग के दम पर नवंबर की मिली हार का ग़म ज़रूर एक हद तक कम किया. भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराकर सेमीफ़ाइनल में अपनी जगह पक्की की.
कमज़ोरियां जिन पर भारत को ध्यान देने की ज़रूरत

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भले ही इस 50 ओवरों वाले विश्व कप की तरह ही इस टी-20 विश्व कप में भारतीय टीम का अजेय अभियान जारी है. पर अब भी कुछ ऐसी कमज़ोरियां हैं, जो सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में टीम इंडिया के लिए बड़ी मुश्किल साबित हो सकती हैं.
इस विश्व कप में ओपनिंग भारतीय टीम के लिए अभी तक सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हुई है.
ओपनर के तौर पर टीम के दो सबसे अनुभवी खिलाड़ी और बल्लेबाज़ विराट कोहली और रोहित शर्मा अपने कद के हिसाब से ख़ास छाप नहीं छोड़ पाए हैं.
इस पूरे टूर्नामेंट में रोहित शर्मा के बल्ले से केवल दो अर्धशतक ही निकले हैं. रोहित ने आयरलैंड के ख़िलाफ़ भारतीय टीम के पहले मैच में 52 रनों की पारी खेली थी.
हालांकि रोहित ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 92 रनों की ताबड़तोड़ पारी से एक हद तक दर्शकों को ख़ुश होने का मौक़ा भले दे दिया है.
लेकिन सबसे बड़ी चुनौती विराट कोहली के मोर्चे पर देखने को मिल रही है. विराट अभी तक इस टूर्नामेंट में लय में नहीं आ पाए हैं.
यहां तक कि उन्होंने केवल बांग्लादेश के ख़िलाफ़ मैच में 30 रनों का आंकड़ा पार किया था. इसके अलावा कोहली इस टूर्नामेंट में दो बार ज़ीरो पर आउट हो चुके हैं.
इन टीमों की लिस्ट देखें तो केवल पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया और अभी की स्थिति के लिहाज़ से अफ़ग़ानिस्तान ही ऐसी टीमें हैं, जिनको मज़बूत टीमें कहा जा सकता है. लेकिन स्कोरबोर्ड से साफ़ है कि आयरलैंड, अमेरिका और बांग्लादेश जैसी टीमों के ख़िलाफ़ भी कोहली का बल्ला ख़ामोश ही रहा.
कोहली और रोहित के बीच इस पूरे टूर्नामेंट में अभी तक कोई ढंग की साझेदारी भी नहीं हो पाई है.
भारत की बैटिंग में मसला केवल ओपनिंग का ही नहीं है, बल्कि मध्य क्रम पर भी भारत को ध्यान देने की ज़रूरत है.
हालांकि एक विडंबना यह है कि ऋषभ पंत, हार्दिक पांड्या और सूर्यकुमार यादव की एक दो पारियों की वजह से इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
लेकिन इस टूर्नामेंट में भारतीय मध्य क्रम को क़रीब से देखें तो ऋषभ पंत ही एक अकेले ऐसे बल्लेबाज़ रहे हैं, जिन्होंने लगभग सभी मैचों में ठीक-ठाक या पारी को गति देने वाली बल्लेबाज़ी की है.
वहीं सूर्यकुमार यादव के बल्ले से दो और हार्दिक पांड्या के बल्ले से अभी तक एक अर्धशतक आया है.
मध्य क्रम में शिवम दुबे, अक्षर पटेल और रविंद्र जडेजा मैच को संभालने वाली पारी खेलने में काफ़ी हद तक नाक़ाम रहे हैं. शिवम दुबे केवल दो ही मैचों में 30 के पार का स्कोर बना पाए हैं.
भले ही जडेजा की छवि एक बॉलर के तौर पर हो, पर टीम में उनकी भूमिका ऑलराउंडर की मानी जाती है. ऐसे में जडेजा से टीम को हमेशा ही ऐसी उम्मीदें रहतीं है कि वे बॉलिंग या फिर बैटिंग किसी भी एक तरीके से मैच में अपना योगदान देंगे.
हालांकि जडेजा अभी तक बॉलिंग और बैटिंग दोनों से ही प्रभाव दिखा पाने में नक़ाम रहे हैं. ठीक जडेजा की तरह ही अक्षर पटेल और शिवम दुबे को भी उनकी ऑलराउंड क्षमता के चलते टीम में जगह दी गई है. लेकिन अभी तक इन दोनों खिलाड़ियों फैंस की उम्मीदों के हिसाब से प्रदर्शन नहीं किया है.
क्या ओपनिंग के लिए ग़लत चॉइस हैं कोहली

पिछले कई सालों से विराट कोहली भारतीय टीम की बैटिंग की धुरी के तौर पर देखे जाते रहे हैं. विश्व कप 2023 में भी कोहली पूरे टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ थे.
इसी टूर्नामेंट में कोहली ने एक विश्वकप में सचिन के सबसे ज़्यादा रनों का रिकॉर्ड भी तोड़ा था. इसके बाद खेले गए आईपीएल टूर्नामेंट में भी कोहली ने सबसे ज़्यादा रन बनाते हुए ऑरेंज कैप पर कब्ज़ा जमाया था.
लेकिन टी-20 विश्व कप 2024 में कोहली लगातार फ्लॉप होते आ रहे हैं. इसकी एक सबसे बड़ी वजह जो मानी जा रही है वो है कोहली का बैटिंग ऑर्डर.
टेस्ट, वनडे और टी-20 तीनों ही फॉर्मैट में कोहली पिछले कई सालों से तीसरे नंबर पर बैटिंग करते आ रहे हैं. एक तरह से कहें तो लगभग 2010 से ही कोहली की जगह तीन नंबर पर फिक्स हो गई है.
इतना ही नहीं कोहली ने सबसे ज़्यादा रन भी इसी पोजीशन पर बनाए हैं और सबसे ज़्यादा मैच जिताऊ पारियां भी इसी पोजीशन पर खेली हैं.
कोहली के तीसरे नंबर पर आने का एक फ़ायदा यह भी होता था कि इससे भारतीय बैटिंग लाइनअप को ज़्यादा मज़बूती मिलती थी.
अगर ओपनर जल्दी आउट होते थे तो मध्यक्रम में कोहली दूसरे बल्लेबाज़ों के साथ पारी को संभाल लेते थे.
इस विश्व कप में कोहली को ओपनिंग की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है. लेकिन अभी तक तक के प्रदर्शन को देखें तो कोहली इस ज़िम्मेदारी को निभा पाने में नाक़ाम ही रहे हैं.
हालांकि इस टूर्नामेंट में यशस्वी जायसवाल भी टीम बेंच का हिस्सा हैं, पर शिवम दुबे को जगह मिलने से वे फ़िलहाल प्लेइंग इलेवन से बाहर हैं.
लेकिन यशस्वी की क़ीमत पर दुबे भी अपनी जगह के साथ पूरी तरह से इंसाफ़ करने में लगभग नाकाम ही देखे जा रहे हैं.
ऐसे में रोहित और टीम मैनेजमेंट के सामने सेमीफ़ाइनल जैसे मुक़ाबले में इंग्लैंड जैसी मज़बूत टीम के सामने इस समस्या को सही करना एक बड़ी चुनौती है.
गेंदबाज़ी और फील्डिंग में चुनौतियां

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यह टी-20 विश्व कप अमेरिका और वेस्टइंडीज की ज़मीन पर खेला जा रहा है. कुछेक मैचों को छोड़ दें तो अभी तक इस पूरे टूर्नामेंट के लगभग सभी मैच लो स्कोरिंग ही रहे हैं.
यहां तक कि आख़िरी सुपर-8 मुक़ाबले में अफ़ग़ानिस्तान टीम ने महज़ 114 रनों के टारगेट का बचाव कर लिया.
टूर्नामेंट के लगभग मैचों को देखकर यह साफ़ है कि इस टूर्नामेंट में गेंदबाज़ों का प्रदर्शन बल्लेबाज़ों के मुक़ाबले ज़्यादा सराहनीय रहा है. लेकिन भारत के मामले में यह बात पूरी तरह से सही साबित नहीं होती.
अगर बुमराह को छोड़ दें तो लगभग सभी भारतीय गेंदबाज़ों ने एक या दो मैचों में ही ठीक-ठाक बॉलिंग की है.
ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ मैच में हार्दिक ने 11 से ज़्यादा और जडेजा ने 17 से ज़्यादा की इकोनॉमी से रन लुटाए थे.
वहीं अक्षर पटेल भी एक या दो मैच के अलावा 8 रन प्रति ओवर से ज़्यादा के हिसाब से रन दे रहे हैं. अर्शदीप सिंह को भले ही विकेट मिले हों पर वे भी महंगे साबित हो रहे हैं.
सिराज को केवल एक ही मैच में मौका मिल पाया है. शिवम दुबे लगातार प्लेइंग इलेवन का हिस्सा हैं पर एक मैच के अलावा अभी तक उनको भी बॉलिंग कराने का मौका नहीं मिला है. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पिछले मैच में भारतीय फील्डरों ने कैच भी छोड़े.
ऑस्ट्रेलियन कप्तान मिशेल मार्श का दो बार कैच छूटा. हालांकि भले ही मार्श बड़ा स्कोर खड़ा ना कर पाए हों, पर ख़राब फील्डिंग अहम मौक़ों पर घातक ज़रूर साबित हो सकती है.
नॉकआउट मैचों का प्रेशर

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साल 2013 के बाद से भारत कोई भी आईसीसी ट्रॉफी नहीं जीत पाया है. खास तौर पर वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में भारतीय टीम लगातार चोकर साबित होती आई है.
अगर पिछले कुछ उदाहरणों को देखें तो इससे ठीक पहले 50 ओवरों के विश्व कप में भी टीम इंडिया बिना कोई मैच हारे फ़ाइनल में पहुंची थी.
लेकिन घर में खेलने के बाद भी टीम फ़ाइनल के प्रेशर को सही से झेल नहीं पाई और मुक़ाबला हार गई. उससे ठीक पहले भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया में खेले गए टी-20 विश्व कप में सेमीफ़ाइनल तक का सफ़र तय किया.
लेकिन उसे इंग्लैंड के हाथों टीम को 10 विकेट से क़रारी शिकस्त का सामना करना पड़ा. इस टी-20 विश्व कप में भी भारत को अपना सेमीफ़ाइनल मुक़ाबला इंग्लैंड के साथ ही खेलना है.
2013 के बाद भारतीय टीम 9 बार आईसीसी टूर्नामेंट के नॉकआउट खेल चुकी है, जिसमें उसका प्रदर्शन कुछ ऐसा रहा है
- 2014 टी20 वर्ल्ड कप फ़ाइनल- श्रीलंका के ख़िलाफ़ 6 विकेट से हार
- 2015 वनडे वर्ल्ड कप सेमीफ़ाइनल- ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 95 रन से हार
- 2016 टी20 वर्ल्ड कप सेमीफ़ाइनल- वेस्टइंडीज के ख़िलाफ़ 7 विकेट से हार
- 2017 चैंपियंस ट्रॉफी फ़ाइनल- पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 180 रन से हार
- 2019 वनडे वर्ल्ड कप सेमीफ़ाइनल- न्यूजीलैंड के ख़िलाफ़ 18 रन से हार
- 2021 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फ़ाइनल- न्यूजीलैंड के ख़िलाफ़ 8 विकेट से हार
- 2022 टी20 वर्ल्ड कप सेमीफ़ाइनल- इंग्लैंड के ख़िलाफ़ 10 विकेट से हार
- 2023 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फ़ाइनल- ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 209 रन से हार
- 2023 वनडे वर्ल्ड कप फ़ाइनल- ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ 6 विकेट से हार
इस विश्वकप में इंग्लैंड का प्रदर्शन

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इंग्लिश टीम इस टूर्नामेंट में अपने ख़िताब को बचाने की जंग में उतरी है. हालांकि इस टूर्नामेंट में उसका प्रदर्शन अभी तक मिला जुला ही रहा है.
जहां ग्रुप मैच में स्कॉटलैंड के साथ उसका मैच बारिश के चलते रद्द हो गया था. वहीं दूसरे मैच में टीम को ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ हार का सामना करना पड़ा. लेकिन टीम सुपर 8 में जगह बनाने में क़ामयाब रही.
सुपर 8 में भी इंग्लिश टीम को साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ हार का सामना करना पड़ा. लेकिन इंग्लिश टीम ने अमेरिका और वेस्टइंडीज को हराते हुए सेमीफ़ाइनल में अपनी जगह बनाई.
अगर बारिश हुई तो क्या होगा?

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इंग्लैंड और इंडिया के बीच मैच 27 जून को गुयाना के प्रोविडेंस स्टेडियम में खेला जाना है. वर्ल्ड वेदर ऑनलाइन वेबसाइट पर जानकारी के मुताबिक इस दिन हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है.
टीम कॉम्बिनेशन और खिलाड़ियों के प्रदर्शन के अलावा बारिश भी एक कारक हो सकता है. ऐसा कई मैचों में देखा गया है कि बारिश के चलते मैच में आई रुकावट के बाद भारतीय टीम का प्रदर्शन अचानक से ख़राब हो जाता है.
इसकी सबसे बड़ी मिसाल 2019 के विश्व कप सेमीफ़ाइनल मैच में देखने को मिली थी. सेमीफ़ाइनल में भारत का मुक़ाबला न्यूजीलैंड के साथ था.
एक वक्त भारतीय टीम मैच पर अपनी मज़बूत पकड़ भी बना चुकी थी. पहली पारी में भारतीय गेंजबाज़ों ने न्यूजीलैंड की टीम को 239 रनों पर ही समेट दिया था. लेकिन बारिश के चलते खेल को रिज़र्व डे तक बढ़ाना पड़ा.
रिज़र्व डे में भारतीय टीम बैटिंग की बैटिंग कीवी बॉलरों के आगे ताश के पत्तों की तरह ढहती चली गई. उस मैच में पूरी भारतीय टीम 221 रनों पर ही सिमट गई और भारत का विश्व कप जीतने का सपना अधूरा ही रह गया.
भारत के नज़रिये से यह विश्व कप कई मायनों में अहम भी है. ऐसा इसलिए है क्योंकि यह विराट कोहली और रोहित शर्मा का आख़िरी आईसीसी टूर्नामेंट साबित हो सकता है.
ऐसे में इस सेमीफ़ाइनल मैच से पहले भारतीय टीम को अपनी इन कमज़ोरियों से निपटना बेहद ज़रूरी है. इससे ठीक पिछले टी-20 विश्व कप में भी इंग्लैंड की टीम ने ही भारतीय टीम को सेमीफ़ाइनल मुक़ाबले में 10 विकटों की करारी हार दी थी.
ऐसे में कहीं ऐसा ना हो कि आईसीसी ट्रॉफी पर कब्ज़ा जमाने का ख़्वाब कुछ और साल आगे खिसक जाए.

















