अफ़ग़ानिस्तान का ऑस्ट्रेलिया को हराना अब क्यों उलटफेर नहीं कहा जा सकता?

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- Author, संजय किशोर
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है. अफ़ग़ानिस्तान ने आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप में शक्तिशाली ऑस्ट्रेलिया को किंग्सटाउन मैदान पर 21 रन से हराकर एक बार फिर साबित किया है.
मगर इस परिणाम को अप्रत्याशित मानना या उलटफेर कहना क्या अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम को कमतर आँकना नहीं है?
जिन हालत में और जिस तेज़ी से अफ़ग़ानिस्तान की टीम इस मुक़ाम तक पहुँची है वह ज़्यादा अविश्वसनीय है. लेकिन ऐसे नतीजों के संकेत पिछले वनडे वर्ल्ड कप में मिल चुके थे.
राशिद ख़ान की कप्तानी में अफ़ग़ानिस्तान की इस टीम ने पहली बार ऑस्ट्रेलिया को हराया है.

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दोनों टीमों के बीच वनडे में चार और टी-20 में दो मुक़ाबले खेले गए हैं.
वनडे में अफ़ग़ानिस्तान की टीम ऑस्ट्रेलिया से कभी नहीं जीती है, लेकिन टी-20 में दूसरे ही मैच में अफ़ग़ानिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया को शिकस्त दी और इतिहास रच दिया.
हालांकि लीग मैचों में ये टीम न्यूज़ीलैंड को भी हरा चुकी है.
2023 में खेले गए पिछले वनडे वर्ल्ड कप में भी अफ़ग़ानिस्तानी टीम ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ जीत की दहलीज़ तक पहुँच गई.
हालांकि ग्लेन मैक्सवेल की करिश्माई बल्लेबाज़ी से ऑस्ट्रेलिया ने उलटफेर नहीं होने दिया.
यह याद रखने की ज़रूरत है कि अफ़ग़ानिस्तान आसानी से नहीं हारा. इसके लिए मैक्सवेल को ऐसी पारी खेलनी पड़ी जो क्रिकेट इतिहास की सर्वश्रेष्ठ पारियों में गिनी गई.
यानी ‘सुपर से ऊपर’ प्रदर्शन करना पड़ा. मगर इस बार अफ़ग़ानिस्तान ने कोई कोताही नहीं बरती और न ही ऑस्ट्रेलिया का कोई खिलाड़ी करिश्मा कर पाया.
गुरबाज़-ज़ादरान की साझेदारी और नईब की फिरकी

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टॉस ऑस्ट्रेलिया ने जीता और अफ़ग़ानिस्तान को पहले बल्लेबाज़ी करने की दावत दी.
रहमानुल्लाह गुरबाज़ और इब्राहिम ज़ादरान ने शानदार शुरुआत की और पहले विकेट के लिए 118 रन बना डाले.
हालाँकि इसके लिए दोनों 15 ओवर और चार गेंद खेल गए. गुरबाज़ ने 60 और ज़ादरान ने 51 रन बनाए. अफ़ग़ानिस्तान ने 20 ओवर में छह विकेट गंवाकर 148 रन बनाए.
जवाब में ऑस्ट्रेलियाई टीम 19.2 ओवर में 127 रन पर सिमट गई.
गुलबदीन नईब ने चार विकेट लिए. एक समय तो ऑस्ट्रेलिया ने 32 रन पर तीन विकेट गंवा दिए थे.
फिर ग्लेन मैक्सवेल ने मार्कस स्टोइनिस के साथ 39 रन की साझेदारी निभाई. नईब ने स्टोइनिस को आउट कर इस साझेदारी को तोड़ा. यहाँ से मैच का पासा पलट गया.
दहाई के अंक तक नहीं पहुँच पाए 8 बल्लेबाज़

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मैक्सवेल ने जब अंतरराष्ट्रीय टी-20 करियर का 11वां अर्धशतक लगाया तो 2023 वनडे विश्व कप की याद आ गई, जब मैक्सवेल ने अविश्वसनीय पारी खेल ऑस्ट्रेलिया को अफ़ग़ानिस्तान पर जीत दिलाई थी.
ऐसा लग रहा था कि मैक्सवेल फिर वही कारनामा कर सकते हैं, लेकिन गुलबदीन ने मैक्सवेल को आउट कर ऑस्ट्रेलिया की उम्मीदों पर पानी फेर दिया.
अफ़ग़ानिस्तान की सटीक गेंदबाज़ी के सामने मैक्सवेल के अलावा कोई खिलाड़ी 15 का आंकड़ा भी नहीं छू सका.
ट्रेविस हेड (0), डेविड वॉर्नर (3), कप्तान मिचेल मार्श (12), मार्कस स्टोइनिस (11), टिम डेविड (2), मैथ्यू वेड (5), पैट कमिंस (3), एश्टन एगर (2) और एडम जैम्पा (9) सभी नाकाम रहे.
अफ़ग़ानिस्तान की इस जीत से सुपर-8 ग्रुप-1 में सेमीफ़ाइनल की जंग रोमांचक बन गई है.
अब ऑस्ट्रेलिया, अफ़ग़ानिस्तान दोनों के दो-दो अंक हैं. ऑस्ट्रेलिया को अपना आख़िरी सुपर-8 मैच भारत के ख़िलाफ़ और अफ़ग़ानिस्तान को बांग्लादेश के ख़िलाफ़ खेलना है.
दोनों ही टीमों को जीत की ज़रूरत होगी.
2023 में खेले गए वनडे विश्व कप में अफ़ग़ानिस्तान ने अच्छा प्रदर्शन किया था. हालांकि पहले मैच में बांग्लादेश ने 6 विकेट से हरा दिया था और दूसरे मैच में दिल्ली में भारत ने 8 विकेट से शिकस्त दी थी.
मगर टीम का मनोबल नहीं टूटा. अफ़ग़ानिस्तान ने अगले मैच में मौजूदा चैंपियन इंग्लैंड को 69 रनों से हराकर तहलका मचा दिया और उसके बाद अब पाकिस्तान पर जीत अफ़ग़ानी टीम की बड़ी उपलब्धि रही.
पाकिस्तान पर बड़ी जीत

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अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम ने चेन्नई में हशमतुल्लाह शाहिदी की कप्तानी में अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को पटखनी दी थी.
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए पाकिस्तान ने कप्तान बाबर आज़म और अब्दुल्लाह शफ़ीक़ के अर्धशतकों की बदौलत 7 विकेट पर 282 रन का स्कोर खड़ा किया.
अफ़ग़ानिस्तान की तरफ से पहला वर्ल्ड कप मैच खेल रहे 18 साल के नूर अहमद ने सबसे ज़्यादा तीन विकेट चटकाए.
इब्राहिम ज़ादरान और रहमानुल्लाह गुरबाज़ की ओपनिंग जोड़ी की साझेदारी की बदौलत अफ़ग़ानिस्तान ने एक ओवर रहते 8 विकेट से ज़बरदस्त जीत दर्ज कर इतिहास रच डाला था.
कम समय में अफ़ग़ानिस्तान की टीम ने तेज़ी से तरक़्क़ी की है.
पिछले वर्ल्ड कप में टीम के मेंटर अजय जडेजा का मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान के खिलाड़ियों की सबसे बड़ी ख़ासियत है निडरता.
वे किसी भी टीम की आँख में आँख डालकर टक्कर दे सकते हैं.
तालिबान की चेतावनी

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ये जीत कई मायनों में ख़ास है. दुनिया के ज़हन में वो तस्वीरें ताज़ा हैं जब तालिबान को सत्ता सौंप कर अफ़ग़ानिस्तान छोड़ कर अमेरिकी सैनिक वापस जा रहे थे.
तालिबान के क़हर से बचने के लिए अफ़ग़ानिस्तान के नागरिक देश छोड़कर भाग रहे थे. यहाँ तक की कुछ नासमझ अमेरिकी विमानों के डैनों पर सवार हो गए थे.
हाल ही में तालिबान के सर्वोच्च नेता ने अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को ऐसे समय में पैसा कमाने या सांसारिक सम्मान हासिल करने के ख़िलाफ़ चेतावनी दी जब देश मानवीय संकट की चपेट में है और वैश्विक मंच पर अलग-थलग है.
ऐसी चेतावनी के बावजूद टीम की कामयाबी काबिलेतारीफ़ है.
दुनिया के नक़्शे पर अफ़ग़ानिस्तान की तस्वीर बहुत भयावह है.
शीत युद्ध के दौरान दशकों तक दो महाशक्तियों संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच खींचतान का शिकार रहा अफ़ग़ानिस्तान चार दशक से भूख, ग़रीबी, लाचारी, बेबसी और ज़ुल्म से जूझता रहा है.
प्राकृतिक और मानवीय त्रासदी के बीच अफ़ग़ानिस्तान में क्रिकेट उम्मीद की रोशनी है.
क्रिकेट की कामयाबियों के बीच अफ़ग़ानी अपनी पीड़ा भूलने की कोशिश करते हैं. हर जीत उनके लिए मरहम है.
पाकिस्तान में सीखा क्रिकेट

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1979 में जब रूस ने अफ़ग़ानिस्तान पर हमला किया तो लाखों लोगों ने पाकिस्तान पलायन किया.
उन्होंने शरणार्थी शिविरों में क्रिकेट खेला और वहीं सीखा. ये लोग जब अफ़ग़ानिस्तान लौटे तो क्रिकेट उनके साथ आया.
तमाम विरोधों और दुश्वारियों के बीच 1995 में अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) की स्थापना हुई.
हालांकि पहले तालिबान ने क्रिकेट पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन इसकी लोकप्रियता को देखते हुए साल 2000 में उन्हें भी मान्यता देनी पड़ी.
छोटी लीगों में खेलने से लेकर टेस्ट का दर्जा हासिल करने तक टीम ने लंबा सफ़र तय किया है मगर बहुत कम समय में.
अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम ने बला की तेज़ी से तरक़्क़ी की है. टीम ने 2010 में आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफ़ाई किया.
2012 में अफ़ग़ानिस्तान ने पाकिस्तान के साथ अपना पहला वनडे मैच खेला जिसमें वे 7 विकेट से हार गए. 2013 तक अफ़ग़ानी टीम आईसीसी की एसोसिएट सदस्य भी बन गई.
2017 में अफ़ग़ानिस्तान और आयरलैंड को टेस्ट स्टेटस भी मिल गया.
अफ़ग़ानिस्तान और आयरलैंड 11वें और 12वें टेस्ट स्टेटस पाने वाले देश बने. 2018 में अफ़ग़ानिस्तान ने भारत के साथ पहला टेस्ट खेला.
सबसे लोकप्रिय खेल

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अफ़ग़ानिस्तान में पिछले दो दशक में क्रिकेट की लोकप्रियता बेतहाशा बढ़ी है. अब क्रिकेट वहाँ सबसे ज़्यादा देखा जाने वाला खेल है. जब अफ़ग़ानिस्तान जीतता है तो देश में त्योहार सा माहौल हो जाता है.
ऐसे भी लोग हैं जो क्रिकेट नहीं समझते लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के झंडे को लहराते देखने के लिये मैच देखते हैं.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अफ़ग़ानिस्तान के इस सफ़र में भारत और बीसीसीआई साथी रहा है. वनडे और टेस्ट क्रिकेट का दर्जा दिलाने में भारत की भूमिका अहम रही है.
अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम को हालांकि आईसीसी और बाकी देशों से और सहयोग की ज़रूरत है.
उनके पास क्रिकेट का बुनियादी ढांचा नहीं है. एक ही विश्व स्तरीय मैदान काबुल में है. लेकिन यहाँ अब तक कोई भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला गया. भारत अफ़ग़ानिस्तान क्रिकेट टीम का दूसरा घर रहा है.
अपने देश में सुविधाओं के अभाव में अफ़ग़ानी टीम ने लखनऊ, ग्रेटर नोएडा और देहरादून को अपना घरेलू मैदान बनाया था. फ़िलहाल अफ़ग़ानिस्तान ने शारजाह को अपना घर बनाया हुआ है.
कह सकते हैं क्रिकेट अफ़ग़ानिस्तान के लिए आशा का प्रतीक और राष्ट्रीय गौरव का स्रोत बन गया, जो बेहतर भविष्य के लिए प्रयासरत युद्धग्रस्त देश की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करता है.
क्रिकेट अफ़ग़ानी लोगों के समर्पण, दृढ़ता और अडिग भावना का प्रतीक है.
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