स्मृति मंधाना के सामने पस्त हो गई दक्षिण अफ़्रीकी टीम

स्मृति मंधाना

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    • Author, मनोज चतुर्वेदी
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए

स्मृति मंधाना को भारतीय महिला क्रिकेट टीम का संकट मोचक माना जाता है.

दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में शुरू हुई वनडे अंतरराष्ट्रीय सिरीज़ के पहले मैच को जिताने में एक बार फिर उनके बल्ले की चमक ने अहम भूमिका निभाई.

भारतीय टीम ने जब 99 रनों पर अपने पांच विकेट खो दिए और टीम सस्ते में निपटती नज़र आ रही थी, उस समय स्मृति मंधाना ने अपनी बल्लेबाज़ी के कमाल से भारत को आठ विकेट पर 265 रन तक पहुँचाया और यह स्कोर आसान जीत दिलाने वाला साबित हुआ. भारत ने दक्षिण अफ्रीका की पारी 122 पर समेटकर 143 रन जीत हासिल कर ली.

मंधाना की बल्लेबाज़ी में मुश्किल में आता है निखार

स्मृति मंधाना की बल्लेबाज़ी में निखार आया है.

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भारतीय पुरुष टीम में जिस तरह से विराट कोहली मुश्किल समय में अपनी बल्लेबाज़ी को ऊंचाइयां देते हैं. यह ख़ूबी स्मृति मंधाना में भी नज़र आती है.

भारत ने इस मैच में 99 रन तक स्कोर पर पांच प्रमुख विकेट खो दिए तो उन्होंने पारी को मज़बूती देने के लिए अपने खेलने की स्टाइल को बदल दिया.

मंधाना को आमतौर पर आक्रामक अंदाज़ में खेलने के लिए जाना जाता है. पर इस स्थिति में उनके शॉट सिलेक्शन की जितनी तारीफ़ की जाए, वह कम है.

उन्होंने जोखिम भरे शॉटों पर अंकुश लगाया. पर ढीली गेंदों को मैदान से बाहर भेजने में कभी गुरेज नहीं किया ताकि तेज़ी के साथ स्कोर बोर्ड आगे बढ़ता रहे. इससे वह दक्षिण अफ्रीका के गेंदबाज़ों पर दबाव बनाने में सफल रहीं.

भारत ने पांच विकेट गिर जाने के बाद 166 रन जोड़े और ऐसा वह पहली बार करने में सफल रहा है. इससे भारतीय बल्लेबाज़ी में आई गहराई को समझा जा सकता है.

मिताली के रिकॉर्ड से सिर्फ़ एक शतक दूर

पूर्वी भारतीय कप्तान मिताली राज. फ़ाइल फ़ोटो

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स्मृति मंधाना ने अपने वनडे करियर के छठा शतक लगाया है और इस तरह वह पूर्व कप्तान मिताली राज के सात वनडे शतकों के रिकॉर्ड से सिर्फ़ एक शतक दूर हैं.

पर इसमें ख़ास बात यह है कि मिताली ने अपने 23 साल लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में 232 मैचों में यह शतक लगाए थे.

लेकिन स्मृति मंधाना ने मात्र 83 मैचों में छह शतक लगा दिए हैं. इससे यह समझा जा सकता है कि वह यदि मिताली के बराबर मैच खेलने में सफल रहीं तो उनके शतकों की संख्या कहां पहुंचेगी, समझा जा सकता है.

मंधाना का यह शतक इसलिए भी ख़ास है, क्योंकि इसने भारत को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने के अलावा यह उनका घर में पहला शतक है. उन्होंने इससे पहले अपने पांचों शतक विदेशी भूमि पर बनाए थे.

स्मृति मंधाना वनडे अंतरराष्ट्रीय मैचों में शतकों के रिकॉर्ड से काफ़ी पीछे हैं. ऑस्ट्रेलिया की कप्तान एम लेनिंग के नाम सबसे ज़्यादा 15 शतक हैं. हां, इतना ज़रूर है कि भारतीय शतकों का रिकॉर्ड ज़रूर स्मृति मंधाना के नाम दर्ज हो सकता है.

मंधाना को मिला दीप्ति और पूजा का अच्छा सहयोग

पूजा वस्त्रकर

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यह सही है कि भारत की इस जीत में स्मृति मंधाना की शतकीय पारी का अहम योगदान रहा. लेकिन दीप्ति शर्मा और पूजा वस्त्रकर के साथ साझेदारियों के योगदान को भी कम करके नहीं आंका जा सकता है.

भारत की शुरुआती पारी ढह जाने के बाद विकेट पर जमीं मंधाना को पहले दीप्ति शर्मा के रूप में अच्छी जोड़ीदार मिली. उन्होंने छठे विकेट की साझेदारी में 81 रन जोड़कर भारत को लड़ने लायक स्थिति में पहुंचाया, तो पूजा ने सातवें विकेट की साझेदारी में 58 रन जोड़कर भारतीय पारी को मजबूती देने में भरपूर योगदान दिया.

दीप्ति शर्मा पिछले कुछ समय से बेहतरीन ऑलराउंडर के तौर पर निखरकर आई हैं. उन्होंने मुश्किल समय में 48 गेंदों में 37 रन की पारी खेलने के अलावा दक्षिण अफ्रीका की पारी ढहाने में छह ओवरों में 10 रन पर दो विकेट निकालकर अहम भूमिका निभाई. यहां तक बात पूजा की है तो उन्होंने भी 31 रन बनाने के अलावा एक विकेट भी निकाला.

मंधाना की कमाल की पारियां

हम मंधाना के करियर की बेहतरीन पारियों की बात करें तो सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ ही खेली 135 रनों की पारी जेहन में आती है.

किंबर्ली में खेले गए इस मैच में उन्होंने 129 गेंदों में 14 चौकों और एक छक्के से यह रन बनाए थे. इस पारी के दम पर ही भारत यह मैच 178 रन से जीतने में सफल रहा था.

इसी तरह वेस्ट इंडीज के ख़िलाफ़ 106 रन और न्यूजीलैंड के ख़िलाफ़ 105 रन की पारी उनके यादगार प्रदर्शनों में शामिल है.

वेस्ट इंडीज के ख़िलाफ़ खेली गई पारी तो 2017 के आईसीसी विश्व कप के लीग चरण में होने की वजह से महत्वपूर्ण थी.

वहीं न्यूजीलैंड के ख़िलाफ़ पारी उनके घर नेपियर में खेली गई थी. इस मैच में भारत के सामने 193 रन का लक्ष्य था. मंधाना ने जेमिमा के साथ पहले विकेट की साझेदारी में 190 रन जोड़ दिए थे.

आशा शोभना

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लेग स्पिनर आशा शोभना ने पिछली महिला प्रीमियर लीग में मुश्किल स्थितियों में विकेट निकालने वाली गेंदबाज़ की छवि बनाई थी.

इस कारण ही वह दो माह पहले सबसे ज़्यादा उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाली भारतीय खिलाड़ी बनीं थीं.

उन्हें 33 साल की उम्र में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ टी-20 मैच में खेलने का मौका मिला था. अब वह भारत के लिए वनडे मैचों में भी सबसे ज़्यादा उम्र में पदार्पण करने वाली खिलाड़ी बन गई हैं.

दक्षिण अफ्रीका को तीन शुरुआती झटके लग जाने के बाद मारिजाने कैप और सुने लूज ने जब दस ओवर खेलकर चौथे विकेट की साझेदारी निभा दी तो लगे लगा कि दक्षिण अफ्रीका वापसी कर सकती है, क्योंकि कैप की छवि गेम चंजर वाली है.

इस साझेदारी को तोड़ने के लिए कप्तान हरमनप्रीत कौर आशा को अटैक पर लाई और उन्होंने कप्तान की उम्मीदों पर खरे उतरते हुए कैप को ख़ुद के कप्तान के हाथों कैच करा दिया. इसके बाद उनकी गेंदबाज़ी का जादू ऐसा चला कि दक्षिण अफ्रीका की पूरी टीम 122 रन पर ढेर हो गई.

आशा ने इस पारी को ढहाने में चार विकेट निकालकर अहम भूमिका निभाई. यह विकेट उन्होंने 8.4 ओवरों में मात्र 21 रन देकर निकाले.

भारतीय महिला क्रिकेट टीम

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भारतीय टीम की फिटनेस में भी आया है सुधार

भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने मैच शुरू होने से पहले कहा था कि अमोल मजूमदार के कोच बनने के बाद टीम ने फिटनेस पर काफी मेहनत की है. अब टीम की फील्डिंग में भी सुधार आया है.

यह बात मैच के दौरान साफ नज़र भी आई. भारतीय खिलाड़ियों ने अच्छी फील्डिंग से दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों पर दबाव बनाए रखा. यही नहीं भारतीय फील्डरों ने सही समय पर दिमाग़ का भी अच्छा इस्तेमाल किया. अनेरी का जेमिमा ने कैच छोड़ा पर उसके आगे निकलने पर सही थ्रो से उन्हें रन आउट करा दिया.

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