टी20 वर्ल्ड कप: भारत ने अफ़ग़ानिस्तान को हराया, लेकिन एक टेंशन अब भी कायम

सूर्यकुमार यादव

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    • Author, विमल कुमार, वरिष्ठ खेल पत्रकार
    • पदनाम, ब्रिजटाउन, बारबाडोस से बीबीसी हिंदी के लिए

भारत के लिए वर्ल्ड कप सुपर 8 के दौर का पहला मुक़ाबला नतीजे के लिहाज से शानदार रहा.

टीम इंडिया ने अफ़ग़ानिस्तान को आसानी से 47 रनों से मात दी लेकिन इतने बड़े अंतर से जीतने के बावजूद टीम इंडिया के लिए कई सवाल बने हुए हैं.

अगर सूर्यकुमार यादव ने अपने करियर की एक बेहतरीन पारी फिर से नहीं खेली होती और अगर उन्हें हार्दिक पंड्या का साथ नहीं मिला होता तो टीम इंडिया के लिए इस मैच में भी काफ़ी मुश्किलें आ सकती थीं.

सूर्यकुमार की चमक

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बहरहाल, मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूर्यकुमार ने साफ़ कर दिया था कि वो पिछले दो साल से इस फॉर्मेट में दुनिया के नंबर एक बल्लेबाज़ होने की रैंकिंग को सही साबित करने के इरादे से आए हैं.

अमेरिका के ख़िलाफ़ सूर्यकुमार ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ और स्वाभाविक खेल को छोड़ते हुए मौक़े की नज़ाकत को समझा. उन्होंने संभल कर खेलते हुए अर्ध-शतक बनाया. लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के ख़िलाफ़ जब टीम इंडिया पर दबाव बनने लगा तो उन्होंने वो रंग दिखाए, जिसके लिए वो जाने जाते हैं.

सूर्य ने तब अपने नाम के मुताबिक़ 360 डिग्री शैली में खेलते हुए राशिद ख़ान जैसे दिग्गज स्पिनर को भी पस्त कर दिया.

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7वें ओवर के अंत में जब सूर्यकुमार बल्लेबाज़ी करने के लिए उतरे तो सिर्फ ऋषभ पंत ने ही थोड़ी आक्रमकता दिखाते हुए 11 गेंदों पर 20 रनों की पारी खेली थी.

उनसे पहले रोहित शर्मा (8 रन 13 गेंदों पर ) और विराट कोहली के (24 गेंदों पर 24 रन ) ने पहले विकेट की साझेदारी के दौरान 37 गेंद पर सिर्फ़ 32 रनों की शुरुआत दी थी.

जिस राशिद ख़ान के ख़िलाफ़ कोहली असहज दिख रहे थे, उनके ख़िलाफ़ सूर्यकुमार ने छह गेंदों पर 16 रन बनाए. राशिद ने अपने बाकी तीन ओवर में भारतीय बल्लेबाज़ों पर ऐसा शिकंजा कसा कि उन्होंने तीन ओवर में सिर्फ़ 10 रन देकर तीन विकेट झटक लिए थे.

सूर्यकुमार के लिए अच्छी बात ये थी कि उन्हें मध्य क्रम में हार्दिक पंड्या का साथ मिला. दोनों की ताबड़तोड़ साझेदारी को देखकर ऐसा लग रहा था कि मानो मुंबई इंडियंस कोई आईपीएल का मुक़ाबला खेल रही हो.

हार्दिक का वो छक्का

हार्दिक पंड्या

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हार्दिक ने 24 गेंदों पर 32 रन बनाए, जिसमें तीन चौके और दो छक्के शामिल रहे. एक छक्का तो ऐसा था कि प्रेस बॉक्स का शीशा टूटते-टूटते बचा.

ऐसा लगा कि मानो हार्दिक मीडिया को ये संदेश देने की कोशिश कर रहे थे कि आईपीएल और उसके बाद उनके खेल और निजी जीवन को लेकर जो नेगेटिव कवरेज मिली है, उससे वो काफ़ी मायूस रहे.

अच्छी बात रही कि पूरे प्रेस बॉक्स में उनके इस छक्के को लेकर जमकर तालियां बजीं.

फॉर्म में बुमराह

बुमराह

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अगर बल्लेबाज़ी में सूर्या-हार्दिक की जोड़ी ने तहलका मचाया तो सदाबहार जसप्रीत बुमराह एक बार फिर से पूरे फॉर्म में दिखे.

बुमराह ने चार ओवर में महज़ सात रन देकर तीन विकेट लिए. एक बड़ा स्कोर खड़ा करने का सपना अफ़ग़ानिस्तान देखता, उससे पहले ही उसे तोड़ बुमराह ने तोड़ दिया.

उनके अलावा कुलदीप यादव जो इस टूर्नामेंट में पहला मैच खेल रहे थे, उन्होंने भी मध्य क्रम में अफ़ग़ानी बल्लेबाज़ों पर दबाव बनाए रखा. कुलदीप ने चार ओवर में भले ही 32 रन दिए लेकिन उन्होंने भी दो विकेट हासिल किए.

सलामी जोड़ी और जोख़िम

विराट कोहली और रोहित शर्मा

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लेकिन, टीम इंडिया के लिए सीनियर बल्लेबाज़ों की नाकामी उनके लिए परेशानी का सबब बन सकती है.

वर्ल्ड कप में सलामी जोड़ी के तौर पर आए रोहित शर्मा और विराट कोहली ने मिलकर चार मैचों में 15 की मामूली औसत से 105 रन बनाए हैं.

इस जोड़ी का स्ट्राइक रेट भी 105 से कम रहा है. पूरे करियर में इन दिग्गजों को टी20 फॉर्मेट में स्ट्राइक रेट की आलोचना से गुज़रना पड़ा है.

अपने करियर के आख़िर दौर में और इस टूर्नामेंट में ये दोनों सिर्फ़ अगले मैच यानी बांग्लादेश के ख़िलाफ़ ही नाकाम होने का जोखिम ले सकते हैं, क्योंकि इसके बाद जो मुक़ाबलें होंगे, उसमें उम्मीदें पहाड़ से भी बड़ी होंगी.

सबसे बड़ी चिंता

रविंद्र जडेजा

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मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

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इन दोनों के अलावा स्पिन हिटर के तौर पर वर्ल्ड कप के लिए चुने गए शिवम दुबे का शांत बल्ला भी टीम इंडिया के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है.

मुमकिन है कि टीम इंडिया बांग्लादेश के ख़िलाफ़ यशस्वी जायसवाल को ओपनर के तौर पर वापस लेकर आए और कोहली अपने स्वाभाविक पोजीशन नंबर 3 पर खेलें. इससे दुबे के बदले संजू सैमसन को खेलने का मौक़ा मिल सकता है.

रोहित-कोहली के अलावा अनुभवी रविंद्र जडेजा भी बल्ले और गेंद से इस टूर्नामेंट में लय के लिए जूझते ही नज़र आ रहे हैं.

अफगानिस्तान के खिलाफ बल्लेबाज़ी करते हुए जडेजा ने सिर्फ़ सात रन और गेंदबाज़ी करते हुए तीन ओवर में 20 रन खर्च किए और सिर्फ़ एक ही कामयाबी हासिल की.

कहतें है जीत की रोशनी में टीम के कई कमज़ोर पहलू छिप जाते हैं लेकिन अफ़ग़ानिस्तान को हराने के बाद टीम इंडिया को जीत की ख़ुशी से ज़्यादा एक बात की चिंता सबसे ज्यादा हो रही है.

चिंता यह है कि कैसे सुपर 8 के आखिरी मैच से पहले पूरी टीम वर्ल्ड कप जीतने के लिए कैसे मजबूत दावेदारी पेश करे.

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