सौरभ नेत्रावलकर : कभी भारत की अंडर-19 टीम में थे अब अमेरिकी टीम में कैसे पहुंच गए

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- Author, जान्हवी मूले
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अमेरिका ने टी-20 वर्ल्ड कप में कनाडा को सात विकेट से हराकर धमाकेदार शुरुआत की है.
टी-20 वर्ल्ड कप के पहले मैच में कनाडा ने 20 ओवरों में पांच विकेट पर 194 रन बनाए. कनाडा की ओर से नवनीत धालीवाल ने सबसे ज़्यादा 61 रन बनाए.
इसके जवाब में अमेरिकी टीम ने एरन जोंस की धमाकेदार बल्लेबाज़ी की बदौलत 18वें ओवर में तीन विकेट पर 197 रन बना लिए.
ए़रन जोंस ने चार चौके और दस छक्के की मदद से 40 गेंदों पर नाबाद 94 रन बनाए. बारबाडोस में जन्मे जोंस अमेरिकी टीम के ज़ोरदार बल्लेबाज़ों में गिने जाते हैं.
इस मुक़ाबले में मुंबई के बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ सौरभ नेत्रवलकर को भी खेलने का मौक़ा मिला.
उन्होंने दो ओवर की गेंदबाज़ी की और इसमें कोई ख़ास असर नहीं छोड़ पाए. लेकिन अमेरिकी टीम तक उनके पहुँचने की कहानी दिलचस्प है.
मूल रूप से मुंबई के सौरभ कभी अंडर-19 टीम इंडिया का हिस्सा थे. फिर उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए तो उन्होंने ये मान लिया था कि क्रिकेट का करियर अब ख़त्म हो चुका है.
लेकिन क्रिकेट से उनका प्यार बना रहा. अमेरिका में पढ़ाई के दौरान भी उन्हें जब भी मौक़ा मिला, उन्होंने क्रिकेट खेलना जारी रखा और अब उनके लिए आईसीसी टी-20 वर्ल्ड कप के रास्ते खुल गए हैं.
मुंबई के मैदान से अमेरिकी टीम तक का सफ़र सौरभ के खेल से लगाव और जुनून की कहानी है.
अंडर-19 टीम में प्रदर्शन

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सौरभ नेत्रावलकर का जन्म 16 अक्टूबर 1991 को मुंबई में हुआ था. मलाड में पले और बढ़े और 10 साल की उम्र से उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था.
लेकिन पहली बार उनका नाम 2008-09 सीज़न में सुर्खियों में आया. उन्होंने कूच बिहार ट्रॉफ़ी -19 क्रिकेट टूर्नामेंट में छह मैचों में 30 विकेट चटकाए थे.
कभी मुंबई को बल्लेबाज़ों के लिए जाना जाता था, ऐसे में किसी युवा तेज़ गेंदबाज़ की अच्छी गेंदबाज़ी पर लोगों की नज़रें तुरंत गईं.
स्वाभाविक रूप से लंबे, दुबले और पतले बाएं हाथ के गेंदबाज़ के तौर सौरभ चर्चा में आ गए.
सौरभ ने इसके बाद 2010 में दक्षिण अफ्रीका में त्रिकोणीय सिरीज़ में आठ विकेट लिए और उसके बाद न्यूज़ीलैंड में आयोजित अंडर-19 वर्ल्ड कप में नौ विकेट लिए.
उस वक़्त अंडर-19 टीम में सौरभ के साथ केएल राहुल, मयंक अग्रवाल और जयदेव उनादकट भी थे. ये तीनों भारतीय टीम तक पहुंचने में कायमाब रहे. सौरभ वहां तक नहीं पहुंच सके.
क्रिकेट के साथ-साथ सौरभ को पढ़ाई का भी शौक था. उन्होंने 2009-13 के दौरान सरदार पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मुंबई से अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की.
वह कहते हैं, "2013 में मुझे पुणे में इंजीनियरिंग की नौकरी मिल गई. तब मैंने फ़ैसला किया कि कम से कम दो साल तक काम नहीं करूंगा और क्रिकेट को समय दूंगा. मैं मुंबई टीम में सिलेक्ट होना चाहता था. मैंने उसी साल मुंबई रणजी टीम में डेब्यू भी किया था."
सौरभ ने दो साल तक लगातार कोशिश की लेकिन प्लेइंग इलेवन के लिए प्रतिस्पर्धा इतनी थी कि वह अपनी जगह पक्की नहीं कर सके और आईपीएल में भी उन्हें मौक़ा नहीं मिला.

क्रिकेटर से लेकर क्रिकेट ऐप डेवलपर तक

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एक क्रिकेटर का करियर असल में महज 22-23 साल की उम्र में शुरू होता है. लेकिन उम्र के इसी पड़ाव पर सौरभ ने क्रिकेट छोड़ने का फ़ैसला कर लिया.
सौरभ कहते हैं, "तब एक दुविधा थी कि क्या मुझे क्रिकेट छोड़ देना चाहिए और अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित करना चाहिए?"
मुंबई रणजी टीम में उनका स्थान निश्चित नहीं था और ऐसा कोई रास्ता नहीं था कि वह आगे भारत के लिए खेल सकें. इसलिए सौरभ ने अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने का फ़ैसला किया.
“2015 में, बैक-अप विकल्प के रूप में, मैंने यूएस में मास्टर्स के लिए प्रवेश परीक्षा दी. मेरे साथ इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले कई लोग अमेरिका में पढ़ रहे थे, मुझे उनके अनुभव जानने को मिले. मास्टर्स के लिए मैंने न्यूयॉर्क के कॉर्नेल विश्वविद्यालय में दाखिला लिया, जिसे कंप्यूटर विज्ञान के लिए दुनिया के अग्रणी विश्वविद्यालयों में से एक माना जाता है."
2015 में सौरभ आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका चले गए. बाद में उन्हें एक प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनी ओरेकल में नौकरी भी मिल गई.
इस दौरान सौरभ ने क्रिकेट को लेकर एक ऐप भी बनाया था. उनके योग और गाने के वीडियो भी हाल के दिनों में इंस्टाग्राम पर चर्चित हुए.
उन्हें लगा था कि अमेरिका जाने पर क्रिकेट बंद हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सौरभ कहते हैं, "कॉलेज में कुछ बच्चे सिर्फ़ मनोरंजन के लिए क्रिकेट खेलते थे. उन्होंने एक कॉलेज क्रिकेट क्लब बनाया था. कॉलेज के स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित होती थीं."
ओरेकल में नौकरी पाने के बाद सौरभ सैन फ्रांसिस्को, कैलिफोर्निया चले गए. यहां हर सप्ताह के अंत में क्लब क्रिकेट टूर्नामेंट होते हैं. सौरभ का पांच दिन काम करने और शनिवार और रविवार के मैच में खेलने का शेड्यूल होता था.
सौरभ ने बताया, “वे टूर्नामेंट भारत के स्तर के नहीं थे. तब यहां कोई साधारण पिच भी नहीं थीं. अब भी नहीं हैं. यहां हमारे पास वैसी उचित मिट्टी की पिच नहीं है, जैसी भारत में होती है. सिंथेटिक मैट के समान पिच होती है. हालांकि, लॉस एंजिलिस में मुंबई के समान एक पार्क में तीन या चार पिचें हैं. वो अच्छी पिचें हैं. हम वहां खेलने जाते थे.”

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6 घंटे ड्राइव कर क्रिकेट खेलने जाते थे सौरभ
लॉस एंजिल्स सैन फ्रांसिस्को से छह घंटे की ड्राइव पर है. इसलिए सौरभ शुक्रवार की शाम को गाड़ी से लॉस एंजिल्स जाते थे, शनिवार को वहां खेलते थे और रविवार को सैन फ्रांसिस्को लौट आते थे.
“उस क्लब में खेलते समय मेरे साथ तीन या चार लोग थे जो अमेरिकी टीम में खेल रहे थे. दरअसल, तभी मुझे पता चला कि अमेरिका की भी एक क्रिकेट टीम है."
लेकिन सौरभ को यूएसए की राष्ट्रीय टीम के लिए खेलने की बहुत कम उम्मीद थी क्योंकि वहां की टीम में चयन के नियम बहुत कड़े थे.
उस वक्त की शर्तों के बारे में सौरभ बताते हैं, “आपको अमेरिका में सात साल तक रहना होगा और आपको स्थायी निवासी होना होगा. मैं तब स्टूडेंट वीज़ा पर था, फिर वर्क वीज़ा पर था. इसलिए अमेरिका के लिए खेलना सवाल ही नहीं उठता था. मैं केवल खेल का आनंद लेने के लिए क्रिकेट खेल रहा था.”

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2018 में सौरभ ने अमेरिका में तीन साल पूरे किए और उसी समय आईसीसी ने सात साल की शर्त को घटाकर तीन साल कर दिया.
जब अमेरिकी टीम ट्रेनिंग के लिए लॉस एंजिल्स आई तो वहां को कोच को सौरभ का खेल पसंद आया और धीरे-धीरे अमेरिकी टीम के दरवाजे उनके लिए खुलते गए.
बाद में उन्होंने अमेरिका में मेजर लीग क्रिकेट, कैरेबियन प्रीमियर लीग और इंटरनेशनल लीग ट्वेंटी-20 में हिस्सा लिया.
एसोसिएट क्रिकेट का संघर्ष

बहुत से लोग सोचते हैं कि क्रिकेट में सब कुछ आसान है या छोटी टीमों के लिए खेलना आसान है. लेकिन सौरभ बताते हैं कि यहां भी बड़ा संघर्ष है.
“एसोसिएट देशों में क्रिकेट बहुत कठिन है, क्योंकि सुविधाएं बहुत कम हैं. हमारे पास कई जगहों पर अभ्यास के लिए सुविधाएं या साधारण पिचें नहीं हैं. हम पांच बजे ऑफिस छोड़ देते थे और रात में सात से नौ बजे तक घर के अंदर अभ्यास करते थे.”
2019 में आईसीसी ने सभी सदस्यों को ट्वेंटी20 अंतरराष्ट्रीय टीम का दर्जा दिया. फिर संयुक्त राज्य अमेरिका ने 2026 विश्व कप क्वालीफायर में प्रवेश करके अस्थायी एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय दर्जा भी प्राप्त किया. सौरभ बताते हैं कि अगले तीन सालों में अमेरिका में क्रिकेट तेजी से बढ़ने वाला है.
उन्होने बताया, “अच्छे मैदान बन चुके हैं. अकादमियां आकार ले रही हैं और इससे नए खिलाड़ी उभरने लगे हैं. हमारी वनडे टीम में कुछ ऐसे हैं जो जन्म से ही यहां हैं. यहां 13-14 साल के खिलाड़ी हैं जिनकी गुणवत्ता अगले चार-पांच साल में दिखेगी. अगली चुनौती उन्हें अंतरराष्ट्रीय खेल के लिए तैयार करने की है."
भारत के ख़िलाफ़ खेलने की चुनौती

ट्वेंटी-20 विश्व कप से पहले टी-20 सिरीज़ में अमेरिका ने बांग्लादेश को हराया था. सौरभ का कहना है कि उस जीत से उनकी टीम को नया आत्मविश्वास मिला. टीम कनाडा के ख़िलाफ़ जीत से शानदार शुरुआत कर चुकी है.
अब अमेरिकी टीम छह जून को पाकिस्तान से और 12 जून को भारत के ख़िलाफ़ खेलेगी. सौरभ कहते हैं कि भारत के ख़िलाफ़ खेलना एक भावनात्मक पल होगा.
उन्होंने बताया, “मैंने भारत के लिए अंडर-19 क्रिकेट खेला है. कई लोग जो कभी मेरे साथ खेलते थे वे अब भारतीय टीम में हैं. उन्हें दोबारा देखना अच्छा लग रहा है."
भारत के ख़िलाफ़ मैच के बारे में सौरभ ने कहा, "टी-20 में कुछ भी हो सकता है. हम सकारात्मक हैं, लेकिन एक समय में एक ही मैच के बारे में सोच रहे हैं.”
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