क्या है आईपैक और कौन हैं इसके प्रमुख प्रतीक जैन जिनके यहां ईडी ने छापेमारी की

इमेज स्रोत, linkedin/Getty
केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में गुरुवार को राजनीतिक सलाहकार कंपनी आईपैक और इसके प्रमुख प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की.
आइपैक और इसके प्रमुख पश्चिम बंगाल के सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं, इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि छापेमारी के दौरान राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद प्रतीक जैन के घर पहुंच गई थीं.
ईडी का दावा है कि ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी से जुड़ी हार्ड डिस्क, आतंरिक दस्तावेज़ और संवेदनशील डेटा को ज़ब्त करने की कोशिश की.
ममता बनर्जी ने प्रतीक जैन को टीएमसी का आईटी चीफ़ बताया. आइपैक ने तृणमूल कांग्रेस के लिए 2021 में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार की थी.
क्या है आईपैक और कैसे काम करती है?

इमेज स्रोत, indianpac.com
साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में भी आईपैक टीएमसी से जुड़ी रही. दोनों ही चुनावों में टीएमसी ने अच्छा प्रदर्शन किया था.
वरिष्ठ कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने एएनआई से बातचीत में आईपैक को टीएमसी पार्टी की आंख और कान बताया.
आईपैक की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसका पूरा नाम इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी है. यह 2013 में सिटिजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस (सीएजी) के नाम से शुरू हुई थी.
आईपैक की वेबसाइट ने लिखा है कि संस्था ''दूरदर्शी नेताओं के साथ काम करती है जिनका प्रूवन ट्रैक रिकॉर्ड है. कंपनी नेताओं को जनता आधारित एजेंडा बनाने में मदद करती है और उनके साथ मिलकर प्रभावी तरीके से लागू करती है, ताकि उस एजेंडा को जनता तक पहुंचाया जाए और बड़े समर्थन को जुटाया जा सके.''
आईपैक ने सबसे पहले साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए काम किया था.
इसके बाद से ये संस्था कई राज्यों में अलग-अलग दलों के लिए चुनावी रणनीति बनाती रही है, इनमें से अधिकतर चुनावों में उन पार्टियों ने जीत दर्ज की, जिनके साथ आईपैक ने काम किया.
जबकि कुछ में ऐसी पार्टियों को हार का सामना भी करना पड़ा था.
कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर उन प्रचार अभियानों की जानकारी भी दी है, जो संस्था ने डिजाइन किए थे.
इनमें पंजाब कांग्रेस के लिए बनाया अभियान 'कैप्टन दे नौ नुक्ते', जेडीयू के लिए 'नीतीश के 7 निश्चय', टीएमसी के लिए 'दीदी की शपथ' और आम आदमी पार्टी के लिए 'केजरीवाल की 10 गारंटियां' सहित कई कैंपेन शामिल हैं.
प्रशांत किशोर और आईपैक का क्या कनेक्शन?

इमेज स्रोत, Getty Images
आईपैक से पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर भी जुड़े थे.
2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले तक प्रशांत किशोर ही आईपैक का चेहरा हुआ करते थे.
फिर उन्होंने राजनीति में कदम रखा और आईपैक से अलग हो गए.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक़,आईपैक में काम कर चुके फलकयार अस्करी ने बताया, "प्रशांत किशोर सिर्फ सलाहकार की तरह काम करते थे. कंपनी की संरचना में ऐसा कुछ नहीं था जो उन्हें बांधे रखता, इसलिए वे चले गए तो कंपनी पर कोई असर नहीं पड़ा."
कौन हैं प्रतीक जैन?

इमेज स्रोत, Getty Images
प्रशांत किशोर के जाने के बाद आईपैक की कमान ऋषि राज सिंह, विनेश चंदेल और प्रतीक जैन के हाथों में है.
एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि प्रतीक जैन आईपैक में सबसे मुख्य व्यक्ति हैं.
माना जाता है कि पश्चिम बंगाल के आगामी चुनाव में टीएमसी के लिए काम करने की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर है.
वह आईपैक के सिस्टम को टीएमसी की व्यवस्था से जोड़ने का काम करते हैं.
प्रतीक जैन की लिंक्डइन प्रोफ़ाइल से मिली जानकारी के अनुसार, वह आईपैक में सह-संस्थापक और निदेशक हैं.
अप्रैल 2015 से वह इस कंपनी के साथ जुड़े हैं. जैन उससे पहले सिटिजन्स फॉर अकाउंटेबल गवर्नेंस के संस्थापक सदस्य रहे.
राजनीतिक सलाह देने वाली कंपनी से जुड़ने से पहले वह मल्टीनेशनल कंपनी डेलॉइट में बतौर एनालिस्ट काम करते थे.
उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से बीटेक किया है.
टीएमसी के एक नेता ने 'टाइम्स ऑफ इंडिया' को कहा, "प्रशांत किशोर के विपरीत, प्रतीक जैन हमेशा सुर्ख़ियों से दूर रहना पसंद करते हैं. एक प्रतिभाशाली व्यक्ति होने के नाते, वे एकांत में रहकर ही सबसे अच्छा काम करते हैं. इसके अलावा, उनकी जड़ें कोलकाता से ही हैं और वे बंगाल की जियोपॉलिटिक्स को अधिकांश लोगों से बेहतर समझते हैं."
अख़बार के अनुसार टीएमसी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने जैन से जुड़ा एक वाकया साझा किया.
उन्होंने कहा, "बंगाल के 2024 के लोकसभा चुनाव का परिणाम घोषित हो चुका था, प्रतीक जैन को मुख्यमंत्री और उनकी टीम के साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए बुलाया गया. अगले दिन मीडिया में प्रकाशित तस्वीर में स्पष्ट तौर पर नजर आ रहा था कि वह तस्वीर खिंचवाने में असहज दिख रहे थे."
बीबीसी के लिए कलेक्टिवन्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















