'मस्जिद ज़रूर बनेगी', पश्चिम बंगाल विधायक हुमायूं कबीर के दावे की परीक्षा का दिन

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- Author, इल्मा हसन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
'मस्जिद ज़रूर बनेगी' ये तृणमूल कांग्रेस से निकाले गए विधायक हुमायूं कबीर के शब्द थे.
हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले के भरतपुर सीट से विधायक हैं. वह पिछले कई दिनों से दावा कर रहे हैं कि 6 दिसंबर को वो भरतपुर के बेलडांगा में 'बाबरी मस्जिद' बनवाने के लिए नींव रखेंगे.
6 दिसंबर वही तारीख़ है, जिस दिन 33 साल पहले अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहा दी गई थी.
4 दिसंबर को तृणमूल कांग्रेस ने हुमायूं कबीर को पार्टी से निष्कासित कर दिया है.
पश्चिम बंगाल (टीएमसी) के मंत्री और कोलकाता के मेयर फ़िरहाद हकीम ने कहा कि हुमायूं कबीर को पहले भी चेतावनी दी गई थी, इसके बाद भी हुमायूं कबीर यह दावा करते रहे.
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उन्होंने यह भी कहा, "बीजेपी अपना पांव पश्चिम बंगाल में जमा नहीं पा रही है. ये बीजेपी के पैसे से ऐसा बोल रहे हैं ताकि समाज टूट जाए. तृणमूल कांग्रेस ऐसा नहीं करने देगी."
'जहां संदेश भेजना था, भेज दिया'
पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं. चुनाव से पहले इस मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी है.
पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने कहा, "जनता को सोचना चाहिए कि वे पश्चिम बंगाल में रहना चाहते हैं या पश्चिम बांग्लादेश में. जिस-जिस जगह संदेश भेजना था वह भेज दिया, और अब निष्कासित कर दिया. मुख्यमंत्री कई बार ख़ामोश भी रही हैं, यह नाटक है."
पार्टी से निष्कासित होने के बाद हुमायूं कबीर ने कहा है कि वह मस्जिद अब भी बनवाएंगे.
उन्होंने 22 दिसंबर को एक नई पार्टी बनाने की घोषणा भी की है. यह पहली बार नहीं है जब हुमायूं कबीर के ख़िलाफ़ इस तरह की कार्रवाई हुई है. वह पार्टी लाइन के ख़िलाफ़ पहले भी बोल चुके हैं.
62 साल के हुमायूं कबीर ने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी. साल 2012 में तृणमूल कांग्रेस के विधानसभा चुनाव जीतने के एक साल बाद उन्होंने कांग्रेस छोड़ टीएमसी का दामन थाम लिया. लेकिन साल 2015 में हुमायूं कबीर को पार्टी के ख़िलाफ़ बोलने के कारण टीएमसी से बाहर कर दिया गया.
उन्होंने कहा था कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को 'राजा' बनाना चाहती हैं. उन्होंने ममता बनर्जी के आने वाले समय में मुख्यमंत्री रहने की काबिलियत पर भी सवाल उठाए थे.
साल 2018 में हुमायूं कबीर बीजेपी का हिस्सा बन गए और मुर्शिदाबाद से लोकसभा चुनाव भी लड़े, जो वह हार गए थे. साल 2021 में वे वापस तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए.
पार्टी गई, विधायकी नहीं

अपने बयानों की वजह से वह बीते कुछ साल में कई बार विवादों में रहे हैं.
मई 2024 में उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान कहा था कि, 'मुर्शिदाबाद में 70% जनसंख्या मुस्लिम है... बीजेपी के समर्थकों को भागीरथी नदी में फेंक देंगे.'
नवंबर 2024 में हुमायूं कबीर को शो-कॉज़ नोटिस भी मिला क्योंकि उन्होंने मांग की थी कि ममता बनर्जी को नहीं बल्कि अभिषेक बनर्जी को गृह मंत्रालय की ज़िम्मेदारी मिले.
इस साल मार्च में पार्टी से मिले नोटिस के बाद हुमायूं कबीर को माफ़ी मांगनी पड़ी थी.
उन्होंने नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी विधायक सुवेंदु अधिकारी को धमकी दी थी. दरअसल सुवेंदु अधिकारी ने राज्य में बीजेपी की जीत होने पर मुस्लिम विधायकों के ख़िलाफ़ कदम उठाने की बात की थी, जिसके जवाब में हुमायूं कबीर ने भी आपत्तिजनक बयान दिया था.
अब ताज़ा विवाद के बाद हुमायूं कबीर ने तृणमूल कांग्रेस पर मुस्लिम समुदाय को समर्थन न देने का आरोप लगाया है और कहा है कि साल 2026 के चुनावों के बाद ममता बनर्जी मुख्यमंत्री नहीं बनेंगी.
उनका कहना है, "साल 2011 के बाद जब ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनी थीं, उस समय राज्य में आरएसएस की करीब 400 शाखाएं थीं. आज वह संख्या 12 हज़ार तक पहुंच गई है. इससे साबित होता है कि मुख्यमंत्री किसके लिए काम कर रही हैं. जगन्नाथ मंदिर बनाने के लिए राज्य के ख़जाने से पैसा किसने खर्च किया था? तो फिर मस्जिद बनवाने की इच्छा रखने पर मेरे प्रति इतना गुस्सा क्यों है?"
हुमायूं कबीर को भले ही टीएमसी से निष्कासित कर दिया गया हो, लेकिन यह निष्कासन पार्टी सदस्यता से ही है. वह अभी भी भरतपुर के विधायक बने हुए हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















