वेनेज़ुएला सबसे ज़्यादा ऑयल रिज़र्व होने के बावजूद क्यों इस अवसर को भुना नहीं पाया? - द लेंस
साल 2026 के शुरुआत में ही एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम हुआ, जिसके बाद ये चर्चा शुरू हो गई कि क्या अंतरराष्ट्रीय क़ानून अहम हैं या ताक़तवर देश के नेता का शक्ति प्रदर्शन?
अमेरिका ने वेनेज़ुएला में सैन्य कार्रवाई की और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को 'पकड़' लिया. अमेरिका ने कहा कि ये कार्रवाई नशीले पदार्थों की तस्करी के ख़िलाफ़ थी, मगर ये क़दम अचानक नहीं उठा बल्कि यह कई महीनों की सैन्य दबाव की रणनीति का नतीजा था.
वेनेज़ुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा कच्चे तेल का भंडार है और ये भंडार करीब 300 अरब बैरल का है. इतना तेल एक देश को दुनिया के अमीर देशों की कतार में पहुंचा सकता है, मगर कथित भ्रष्टाचार और आर्थिक कुप्रबंधन के चलते वहां की 90 प्रतिशत से ज़्यादा आबादी गरीबी में जी रही है. तेल है, लेकिन उत्पादन बेहद कम है.
सवाल उठ रहे हैं कि आख़िर मादुरो के ख़िलाफ़ की गई कार्रवाई के पीछे की असल मंशा क्या थी? इस तरह की कार्रवाई से दुनिया के अन्य प्रभावशाली देश किस तरह के संकेत ले सकते हैं? क्या ट्रंप दुनिया में एक देश के साम्राज्य के दिन वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं? और भारत के लिए इस घटनाक्रम के क्या मायने हैं?
द लेंस के इस एपिसोड में इन सभी सवालों पर चर्चा हुई. इस चर्चा में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़्म मुकेश शर्मा के साथ शामिल हुए वरिष्ठ पत्रकार ज़ुबैर अहमद, द इंडियन एक्सप्रेस के नेशनल बिज़नेस एडिटर अनिल शशि और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में दक्षिण अमेरिकी विषयों की प्रोफ़ेसर अपराजिता कश्यप.
प्रोड्यूसरः शिल्पा ठाकुर / सईदुज़्जमान
गेस्ट कोऑर्डिनेटरः संगीता यादव
वीडियो एडिटिंगः जमशैद अली
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.



