रोहित शर्मा की वो छूट, जिससे टी-20 क्रिकेट वर्ल्डकप के फ़ाइनल में पहुंची टीम इंडिया

रोहित शर्मा

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    • Author, विमल कुमार
    • पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार जॉर्जटाउन(गयाना) से

टी20 क्रिकेट वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल मुक़ाबले से ठीक पहले प्रेस वार्ता में भारतीय कप्तान रोहित शर्मा से एक सवाल पूछा गया.

सवाल था कि ऑस्ट्रेलिया वाले मैच में जीत की सबसे बड़ी बात क्या रही थी?

रोहित ने हँसते हुए कहा था कि अब ऑस्ट्रेलिया वर्ल्ड कप में नहीं है.

ज़ाहिर सी बात है कि रोहित साफ-साफ ये नहीं कहना चाहते थे कि 19 नवंबर 2023 को वनडे वर्ल्ड कप फाइनल और जून 2023 में वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप में ऑस्ट्रेलिया से मिली हार उन्हें कचोटती है.

ऐसे में ऑस्ट्रेलिया को टूर्नामेंट से ही बाहर का रास्ता दिखाने में उन्हें काफ़ी खुशी मिली.

इंग्लैंड के ख़िलाफ़ भी रोहित का यही इरादा रहा होगा कि क़रीब दो साल पहले एडिलेड में उन्हीं के ख़िलाफ़ सेमीफाइनल में भारत बुरी तरह से हार गया था.

इसके बाद टीम इंडिया की बल्लेबाज़ी शैली की काफ़ी आलोचना हुई थी.

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सेमीफ़ाइनल में मैदान का हाल

वर्ल्ड कप के दूसरे सेमीफाइनल में टीम इंडिया इंग्लैड को हराकर फाइनल में पहुंच गई है, जहां उसका मुकाबला दक्षिण अफ्रीका से होगा.

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दूसरे सेमीफाइनल में गयाना की पिच एडिलेड की तरह सपाट नहीं थी.

यहां पर रन बनाने के लिए अनुभव के साथ साथ योग्यता और दिलेरी की ज़रूरत थी.

अगर ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ रोहित विध्वंसक रूप में नज़र में आए थे तो जॉस बटलर की टीम के ख़िलाफ़ उन्होंने एक मुश्किल पिच पर संयम, धैर्य और आक्रामकता का बेहतरीन तालमेल दिखाया.

रोहित ने मैच का इकलौता और इस वर्ल्ड कप में अपना तीसरा अर्धशतक जड़ा.

रोहित पर ज़िम्मेदारी और दबाव इसलिए ज़्यादा बढ़ गया था क्योंकि पूर्व कप्तान विराट कोहली इस फॉर्मेट में बेहद ख़राब दौर से गुज़र रहे हैं.

सात पारियों में 11 से कम की औसत और 100 का स्ट्राइक रेट कोहली जैसे बल्लेबाज़ के साथ बिलकुल मेल नहीं खाता है. ये कोहली ही थे, जिन्होंने वर्ल्ड कप से ठीक पहले आईपीएल में 741 रन ठोक डाले थे.

कोहली के संघर्ष के दौर के बावजूद अगर टीम इंडिया को इसका तनिक भी असर नहीं पड़ा है तो रोहित के साथ सूर्यकुमार यादव की निरंतरता और निर्णायक लम्हों में बेहतरीन पारी खेलना भी एक बड़ी वजह रहा है.

मैच के बाद रोहित शर्मा ने कहा, ''मैं अपने दिमाग में एक लक्ष्य निर्धारित कर सकता हूं लेकिन मैं बल्लेबाज़ों को नहीं बताना चाहता...वो सभी खिलाड़ी हैं और मैं चाहता हूं कि वो जाएं और खुलकर खेलें...बगैर ये सोचे कि क्या स्कोर बनना है. बल्लेबाज़ों ने परिस्थिति को अच्छे से समझा और उसके हिसाब से खेला. हमने 170 रन बनाए और मुझे लगता है कि हम काफ़ी अच्छा खेले.''

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सूर्या की रोहित के साथ साझेदारी

मुंबई के सूर्या ने अपने कप्तान के साथ एक शानदार साझेदारी की और 171 रनों का लक्ष्य देने में एक अहम भूमिका निभाई.

सूर्या ने 36 गेंदों पर 47 रन बनाए.

इसके अलावा हार्दिक पंड्या के 13 गेंदों पर 23 रन, रविंद्र जडेजा के 9 गेंदों पर 17 रन और अक्षर पटेल के 6 गेंदों पर 10 रन ने एक बार फिर से कप्तान रोहित की उस सोच को सही साबित किया है.

रोहित बल्लेबाज़ी क्रम में गहराई पर ज़ोर देते हैं जिसके चलते हर बल्लेबाज़ नंबर 1 से लेकर 8 तक खुलकर खेल सके.

लेकिन, टीम इंडिया ने अगर मैच जीता तो इसकी वजह रही इनका गेंदबाज़ी आक्रमण.

अक्षर पटेल ना तो कुलदीप यादव की तरह मैच विनर हैं जो जादुई गेंदें फेंककर किसी भी मैच का रुख़ बदल सकते हैं और ना ही जडेजा की तरह उनके पास अनुभव है.

अक्षर का प्रदर्शन

अक्षर पटेल

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इस वर्ल्ड कप में अक्षर ने दिखाया है कि कैसे बड़े खिलाड़ियों के साए में रहते हुए भी अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है.

पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मैच में उन्होंने टॉप ऑर्डर में जाकर ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी करते हुए पाकिस्तानियों को भौचक्का किया.

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ एक हैरतअंगेज कैच लपककर मैच को ही घुमा दिया.

इसके अलावा हर मैच में वो अपनी गेंदबाज़ी से भी शानदार प्रभाव डाल रहे हैं. लेकिन इंग्लैंड के कप्तान जॉस बटलर को जिस तरह से उन्होंने पवेलियन की राह दिखाई, उससे ये कहा जा सकता है कि गुजरात का ये खिलाड़ी धीरे-धीरे अपनी अहमियत को हर किसी के सामने बता रहा है.

दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से वनडे वर्ल्ड कप से पटेल चोट के चलते बाहर हो गए थे और आख़िरी लम्हों में आर अश्विन को मौक़ा मिला था.

पटेल खुद 2015 में ऑस्ट्रेलिया में अपना पहला वर्ल्ड कप खेल चुके हैं. लेकिन एक दशक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बिताने के बावजूद ना तो वो अपनी जगह एकदम से पक्की कर पाए हैं और ना ही उनके चर्चे मीडिया या फैंस के बीच हो पाते हैं.

अब काफी कुछ बदल सकता है क्योंकि उनके तीन विकेट के स्पेल ने इंग्लैंड की कमर तोड दी.

अगर पटेल ने 4 ओवर में 23 रन देकर 3 विकेट लिए तो कुलदीप ने इतने ही विकेट, इतने ही ओवर की गेंदबाज़ी में सिर्फ 19 रन देकर हासिल किए.

कुलदीप के बारे में अगर ये कहा जाए कि कप्तान रोहित शर्मा के दौर में उनका आत्म-विश्वास अपने परवान पर है तो ग़लत नहीं होगा.

ये जीत क्या बताती है

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कुल मिलाकर देखा जाए तो एक बार फिर से ये टीम इंडिया के खिलाड़ियों की सामूहिक जीत थी, जहां पर प्लेयर ऑफ द मैच के लिए अक्षर से लेकर कुलदीप और रोहित भी दावेदार थे.

तीन तेज़ गेंदबाज़ होने के बावजूद अगर रोहित ने उनसे पूरे मैच में 6 ओवर भी नहीं डलवाए तो आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि पिच पर स्पिनर्स को कितनी मदद थी.

इसके बावजूद इंग्लैंड के कप्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाज़ी करने का फैसला किया था.

रोहित ने कहा था कि वो बल्लेबाज़ी करना ही पंसद करते.

रोहित के इस आत्मविश्वास को देखिए. 2014 टी20 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में आख़िरी बार किसी टीम(श्रीलंका ने) नॉक आउट मुकाबले में पहले बल्लेबाज़ी करते हुए जीत हासिल की थी.

इसके बाद से 12 मौक़ों पर हर नॉक आउट मैचों में (पिछले 5 वर्ल्ड कप से) सेमीफाइनल या फाइनल में टीमों ने बाद में बल्लेबाज़ी करते हुए मैच और टूर्नामेंट जीते हैं.

क्या 29 जून को रोहित एक बार फिर से उसी अंदाज़ में बल्लेबाज़ी और कप्तानी करते दिखेंगे, जिसके चलते पूरे टूर्नामेंट में उनकी टीम को एक भी मैच में हार नहीं मिली.

भारतीय क्रिकेट प्रेमी चाहेंगे कि कि पिछले 12 साल से वर्ल्ड कप जीतने का सपना आखिरकार ज़रूर पूरा हो, जिसकी भविष्यवाणी बीसीसीआई के सचिव जय शाह ने अब से कुछ महीने पहले ही कर दी थी.

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