कश्मीर: वर्ल्ड कप में भारत की हार पर जश्न मनाने का आरोप, छात्रों पर यूएपीए लगने से छिड़ी बहस

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इमेज कैप्शन, गिरफ़्तार किए गए नौजवानों के वकील शफ़ीक अहमद
    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, गांदरबल से, बीबीसी हिंदी के लिए

विश्व कप क्रिकेट के फ़ाइनल में भारत की हार और ऑस्ट्रेलिया की जीत पर जश्न मनाने के आरोप में सात कश्मीरी छात्रों पर यूएपीए लगा दिया गया है और इसी को लेकर वहाँ बहस छिड़ गई है.

कथित तौर पर जश्न मनाने वाले कश्मीरी छात्रों के परिजनों ने उन्हें निर्दोष बताया है.

इन सात छात्रों को 20 नवंबर को गिरफ़्तार कर लिया गया था और वो फ़िलहाल पुलिस रिमांड पर हैं. ये सभी छात्र भारत प्रशासित कश्मीर के गांदरबल में कृषि विश्वविद्यालय में पढ़ते हैं.

आतंकवाद से निबटने के लिए बने सख़्त कानून अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट (यूएपीए) का इस्तेमाल पत्रकारों, छात्रों और राजनीतिक-सामाजिक कार्यकर्ताओं पर किए जाने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं.

पुलिस के आईजी ने बीबीसी से कहा है कि इन लोगों के ख़िलाफ़ मुकदमा तब दर्ज किया गया जब ग़ैर-कश्मीर छात्रों ने भारत विरोधी नारे लगाए जाने और धमकाए जाने की शिकायत की.

क्या कह रहे हैं छात्रों के परिजन?

गिरफ्तार छात्रों में से एक के भाई ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “जब ये घटना हुई उस वक़्त मेरा भाई हॉस्टल में अपने कमरे में ही था. मेरे भाई ने मुझे बताया कि घटना से पहले सब लड़के अपने-अपने कमरों में थे. कोई मैच देख रहा था, कोई पढ़ाई कर रहा था और कोई किसी और काम मैं व्यस्त था. भाई ने मुझे बताया कि उसे इस घटना के बारे में कुछ भी नहीं पता.”

वहीं एक दूसरे छात्र के परिजन ने बीबीसी से कहा, “मेरे बच्चे को नहीं पता कि ये घटना हुई कैसे. अगर बच्चे से कोई ग़लती हो भी गई है तो उसे माफ़ किया जाए और उसके भविष्य को बचाया जाए.”

गिरफ़्तार छात्रों के परिजन डरे हुए हैं और चिंतित भी. वो मीडिया सेे बात करने से बचते दिखे और अपनी पहचान ज़ाहिर नहीं करना चाहते हैं.

एक दूसरे परिजन ने कहा, “अगर हमारे बच्चों से ग़लती हुई भी है तो भी यूएपीए जैसा सख़्त क़ानून तो उनकी ज़िंदगी ही ख़राब कर देगा.”

ग़िरफ़्तार छात्रों के वकील शफ़ीक़ अहमद भट ने बीबीसी से कहा, “अदालत ने पुलिस से अब रिपोर्ट मांगी है. हमें भी अब तक पुलिस की रिपोर्ट की कॉपी नहीं मिली है.”

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इमेज कैप्शन, गांदरबल का कृषि विश्वविद्यालय जहाँ छात्र पढ़ते हैं

क्या है पूरा मामला

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गिरफ़्तार किए गए छात्रों पर आरोप है कि फ़ाइनल मैच के दौरान वो भारतीय टीम का समर्थन करने वाले ग़ैर-कश्मीरी छात्रों से भिड़ गए, हंगामा किया और ऑस्ट्रेलिया की जीत के बाद जश्न मनाया.

ये छात्र शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चर साइंस एंड टेक्नॉलजी, गांदरबल के छात्र हैं.

पुलिस ने 20 नवंबर को इन सात छात्रों को गिरफ्तार किया है. इन छात्रों के ख़िलाफ़ यूएपीए के सेक्शन 13 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

कश्मीर ज़ोन के इंस्पेक्टर जनरल विधि कुमार बिरदी ने बीबीसी से कहा, “फ़ाइनल मैच के बाद नारेबाज़ी हुई थी. यूनिवर्सिटी के ही छात्रों ने इन सात लोगों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई थी. उनकी शिकायत के मुताबिक़ इन लोगों ने उन्हें धमकाया भी था. उसी शिकायत के आधार पर ये मामला दर्ज हो गया है और आगे की तफ़्तीश जारी है."

शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में लिखा, “मैच के दौरान भारत का समर्थन करने पर उन छात्रों ने मुझे ख़ामोश रहने को कहा और जान से मारने की धमकी भी दी. वो बार-बार पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगा रहे थे और उनकी नारेबाज़ी से हम ग़ैर कश्मीरी छात्रों में ख़ौफ़ पैदा हो गया.”

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इमेज कैप्शन, यूनिवर्सिटी का परिसर

क्यों लगाया गया यूएपीए?

छात्रों के ख़िलाफ़ यूएपीए लगाने की आलोचना के बाद गांदरबल पुलिस ने बयान जारी कर कहा, “यूएपीए की धारा 13 अलगाववादी विचारधारा को भड़काने, उसकी वकालत करने और उसका हौसला बढ़ाने के लिए लगाई गई है. ये वास्तविक आतंकी योजना बनाने के बारे में नहीं है और ये इस अधिनियम का अपेक्षाकृत एक नरम प्रावधान है."

पुलिस ने बयान में बताया, "इस धारा का इस्तेमाल उन लोगों के ख़िलाफ़ किया जाता है जो भारत के प्रति समर्थन रखने वालों को आतंकित करते हैं.”

ज़िला गांदरबल के शुहामा इलाक़े में स्थित कृषि विश्वविद्यालय में जब हम पहुँचे तो ज़्यादातर छात्र इस मुद्दे पर बात करने से बचते नज़र आए.

इस कृषि विश्वविद्यालय में क़रीब पचास ग़ैर-कश्मीरी छात्र इस समय पढ़ाई कर रहे हैं.

विश्वविद्यालय के एक सीनियर कश्मीरी छात्र ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि जब भारत और ऑस्ट्रेलिया का मैच हो रहा था तो ऑस्ट्रेलिया की जीत पर किसी एक छात्र ने जश्न मनाया और भारत की हार पर दूसरे को दुख हुआ. इसी बात पर दोनों के बीच कुछ कहा-सुनी हो गई. हो सकता है इससे बात और तनाव बढ़ गया हो.

इस छात्र ने आगे कहा, “एक क्रिकेट मैच के कारण किसी की वफ़ादारी को तौला नहीं जा सकता है. अगर छात्रों से कुछ ग़लती भी हो गई है, तो इसका मतलब ये नहीं कि आँखें बंद करके उन पर यूएपीए जैसा सख्त क़ानून लगाया जाए. मैं घटना के समय मौजूद नहीं था. सिर्फ़ एक मैच एक छात्र की तक़दीर का फैसला नहीं कर सकता है. यहाँ कश्मीरी और ग़ैर कश्मीरी छात्र मिल जुलकर रहते हैं. हम सारे त्योहार साथ मनाते हैं.”

एक और छात्र ने भी नाम न बताने की शर्त पर कहा कि जब मैच ख़त्म हो गया तो हॉस्टल में कुछ लड़के अपने कमरों से बाहर आ गए और फिर कुछ शोर-शराबे की आवाज़ें सुनी गईं. उनका कहना था कि उसके बाद मामला कहाँ पहुँच गया, ये पता नहीं चला.

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इमेज कैप्शन, यूनिवर्सिटी श्रीनगर से सिर्फ़ 18 किलोमीटर दूर है

विश्वविद्यालय के अधिकारी ने क्या कहा ?

यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्ल्ड कप फाइनल के दिन का मामला है. मैच ख़त्म होने के बाद कश्मीरी और ग़ैर-कश्मीरी छात्रों के बीच आपस में कुछ मैच को लेकर हुआ था. कश्मीरी लड़कों ने कुछ शोर और हंगामा किया था. घटना का वीडियो रिकॉर्ड करके पुलिस को भेजा गया जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की."

बीबीसी ने विश्वविद्यालय के डीन फैकल्टी प्रोफेसर मोहम्मद तुफैल बांडे से इस पूरे मामले पर बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बात करने से साफ़ इनकार कर दिया.

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इमेज कैप्शन, शेर-ए-कश्मीर एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी गांदरबल

कश्मीर में यूएपीए के ग़लत इस्तेमाल का आरोप

बीते चार सालों में सैकड़ों लोग कश्मीर में यूएपीए के तहत गिरफ़्तार किए गए हैं.

यूएपीए यानी अनलॉफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट के तहत आरोप पत्र को 90 दिनों के अंदर अदालत में पेश किया जा सकता है. अदालत आरोप पत्र को जमा करने की सीमा 180 दिनों तक बढा सकती है.

यूएपीए क़ानून विशेष प्रावधान के तहत आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए बनाया गया है.

यूएपीए में कई ऐसे सेक्शन हैं कि जिनमें अभियुक्त को तब तक ज़मानत नहीं मिल सकती जब तक कि वो अपने आपको अदालत में निर्दोष साबित ना कर दे.

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता रियाज़ खवार कहते हैं, “जब से ये क़ानून बना है, तब से न सिर्फ़ कश्मीर बल्कि पूरे भारत में इसका ग़लत इस्तेमाल किया जा रहा है. इस क़ानून में सबसे बड़ा मसला ये है कि अभियुक्त को ख़ुद को निर्दोष साबित करना पड़ता है, जैसा कि अक्सर हो नहीं पाता.”

महबूबा मुफ़्ती

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इमेज कैप्शन, पीडीपी की नेता महबूबा मुफ़्ती

राजनीतिक दलों ने क्या कहा ?

इस घटना की कश्मीर के कई राजनीतिक दलों ने भी तीखी आलोचना की. पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (एम) के नेता और पूर्व विधायक यूसुफ़ तारिगामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कि किसी टीम की क्रिकेट में जीत पर जश्न मनाने के लिए यूएपीए लगा देना बेहद चौंकाने वाला मामला है.

कश्मीर में पहली बार क्रिकेट को लेकर इस तरह के मामले या टकरावपूर्ण स्थिति सामने नहीं आई है.

अतीत में भी इस तरह की घटनाएं सामने आती रही हैं.

साल 2016 में भी श्रीनगर के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलॉजी में उस वक़्त कश्मीरी और ग़ैर कश्मीरी छात्रों के बीच झड़प हो गई थी जब वेस्ट इंडीज़ ने भारत को हरा दिया था. तब कश्मीरी छात्रों पर भारत की हार का जश्न मनाने का आरोप लगा था.

पुलिस को तब हालात को क़ाबू में करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा था. तब ग़ैर कश्मीरी छात्रो ने मांग की थी कि इस इंस्टीट्यूट को कश्मीर से बाहर शिफ़्ट किया जाए.

श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के छात्रों और स्टाफ पर वर्ष 2021 में टी-20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की भारत के ख़िलाफ़ जीत पर जश्न मनाने का आरोप लगा था. तब उन पर भी यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया था.

भारत और पाकिस्तान के बीच जब-जब मैच होता है, तब-तब कश्मीर में तनाव के हालात बन जाते हैं.

प्रशासन को हर बार निर्देश देने पड़ते हैं कि सड़कों पर लोग जमा ना हों.

यूएपीए

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क्या है यूएपीए क़ानून?

ये क़ानून भारत में ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए 1967 में लाया गया था.

इस कानून के तहत अगर सरकार को अगर इस बात का 'यक़ीन' हो जाए कि कोई व्यक्ति या संगठन 'आतंकवाद' में शामिल है तो वो उसे 'आतंकवादी' क़रार दे सकती है, यानी मुक़दमा चलाए बिना ही किसी को आतंकवादी घोषित किया जा सकता है.

यूएपीए ऐक्ट में छठे संशोधन के कुछ प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करने वाले एडवोकेट सजल अवस्थी कहते हैं, "यूएपीए ऐक्ट के सेक्शन 35 और 36 के तहत सरकार बिना किसी दिशा-निर्देश के, बिना किसी तयशुदा प्रक्रिया का पालन किए किसी व्यक्ति को आतंकवादी क़रार दे सकती है."

यूएपीए ऐक्ट के सेक्शन 15 के अनुसार भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा या संप्रभुता को संकट में डालने या संकट में डालने की संभावना के इरादे से भारत में या विदेश में जनता या जनता के किसी तबक़े में आतंक फैलाने या आतंक फैलाने की संभावना के इरादे से किया गया कार्य 'आतंकवादी कृत्य' है.

इस परिभाषा में बम धमाकों से लेकर जाली नोटों का कारोबार तक शामिल है.

आतंकवाद और आतंकवादी की स्पष्ट परिभाषा देने के बजाय यूएपीए एक्ट में सिर्फ़ इतना ही कहा गया है कि इनके अर्थ सेक्शन 15 में दी गई 'आतंकवादी कार्य' की परिभाषा के मुताबिक़ होंगे.

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