अनंतनाग मुठभेड़: कर्नल मनप्रीत की माँ बोलीं- बेटे को मिस कॉल मार देती थी और वो फ़ोन करता था

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जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग के कोकरनाग इलाक़े में बुधवार को सेना और चरमपंथियों के बीच मुठभेड़ हुई.
इस मुठभेड़ में कर्नल मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष धोंचक और डीएसपी हुमायूं मुज़म्मिल भट्ट मारे गए.
इन अधिकारियों के अलावा एक जवान की भी मौत हुई है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, इस जवान के बारे में अभी ज़्यादा जानकारी नहीं मिल पा रही है.
हमले की ज़िम्मेदारी प्रतिबंधित रेज़िस्टेंस फ़्रंट ने ली है.
माना जाता है कि पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा का यह प्रॉक्सी संगठन है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ''अधिकारियों का मानना है कि ये वही आतंकवादी संगठन है, जिसने चार अगस्त को कुलगाम में सेना के जवानों पर हमला किया था और तीन जवानों की हत्या कर दी थी.''
हमले के बाद से सेना का सर्च अभियान जारी है और हमलावर चरमपंथियों को पकड़ने की कोशिश की जा रही है.
कश्मीर पुलिस ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए लिखा, ''सुरक्षाबलों के ऑपरेशन में दो लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादियों को घेर लिया गया है. इसमें उज़ैर ख़ान भी शामिल हैं.''
बीते कुछ सालों में कश्मीर में हुआ ये बड़ा चरमपंथी हमला बताया जा रहा है.
इस कहानी में हम आपको अनंतनाग मुठभेड़ में मारे गए मेजर आशीष धोंचक, कर्नल मनप्रीत सिंह और डीएसपी हुमायूं भट्ट के बारे में बताने की कोशिश करेंगे.

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कर्नल मनप्रीत सिंह: पिता की यूनिट में बेटा बना अधिकारी
पंजाब के मोहाली के पास मुल्लापुर जगह है. इसी के पास भरोजियां गांव में कर्नल मनप्रीत सिंह का घर है.
कर्नल मनप्रीत 19 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर थे. मनप्रीत को कुछ वक़्त पहले सेना से मेडल मिला था.
सेना की जिस यूनिट में मनप्रीत अधिकारी थे, उसी यूनिट में उनके पिता नायक पद पर थे.
कर्नल मनप्रीत दो भाई थे और कुछ वक़्त पहले उनके पिता की भी मौत हो गई थी.
कर्नल मनप्रीत साधारण परिवार से हैं. गांव के चंडी मंदिर के पास उनकी पत्नी और बच्चे रहते हैं.
कर्नल मनप्रीत की मां ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ''मेरा बेटा बचपन से फौज में जाना चाहता था. छोटे में अपने पापा की वर्दी पहन लेता था. हर शनिवार, रविवार को फोन पर बात होती थी. हम उसे मिस कॉल मार दिया करते थे, फिर वो फोन करता था.''
रोते हुए कर्नल मनप्रीत की मां बताती हैं- मैं रोज़ ख़बरें देखती थीं, कल मुझे ख़बर नहीं देखने दी. मेरा बेटा बहुत मेहनती था.
बीबीसी संवाददाता सरबजीत सिंह के मुताबिक़- मनप्रीत की मां मनजीत कौर ने कहा- अगर बेटे ने बड़ी रैंक ना ली होती तो वो बच जाता.
कर्नल मनप्रीत के रिश्तेदार विरेंद्र गिल ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ''मेरी कल सुबह सात बजे मनप्रीत से बात हुई थी. उसने कहा था कि वो बाद में बात करेगा. वो अच्छा इंसान था. बीते साल ही सेना से उसे मेडल मिला था. हमें बुधवार दोपहर ढाई बजे फोन आया कि वो घायल हो गए हैं. तब हमने मनप्रीत की पत्नी को ये बात बताई थी.''

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कर्नल मनप्रीत सिंह के ससुर जगदेव सिंह ने कहा, ''मनप्रीत का प्रमोशन तीन साल पहले हुआ था. दो बच्चे हैं, छह साल की बानी और दो साल का कबीर.''
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, मनप्रीत का अंतिम संस्कार पंचकुला में किया जाएगा.

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मेजर आशीष धोंचक: गृह प्रवेश के लिए आना था मगर...
इस मुठभेड़ में मारे गए 36 वर्षीय मेजर आशीष धोंचक 15वीं सिख लाइट इन्फेंट्री में शामिल थे.
बीबीसी के सहयोगी पत्रकार सत सिंह के मुताबिक़, हरियाणा के पानीपत ज़िले में बिंझौल गांव के रहने वाले मेजर आशीष जल्द ही छुट्टियों पर घर आने वाले थे.
उन्होंने अपनी माँ से वादा किया था कि वह अगले महीने 23 अक्तूबर को अपने घर के गृह प्रवेश के मौके पर घर आएंगे.
संयोग से इसी दिन उनका जन्मदिन भी था.
फिलहाल आशीष की पत्नी ज्योति अपनी दो वर्षीय बेटी वामिनी अपने सास-ससुर के साथ पानीपत के सेक्टर 7 में एक किराये के घर में रहती हैं.
मेजर आशीष के पिता लालचंद पहले एक फर्टिलाइजर कंपनी में काम करते थे. लेकिन रिटायरमेंट के बाद से वह आशीष की पत्नी के साथ ही रह रहे हैं.
आशीष के बहनोई सुरेश दुहान ने बीबीसी को बताया है कि आशीष के परिवार को उनके नहीं रहने की ख़बर बुधवार को टीवी चैनलों के माध्यम से मिली. इससे पहले उन्हें सेना मुख्यालय से फोन आया था जिसमें उन्हें आशीष के घायल होने की सूचना मिली थी.
सुरेश ने बताया है कि मेजर आशीष साल 2012 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे. और दो साल पहले ही उनकी पोस्टिंग मेरठ से कश्मीर में हुई थी.
आशीष ने आश्वासन दिया था कि उनकी टीम एक ऑपरेशन पर काम कर रही है जिसे अच्छी तरह अंजाम दिया जा रहा है.
मेजर आशीष के अंकल महावीर की तीन दिन पहले ही उनके साथ बातचीत हुई थी. उन्होंने बताया कि मेजर आशीष 23 अक्तूबर को होने जा रहे गृह प्रवेश के कार्यक्रम को लेकर काफ़ी उत्साहित थे.
वह कहते हैं, “मेजर आशीष का परिवार 23 अक्तूबर का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था क्योंकि इस दिन गृह प्रवेश के साथ-साथ उसका बर्थडे भी था. और गृह प्रवेश होना उसका सपना पूरा होने जैसा था.”
वहीं, आशीष की मां कमला अपने बेटे को खोने के ग़म में रो-रोकर बेहाल हैं.
वह कहती हैं, “मैं उसे गले लगाकर उसकी पीठ ठोकूंगी क्योंकि उसने अपनी मातृभूमि की सेवा की है. उसने साबित कर दिया है कि वो इस देश का बेटा है.”
मेजर आशीष धोंचक के चाचा दिलावर सिंह ने बताया, "वो अपने माता-पिता का अकेला बेटा था. 3 बहनें हैं इसकी. एक महीने पहले घर आया था. हमें फोन से ही पता चला. पहले ये पता चला कि कोई ऑपरेशन चल रहा है. फिर बाद में न्यूज़ के जरिए.... बेटे ने बताया.''
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अपने बेटे को खोने के ग़म में बिलखते-बिलखते उन्होंने कहा कि आशीष अपने चचेरे भाई विकास को देखकर सेना में शामिल हुआ था.
पीड़ित परिवार ने सवाल उठाया कि कब तक आशीष जैसे युवा तिरंगे में लिपटकर अपने घर आते रहेंगे और आतंकी देश की सीमाओं के लिए ख़तरा पेश करते रहेंगे.
सेना के शीर्ष अधिकारी मेजर आशीष के परिवार से मिलने उनके घर पहुंच गए हैं.
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डीएसपी हुमायूं मुज़म्मिल भट्ट: दो महीने पहले बने थे पिता
जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीएसपी हुमायूं भट्ट की दो महीने की बेटी भी है.
हुमायूं के पिता गुलाम हसन बट जम्मू कश्मीर पुलिस में आईजी थे और 2018 में रिटायर गहुए थे.
मुठभेड़ में मारे गए बेटे को सलामी देते हुए उनका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है.
ग्रेटर कश्मीर की रिपोर्ट के मुताबिक़, हुमायूं 2018 के जेकेएस बैच के अधिकारी थे. हुमायूं की डेढ़ साल पहले ही शादी हुई थी.
लगभग दो महीने पहले हुमायूं के घर खुशियां आई थीं, जब वो एक बेटी के पिता बने थे.
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