जम्मू और कश्मीर: चरमपंथी हमले में मारे गए भारतीय सेना के कुत्ते केंट की कहानी

इमेज स्रोत, Defence PRO
- Author, मोहित कंधारी
- पदनाम, जम्मू से, बीबीसी हिंदी के लिए
भारतीय सेना की '21 डॉग यूनिट' की छह वर्षीय मादा लैब्राडोर 'केंट' सोशल मीडिया में मंगलवार के बाद से ही सुर्ख़ियों में है.
मंगलवार को राजौरी ज़िले के नारला इलाके में चरमपंथियों के साथ हुई मुठभेड़ के दौरान अपने संचालक को चरमपंथियों से बचाते हुए केंट की मौत हो गई थी.
केंट दरअसल में चरमपंथियों की तलाश कर रही सैनिकों की एक टुकड़ी का नेतृत्व कर रही थी और इसी दौरान चरमपंथियों की गोलीबारी में उसकी मौत हुई.
इसके बारे में रक्षा मंत्रालय के जम्मू स्थित प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल सुनील बर्तवाल ने बताया, "भारतीय सेना की '21 आर्मी डॉग यूनिट' की ट्रैकर डॉग केंट राजौरी में ऑपरेशन सुजालिगला में सबसे आगे थी. भाग रहे चरमपंथियों की तलाश में सैनिकों की एक टुकड़ी का नेतृत्व कर रही थी और पीछा करने के दौरान, यह भारी गोलीबारी की चपेट में आ गया. अपने हैंडलर (संचालक) की रक्षा करते हुए उसने भारतीय सेना की सर्वोत्तम परंपराओं का पालन करते हुए अपना जीवन बलिदान कर दिया."
इस बीच, जम्मू रेंज के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह ने एक बयान में कहा है, "राजौरी ज़िले के नरला इलाके में हुई मुठभेड़ में अब तक दो चरमपंथी मारे गए हैं और भारतीय सेना का एक जवान भी शहीद हो गया है. इसके इलावा मुठभेड़ के दौरान एक पुलिस एसपीओ सहित तीन अन्य सुरक्षा कर्मी घायल हो गए हैं."
केंट का अंतिम संस्कार

इमेज स्रोत, ANI
केंट के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में सेना के जवान शामिल हुए हैं और उसे भावभीनी विदाई दी.
इस बीच नगरोटा स्थित व्हाइट नाइट कोर के अपने ट्विटर हैंडल पर एक ट्वीट में सेना के जवान राइफ़लमैन रवि को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, "व्हाइट नाइट कोर भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं में ऑपरेशन सुजालिगला के दौरान राइफ़लमैन रवि के सर्वोच्च बलिदान को सलाम करती है. हमारे राष्ट्र के प्रति उनके अटूट समर्पण और सेवा को हमेशा याद किया जाएगा."
सोमवार देर रात को राजौरी के नारला इलाके में ऑपरेशन शुरू होने के तुरंत बाद, 21 आर्मी डॉग यूनिट के खोजी कुत्तों को सैनिकों की सहायता के लिए मुठभेड़ स्थल पर तैनात किया गया था.
जम्मू स्थित रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, "केंट हाल ही मैं दो हफ्ते का ट्रेनिंग कोर्स अटेंड करने के बाद ड्यूटी पर तैनात हुई थी."
केंट ने 16 अगस्त से 31 अगस्त, 2023 के बीच दो हफ़्ते की ट्रेनिंग कर एक सितंबर को अपनी यूनिट में ड्यूटी ज्वॉइन की थी.
सर्च ऑपरेशन
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक केंट का जन्म 23 अक्टूबर, 2016 को हुआ था और 23 मई, 2018 को केंट ने आर्मी ज्वॉइन की थी.
केंट ट्रैकर डॉग की कैटेगरी में शामिल थी और 30 दिसंबर, 2022 से वो ऑपरेशन ड्यूटी पर तैनात किया गया था.
पिछले नौ महीनों के दौरान केंट लगभग आधा दर्जन ऑपरेशंस में भाग ले चुकी थी.
जम्मू में रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार 27 जनवरी, 2023 को केंट को सर्च ऑपरेशन की ड्यूटी पर तैनात किया गया था.
इस के बाद उसने अपने संचालक के साथ मिलकर 3 फ़रवरी के दिन चलाए गए सर्च ऑपरेशन में भी हिस्सा लिया था .
चार अप्रैल को केंट को एक चोरी का मामला सुलझाने के लिए ड्यूटी पर तैनात किया गया था.
वीरता और बलिदान

इमेज स्रोत, MOHIT KANDHARI
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी केंट की वीरता और बलिदान को सलाम करते हुए बड़ी संख्या में लोग प्रशंसा कर रहे हैं और कर्तव्य की पंक्ति में उनके द्वारा किये गए बलिदान की सराहना की.
जम्मू और कश्मीर में चरमपंथियों के साथ हुई मुठभेड़ में पिछले साल भी आर्मी डॉग यूनिट्स के सदस्यों के अपनी जान की बाज़ी लगा दी थी.
भारतीय सेना की 26 डॉग यूनिट के सबसे कम उम्र के सैनिकों में से एक, दो साल के हमलावर कुत्ते एक्सल ने 30 जुलाई, 2022 को पट्टन में एक ऑपरेशन में सर्वोच्च बलिदान दिया था.
एक्सल को उसके प्रशिक्षक द्वारा घनी आबादी वाले क्षेत्र में एक घर के अंदर छिपे चरमपंथियों के सटीक स्थान का पता लगाने का काम सौंपा गया था.
अपने ट्रेनर की आज्ञा का पालन करते हुए एक्सल बिल्डिंग के अंदर चला गया. जब वह सामान्य तलाशी ले रहा था तो एक कमरे के अंदर छिपे हुए चरमपंथी द्वारा चलाई गई 'गोलियों की बौछार' से एक्सल को चोट लग गई. एक्सल बेल्जियन मैलिनोइस नस्ल का था जो ड्रग्स, बम, गैस का पता लगाने, नियमित खोज और ट्रैकिंग जैसे ऑपरेशंस में हिस्सा लेता था.
पहले भी हुई है आर्मी यूनिट्स के कुत्तों की मौतें

इमेज स्रोत, DEFENCE PRO
इस के बाद 9 अक्टूबर, 2022 को एक दुसरे ऑपरेशन के दौरान आर्मी डॉग यूनिट के सबसे कम उम्र के सैनिक दो वर्षीय ज़ूम ने अनंतनाग में चरमपंथियों के साथ हुई मुठभेड़ में अपना बलिदान दिया था.
जम्मू में रह रहे एक भूतपूर्व डॉग ट्रेनर के अनुसार, "पिछले तीन दशकों में, प्रशिक्षित कुत्तों ने अपने कर्तव्यों का पालन किया है और भारतीय सेना के सैनिकों के साथ अपने जीवन का बलिदान दिया है."
उनके मुताबिक, "यूनिट के कुत्तों को सबसे पहले छिपे हुए चरमपंथियों के स्थान और उनके द्वारा ले जा रहे हथियारों और गोला-बारूद का पता लगाने के लिए भेजा जाता है."
डॉग ट्रेनर बताते हैं, "इन कुत्तों पर लगे कैमरों से मिलने वाली फ़ीड की निगरानी एक नियंत्रण कक्ष से की जाती है. इन कुत्तों को छिपे हुए चरमपंथियों की नजर में आए बिना उनके ठिकाने में घुसने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है. उन्हें इन ऑपरेशनों के दौरान न भौंकने के लिए भी प्रशिक्षित किया जाता है."
विशेष पुरस्कार

इमेज स्रोत, DEFENCE PRO
अगर इन कुत्तों पर छुपे चरमपंथियों की नजर पड़ जाए और वे उन पर हमला कर दें तो कुत्ते जवाबी हमला करके जवाब देते हैं. कुत्ते का हैंडलर हमेशा स्थिति पर पैनी नजर रखता है.
जम्मू और कश्मीर में ट्रैकर डॉग्स का इस्तेमाल रोड ओपनिंग पार्टी (आरओपी) की ड्यूटी, विस्फ़ोटक का पता लगाने, किसी वीआईपी या संवेदनशील क्षेत्र को साफ़ करने के लिए बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है.
समय-समय पर भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारी प्रशस्ति पत्र और अन्य पुरस्कार देकर आर्मी डॉग यूनिट्स को सम्मानित करते हैं. भारतीय सेना में कुत्तों को उनकी बहादुरी के लिए विशेष पुरस्कार भी दिए जाते हैं.
चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टाफ़ कमेंडेशन कार्ड, वाइस चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ कमेंडेशन कार्ड और जीओसी इन चीफ़ कमेंडेशन कार्ड से लेकर इन कुत्तों को विभिन्न ऑपरेशनों के दौरान उनके प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया जाता है. दो साल के एक्सल को स्वतंत्रता दिवस पर भारत सरकार ने वीरता पुरस्कार दिया था.
भारतीय सेना की यूनिट्स में कुत्ते

इमेज स्रोत, ANI
भारतीय सेना के पास अपनी यूनिट्स में विभिन्न नस्ल के कुत्ते हैं.
इनमें लैब्राडोर, जर्मन शेफ़र्ड, बेल्जियन मैलिनोइस और ग्रेट माउंटेन स्विस कुत्ते शामिल हैं.
भारतीय नस्लों में मुधोल हाउंड भी इनमें शामिल हैं.
इन कुत्तों का उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है जैसे गार्ड ड्यूटी, गश्त, इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) सहित विस्फ़ोटकों को सूंघना, माइन का पता लगाना, ड्रग्स सहित प्रतिबंधित वस्तुओं को सूंघना और लक्ष्य पर हमला करना.
भारतीय सेना के कुत्ते को प्रतिदिन प्रशिक्षित करने और मार्गदर्शन करने के लिए एक हैंडलर होता है.

इमेज स्रोत, ANI
मुख्य प्रशिक्षण मेरठ के रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर सेंटर एंड कॉलेज में शुरू होता है.
इन कुत्तों को नौ महीने से अधिक समय तक और बाद में तीन महीने तक ज़मीन पर प्रशिक्षित किया जाता है.
सेना इन कुत्तों को उनकी चपलता के आधार पर करीब सात-आठ साल तक रखती है.
इन कुत्तों को स्वस्थ और सक्रिय रखने के लिए विशेष भोजन और पोषण प्रदान किया जाता है.
भारतीय सेना के पास देश भर में 27 से अधिक डॉग यूनिट्स हैं.
एक यूनिट में करीब 24 कुत्ते शामिल होते हैं. कुछ कुत्ते आरवीसी सेंटर में पैदा होते हैं और कुछ बाहर से लाए जाते हैं.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












