पूर्वी लद्दाख़ में चीन शायद ही पीछे हटे, ऐसा क्यों सोचते हैं भारत के पूर्व सैन्य अधिकारी- प्रेस रिव्यू

इमेज स्रोत, Getty Images
अरुणाचल प्रदेश को चीन के नए आधिकारिक नक़्शे में दिखाने के बाद पूर्वी लद्दाख़ में चीन की स्थिति को लेकर कई रिटायर्ड सैन्य अधिकारी चिंता जा रहे हैं.
अंग्रेज़ी अख़बार ‘द टेलीग्राफ़’ ने रिटायर्ड दिग्गज सैन्य अधिकारियों के हवाले से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें उनका कहना है कि नए नक़्शे से साफ़ है कि चीन पूर्वी लद्दाख़ में अप्रैल 2020 की पहले की स्थिति में नहीं जाना चाहता है.
ऐसी मीडिया रिपोर्ट हैं कि चीन ने बीते तीन सालों में 2,000 वर्ग किलोमीटर की ज़मीन पर क़ब्ज़ा कर लिया है.
बीजिंग ने सोमवार को अपने ‘स्टैंडर्ड मैप’ का साल 2023 का संस्करण जारी किया था, जिसमें भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश, विवादित दक्षिण चीन सागर और 1962 के युद्ध में क़ब्ज़ा किए गए अक्साई चिन को अपना भूभाग दिखाया था.
एक पूर्व लेफ़्टिनेंट जनरल ने ‘द टेलीग्राफ़’ से कहा, “ब्रिक्स सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के कुछ ही दिनों के बाद चीन का ताज़ा क़दम साफ़ दिखाता है कि चीनी सेना का लद्दाख़ में यथास्थिति दोबारा लागू करने का बिल्कुल भी मूड नहीं है.”
उन्होंने कहा, “इसके बजाय वे अब पूर्वी सेक्टर में अरुणाचल प्रदेश पर दावा करके एक नई यथास्थिति लागू करना चाहते हैं.”

इमेज स्रोत, Getty Images
भारत ने जताई आपत्ति
भारत ने मंगलवार को राजनयिक चैनलों के ज़रिए इस नक़्शे को लेकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था, “हम इन दावों को ख़ारिज करते हैं क्योंकि इनका कोई आधार नहीं है. चीनी पक्ष की ओर से इस तरह के क़दम केवल सीमा समाधान को जटिल बनाते हैं.”
अख़बार लिखता है कि आपत्ति किस स्तर पर दर्ज कराई गई है, उसकी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. इस तरह की भड़काऊ हरकतों के लिए भारत लगातार पाकिस्तान राजनयिकों को तलब करता है लेकिन इस तरह के कोई रिकॉर्ड नहीं हैं कि नई दिल्ली ने हालिया सालों में किसी चीनी राजनयिक को तलब किया गया हो.
यहाँ तक कि जून 2020 के लद्दाख़ की गलवान घाटी में चीनी सैनिकों से झड़प में 20 भारतीय जवानों के मारे जाने के बाद भी किसी चीनी राजनयिक को नहीं तलब किया गया था.
बीजेपी नेता और पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने मंगलवार को ट्वीट करते हुए कहा, “कितनी कमज़ोर प्रतिक्रिया है. हमें चीन के साथ राजनयिक संबंधों को तोड़ लेना चाहिए. यहां तक कि यह चीन के साथ अडानी के व्यवसाय को भी नुक़सान पहुंचाए. दक्षिणी गुजरात में चीन के ट्रॉलर बेस को भी बंद कर दें.”
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 1
क्या बोले रिटायर्ड सैन्य अफ़सर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गलवान की घटना के बाद लगातार यह दावा करते रहे हैं कि भारतीय क्षेत्र में न ही कोई आया है और न ही किसी ने क़ब्ज़ा किया है.
पूर्व सेना प्रमुख जनरल वेद मलिक ने मंगलवार को ट्वीट किया कि नक़्शे को जारी करना दिखाता है कि बीजिंग का सेना विवाद सुलझाने का कोई इरादा नहीं है.
साल 1999 में कारगिल युद्ध के समय सेना प्रमुख रहे जनरल मलिक ने सवाल किया कि ‘क्या भारत को तिब्बत की पुरानी स्थिति को घोषित नहीं करना चाहिए और वन चाइना पॉलिसी को त्यागना चाहिए?’
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 2
एक रिटायर्ड ब्रिगेडियर ने अख़बार से कहा कि चीनी सेना लगातार भारतीय क्षेत्र पर क़ब्ज़ा कर रही है जबकि भारत दावा कर चुका है कि मोदी और शी जिनपिंग के बीच बीते सप्ताह लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल पर सैनिकों के पीछे हटने और तनाव कम करने की कोशिशें तेज़ करने को लेकर बात हुई है.
उन्होंने ये भी कहा कि चीनी पक्ष ने जो बयान जारी किया है, उसमें बातचीत का कोई ज़िक्र ही नहीं है.
पूर्व ब्रिगेडियर ने कहा, “दिल्ली और बीजिंग ने बातचीत के बाद जो अलग-अलग बयान पेश किए हैं वो बताते हैं कि चीनी सेना का क्षेत्र में अप्रैल 2020 से पहले की यथास्थिति लागू करने का कोई इरादा नहीं है. ज़मीन पर लद्दाख़ में चीन लगातार हमारी ज़मीन पर क़ब्ज़ा करना जारी रखे हुए है.”

इमेज स्रोत, Getty Images
अक्साई चिन में चीनी सेना का नया रुख़
अंग्रेज़ी अख़बार ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने सैटेलाइट डेटा से ये पता लगाया है कि अक्साई चिन क्षेत्र में चीन अपनी सैन्य उपस्थिति को और मज़बूत कर रहा है.
अख़बार ने इस पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है. अख़बार लिखता है कि उसको मैक्सर टेक्नोलॉजीज़ से मिले डेटा से साफ़ है कि चीनी सेना अक्साई चिन के 15 वर्ग किलोमीटर के इलाक़े की छह जगहों पर सैन्य निर्माण कर रहा है.
अख़बार के मुताबिक़, चीन यहां पर सैन्य बंकर और अंडरग्राउंड फ़ैसिलिटीज़ बना रहा है.
यह इलाक़ा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से 70 किलोमीटर दूर है और मई 2020 में सैन्य गतिरोध के बाद यहां पर जवानों की तैनाती की गई थी.
अगस्त 2023 की ताज़ा तस्वीरों से पता चलता है कि इस इलाक़े में कंस्ट्रक्शन एक्टिविटीज़ ज़ोरों पर है. यहां पर एर्थ मूविंग मशीनरी के अलावा, नई सड़कें, अंडरग्राउंड फ़ैसिलिटी के लिए कई एंट्रेंस भी मौजूद हैं.
विश्लेषकों का मानना है कि अंडरग्राउंड फैसिलिटी संवेदनशील साज़ो-सामान, हथियारों और कमांड पोस्ट को हवाई या मिसाइल स्ट्राइक से बचाने के लिए हो सकती हैं.
अख़बार लिखता है कि भारतीय अधिकारियों ने उसकी इस रिपोर्ट पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.

इमेज स्रोत, SAMACHARTODAY
ज्योति मौर्य के पति ने वापस ली शिकायत
उत्तर प्रदेश में कई दिनों तक चर्चित रहे ज्योति और आलोक मौर्य मामले में अब नया मोड़ आया है.
हिंदी अख़बार ‘अमर उजाला’ अपनी रिपोर्ट में लिखता है कि पीसीएस अधिकारी पत्नी ज्योति मौर्य के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले उनके पति आलोक मौर्य ने अपनी शिकायत वापस ले ली है.
आलोक ने सोमवार को जांच समिति के सामने इस मामले को लेकर प्रार्थना पत्र सौंपा था. समिति एक-दो दिनों में रिपोर्ट मंडलायुक्त को सौंपेगी.
आलोक ने ज्योति पर भ्रष्टाचार में शामिल होने समेत कई गंभीर आरोप लगाए थे. इसकी शिकायत प्रशासन में भी की थी. इसको लेकर प्रशासन के निर्देश पर मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने अपर आयुक्त अमृत लाल बिंद की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी.
समिति ने पहले नौ अगस्त को आलोक को पूछताछ के लिए बुलाया था. उस समय आलोक ने बयान दर्ज करने और सबूत उपलब्ध कराने के लिए 20 दिन का समय मांगा था. इसके बाद आलोक को 28 अगस्त को बुलाया गया था.

इमेज स्रोत, SANTOSH KUMAR/HINDUSTAN TIMES VIA GETTY IMAGES
बिहार में छुट्टियों की कटौती पर राजनीति
हिंदी अख़बार ‘हिंदुस्तान’ ने बिहार राज्य में सरकारी स्कूलों में छुट्टियों में कटौती किए जाने पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है.
अख़बार लिखता है कि रक्षाबंधन के मौके पर सरकारी स्कूलों में अब छुट्टी नहीं रहेगी.
शिक्षा विभाग के अप मुख्य सचिव केके पाठक के निर्देश के बाद माध्यमिक शिक्षा कार्यालय की ओर से स्कूलों की छुट्टियों में बदलाव किया गया है.
इस साल दिवाली से छठ तक अलग-अलग पर्व-त्योहारों पर छुट्टियों को घटाकर आधा कर दिया गया है. इस मुद्दे पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है.
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार की सरकार पर हमला बोलते हुए इसकी तुलना शरिया क़ानून से की है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
















