मणिपुर पुलिस बनाम असम राइफ़ल्स का विवाद सतह पर क्यों आया? जानिए पूरा मामला

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- Author, राघवेंद्र राव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मणिपुर में पिछले तीन महीने से ज़्यादा समय से चल रही जातीय हिंसा के बीच राज्य में तैनात सुरक्षा बलों के बीच ज़मीनी स्तर पर हो रहे टकराव अब खुलकर सामने आ गए हैं.
ताज़ा घटनाक्रम में मणिपुर पुलिस ने असम राइफल्स के सैनिकों के ख़िलाफ़ काम में बाधा डालने, चोट पहुँचाने की धमकी देने और ग़लत तरीक़े से रोकने की धाराओं के तहत एफ़आईआर दर्ज की है.
असम राइफल्स की 9वीं बटालियन के सुरक्षाकर्मियों के ख़िलाफ़ ये एफ़आईआर विष्णुपुर ज़िले के फोउगाकचाओ इखाई पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई है.
एफ़आईआर में कहा गया है कि नौ असम राइफ़ल्स के सैनिकों ने मणिपुर पुलिस के कर्मियों को अपना काम करने से रोका और कथित कुकी उग्रवादियों को सुरक्षित क्षेत्र में भागने का मौक़ा दिया.
असम राइफ़ल्स एक केंद्रीय अर्धसैनिक बल है, जो मुख्य रूप से भारत-म्यांमार सीमा पर तैनात है. असम राइफ़ल्स भारतीय सेना के ऑपरेशनल नियंत्रण के तहत काम करता है.
असम राइफ़ल्स की भूमिका पर उठते सवालों का भारतीय सेना ने खंडन किया है. भारतीय सेना का कहना है कि "ज़मीनी हालात की जटिल प्रकृति की वजह से विभिन्न सुरक्षा बलों के बीच सामरिक स्तर पर कभी-कभी मतभेद हो जाते हैं" जिनका निपटारा सयुंक्त तंत्र के ज़रिये तुरंत कर लिया जाता है.
इस मामले को लेकर सेना का कहना है कि असम राइफ़ल्स हिंसा रोकने के लिए कुकी और मैतेई क्षेत्रों के बीच बनाये गए बफ़र ज़ोन को सुनिश्चित करने के लिए कमांड मुख्यालय द्वारा दिए गए कार्य को अंज़ाम दे रही थी.

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क्या है मामला?
असम राइफ़ल्स के ख़िलाफ़ दर्ज एफ़आईआर में मणिपुर पुलिस ने कहा है कि पाँच अगस्त को सुबह साढ़े छह बजे राज्य पुलिस की टीमें क्वाक्ता वॉर्ड नंबर आठ के पास फोल्जांग रोड के इलाक़े में अभियुक्त कुकी विद्रोहियों का पता लगाने पहुँची.
कुछ ही घंटे पहले दिन में क़रीब साढ़े तीन बजे क्वाक्ता में हथियारबंद अपराधियों ने सो रहे तीन मैतेई लोगों की हत्या कर दी थी. मरने वालों में दो लोग पिता-पुत्र थे. मणिपुर पुलिस को ये शक था कि इस हत्याकांड में कुकी विद्रोहियों का हाथ है और शायद वो अब भी उसी इलाक़े में शरण लिए हुए हैं.
मणिपुर पुलिस के मुताबिक़ जब उनकी टीमें इलाक़े में क़ुतुब वाली मस्जिद पहुंचीं तो असम राइफ़ल की 9वीं बटालियन के कर्मियों ने क्वाक्ता फोल्जांग रोड के बीच अपनी बख्तरबंद कैस्पर गाड़ियां लगाकर उन्हें आगे जाने से रोका और इसी वजह से कुकी आतंकियों को किसी सुरक्षित जगह भाग जाने का मौक़ा मिला.
इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इस वीडियो में मणिपुर पुलिस और असम राइफ़ल्स के जवानों के बीच तीखी बहस होते देखी जा सकती है. साथ ही मणिपुर पुलिस के एक जवान को असम राइफ़ल्स पर हथियारबंद अपराधियों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाते हुए देखा जा सकता है.
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यह पहला टकराव नहीं
ये हालिया घटना पहला ऐसा मामला नहीं है, जब मणिपुर पुलिस और असम राइफ़ल्स के बीच होती तकरार साफ़ तौर पर देखी गई.
दो जून को एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें देखा जा सकता था कि असम राइफ़ल्स की 37वीं बटालियन के कर्मियों ने सुगनु पुलिस स्टेशन के मेन गेट पर एक बख़्तरबंद कैस्पर गाड़ी लगा कर उसका रास्ता रोक दिया था. साथ ही वीडियो में ये भी दिखा कि सुगनु पुलिस स्टेशन के सामने की सड़क पर दोनों तरफ़ कैस्पर गाड़ियां लगाकर पुलिस स्टेशन तक पहुँचने के रास्ता रोक दिया गया था.
इस घटना के वीडियो में भी मणिपुर पुलिस के जवानों को असम राइफ़ल्स के सुरक्षाकर्मियों से तीखी बहस करते देखा जा सकता है.
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जुलाई के महीने में जब बीबीसी सुगनु पुलिस स्टेशन पहुँचा तो वहाँ तैनात मणिपुर पुलिस के कर्मियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्होनें असम राइफ़ल्स की 37वीं बटालियन के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर लिया है.
एफ़आईआर दिखाते हुए एक अधिकारी ने बताया कि असम राइफल्स पर कर्तव्य में बाधा डालने, चोट पहुँचाने की धमकी देने और ग़लत तरीक़े से रोकने की धाराओं के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई है.
एफ़आईआर में ये साफ़ तौर पर लिखा गया था कि असम राइफ़ल्स का इरादा पुलिस स्टेशन पर हमला करने का था.
हमने सुगनु पुलिस स्टेशन पर तैनात जवानों से जानना चाहा कि ये घटना क्यों हुई? उनमे से एक ने कहा, "हम नहीं जानते कि उनकी असली मंशा क्या थी. पर ये बहुत चौंकाने वाला था."

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भारतीय सेना असम राइफ़ल्स के बचाव में
असम राइफ़ल्स पर लग रहे आरोपों का भारतीय सेना ने खंडन किया है. ट्विटर पर जारी किए गए एक बयान में भारतीय सेना ने कहा कि कुछ विरोधी तत्वों ने तीन मई से मणिपुर में लोगों की जान बचाने और शांति बहाल करने की दिशा में लगातार काम कर रहे केंद्रीय सुरक्षा बलों विशेष रूप से असम राइफ़ल्स की भूमिका, इरादे और अखंडता पर सवाल उठाने के हताश और असफल प्रयास बार-बार किए हैं.
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भारतीय सेना ने कहा, "यह समझने की ज़रूरत है कि मणिपुर में ज़मीनी हालात की जटिल प्रकृति के कारण विभिन्न सुरक्षा बलों के बीच सामरिक स्तर पर कभी-कभी मतभेद हो जाते हैं. हालाँकि कार्यात्मक स्तर पर ऐसी सभी ग़लतफ़हमियों को मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति की बहाली के प्रयासों में तालमेल बिठाने के लिए संयुक्त तंत्र के माध्यम से तुरंत संबोधित किया जाता है."
भारतीय सेना ने कहा कि "असम राइफ़ल्स को बदनाम करने के उद्देश्य से पिछले 24 घंटों में दो मामले सामने आए हैं".
"पहले मामले में असम राइफ़ल्स बटालियन ने दो समुदायों के बीच हिंसा को रोकने के उद्देश्य से बफ़र ज़ोन दिशानिर्देशों को सख़्ती से लागू करने के एकीकृत मुख्यालय के आदेश के अनुसार सख़्ती से काम किया है. दूसरा मामला असम राइफ़ल्स को एक ऐसे क्षेत्र से बाहर ले जाने का है, जिससे उनका कोई संबंध भी नहीं है."
जिस दूसरे मामले की बात यहाँ की गई है, वो भी एक वीडियो से जुड़ा हुआ है, जिसमें महिलाएं एक फौजी वर्दी पहने अधिकारी के पैरों पर गिरकर रोती-बिलखती नज़र आ रही हैं.
इस वीडियो के ज़रिये ये दावा किया गया था कि ये महिलाएं कुकी-ज़ो समुदायों से हैं जो अपने इलाक़े से असम राइफल्स को हटाकर किसी अन्य सुरक्षाबल को तैनात करने की योजना का विरोध कर रही हैं और रो-रो कर असम राइफ़ल्स से वहाँ रुकने की गुहार लगा रही है.
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भारतीय सेना ने अब कहा है कि मई में मणिपुर में संकट पैदा होने के बाद से सेना की एक इन्फैंट्री बटालियन उस क्षेत्र में तैनात है, जहाँ से असम राइफ़ल्स को हटाने की कहानी बनाई गई है.
भारतीय सेना ने ये भी कहा है कि वो और असम राइफ़ल्स मणिपुर के लोगों को आश्वस्त करते हैं कि वो पहले से ही अस्थिर माहौल में हिंसा को बढ़ावा देने वाले किसी भी प्रयास को रोकने के लिए अपने कार्यों में दृढ़ बने रहेंगे.

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असम राइफ़ल्स के खिलाफ बढ़ती नाराज़गी
मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच चल रही जातीय हिंसा में अब तक 152 लोगों की मौत हो चुकी है.
करीब 60,000 लोग अपने घरों से विस्थापित हो गए हैं. इनमें से कुछ राज्य छोडकर चले गए हैं और हज़ारों लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं.
हज़ारों की संख्या में भारतीय सेना और अर्धसैनिक बलों को मणिपुर में तैनात किया गया है. लेकिन असम राइफ़ल्स एक ऐसा बल है जो पिछले कई वर्षों से मणिपुर के कई इलाक़ों, ख़ासकर पहाड़ी और म्यांमार से लगती सीमा के इलाक़ों पर तैनात है.
पहाड़ी और सीमा से लगते इलाक़े कुकी बाहुल्य वाले हैं और इसी बात को आधार बना कर बार-बार ये इल्ज़ाम लगाया जाता रहा है कि असम राइफ़ल्स और कुकी समुदाय में घनिष्ठता है.
11 जुलाई को मणिपुर के 31 विधायकों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखकर कहा कि असम राइफ़ल्स की 9वीं, 22वीं और 37वीं को राज्य से हटा दिया जाए और ऐसे दूसरे केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की जाए जो राज्य की एकता को बढ़ावा देने की ओर ज़्यादा इच्छुक हैं.
इन विधायकों का ये भी कहना था कि असम राइफ़ल्स की कुछ इकाइयों द्वारा निभाई गई भूमिकाओं को लेकर चिंताएं हैं जो वर्तमान में राज्य के भीतर एकता के लिए ख़तरा पैदा करती हैं.
सात अगस्त को मणिपुर की भारतीय जनता पार्टी इकाई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे एक ज्ञापन में कहा कि राज्य में शांति बनाए रखने में असम राइफ़ल्स की भूमिका की काफ़ी आलोचना हो रही है और सार्वजनिक आक्रोश देखने को मिल रहा है.
इस ज्ञापन में कहा गया कि असम राइफ़ल्स निष्पक्षता बनाये रखने में असफल रही और जनता ये आरोप लगा रही है कि उनकी भूमिका पक्षपातपूर्ण है जिसमें वो एक समुदाय का समर्थन कर रहे हैं.
मणिपुर भाजपा ने प्रधानमंत्री से गुहार लगाई है कि जनहित में असम राइफ़ल्स को हटाकर किसी अन्य अर्धसैनिक बल को स्थाई रूप से मणिपुर में तैनात किया जाए.
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