मणिपुर यौन हिंसा मामले में केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में क्या-क्या कहा है, दस ख़ास बातें

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- Author, उमंग पोद्दार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मणिपुर के कांगपोकपी ज़िले में दो कुकी महिलाओं के नग्न परेड कराए जाने का वीडियो वायरल होने के एक दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया था.
वो 20 जुलाई का दिन था. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से 'हालात ठीक करने, पहले जैसी स्थिति बहाल करने और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए' ज़रूरी कदम उठाने के लिए कहा.
सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि इस दिशा उठाए गए कदमों के बारे में अदालत को अवगत कराया जाए.
चीफ़ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की गैरमौजूदगी में 28 जुलाई को इस केस की सुनवाई नहीं हो सकी लेकिन केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दायर किया है.
हम आगे बता रहे हैं कि केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में क्या-क्या कहा है?

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हलफनामे की दस ख़ास बातें
- मणिपुर की राज्य सरकार ने ये मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दिया है.
- त्वरित जांच के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि ये मामला मणिपुर से 'बाहर किसी भी अन्य राज्य में' ट्रांसफर कर दिया जाए.
- केंद्र सरकार ने कोर्ट से ये भी आग्रह किया है कि वो चार्जशीट फाइल होने के छह महीने के भीतर ट्रायल को पूरा करने के लिए आदेश जारी करे.
- वायरल वीडियो की जांच के दौरान राज्य सरकार ने सात मुख्य अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया है और वे पुलिस की हिरासत में हैं.
- कर्फ्यू और अन्य संबंधित क़ानूनों के उल्लंघन के आरोप में 13,782 लोग हिरासत में लिए गए हैं. राज्य सरकार भीड़ इकट्ठा होने से रोकने के लिए ड्रोन से निगरानी कर रही है.
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- इन घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए राज्य सरकार ने ये अनिवार्य कर दिया है कि थाना प्रभारी के स्तर पर ऐसे सभी मामलों की रिपोर्ट पुलिस महानिदेशक को दी जाएगी. साथ ही इन घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए वाजिब इनाम भी दिया जाएगा और सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी.
- क़ानून और व्यवस्था राज्य सरकार के विशेषाधिकार के दायरे में आता है लेकिन केंद्र सरकार मणिपुर के घटनाक्रम पर करीबी नज़र रखी हुई है. इसके अलावा सुरक्षा के लिए ज़रूरी मदद मुहैया कराई जा रही है. घटना की तफ़्तीश और अभियोजन की प्रगति पर निगरानी रखने के लिए केंद्र सरकार उच्चतम स्तर पर सलाह दे रही है. केंद्र मध्यस्थता और राजनीतिक बीच-बचाव की भूमिका भी निभा रहा है.
- केस की जांच के लिए एक एडिश्नल एसपी रैंक के अफसर को जिम्मेदारी दी गई है और जिन दोषियों की पहचान की जा चुकी है, उनकी गिरफ़्तारी के लिए विभिन्न जगहों पर अलग-अलग पुलिस टीमों का गठन किया गया है.
- राज्य सरकार ने दावा किया है कि उसने 'पहले जैसी स्थिति बहाल करने' के लिए काउंसिलींग जैसे कदम उठा रही है. सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखने के लिए आश्रय स्थल बनाए गए हैं, शिक्षा के लिए इंतज़ाम किए जा रहे हैं, आजीविका के लिए मदद दी जा रही है और अन्य कदम उठाए जा रहे हैं.
- मणिपुर में राज्य सरकार की पुलिस के अलावा केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों की 124 अतिरिक्त कंपनियां और आर्मी/असम राइफल्स की 185 टुकड़ियां मौजूद हैं. सुरक्षा सलाहकार कुलदीप सिंह के नेतृत्व में अलग-अलग सुरक्षा बलों के एक एकीकृत कमांड का गठन किया गया है.
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महिलाओं को निर्वस्त्र करने का मामला क्या है
मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच बीते ढाई महीनों से जारी हिंसक संघर्ष के बीच 19 जुलाई को मणिपुर की दो महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न का एक भयावह वीडियो सामने आया.
20 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब संसद के मॉनसून सत्र से पहले मीडिया से बात करने आए तो उन्होंने भी मणिपुर की घटना का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनका हृदय पीड़ा से भरा हुआ है.
पीएम मोदी ने कहा कि देश की बेइज्जती हो रही है और दोषियों को बख़्शा नहीं जाएगा.
यह पहली बार था जब प्रधानमंत्री मोदी ने मणिपुर में जारी हिंसा पर कुछ कहा है. विपक्ष मणिपुर पर पीएम मोदी के न बोलने को लेकर लंबे समय से सवाल उठा रहा था.
मणिपुर पुलिस ने इस वीडियो की पुष्टि करते हुए बताया है कि ये महिलाएं बीती चार मई को मणिपुर के थोबल ज़िले में यौन उत्पीड़न की शिकार हुई थीं.
राज्य के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा है कि वह दोषियों को फांसी की सज़ा दिलवाने की कोशिश करेंगे.
इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख़ 28 जुलाई की तय की थी.
मणिपुर में मई के महीने से ही जातीय संघर्ष की स्थिति बनी हुई है.
इस हिंसा में अब तक कम से कम 130 लोगों की मौत हो चुकी है और 60 हज़ार से अधिक लोगों को मजबूर होकर अपना घर-बार छोड़ना पड़ा है.
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