राजौरी एनकाउंटर में जान गंवाने वाले कैप्टन की मां चेक दे रहे यूपी के मंत्री से क्या बोलीं - प्रेस रिव्यू

शुभम गुप्ता की मां

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जम्मू-कश्मीर के राजौरी में चरमपंथियों के साथ मुठभेड़ में जान गंवाने वाले कैप्टन शुभम गुप्ता की मां को चेक देते हुए फोटो खिंचवाने को लेकर विपक्षी दलों ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है.

द हिंदू की ख़बर के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मंत्री योगेंद्र उपाध्याय आगरा पहुंचे हुए थे. वह और अन्य नेता कैप्टन गुप्ता की मां को 50 लाख रुपये देते समय फ़ोटो खिंचवाने के लिए पोज़ कर रहे थे.

उसी समय कैप्टन गुप्ता की मां ने कहा, “ये प्रदर्शनी मत लगाओ.”

वायरल वीडियो में दिख रहा है कि कैप्टन गुप्ता की मां को पकड़कर उस ओर लाया जा रहा है, जहां मंत्री और अन्य नेता चेक लेकर खड़े थे. जब उन्हें चेक देने की कोशिश की जा रही थी, तब भी वह रोते हुए लगभग बेसुधी की हालत में थीं.

समाजवादी पार्टी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “भाजपाइयों की असंवेदनशीलता पर बोली एक मां 'ये प्रदर्शनी मत लगाओ भाई!' भाजपा सरकार के मंत्री कल ही शहीद हुए आगरा के कैप्टन शुभम गुप्ता के परिवार को चेक देने के नाम पर करा रहे फोटोशूट, बिलखती मां के आंसुओं का अपमान. शहीदों के नाम पर भी राजनीति करने से बाज नहीं आये भाजपा वाले, शर्मनाक. शहीद के परिवार को अपमानित करने के लिए माफ़ी मांगे मंत्री.”

वहीं कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को दुखद बताया है. उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अजय राय ने मंत्री के व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा कि 'यह दुखद, शर्मनाक और असहनीय है.'

कांग्रेस नेता श्रीनिवास बी.वी. ने एक्स पर लिखा, “27 साल के शहीद कैप्टन शुभम गुप्ता की रोती बिलखती मां को गिद्ध जनता पार्टी के मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और गिद्ध भाजपाइयों को कहने के लिए मजबूर होना पड़ा. शर्म है कि इन्हें आती नहीं.”

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शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इसे बेशर्मी करार देते हुए एक्स पर पोस्ट किया है कि 'शहीद बेटे की मां गुहार लगा रही हैं, लेकिन मंत्री अपने फ़ोटो क्लिक करवाने में लगे हैं. यह कैसी बेशर्मी है. क्या शहीद के परिवार को अब शांति से शोक मनाने भी नहीं दिया जाएगा? संवेदनहीन.'

इलाहाबाद हाई कोर्ट

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यूपी में बीफ़ की ढुलाई पर नहीं है रोक: हाई कोर्ट

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मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पाया है कि उत्तर प्रदेश के क़ानून में राज्य के बाहर से राज्य के अंदर बीफ़ लाने पर कोई बंदिश या रोक नहीं है.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, हाई कोर्ट ने यूपी प्रिवेंशन ऑफ़ काउ स्लॉटर एक्ट 1955 के प्रावधानों को लेकर यह बात कही.

20 नवंबर को दी व्यवस्था में जस्टिस पंकज भाटिया ने कहा, “क़ानून और नियमों के तहत ढुलाई को लेकर लगी पाबंदियां सिर्फ़ गाय, सांड़ या बैल को उत्तर प्रदेश के अंदर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने या फिर यहां से बाहर ले जाने के मामले में ही लागू होती हैं.”

उन्होंने कहा, “नियमों के तहत, बीफ़ की ढुलाई पर रोक का कोई प्रावधान नहीं है. काउ स्लॉटर एक्ट की धारा 5 ए के तहत लगी पाबंदियां सिर्फ़ गाय, सांड़ और बैल के ट्रांसपोर्ट को लेकर ही हैं, वह भी प्रदेश के बाहर से इन्हें लाने या फिर प्रदेश के अंदर एक जगह से दूसरी जगह ले जाने को लेकर. बीफ़ के ट्रांसपोर्टेशन को लेकर कोई पाबंदी नहीं है, भले ही इसे बाहर से प्रदेश के अंदर लाया जा रहा हो.”

हाई कोर्ट फ़तेहपुर के वसीम अहमद द्वारा फ़ाइल की गई याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिन पर 2021 में काउ स्लॉटर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था.

पूर्व जज बोले- 'बेबाकी' के कारण हुआ था तबादला

गुजरात राज्य मानवाधिकार आयोग के प्रमुख और सेवानिवृत जज, जस्टिस के.जे. ठाकर ने शुक्रवार को अहमदाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि 'बेबाकी' के कारण उनका तबादला गुजरात हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट किया गया था.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, अहमदाबाद इंटरनेशनल लिटररी फेस्टिवल के आठवें संस्करण के उद्घाटन समारोह के दौरान जस्टिस ठाकर ने यह बात कही.

2013 में जस्टिस टाकर को गुजरात हाई कोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त किया गया था और 2016 में उनका तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट कर दिया गया था.

जस्टिस ठाकर का परिचय देते हुए लेखिका पायल मेहता ने कहा, “हर जस्टिस शपथ लेता है कि उसके फैसले बिना किसी भय और पक्षपात के होंगे. जस्टिस ठाकर इसका जीता जागता उदाहरण हैं और आज तक लोग याद करते हैं कि इन्होंने अपने सभी फैसले बिना किसी डर और पक्षपात के सुनाए.”

जस्टिस ठाकर ने अपने भाषण में कहा, “मैंने बेफ़ौफ़ होकर बात की है, इसीलिए मेरा तबादला इलाहाबाद कर दिया गया था. वह एक अलग कहानी है.”

लेफ़्टिनेंट जरनल उपेंद्र द्विवेदी

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इमेज कैप्शन, लेफ़्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी (फ़ाइल फोटो)

भारतीय अफ़सर ने कहा- रिटायर पाकिस्तानी फ़ौजी बन रहे 'आतंकवादी'

भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि ‘सीमा से घुसपैठ कर भारत में दाख़िल होने वाले कुछ आतंकवादी पाकिस्तान के सेवानिवृत सैनिक हैं.’

हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के अनुसार, नॉर्दर्न कमान के प्रमुख, लेफ़्टिनेंट जरनल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना ने आतंकवादियों की पहचान करने की कोशिश की तो पता चला कि उनमें से कुछ पाकिस्तानी सेना से रिटायर हुए हैं.

शुक्रवार को जम्मू के राजौरी ज़िले में लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर और अन्य के साथ 31 घंटों तक चली मुठभेड़ के बाद उन्होंने यह बात कही. इस मुठभेड़ में भारत के दो कैप्टनों समेत पांच जवानों की जान गई है.

लेफ़्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी कहा, “20 से 25 आतंकवादी इस इलाक़े में सक्रिय हो सकते हैं, लेकिन जिस तरह से सेना, पुलिस और अन्य एजेंसियों ने अपने अभियान में तेज़ी लाई है, हमें लगता है कि उससे हम एक साल में हालात पर क़ाबू पा लेंगे.”

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