कश्मीर: अमरनाथ गुफा तक सड़क निर्माण पर क्या विवाद चल रहा है?

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- Author, माजिद जहांगीर
- पदनाम, श्रीनगर से बीबीसी हिंदी के लिए
भारत प्रशासित कश्मीर में स्थित अमरनाथ गुफा के रास्ते पर चल रहे निर्माण का मामला पिछले कई दिनों से सुर्ख़ियों में है.
दरअसल, बीते दिनों भारत सरकार के सीमा सड़क संगठन या (बीआरओ) ने एक्स हैंडल पर एक वीडियो साझा किया था.
उस वीडियो में दक्षिण कश्मीर में स्थित अमरनाथ गुफा तक सड़क बनते दिखाया गया है.
इस वीडियो के सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों ने इसका सख़्त विरोध करना शुरू किया.
राजनीतिक दलों का कहना था कि इस इलाके में पारिस्थितिकी का असंतुलन पैदा होने का ख़तरा बढ़ सकता है और आने वाले समय में सड़क बनाने के कारण कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है.
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सिस्ट) के पूर्व विधायक और पार्टी के स्टेट सेक्रेटरी मोहम्मद यूसुफ़ तारिगामी ने कहा इससे जानकार और सभी लोग चिंतित हैं.
"हमारे लिए अहम मसला ये है कि जो लोग यात्रा करने एक विश्वास के साथ आते हैं, वह सुरक्षित रहने चाहिए. सुरक्षा का मतलब चरमपंथ नहीं है, बल्कि मौसमी हालात में वह सुरक्षित रहें और कोई हादसा नहीं हो. इसलिए हमारा मानना है कि सड़क बनाने की ज़रूरत नहीं है."
तारिगामी के मुताबिक अमरनाथ यात्रा के साथ लोगों का रोज़गार भी जुड़ा है और सड़क बनाने से उनके रोज़गार पर असर पड़ सकता है.

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क्यों हो रहा है विरोध?
श्रीनगर से अमरनाथ गुफा की दूरी 131 कि.मी. है और समुद्र तल से यह 12,756 फ़ुट की ऊंचाई पर है.
अमरनाथ गुफा का पूरा इलाका ग्लेशियरों और ऊंचे बर्फीले पहाड़ों से साल भर घिरा रहता है.
पहलगाम और बालटाल में हज़ारों स्थानीय लोग यात्रा के दौरान घोड़ों, पालकियों और डांडियों के सहारे रोज़गार कमाते हैं. पहलगाम और बालटाल के मार्गों से अमरनाथ गुफा पहुंचा जाता है. पहलगाम से 20 और बालटाल से क़रीब 14 कि.मी. का पैदल सफ़र तय करना पड़ता है.
नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और सांसद हसनैन मसूदी पूछते हैं कि क्या काम शुरू करने से पहले एनवायरनमेंट असेसमेंट से जुड़े नियमों को पूरा किया गया है?
वह कहते हैं, "अगर एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट किया गया है तो उसको जनता के सामने लाया जाए. लोगों को ये बताया जाए कि उस असेसमेंट में क्या राय दी गई है. ये आज की बात नहीं है. हम इसको इन्ट्रा जनरेशन इक्विटी कहते हैं."
"न केवल हम पर ये फ़र्ज़ बनता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून और संविधान भी बताता है कि हम वैसा ही पर्यावरण अपनी आने वाली नस्लों के लिए छोड़ें, जिस हालत में वह हैं."
मसूदी बताते हैं कि 05 अगस्त 2019 को, जब जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया तब यहां डेवलपमेंट एक्ट मौजूद था, जिसके मुताबिक किसी भी प्रोजेक्ट के लिए एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट ज़रूरी था जो विशेषज्ञों के ज़रिए किया जाता था.
मसूदी यह भी कहते हैं कि यातायात के ख़िलाफ़ कोई विरोध नहीं कर सकता है, लेकिन जहां इस समय ये किया जा रहा है वहां उसकी गुंजाइश नहीं है.

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बीआरओ का क्या कहना है?
जम्मू-कश्मीर की सियासी जमातों के विरोध के बाद बीआरओ ने 10 नवंबर 2023 को एक बयान जारी कर बताया कि अमरनाथ गुफा मंदिर पर चल रही सड़क परियोजना पैदल यात्रियों के आवागमन के लिए है और पर्यावरण संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए पटरियों को चौड़ा किया गया है.
बयान के अनुसार, "पवित्र अमरनाथ गुफा जाने वाली पटरियों को चौड़ा करने का काम भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के मुताबिक़ किया गया है."
"न्यायालय ने वर्ष 2012 में पर्यावरण संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए पैदल यात्रियों के आवागमन को सुविधाजनक बनाने और ट्रैक पर भीड़ नियंत्रित करने, मौजूदा ट्रैक के महत्वपूर्ण हिस्सों में सुधार करने, संवेदनशील हिस्सों के साथ सुरक्षा रेलिंग और दीवारों को बनाए रखने और पटरियों को चौड़ा करने के निर्देश जारी किए थे."
सीमा सड़क संगठन ने वाहन मार्ग के माध्यम से गुफा मंदिर तक पहुंचने की ख़बर को "तथ्यात्मक रूप से ग़लत" बताया, "बीआरओ ने पैदल, पालकी या डंडियों और टट्टों पर यात्रियों की आवाजाही के लिए बनी पटरियों को चौड़ा करने का काम किया है."

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ट्रैक की मरम्मत
बालटाल रास्ते से अमरनाथ गुफा तक के ट्रैक और सड़कों की मरम्मत का काम पहले जम्मू-कश्मीर सरकार का रोड्स एंड बिल्डिंग्स विभाग देखता था, जबकि पहलगाम से गुफा जाने वाली सड़क की मरम्मत और मेंटेनेंस का काम पहलगाम डेवलपमेंट अथॉरिटी के हाथों में था.
सितंबर 2022 को मेंटेनेंस और मरम्मत का काम बीआरओ को सौंपा गया.
बीआरओ ने अपने बयान में बताया है कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने उन्हें अमरनाथ ट्रैक की मेन्टेनेंस और अपग्रडेशन का काम सितंबर 2022 में सौंपा था.
बीआरओ की ओर से फिलहाल संगम बेस से सड़क को चौड़ा किया है और संगम टॉप से एक नए कट को अपनाया गया है.
बीआरओ के मुताबिक़, संगम टॉप से निचली गुफा तक का हिस्सा भी चौड़ा किया गया है और निचली गुफा से पवित्र गुफा तक का ट्रैक को भी चौड़ा किया गया है.
बीआरओ के अनुसार, जून 2023 में बालटाल ट्रैक से बरारीमर्ग तक सड़क को चौड़ा किया गया.
सरकार ने बीआरओ को दोनों ट्रैक्स पर काम करने का जिम्मा सौंपा था.

बीजेपी का आरोप
जम्मू-कश्मीर बीजेपी का ख्याल है कि अगर गुफा तक सड़क बन भी रही है, तो इस पर किसी को ऐतराज नहीं होना चाहिए.
पार्टी के जम्मू-कश्मीर प्रवक्ता अल्ताफ़ ठाकुर दावा कर रहे हैं कि जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग का जब काम शुरू होना था तो पर्यावरण का सर्टिफ़िकेट हासिल किया गया था और उसी तरह अमरनाथ गुफा तक सड़क बनाने के लिए भी ऐसा ही नियमों को ध्यान में रखा गया है.
ठाकुर बताते हैं कि इस बात को सब जानते हैं जहां सड़क बनाई जा रही है वहां पेड़ नहीं हैं, जिनको काटा गया हो.
वो कहते हैं, "वहां तो सिर्फ पत्थर के पहाड़ हैं. अगर उनको थोड़ा तराशा गया है तो किसी को क्या आपत्ति है. मुझे नहीं लगता वहां के पर्यावरण पर सड़क बनने से कोई प्रभाव होगा. लोगों को वहां जाने में आसानी होगी. कश्मीर का धार्मिक पर्यटन सड़क बनने से बढ़ सकता है."
कश्मीरी पंडित और राजनीतिक कार्यकर्ता मोहित भान बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर में कोई भी अमरनाथ यात्रा के ख़िलाफ़ नहीं है, “बल्कि हमारी आवाज़ और खेद अमरनाथ गुफा तक वाहनों के लिए सड़क बनाने के ख़िलाफ़ है.”
भान कहते हैं कि जहां-जहां भी जंगलों के बीचों बीच कंक्रीट का निर्माण हुआ है, वहां वहां प्रकृति को नुकसान देखने को मिला है.
उन्होंने बताया कि जिस तरह से श्रद्धालुओं की संख्या गुफा तक जाने के लिए बढ़ाई गई, उसका नतीजा ये हुआ कि अब कुछ ही दिनों में गुफा में शिवलिंग पिघल जाता है.

आरोप प्रत्यारोप
वहीं पीडीपी अमरनाथ गुफा तक सड़क ले जाने को बीजेपी पर राजनीति करने और इन हालात का फ़ायदा उठाने का इल्ज़ाम लगा रही है.
पीडीपी के महासचिव (संगठन) डॉक्टर महबूब बेग कहते हैं, "अमरनाथ गुफा तक सड़क ले जाने का मुद्दा बड़ा संवेदनशील है. ऐसा इसलिए है कि बीजेपी हर मुद्दे को धर्म की नज़र से देखती है. अब चुनाव आने वाला है और इस तरह के मुद्दों को चुनाव में इस्तेमाल करना चाहती है, जो कि बड़े दुख की बात है. एक सेक्युलर देश में सरकार को धर्म के साथ मिलाना संविधान के ख़िलाफ़ है."
जम्मू-कश्मीर बीजेपी भी कश्मीर स्थित सियासी जमातों नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी पर मुस्लिम कार्ड खेलने की कोशिश का आरोप लगा रही है.
पार्टी प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर कहते हैं कि अब चूँकि लोकसभा चुनाव आने वाले हैं और कश्मीर के सियासी दल अमरनाथ गुफा तक सड़क बनाने को जानबूझ कर एक मुद्दा बनाकर एक बार फिर से 2008 को दुहराकर मुस्लिम वोट हासिल करना चाहते हैं.
गौरतलब है कि 2008 में जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ लैंड विवाद कई महीनों तक चला था. बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन अमरनाथ श्राइन बोर्ड को गुफ़ा के आसपास ज़मीन देने के ख़िलाफ़ हुए थे.
बाद में उस समय की राज्य और केंद्र सरकार ने ज़मीन देने के फ़ैसले को वापस लिया था और उसके बाद विरोध प्रदर्शन बंद हुए थे.
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