यासीन मलिक की पत्नी को पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री का सलाहकार क्यों बनाया?

मुशाल हुसैन मलिक

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    • Author, शुमाइला जाफ़री
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद

बीते वर्ष दिल्ली की अदालत से जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ़्रंट (जेकेएलएफ़) के अध्यक्ष यासीन मलिक को मई 2022 में दिल्ली की अदालत से उम्र क़ैद की सज़ा सुनाए जाने के एक दिन बाद जब मैं उनकी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक से मिलने इस्लामाबाद के उनके घर पहुंचीं तो वो कश्मीर से आए जाने-माने लोगों के एक समूह से मुलाक़ात कर रही थीं.

मलिक को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने, इसके लिए पैसे का इंतज़ाम करने और आपराधिक साजिश में शामिल होने का दोषी पाया गया था. मलिक ने अदालत को बताया था कि उन्होंने 1990 के दशक में हथियार छोड़ दिए थे.

मुशाल सिर से पांव तक वो काले लिबास में थीं. हमेशा की तरह उनके चेहरे पर नूर था लेकिन आंखों में उदासी छाई थी.

मुशाल के सहयोगी ने नम्रतापूर्वक मुझसे बड़े से ड्रॉइंग रूम के एक अलग कोने में कुछ देर बैठ कर इंतज़ार करने का आग्रह किया. वहां की दीवार यासीन मलिक की आदमकद तस्वीरों और कश्मीर की रंगीन टेपीस्ट्री से अटी पड़ी थीं.

कश्मीर का वो समूह वहां यासीन मलिक के लिए अपना समर्थन जताने पहुंचा था. मैंने उनकी कुछ बातें सुन ली थीं.

उनमें से जब एक शख़्स ने यासीन मलिक को 'थे' कह कर संबोधित किया तो उसे बीच में ही काटते हुए मुशाल बोलीं, "आप उनके बारे में 'थे' क्यों बोल रहे हैं? वे यहीं हैं, जल्द ही सब ठीक हो जाएगा, उनके लिए मैं पूरा ताक़त लगा दूंगी."

मुशाल मलिक

कौन हैं मुशाल मलिक?

कश्मीरी मूल की मुशाल पाकिस्तानी नागरिक हैं, 2009 में उनकी शादी यासीन मलिक से हुई, इस शादी का जश्न समूचे पाकिस्तान में मनाया गया, जबकि भारत में इसकी आलोचना की गई.

पत्रकार और विश्लेषक अज़ाज़ सैयद बताते हैं कि तब उन दोनों के मेल को लेकर काफ़ी चर्चा हो रही थी. कुछ लोगों ने तो इसे पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी के ज़रिए बनाया गया मेल तक कहा था और दोनों के बीच फासले, भारत-पाकिस्तान की दुश्मनी और यासीन मलिक की राजनीति को देखते हुए यहां तक बोले कि ये रिश्ता टिक नहीं सकेगा. हालांकि, ये शादी समय की बिसात पर आज भी कायम है.

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मुशाल पाकिस्तान के जाने माने अर्थशास्त्री की बेटी हैं और वे ख़ुद लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से स्नातक हैं.

वे पेंटर हैं, कवयित्री हैं और 11 साल की बेटी रज़िया सुल्ताना की मां हैं. वे कश्मीर के अलगाववाद के पक्ष में पाकिस्तान के तरफ़ से एक बुलंद आवाज़ रही हैं.

मुशाला की यासीन मलिक से 2005 में तब मुलाक़ात हुई थी जब वे पाकिस्तान के दौरे पर थे. दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया और कुछ सालों बाद उन्होंने शादी कर ली.

मुशाल अपने पति से 20 साल छोटी हैं.

मुशाल पिछले पांच साल से भारत से वीज़ा की मांग कर रही हैं ताकि जेल की सलाखों के पीछे रह रहे अपने पति से मिल सकें. हालांकि 2014 तक वे पांच बार भारत आ चुकी हैं.

उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन का अधिकांश हिस्सा पाकिस्तान में ही अकेले गुज़ारा है. वे सिंगल पेरेंट के तौर पर अपनी बेटी की अकेले परवरिश कर रही हैं.

मुशाल इस्लामाबाद में रहती हैं. वे अपने पति यासीन मलिक की भारतीय जेल से रिहाई को लेकर सक्रिय रूप से अभियान चला रही हैं. बीबीसी के इंटरव्यू में उन्होंने मुझे बताया कि यासीन मलिक से उनकी आख़िरी बार बात 2019 में भारत सरकार के कश्मीर के विशेष दर्जा को निरस्त करने से ठीक एक दिन पहले हुई थी.

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मुशाल की नियुक्ति सांकेतिक

मुशाल हुसैन मलिक को अब पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार में प्रधानमंत्री की मानवाधिकार और महिला सशक्तिकरण के मामलों के विशेष सलाहकार के पद पर नियुक्त किया गया है. इस पद पर उनकी नियुक्ति को लेकर पाकिस्तान में सकारात्मक प्रतिक्रिया रही है.

राजनीतिक टिप्पणीकार सोहेल वड़ाइच इसे सांकेतिक और महत्वपूर्ण बताते हैं. वे कहते हैं कि अपने पति के लिए आवाज़ उठाने के क्रम में वे साहसी रही हैं, मानवाधिकार के मुद्दे से उनका जुड़ाव व्यक्तिगत रहा है.

पत्रकार हामिद मीर उनकी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहते हैं, "अंतरिम सरकार की कैबिनेट में पाकिस्तान के सभी प्रांत, सभी इलाके के लोगों का प्रतिनिधित्व है. इसमें मुशाल कश्मीर का प्रतीक हैं. इस कैबिनेट के अधिकांश मंत्री और सलाहकार टेक्नोक्रेट हैं और ये नियुक्तियां राजनीतिक नहीं हैं. यह एक अंतरिम व्यवस्था है, इसका एकमात्र उद्देश्य आम चुनाव कराना है, और जब तक कि एक निर्वाचित सरकार कार्यभार नहीं संभाल लेती, तब तक इन्हें सिर्फ दैनिक कामकाज चलाना है."

पाकिस्तान की कार्यवाहक कैबिनेट कामचलाऊ व्यवस्था के रूप में आम चुनावों तक के लिए स्थापित की गई है. यह चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने की संभावना है.

लेकिन सोहेल वड़ाइच की नज़र में मुशाल की नियुक्ति के स्पष्ट राजनीतिक मायने हैं.

वे कहते हैं, "ये भारत के लिए संदेश है कि कश्मीर को भुलाया नहीं गया है. यह प्रतीक के रूप में दर्शाता है कि पाकिस्तान मुशाल की आवाज़ को समर्थन देता है. वह आवाज़ जो वह अपने पति की निष्पक्ष सुनवाई और भारतीय अधिकारियों से अपने पति को बरी करने के लिए उठा रही हैं."

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यासीन मलिक

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कश्मीर पर यासीन और मुशाल की सोच एक जैसी नहीं

अपने पति की तरह ही वे कश्मीर के मुद्दे को लेकर प्रतिबद्ध हैं, हालांकि विश्लेषक अज़ाज़ सैयद कहते हैं कि कश्मीर के लिए मुशाल और यासीन मलिक के नज़रिए में एक फ़र्क़ भी है.

वे बताते हैं, "यासीन मलिक आज़ाद कश्मीर की बात करते हैं जबकि मुशाल कश्मीर को पाकिस्तान के हिस्से के रूप में बताती हैं."

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