पठानकोट हमले के 'मास्टरमाइंड' की हत्या का दावा, क्या ये टारगेट किलिंग है?

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- Author, मोहम्मद ज़ुबैर ख़ान
- पदनाम, पाकिस्तान से, बीबीसी के लिए
पाकिस्तान के सियालकोट में बुधवार को मौलवी शाहिद लतीफ़ की गोली मार कर हत्या कर दी गई.
दावा किया जा रहा है कि ये वही शाहिद लतीफ़ हैं, जिन्हें भारत वर्ष 2016 में पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड मानता है.
पठानकोट में हुए चरमपंथी हमले में सात भारतीय सैनिकों की मौत हो गई थी. हमले में शामिल सभी चरमपंथी भी मारे गए थे.
सियालकोट की पुलिस ने हत्या की पुष्टि की है और घटना की विस्तार से जानकारी भी दी है.
पुलिस ने इस पर कुछ नहीं कहा है कि क्या ये वही शाहिद लतीफ़ है, जिनकी पठानकोट हमले में भारत को तलाश है.
लेकिन स्थानीय पत्रकार माजिद निज़ामी का कहना है कि ये वही शाहिद लतीफ़ थे, जिन्हें भारत की सरकार पठानकोट हमले का मास्टरमाइंड मानती है.
भारतीय मीडिया भी ये दावा कर रहा है कि बुधवार को सियालकोट में जिस शाहिद लतीफ़ की हत्या हुई है, उसका संबंध पठानकोट हमले से था.
सियालकोट पुलिस के मुताबिक़, घटना बुधवार सुबह की नमाज़ के दौरान दस्का तहसील में हुई.
आरोप है कि शाहिद लतीफ़ चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा था और पठानकोट हमले में भारत को उसकी तलाश थी.
पुलिस ने हत्या और आतंकवाद की धाराओं के तहत दास्का सदर थाना में इसकी रिपोर्ट दर्ज की है.
दर्ज एफ़आईआर में पुलिस ने गुराया की नूर मस्जिद में तैनात गार्ड के बयान का हवाला देते हुए कहा है कि 11अक्तूबर की सुबह 20 से 22 साल की उम्र के तीन अज्ञात युवक नमाज़ करने के बहाने से मस्जिद में दाखिल हुए.
शिकायत के अनुसार, "जैसे ही मस्जिद में लोग नमाज़ के लिए खड़े हुए, तीनों ने गोलियाँ चलानी शुरू कर दीं. घटना में मौलाना शाहिद लतीफ़, मौलाना अब्दुल अहद और हाशिम नाम के तीन लोग घायल हो गये."
एफ़आईआर में कहा गया है कि "मौलाना शाहिद लतीफ़ की मौत घटनास्थल पर ही हो गई, जबकि अन्य दो को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ हाशिम की भी मौत हो गई."

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ये टारगेट किलिंग की घटना है: पुलिस
सियालकोट पुलिस के प्रवक्ता के मुताबिक़ हमलावरों की तलाश चल रही है, उनकी तलाश के लिए पुलिस ने विभिन्न स्थानों पर नाकेबंदी कर दी है.
वहीं सियालकोट के डीपीओ मोहम्मद हसन ने स्थानीय मीडिया से बातचीत में कहा, "अज्ञात हथियारबंद लोग मस्जिद में घुस आए थे, उन्होंने मस्जिद के भीतर गोलीबारी की. ये एक आतंकवादी घटना है. इसे हम टारगेट किलिंग भी कह सकते हैं. मौलाना शाहिद लतीफ़ और हाशिम बच नहीं सके, अब्दुल अहद हमले में घायल हुए हैं."
उन्होंने कहा, "पुलिस को मौक़े से अहम सबूत मिले हैं, हम इस पर काम कर रहे हैं. शाहिद लतीफ़ को पहले ही ख़तरा था और उन्होंने इस संबंध में ज़रूरी सुरक्षा इंतज़ाम किए थे. इस मामले की जाँच सभी एजेंसियां मिलकर कर रही हैं."
हादसा होने के बाद सुरक्षा को लेकर नाकेबंदी के बारे में मीडिया के सवाल पर डीपीओ का दावा था कि "पुलिस हादसे की ख़बर मिलते ही मौक़े पर पहुँची थी."
अज्ञात हथियारबंद लोग मस्जिद में घुस आए थे, उन्होंने मस्जिद के भीतर गोलीबारी की. ये एक आतंकवादी घटना है. इसे हम टारगेट किलिंग भी कह सकते हैं.
मौलाना शाहिद लतीफ़ के बारे में क्या है जानकारी
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर के रहने वाले मौलाना शाहिद लतीफ़ सालों से दस्का के नूर मदीना मस्जिद के प्रशासक के रूप में काम कर रहे थे.
अब तक मिली जानकारी के अनुसार उनके परिवार में उनकी पत्नी के अलावा दो बच्चे हैं.
कश्मीर मामलों पर नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार माजिद निज़ामी कहते हैं कि मौलाना शाहिद लतीफ़ ने भारत की जेल में लंबा वक़्त बिताया है.
वो कहते हैं, "90 के दशक की शुरुआत में वो पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर से भारत प्रशासित कश्मीर में चले गए थे. उस समय वो प्रतिबंधित संगठन हरकत अल-मुजाहिदीन से जुड़े थे. वो कुछ समय तक सक्रिय रहे."
वो कहते हैं कि ये आंदोलन मुजाहिदीन के जानेमाने नेता सज्जाद अफ़गानी के नेतृत्व में चल रहा था. शाहिद को भारत सरकार ने गिरफ्तार कर लिया और उन्हें बनारस जेल में रखा गया.
1999 में कंधार विमान अपहरण के दौरान चली बातचीत में जिन 40 लोगों की सूची रिहाई के लिए भारत को दी गई थी उनमें शाहिद लतीफ़ का नाम था. हालाँकि उन्हें सीनियर नेतृत्व में शामिल नहीं किया गया.
माजिद निज़ामी कहते हैं कि बाद की बातचीत के बाद केवल पाँच लोगों को रिहा किया गया था और इनमें शाहिद लतीफ़ शामिल नहीं थे.
शाहिद को साल 2010 में भारतीय जेल से रिहा क्या गया जिसके बाद वो पाकिस्तान आ गए. माजिद निज़ामी कहते हैं कि "रिहाई के बाद शायद ही वो कभी पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में रहे हों."
माजिद निज़ामी के मुताबिक जैश-ए-मोहम्मद या हरकत अल-मुजाहिदीन को लेकर शाहिल लतीफ़ की गतिविधियाँ काफ़ी समय से सामने नहीं आ रही थीं.
हालाँकि जनवरी 2016 में जब भारतीय एयर फोर्स के पठानकोट हवाई अड्डे पर हमला हुआ तो इंटरपोल ने उनके नाम पर रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया.

भारत का दावा है कि सुरक्षा एजेंसियों ने फ़ोन कॉल के ज़रिए हमले की योजना बना रहे एक ग्रुप की पहचान की थी, जिसमें शाहिद लतीफ़ भी शामिल था. इसके बाद भारत में शाहिद लतीफ़ के ख़िलाफ़ कुछ मामले दर्ज किए थे.
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार उन्हें 12 नवंबर 1994 को गिरफ्तार किया गया था जिसके बाद 16 साल तक वो भारत की जेल में बंद रहे. बाद में जब उन्हें छोड़ा गया वो वाघा के रास्ते होते हुए पाकिस्तान पहुंचे.
माजिद निज़ामी के अनुसार शाहिद लतीफ़ उन लोगों में से एक थे जिनकी भारत को तलाश थी. वो कहते हैं कि "ये टारगेट किलिंग का मामला लगता है."
पत्रकार फ़ैज़ुल्लाह खान की राय भी यही है. वो कहते हैं कि शाहिद लतीफ़ की हत्या से कुछ दिन पहले पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में अबू कासिम (जो जमात-उद-दावा से जुड़े बताए जाते हैं) की हत्या हुई थी, वो भी इसी तरह से हुई थी.
इसी साल सितंबर में फ़ज़्र की नमाज़ के वक्त रावलाकोट के अल-कुद्स मस्जिद में अज्ञात बंदूकधारियों ने उन पर गोलियां चलाई थीं. मौक़े पर उनकी मौत हो गई थीं.
शाहिद लतीफ़ इन दिनों सतर्क थे

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शाहिद लतीफ़ के एक क़रीबी रिश्तेदार के अनुसार, "मौलाना इन दिनों अधिक सतर्क थे और उन्होंने लोगों से मिलना-जुलना भी बंद कर दिया था."
नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर एक रिश्तेदार ने बीबीसी को बताया कि "वो बीते दिनों काफ़ी सावधानी बरत रहे थे. उन्होंने अपनी गतिविधियां भी सीमित कर ली थीं. उन्होंने कई बार ज़िक्र किया था कि उनकी जान को ख़तरा है."
फ़ैज़ुल्लाह खान के अनुसार "शाहिद लतीफ़ की हत्या से पहले जैशे-मोहम्मद के इब्राहिम मिस्त्री, हिज़्बुल-मुजाहिदीन के इम्तियाज़ आलम और लश्कर-ए-तैयबा के अबू कासिम को मस्जिद के भीतर नमाज़ के दौरान निशाना बनाया गया था."
वो कहते हैं, "हमलावरों ने उनकी हत्या के लिए नमाज़ का वक़्त इसलिए चुना हो सकता है क्योंकि इस समय वो अपनी सुरक्षा नहीं कर सकते. और फिर शायद लोगों ने सोचा नहीं होगा कि उन्हें मस्जिद में निशाना बनाया जा सकता है."
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