कश्मीर में बिहारी मज़दूर की हत्या करने वाले चरमपंथी का रातों-रात एनकाउंटर: पुलिस- प्रेस रिव्यू

दक्षिण कश्मीर के शोपियां में सोमवार शाम से शुरू हुए दो अलग-अलग ऑपरेशन में पाँच चरमपंथियों की मौत हो गई.

मारे जाने वालों में एक वह चरमपंथी भी शामिल है, जिसने 5 अक्टूबर को श्रीनगर में बिहार के एक रेहड़ी वाले की हत्या की थी. यह जानकारी पुलिस ने दी है.

अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ ये एनकाउंटर ऑपरेशन जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों की एक संयुक्त टीम ने दो गांवों तुलरान और फीरीपोरा में चरमपंथियों की मौजूदगी के इनपुट मिलने पर किया.

तुलरान में हुई मुठभेड़ में तीन चरमपंथियों की मौत हुई और कि फीरीपोरा में दो की. अख़बार ने इस ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है.

पुलिस ने मंगलवार को जारी किए गए एक बयान में कहा, ''तुलरान में तलाशी अभियान के दौरान जैसे ही आतंकवादियों की मौजूदगी का पता चला, उन्हें बार-बार आत्मसमर्पण करने का मौका दिया गया, लेकिन उन लोगों ने गोलीबारी शुरू कर दी और इस कारण एनकाउंटर करना पड़ा.''

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तीनों चरमपंथियों की पहचान कापरेन शोपियां के दानिश हुसैन डार, पहलीपोरा के यावर हुसैन नाइकू और गंदरबल के मुख़्तार अहमद शाह के रूप में हुई है.

पुलिस का कहना है कि वे लश्क़र-ए-तैयबा के एक गुट द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) से जुड़े हुए थे.

पुलिस ने कहा कि मुख़्तार शाह 5 अक्टूबर को श्रीनगर में पानी पुरी वाली की रेहड़ी लगने वाले बिहार के वीरेंद्र पासवान की हत्या में शामिल था. पासवान को गोली मारी गई थी.

पुलिस के मुताबिक़ शाह की हत्या के साथ घाटी में 'टार्गेटेड किलिंग' (निशाना बनाकर हत्या) के चार हालिया मामलों में से दो को सुलझा लिया गया है.

उन्होंने बताया कि सोमवार को बांदीपुर के हाजिन गांव में एक आम नागरिक की हत्या के लिए ज़िम्मेदार एक चरमपंथी की भी एनकाउंटर में मौत हो गई.

फीरीपोरा गांव में चले दूसरे ऑपरेशन में दो चरमपंथियों की मौत हुई.

पुलिस के मुताबिक़,''शोपियां के फीरीपोरा में रात को अंधेरे के कारण तलाशी अभियान रोक दिया गया और तड़के फिर से शुरू किया गया. इस मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए.''

फीरीपोरा में मारे गए चरमपंथियों की पहचान कापरेन के उबैद अहमद डार और बरारीपोरा के ख़ुबैब अहमद नेंगरू के रूप में हुई है. दोनों लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े थे.

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एक्सपर्ट पैनल ने बच्चों के लिए कोवैक्सीन को दी मंज़ूरी

द हिंदू अख़बार में छपी इस ख़बर के मुताबिक़, सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) की विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) की ओर से 2-18 साल के बच्चों के लिए भारत बायोटेक के वैक्सीन के आपातकालीन इस्तेमाल की सिफ़ारिश इमरजेंसी यूज़ ऑथराइजेशन (ईयूए) से की गई है.

कोवैक्सीनभारत की पहली स्वदेशी वैक्सीन है जिसे भारत बायोटेक ने आईसीएमआर और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजीके साथ कर विकसित किया है.

अगर इसे आपातकालीन इस्तेमाल के लिए हरी झंडी दी जाती है, तो यह दुनिया की पहली कोविड-19 वैक्सीन होगी जिसका उपयोग 2 साल के बच्चों के टीकाकरण के लिए किया जाएगा.

कंपनी ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि उसने सीडीएससीओ को 2-18 आयु वर्ग के क्लिनिकल परीक्षण के आंकड़े सौंपे हैं.

एसईसी की उचित समीक्षा के बाद ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया (डीसीजीआई) को सिफारिशें पेश की गई हैं.

केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अख़बार से कहा कि हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक ने सितंबर में 18 साल से कम उम्र के बच्चों पर कोवैक्सिन के फ़ेज़ -2 और फ़ेज़ -3 का परीक्षण पूरा कर लिया था और डेटा जमा कर दिया था.

परीक्षण 2-6, 6-12 और 12 -18 आयु के समूहों पर किए गए थे.

आर्यन ख़ान

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आज स्पेशल कोर्ट में होगी आर्यन खान की ज़मानत पर सुनवाई

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी ख़बर के अनुसार, नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाली एक विशेष अदालत बुधवार को अभिनेता शाहरुख ख़ान के बेटे आर्यन ख़ान और अन्य की ज़मानत याचिका पर सुनवाई करेगी.

यह मामला विशेष अदालत में तब आया जब मजिस्ट्रेट की अदालत ने ये कहते हुए उनकी याचिका ख़ारिज कर दी कि इस मामले पर फ़ैसला करने का अधिकार उसके पास नहीं है.

आर्यन ख़ान और आठ अन्य लोगों को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने 3 अक्टूबर को एक क्रूज़ पर छापेमारी के बाद गिरफ़्तार किया था.

एनडीपीएस कोर्ट ने सोमवार को एनसीबी को आदेश जारी कर इस मामले में 13 अक्टूबर तक जवाब दाख़िल करने को कहा था.

एनसीबी ने क्रूज़ पर सवार कुछ लोगों से प्रतिबंधित ड्रग्स बरामद करने का दावा किया है.

एजेंसी का कहना है कि यह एक "अंतराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी" के नेटवर्क की ओर इशारा करता है, जिसकी जांच करना ज़रूरी है.

हालांकि आर्यन ख़ान के वकील का कहना है कि उन्हें ग़लत तरीके से इस मामले में फंसाया जा रहा है.

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बिजली संकटः पीएमओ की कोयला आपूर्ति के लिए योजना तैयार

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, प्रधानमंत्री कार्यालय ने पावर प्लांट को बिना रुकावट ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक योजना तैयार की है.

केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने यहाँ तक निर्देश जारी कर दिया है कि जो राज्य आम लोगों को बिजली की आपूर्ति के बजाय ऊँचे दरों पर बिजली बेच रहे हैं, उनकी बिजली की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी.

प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पीके मिश्रा ने बिजली मंत्रालय के सचिव आलोक कुमार और कोयला मंत्रालय के सचिव अनिल कुमार जैन ने साथ बैठक की और कोयला की उपलब्धता और बिजली के ताज़ा हालात पर विस्तृत चर्चा की.

दोनों सचिवों ने बताया कि कोयले की कोई कमी नहीं है, लिहाज़ा कुछ दिनों दिनों में बिजली उत्पादन संयंत्रों को कोयले की आपूर्ति सामान्य होने लगेगी.

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