आर्यन ख़ान मामला: रेव पार्टी क्या है, वहाँ क्या होता है?

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    • Author, मयंक भागवत
    • पदनाम, बीबीसी मराठी

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख़ ख़ान के बेटे आर्यन ख़ान को एक रेव पार्टी से गिरफ़्तार किया है. आर्यन पर आरोप हैं कि उन्होंने ड्रग्स ख़रीदे और उनका सेवन किया था.

आर्यन ख़ान की ज़मानत पर सोमवार को सुनवाई हुई थी, लेकिन उन्हें गुरुवार तक एनसीबी की हिरासत में भेज दिया गया.

कोर्डेलिया क्रूज़ पर हुई कथित रेव पार्टी में आर्यन ख़ान के अलावा आठ और लोगों को हिरासत में लिया गया था.

इसके बाद से रेव पार्टियों और उनमें ड्रग्स के इस्तेमाल पर चर्चा शुरू हो गई है.

क्या होती है रेव पार्टी और इनमें क्या होता है? हमने इसे लेकर नारकोटिक्स विभाग और उनके मुख़बिरों से बात की है.

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रेव पार्टी क्या है?

रेव पार्टियाँ गुपचुप तरीक़े से आयोजित की जाती हैं. इसमें ड्रग्स, शराब, संगीत, डांस और कभी-कभी सेक्स भी शामिल होता है.

एनसीबी के एक अधिकारी ने नाम सार्वजनिक ना करने की शर्त पर बताया, "रेव पार्टियाँ केवल पार्टी सर्किट से जुड़े हुए कुछ चुनिंदा लोगों के लिए आयोजित की जाती हैं. नए लोगों को इन पार्टियों में आने की अनुमति नहीं दी जाती, ताकि इसकी जानकारी ना फैले."

रेव पार्टियाँ ड्रग लेने वालों और बेचने वालों के लिए एक सुरक्षित जगह होती हैं.

एनसीबी के अधिकारी ने बताया कि रेव पार्टियों में बड़ी मात्रा में ड्रग्स लिया जाता है.

आर्यन ख़ान

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क्रूज़ पर हुई रेव पार्टी से एनसीबी ने 13 ग्राम कोकीन, पाँच ग्राम मेफेड्रोन और 22 टेबलेट एक्सटेसी की जब्त की हैं.

अधिकारी ने कहा, "रेव पार्टियों में एक्सटेसी, केटामाइन, एमडीएमए, एमडी और चरस भी लिया जाता है."

पार्टी के दौरान तेज़ आवाज़ में इलेक्ट्रिक ट्रांस म्यूज़िक चलता है ताकि ड्रग लेने वाले लंबे समय तक एक ही तरह के मूड में रहें. लोग ड्रग्स लेते हैं और इस म्यूज़िक पर झूमते हैं.

रेव पार्टियाँ 24 घंटों से लेकर तीन दिनों तक चलती हैं.

एनसीबी के एक अधिकारी ने बताया, "ये एक ख़ास तरह का म्यूज़िक सिस्टम होता है, ताकि इलेक्ट्रिक ट्रांस म्यूज़िक को तेज़ आवाज़ में चलाया जा सके."

लेज़र से रंगीन तस्वीरें, विज़ुअल इफ़ेक्ट्स और धुआँ निकालने वाली मशीनें भी रेव पार्टियों में इस्तेमाल की जाती हैं.

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छापा मारने वाले अधिकारियों के साथ गए एक मुखबिर ने बताया, "रेव पार्टियों में चलने वाले गानों में बहुत कम शब्द होते हैं. ट्रांस म्यूज़िक एक काल्पनिक या भ्रमित करने वाला वातावरण पैदा करता है और लोगों को वो अच्छा लगता है."

इन पार्टियों की योजना से लेकर आयोजन तक में कोड भाषा का इस्तेमाल किया जाता है.

मुंबई पुलिस के सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी समाधान धनेधर एनसीबी के साथ काम कर चुके हैं.

वे बताते हैं, "ये पार्टियाँ दूर-दराज़ जगहों पर की जाती हैं ताकि किसी को शक ना हो."

रेव पार्टियाँ आमतौर पर खंडाला, लोनावला, करजात, खालापुर, पुणे और ऐसी ही कुछ जगहों पर होती हैं.

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पार्टियों में कैसे बुलाए जाते हैं लोग

रेव पार्टियाँ बहुत ही गुपचुप तरीक़े से आयोजित होती हैं. इसलिए जाँच एजेंसियों की नज़र से बचने के लिए कई तरीक़े अपनाए जाते हैं.

रेव पार्टी में बुलाने के लिए सोशल मीडिया और कोड भाषा का इस्तेमाल किया जाता है.

आदिल शेख़ (बदला हुआ नाम) पुलिस के मुखबिर हैं. उन्होंने एनसीबी को पहले दो रेव पार्टियों की सूचना दी थी.

आदिल कहते हैं, "रेव पार्टी की जानकारी देने के लिए पिछले कुछ सालों से सोशल मीडिया का इस्तेमाल काफ़ी बढ़ गया है. इन पार्टियों का हिस्से रहे लोगों का एक छोटा समूह बनाया जाता है जो दूसरों तक पार्टी की जानकारी पहुँचाते हैं."

क्योंकि रेव पार्टियों में बड़ी मात्रा में ड्रग्स का इस्तेमाल होता है इसलिए ये जंगल या ऐसे इलाक़ों में की जाती हैं, जो पुलिस की पहुँच से बाहर हों.

समाधान धनेधर बताते हैं, "पार्टी के आयोजक इसके लिए कुछ गुप्त कोड का इस्तेमाल करते हैं. इन पार्टियों में कोई भी जब चाहे शामिल नहीं हो सकता. कई बार पार्टी की जानकारी सिर्फ़ एक-दूसरे के ज़रिए बोलकर दी जाती है."

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रेव पार्टी में कौन जा सकता है

रेव पार्टियों में बहुत कम लोग बुलाए जाते हैं. ये चुने हुए ग्रुप होते हैं.

इन पार्टियों में शामिल होने के लिए हज़ारों-लाखों ख़र्च करने पड़ते हैं. इसलिए सामान्य लोग इसमें नहीं जा सकते. ये पार्टियाँ बेहद अमीर लोगों के लिए होती हैं.

लेकिन, पिछले कुछ सालों में मध्यमवर्गीय युवा भी अपने अमीर दोस्तों के साथ इस सबका हिस्सा बनते पाए गए हैं.

रेव पार्टियाँ 1980 के दशक में युवाओं के बीच लोकप्रिय हुई थीं.

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किन रेव पार्टियों पर पड़े छापे

मुंबई पुलिस ने 2009 में मुंबई के जुहू इलाक़े में बॉम्बे 72 क्लब में छापा मारा था. पुलिस ने छापेमारी में 246 युवाओं को हिरासत में लिया था. इनमें से कई लोगों की ख़ून की जाँच में ड्रग्स लेने की पुष्टि हुई थी.

रायगढ़ पुलिस ने साल 2011 में खालापुर में एक रेव पार्टी में छापा मारा था. एंटी-नारकोटिक्स सेल के अधिकारी अनिल जाधव को भी इस मामले में शामिल होने को लेकर गिरफ़्तार किया गया था.

पार्टी में पकड़े गए लोगों में से 275 की ख़ून की जाँच में ड्रग्स लेने की पुष्टि हुई थी. 2019 में जुहू के ऑकवुड होटल में छापेमारी के दौरान 96 लोगों को पकड़ा गया था.

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