कश्मीर 'टार्गेट किलिंग': क्यों हो रही है पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और चीन की चर्चा

विजय कुमार

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शनिवार. 16 अक्टूबर 2021

आईजी विजय कुमार मीडिया को जानकारी दे रहे थे, "कश्मीर में आम नागरिकों पर हमले के बाद हमने अभियान चलाया है. नौ मुठभेड़ हुई हैं. 13 आतकंवादियों को मारा गया है. हमारा ऑपरेशन जारी रहेगा."

लेकिन, आईजी विजय कुमार के इस बयान से ज़्यादा चर्चा शनिवार को ही श्रीनगर और पुलवामा में संदिग्ध चरमपंथियों के हमलों की हुई.

इनमें कश्मीर से बाहर के दो लोगों को निशाना बनाया गया. इनमें से एक बिहार के बांका के अरविंद कुमार साह और दूसरे यूपी के सहारनपुर के सगीर अहमद थे.

अरविंद कुमार साहा

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साह के पिता ने बताया, "वो तीन महीने पहले ही श्रीनगर गए थे."

अगले दिन यानी रविवार 17 अक्टूबर को भी संदिग्ध चरमपंथियों ने कुलगाम में दो लोगों की हत्या की. ये दोनों बिहार के रहने वाले थे.

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रविवार को भी आईजी विजय कुमार का एक बयान सामने आया. इसमें उन्होंने उन 'ख़बरों को फ़र्जी बताया जिनमें कहा गया था कि बाहर आए मजदूरों को पुलिस/ सेना के कैंप में रखा जाए.'

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कुलगाम में रविवार को हुए हमले के बाद जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एक बयान जारी कर कहा, "हमारे सुरक्षा बल टेररिस्ट को माकूल जवाब देंगे. जम्मू कश्मीर सरकार दुख के वक्त में उनके परिवारों के साथ खड़ी है. "

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हालांकि, सरकार और पुलिस की ओर से दिया गया आश्वासन शायद घाटी में बाहर से आए लोगों में वो भरोसा नहीं जगा सका जो हालिया हमलों की वजह से बने डर को दूर कर सके.

बाहर से घाटी आए मजदूर

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सोमवार 18 अक्टूबर की सुबह समाचार एजेंसी एएनआई ने अपने ट्विटर हैंडल पर कुछ तस्वीरें जारी कीं. इनमें बाहर से काम करने घाटी पहुंचे मजदूरों का एक दल लौटता दिखाई दे रहा था.

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'हमलों का डर'

समाचार एजेंसी एएनआई ने राजस्थान के मजदूर के हवाले से बताया, "यहां हालात खराब हो रहे हैं. हम डरे हुए हैं. हमारे बच्चे साथ हैं और इसलिए हम अपने शहर वापस जा रहे हैं."

अक्टूबर की शुरुआत से ही संदिग्ध चरमपंथी आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं.

इन्हें 'टार्गेट किलिंग' के तौर पर देखा जा रहा है और अब इन्हें लेकर जो राजनीतिक बयान सामने आ रहे हैं, उनमें पाकिस्तान, चीन और अफ़ग़ानिस्तान का असर देखने की कोशिश हो रही है.

हमले में मारी गई सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल सुपिंदर कौर के परिजन शोक में हैं

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'पाकिस्तान का हाथ'

संदिग्ध चरमपंथियों ने शुरुआत में जिन लोगों को निशाना बनाया, उनमें कश्मीरी पंडित और श्रीनगर के कैमिस्ट माखन लाल बिंद्रू, एक सरकारी स्कूल की सिख प्रिंसिपल सुपिंदर कौर और टीचर दीपक चंद प्रमुख थे.

इनके साथ संदिग्ध चरमपंथियों के निशाने पर बाहर से काम करने के लिए घाटी आए लोग भी आए.

भारतीय जनता पार्टी का आरोप है कि इन हमलों के पीछे पाकिस्तान का हाथ है तो विपक्ष संदिग्ध चरमपंथियों के लगातार हो रहे हमलों को लेकर सरकार को घेरने में जुट गया है.

भारतीय जनता पार्टी की जम्मू कश्मीर इकाई के प्रमुख रविंदर रैना ने आरोप लगाया है कि 'पाकिस्तान और टेररिस्ट डर का माहौल बनाने में लगे हैं.'

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उन्होंने एक बयान जारी कर कहा, "पाकिस्तानी आतंकवादियों ने एक बार फिर जघन्य अपराध किया है और कश्मीर घाटी में अपनी मेहनत के बल पर रोज़ी रोटी कमाने वाली मज़दूरों की जिस प्रकार नृशंस हत्या की है ये बहुत बड़ा जघन्य अपराध इन पाकिस्तान के कायर आतंकवादियों ने किया है. "

बिहार के उप मुख्यमंत्री और बीजेपी के सीनियर नेता तारकिशोर प्रसाद ने ट्वेंटी-20 विश्वकप में भारत और पाकिस्तान के बीच मैच पर रोक लगाने की मांग की है.

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समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक प्रसाद ने कहा, " इस पर रोक लगाई जानी चाहिए जिससे पाकिस्तान को संदेश मिले कि अगर वो चरमपंथ का समर्थन करते रहते हैं तो भारत कहीं भी उनके साथ खड़ा नहीं होगा."

भारत और पाकिस्तान के बीच 24 अक्टूबर को मैच खेला जाना है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक संदिग्ध चरमपंथी हमले में मारे गए साह के पिता ने भी पाकिस्तान के साथ मैच नहीं खेलने की मांग उठाई थी.

जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूख़ अब्दुल्लाह ने इन घटनाओं को कश्मीर को बदनाम करने की साजिश बताया है.

उन्होंने कहा, "मासूम लोगों की हत्याएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं. ये कश्मीरियों को बदनाम करने की साजिश है."

सत्यपाल मलिक

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हालांकि, कई दूसरे नेता इसे प्रशासनिक ढील से जोड़कर देख रहे हैं. इनमें मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक भी हैं. वो जम्मू कश्मीर के राज्यपाल रह चुके हैं.

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चीन का ज़िक्र क्यों?

सत्यपाल मलिक ने मौजूदा प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा, "जब मैं जम्मू कश्मीर का राज्यपाल था तब कोई टेररिस्ट श्रीनगर के 50 से 100 किलोमीटर के दायरे में घुस भी नहीं सकता था. लेकिन अब टेररिस्ट श्रीनगर के लोगों की जान ले रहे हैं. ये वाकई दुखद है. "

किसी वक़्त भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी रही शिवसेना भी मौजूदा स्थिति को लेकर सवाल उठा रही है. एक दौर में जानकार भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना की 'कश्मीर नीति' में एकरूपता देखते थे.

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शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा, "जम्मू कश्मीर के हालात चिंताजनक हैं. बिहार के प्रवासियों, कश्मीरी पंडितों और सिखों को निशाना बनाया जा रहा है. जब पाकिस्तान का ज़िक्र होता है तब आप सर्जिकल स्ट्राइक की बात करते हैं. ऐसे में चीन के साथ भी यही होना चाहिए."

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संजय राउत ने आगे कहा, "रक्षा मंत्री या फिर गृह मंत्री को देश को बताना चाहिए कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख में क्या स्थिति है."

तालिबान की वापसी का असर?

कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने भी कश्मीर घाटी में हुई हत्याओं को लेकर चिंता जाहिर की है और दावा किया है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की वापसी को लेकर उन्होंने आगाह किया था.

उन्होंने कहा, "कश्मीर के दौरे के वक़्त मैंने कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की वापसी का कश्मीर पर भी असर हो सकता है. मैंने ये चिंता भी जाहिर की थी कि कश्मीर में ये खामोशी आने वाले तूफ़ान का संकेत है."

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कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भी कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के उदय के बाद ऐसा अनुमान लगाया जाना चाहिए था.

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तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने बीते महीने बीबीसी संवाददाता विनीत ख़रे से ख़ास बातचीत में कहा था कि उनके पास जम्मू-कश्मीर के मुसलमानों के लिए आवाज़ उठाने का अधिकार है.

सुहैल शाहीन ने अमेरिका के साथ हुए दोहा समझौते की बात करते हुए कहा था कि किसी भी देश के ख़िलाफ़ सशस्त्र अभियान चलाना उनकी नीति का हिस्सा नहीं है.

नीतीश कुमार

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नीतीश ने क्या कहा?

कश्मीर में बीते दो दिनों में बिहार के मजदूरों को निशाना बनाया गया है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे लेकर जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से बात की है.

नीतीश कुमार ने बताया, " मैंने जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल से बात की और हाल में हुई हत्याओं को लेकर चिंता जाहिर की. ये साफ़ है कि कुछ लोग जम्मू कश्मीर में काम करने के लिए बाहर से गए लोगों को निशाना बना रहे हैं."

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आगे कहा, "हमें उम्मीद है कि जम्मू कश्मीर में प्रवासियों की सुरक्षा के लिए उपाय किए जाएंगे.

बिहार के पूर्व सीएम जीतनराम मांझी का भी एक बयान चर्चा में है. इसे जीतनराम मांझी नाम के ट्विटर हैंडल से पोस्ट किया गया है.

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" कश्मीर में लगातार हमारे निहत्थे बिहारी भाईयों की हत्या की जा रहीं है जिससे मन व्यथित है.अगर हालात में बदलाव नहीं हो पा रहे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, (गृह मंत्री) अमित शाह जी से आग्रह है,कश्मीर को सुधारने की जिम्मेवारी हम बिहारियों पर छोड दीजिए 15 दिन में सुधार नहीं दिया तो कहिएगा."

इस बीच, बिहार पुलिस ने सोमवार को बताया कि राज्य के डीजीपी ने जम्मू कश्मीर के चीफ़ सेक्रेट्री और डीजीपी से बात की है. उन्होंने आम लोगों की हत्या को लेकर चर्चा की.

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