वर्ल्ड कप: वनडे का किंग कौन, चेन्नई में कोहली-राहुल ने दिया जवाब

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    • Author, अभिजीत श्रीवास्तव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

दो साल पहले भारतीय टीम के लिए वनडे और टी20 में कप्तान बनने के बाद रोहित ने एक इंटरव्यू में कहा था कि वो अपनी टीम को उस परिस्थिति के लिए तैयार देखना चाहते हैं, जब 10 रन पर तीन विकेट गिर चुके हों.

रोहित ने कहा था, "मैं टीम को उस स्थिति के लिए तैयार देखना चाहता हूँ, जब मैच में केवल 10 रन पर तीन विकेट गिर गए हों. मैं अपनी टीम से ये कहता हूँ कि उस स्थिति के लिए प्लान बनाएं, जब किसी सेमीफ़ाइनल के शुरुआती दो ओवरों में दो विकेट गिर कर गए हों. उन्हें उस स्थिति के लिए तैयार करना है."

रविवार की रात वर्ल्ड कप 2023 के पहले ही मैच में ऑस्ट्रेलिया के सामने भारतीय टीम ठीक उसी स्थिति में थी, जब स्कोर केवल दो रन पर तीन विकेट था.

टीम वहाँ से तो मैच के बाद रोहित बोले भी कि इस जीत से बहुत ख़ुशी मिली. कप्तान ने विशेष तौर पर टीम की फ़ील्डिंग की बहुत तारीफ़ की.

वे बोले, हमने फ़ील्डिंग में सुधार पर कड़ी मेहनत की है. इस तरह की परिस्थिति में कभी कभी बहुत मुश्किल हो सकता है लेकिन कुल मिलाकर यह बहुत ही अच्छी कोशिश रही.

रोहित ने जिस संभावना की दो साल पहले बात की थी वो रविवार को ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ देखने को जब मिला तो यह भी दिखा कि टीम का मध्यक्रम इससे उबरने की कूबत रखता है.

तो इसके लिए चेज़ मास्टर विराट कोहली सबसे बड़ी कुंजी थे जो तब पिच पर मौजूद थे और अगले बल्लेबाज़ केएल राहुल को ये समझा रहे थे कि उन्हें ऐसी स्थिति में क्या करना है.

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केएल राहुल जब उतरे तो विराट ने क्या कहा?

केएल राहुल जब पिच पर आए थे तब स्कोर दो रन पर तीन विकेट था.

मैच के बाद उन्होंने बताया कि विराट कोहली ने पिच पर आने के साथ क्या कहा.

वे बोले, "तब मैं नहा कर निकला ही था और यह उम्मीद कर रहा था कि आधे घंटे अपने पैर को कुछ आराम दूं लेकिन मुझे मैदान में आना पड़ा."

"पिच पर विराट ने कहा कि शुरू में टेस्ट मैच की तरह बल्लेबाज़ी करनी होगी और सही शॉट्स खेलने होंगे. हम प्लान के मुताबिक़ खेले और ख़ुशी है कि टीम को हमारी पारियों से जीत मिली."

कप्तान रोहित भी मैच के बाद तीन विकेट गिरने के बारे में बोले, "ईमानदारी से कहूं तो, हाँ मैं घबराया था. लक्ष्य का पीछा करते हुए आप ऐसी शुरुआत नहीं चाहते हैं."

रोहित साथ ही ये भी बोले कि, "टूर्नामेंट में आगे भी अलग-अलग कंडीशन में मैच खेलने हैं तो नई नई पिचों पर ऐसा ही प्रदर्शन दोहराना होगा."

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विराट-राहुल के केमिस्ट्री

मैच में सबसे अधिक केएल राहुल ने नाबाद 97 रन तो विराट कोहली ने भी ज़ोरदार 85 रन बनाए. दोनों ने चौथे विकेट के लिए 218 गेंदों पर 165 रनों की साझेदारी निभाई.

इस साझेदारी पर पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने लिखा कि इसे लंबे वक़्त तक याद रखा जाएगा.

ये ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ वर्ल्ड कप में किसी भी विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड है. उन्होंने अजय जडेजा और रॉबिन सिंह के बीच 1999 वर्ल्ड कप में हुई 141 रनों की साझेदारी को पीछे छोड़ा.

तो यह चौथे विकेट के लिए वर्ल्ड कप में किसी भी टीम के ख़िलाफ़ सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड भी है.

ये दोनों ही बल्लेबाज़ मध्यक्रम में भारतीय टीम का आधार हैं और इनके बीच पिच पर केमिस्ट्री भी बहुत मज़बूत दिखती है.

अभी पिछले महीने ही एशिया कप में विराट कोहली और केएल राहुल ने तीसरे विकेट के लिए 233 रनों की नाबाद साझेदारी निभाई थी. तब दोनों ने शतक जमाए थे.

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क्या टीम की 'नई दीवार' बन रहे हैं राहुल?

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मध्यक्रम के बल्लेबाज़ के रूप में केएल राहुल ने लगातार अपनी उपयोगिता दिखाई है. चौथे और पांचवे क्रम पर बल्लेबाज़ी के लिए उतरते हुए केएल राहुल ने अब तक 33 पारियों में 13 अर्धशतक जमाए हैं.

वे इस साल 14 मैचों में एक शतक, पांच अर्धशतकों के साथ 69.78 की औसत से 628 रन बना चुके हैं.

इन 14 मैचों में से आधे यानी सात ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ खेले गए हैं और उनमें 349 रन भी बनाए हैं.

मार्च तक खेले गए पहले तीन मैचों में जहां उन्होंने एक अर्धशतक जमाया था. वहीं चोट से उबर कर टीम में वापसी करने के बाद खेले गए चार मैचों में उनका स्कोर नाबाद 58, 52, 26 और नाबाद 97 रन रहा है.

केएल राहुल की मध्यक्रम में लगातार मजबूत प्रदर्शन उनके हमनाम कोच राहुल द्रविड़ की याद दिलाता है, जिन्हें 'टीम की दीवार' के उपनाम से याद किया जाता है.

इस मैच में जब 18वें ओवर में ऐडम ज़ैम्पा को गेंदबाज़ी के लिए लाया गया तो राहुल ने तीन चौके के साथ उनका स्वागत किया.

इससे न केवल उन पर से बल्कि दूसरी छोर से बल्लेबाज़ी कर रहे विराट कोहली पर से भी धीमी रन गति का दबाव ख़त्म हो गया.

राहुल छक्का लगा कर टीम को जिताए और 97 रन बनाकर नाबाद रहे लेकिन शतक न बना पाने की कसक रह गई.

मैच के बाद वे बोले, "मैं सोच रहा था कि एक चौका और फिर छक्का लगाने से शतक पूरा हो सकता है. लेकिन मैंने छक्का लगा दिया और टीम को जीत हासिल हो गई."

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चेज़ किंग कोहली

लक्ष्य का पीछा करते हुए विराट कोहली को क्रिकेट का मास्टर क्लास बल्लेबाज़ यूं ही नहीं माना जाता. जब भी टीम को उनकी पारी की ज़रूरत होती है वो खड़े उतरते हैं.

वनडे में चेज़ करते हुए अपनी 148 पारियों के दौरान विराट की यह 64वीं अर्धशतकीय पारी थी. यानी ऐसे हर दूसरे मैच में वो अर्धशतक तो जमाते ही हैं.

इसलिए जब भारतीय टीम का स्कोर केवल 12 रन था और मिशेल मार्श ने विराट कोहली का कैच टपका दिया तो कमेंट्री कर रहे पूर्व क्रिकेटरों ने कहा कि यह कैच नहीं मैच छूटा है और हुआ भी ऐसा ही.

अपनी इसी पारी के दौरान कोहली ने वनडे में चेज़ करने के दरम्यान सबसे अधिक रन बनाने का रिकॉर्ड भी कायम किया. अब वनडे में चेज़ करते हुए कोहली के 5,517 रन हो गए हैं. उन्होंने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर (5,490 रन) को पीछे छोड़ा है.

इतना ही नहीं वे चेज़ करते हुए विराट 31 मौक़ों पर नॉट आउट रहे हैं और उनमें से 30 बार टीम इंडिया जीती है.

विराट कोहली ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि, "जब बड़े मैच आते हैं तो मुझे ख़ुद को टेस्ट करने का मौक़ा होता है."

कमेंट्री कर रहे गौतम गंभीर भी बोले, "आप ऐसे रन बनाना भी चाहते हैं, जब टीम दबाव में हो तो एक क्रिकेटर रन बनाना चाहता है."

विराट ने अपनी इस शानदार पारी से कमेंट्री बॉक्स में बैठे गौतम गंभीर को भी मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया.

रवींद्र जडेजा

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जडेजा की फिरकी के कायल

भारतीय टीम की गेंदबाज़ी के दौरान जब रविचंद्रण अश्विन की एक गेंद बहुत तेज़ी से घूमी तो कमेंट्री कर रहे पूर्व क्रिकेटर इरफ़ान पठान ने कहना शुरू किया कि जल्दी से रवींद्र जडेजा को गेंदबाज़ी पर लाएं.

हालांकि तब दूसरी छोर से कुलदीप यादव गेंदें डाल रहे थे और अभी अभी उन्होंने वॉर्नर और स्मिथ की जम रही जोड़ी को तोड़ा था.

कुछ ओवरों बाद ही जब रोहित ने जडेजा को गेंद थमाई तो फिर उन्होंने एक यादगार गेंदबाज़ी की.

ये जडेजा की गेंदबाज़ी का नतीजा था कि ऑस्ट्रेलियाई टीम ने केवल 9 रन बनाने के दरम्यान अपने मध्यक्रम के तीन अहम विकेट गंवा दिए.

इसका असर ये हुआ कि स्पिन के अच्छे बल्लेबाज़ माने जाने वाले ग्लेन मैक्सवेल पर तेज़ी से रन बनाने का दारोमदारा पड़ा लेकिन वो पिच नहीं जम सके.

जडेजा ने अपने 10 ओवरों में 28 रन देकर तीन अहम विकेट लिए.

पूर्व क्रिकेटर इरफ़ान पठान रवींद्र जडेजा की हिमायत पर कहते हैं, "जडेजा पिच पर आगे की तरफ़ लेंथ गेंदें डालते हैं. आर्म बॉल करते हैं. साथ ही लगातार स्टंप्स को टारगेट करते हैं. उनकी गेंदों की स्पीड क़रीब 100 किलोमीटर रहती है. वे हर गेंद टर्न नहीं कराते हैं. इससे वो बल्लेबाज़ को छकाने में कामयाब हो जाते हैं. सूखी पिच पर वे हर गेंद को टर्न नहीं कराते इससे बल्लेबाज़ों को यह समझ पाने में समय लगता है कि उनकी कौन सी गेंद टर्न करेगी."

मैच में कुलदीप, अश्विन और बुमराह, सिराज ने भी अच्छी गेंदबाज़ी की.

चेन्नई की पिच का मुआयना करते ऐडम ज़ैम्पा

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चेन्नई की पिच के मिजाज पर चर्चा

वनडे क्रिकेट के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब कोई टीम केवल दो रन पर तीन विकेट गंवाने के बाद मैच जीती है.

भारतीय गेंदबाज़ी और दूसरी पारी में इस स्थिति के आने तक पिच को लेकर भी बहुत कुछ कहा गया.

वेस्टइंडीज़ के पूर्व ऑलराउंडर कार्लोस ब्रैथवेट ने बीबीसी से कहा, "हमेशा कहा जाता है कि पिच के मिजाज पर तब तक राय नहीं बनानी चाहिए जब तक दोनों टीमों ने उस पर बल्लेबाज़ी न की हो. भारत की बल्लेबाज़ी के शुरुआती ओवरों को देखने के बाद मुझे ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज़ों से अधिक सहानुभूति है. यह एक माइनफ़ील्ड की तरह दिख रहा है."

पिच से मदद पर भारतीय टीम के कप्तान रोहित भी बोले, "हमें पता था कि इससे सभी को मदद मिलेगी ये पता था. तेज़ गेंदबाज़ों को रिवर्स स्विंग मिल रहा था तो स्पिनर्स अच्छी गेंदें डाल रहे थे."

वहीं मैच में कमेंट्री कर रहे पूर्व भारतीय ओपनर गौतम गंभीर ने चेन्नई की पिच को लेकर कहा, "यह नए बल्लेबाज़ों के लिए आसान नहीं होती है लेकिन जब आप पिच पर जम जाते हैं तो लंबी पारी खेल सकते हैं."

मैच में 97 रनों की नाबाद पारी खेलने वाले केएल राहुल से जब पिच के बारे में पूछा गया तो वे बोले, "शुरू में जब हम भी गेंदबाज़ी कर रहे थे तो नई गेंद से तेज़ गेंदबाज़ों को कुछ मदद मिल रही थी. बाद में स्पिनर्स को विकेट से मदद मिली. वहीं बाद के ओवरों में ओस ने भी अपना किरदार निभाया. यह विकेट न तो बल्लेबाज़ी के लिए बहुत अच्छी थी, न ही मुश्किल. न ये सपाट विकेट थी न ही गेंदबाज़ों को बहुत मदद मिल रही थी. यह क्रिकेट के लिए एक अच्छी विकेट थी."

रोहित शर्मा

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भारत ने चेन्नई की उस पिच पर कंगारुओं को हराया जहां वो अब से पहले खेले गए मैच में भारतीय टीम के ख़िलाफ़ बीस साबित होते रहे हैं.

रोहित ने दो साल पहले एक इंटरव्यू में यह भी कहा था, "जब आप मैच खेलते हैं तो जीतना चाहते हैं. सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना चाहते हैं. आप अपने करियर में बहुत सारे रन, कई शतकें बना सकते हैं लेकिन चैंपियनशिप जीतना हमेशा आपके जेहन में रहता है क्योंकि उसमें पूरी टीम की कोशिशें होती हैं. हम टीम गेम खेलते हैं. जब आप एक टीम की तरह कुछ बड़ा हासिल करते हैं तो वो मेरे लिए बहुत बड़ी चीज़ है. मेरा लक्ष्य टीम के लिए चैंपियनशिप जीतना है."

वैसे तो इस वर्ल्ड कप में भारतीय टीम का यह आगाज़ ही था लेकिन ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम को हरा कर उसने बाकी टीमों को अपना स्पष्ट संदेश भेज दिया है.

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