भारतीय क्रिकेट टीम के वर्ल्ड कप जीतने की कितनी संभावना है?

इमेज स्रोत, GETTY IMAGES
- Author, सुरेश मेनन
- पदनाम, खेल पत्रकार
क्या भारत इस बार वर्ल्ड कप का ख़िताब जीत सकता है?
ये सवाल आम भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के मन में वर्ल्ड कप के शुरू होने से पहले ही घुमड़ रहा है.
इसका जवाब है हां, भारत निश्चित तौर पर इस बार वर्ल्ड कप का ख़िताब जीत सकता है.
भारतीय क्रिकेट टीम मौजूदा समय में विश्व की सर्वश्रेष्ठ टीम है. टीम को घरेलू मैदानों पर खेलने का मौका मिला है और हाल के दिनों में टीम का प्रदर्शन भी बहुत शानदार रहा है. पिछले ही दिनों इस टीम ने एशिया कप का ख़िताब जीता है.
लेकिन हमें ये भी स्वीकार करना होगा कि भारत के अलावा कुछ दूसरी टीमें भी वर्ल्ड चैंपियन बनने का दमखम रखती है.
इनमें ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, पाकिस्तान, न्यूज़ीलैंड और दक्षिण अफ्रीक़ा शामिल हैं, इनमें से आख़िरी की दो टीमें अब तक वर्ल्ड कप का ख़िताब नहीं जीत सकी हैं.

इमेज स्रोत, DAVE CANNON/ALLSPORT
एशियाई महाद्वीप में जब हुआ वर्ल्ड कप
1983 में पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद भारतीय टीम, हर बार क्रिकेट वर्ल्ड कप में फेवरिट टीम के तौर पर खेलने उतरी है.
1987 में वर्ल्ड कप क्रिकेट का आयोजन पहली बार एशियाई महाद्वीप में हुआ था. तब टीम के वरिष्ठ खिलाड़ियों की परंपरागत सोच थी, जिसके मुताबिक घरेलू मैदान पर खेलने का मतलब अतिरिक्त दबाव का सामना करना था.
तब अधिकांश खिलाड़ियों की सोच यही थी कि घरेलू स्थितियों के बारे में जानने का जो भी फ़ायदा है वो घरेलू दर्शकों की असीमित चाहत के सामने कहीं नहीं ठहरता. 1987 के वर्ल्ड कप में भारतीय टीम सेमीफ़ाइनल से बाहर हो गई.
लेकिन 2011 में हालात एकदम उलट गए, तब घरेलू दर्शकों के सामने भारतीय टीम ने महेंद्र सिंह धोनी के छक्के के बदौलत वर्ल्ड कप जीत लिया था. 1983 से 2011 के बीच में भारत 2003 के वर्ल्ड कप में फ़ाइनल तक पहुंचा था लेकिन ऑस्ट्रेलियाई चुनौती से पार नहीं पा सका था.
अब 12 साल बाद भारतीय टीम से एक बार फिर चैंपियन बनने की उम्मीद की जा रही है. लेकिन क्रिकेट वर्ल्ड कप का अपना अजीब रोमांच है.
इसमें टीमों को एक दो नहीं बल्कि छह से भी ज़्यादा सप्ताह तक अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाना होता है. इसमें दुनिया की सभी दस टीमें एक दूसरे के ख़िलाफ़ खेलने उतरती हैं और शुरुआती हार का बहुत मतलब नहीं रह जाता है.

इमेज स्रोत, GETTY IMAGES
लगातार होते उलटफेर
ऐसा हमलोगों ने 1992 के वर्ल्ड कप में देखा है जब पाकिस्तान की टीम टूर्नामेंट से बाहर होने की कगार तक पहुंच गई थी लेकिन वहां से वापसी करते हुए टीम ने वर्ल्ड कप जीत लिया.
टीम के तत्कालीन कप्तान इमरान ख़ान ने अपने खिलाड़ियों से हारे हुए शेर की तरह लड़ने की अपील की थी और वहां से टीम चैंपियन बनने के बाद ही ठहरी.
ऐसा भी हुआ है जब टीम ने फ़ाइनल से पहले ही अपना ज़ोरदार प्रदर्शन कर दिखाया और उसके बाद खेल फीका हो गया. भारतीय टीम के साथ 2003 के वर्ल्ड कप में यही हुआ था.
टीम के कोचों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने खिलाड़ियों को फ़िट रखने और उनसे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन निकलवाने की होती है. खिलाड़ियों की अपनी अलग गति होती है, ऐसे में वर्ल्ड कप की तैयारियों के दौरान यह सुनिश्चित करना होता है कि खिलाड़ियों का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन सही समय पर निकले.
भारतीय टीम ने एशिया कप में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ 350 से ज़्यादा रन बनाए और फ़ाइनल में श्रीलंका को 50 रनों पर ढेर कर दिया. इस लाजवाब प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम से काफ़ी ज़्यादा उम्मीदें हैं.
भारत के दो अहम खिलाड़ियों ने चोट के बाद शानदार वापसी की है. जसप्रीत बुमराह अपनी ख़ास शैली से शुरुआती ओवरों में विकेट झटक कर टीम को जीत दिला रहे हैं.
केएल राहुल को एशिया कप में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ मुक़ाबले से महज पांच मिनट पहले बताया गया कि वे प्लेइंग इलेवन का हिस्सा हैं. इसके बाद केएल राहुन ने ना केवल बेहतरीन शतक बनाया और विकेट के पीछे बेहतरीन विकेटकीपिंग की.

इमेज स्रोत, Getty Images
किन चुनौतियों से पाना होगा पार
युवा खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी ज़ोरदार रहा है. सलामी बल्लेबाज़ शुभमन गिल अपनी शानदार बल्लेबाज़ी के चलते वर्ल्ड रैंकिंग में बाबर आज़म के बाद दूसरे पायदान पर पहुंच गए हैं.
ईशान किशन दुनिया के बेहतरीन गेंदबाज़ों के सामने शानदार बल्लेबाज़ी कर रहे हैं. जबकि 2011 के वर्ल्ड कप का फ़ाइनल खेल चुके विराट कोहली, एशिया कप में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ एक शानदार शतक जमा चुके हैं.
हालांकि टीम के शीर्ष बल्लेबाज़ों में ऐसा कोई खिलाड़ी मौजूद नहीं है जो कुछ ओवरों की गेंदबाज़ी कर सके और टूर्नामेंट में अहम भूमिका निभा सके.
बाएं हाथ के स्पिनर कुलदीप यादव ने अपनी गेंदबाज़ी में तकनीकी सुधार किया है, अब वे कहीं ज़्यादा सीधे रन अप से गेंद फेंकने आते हैं और गेंदों में तेज़ी ला चुके हैं. इन सबका उन्हें फ़ायदा मिल रहा है.
वर्ल्ड कप जीतने वाली अधिकांश टीमें छह सात गेंदबाज़ों के साथ खेलने उतरती रही हैं. ( 1996 के वर्ल्ड कप में श्रीलंकाई टीम इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण थीं.) इससे उस खिलाड़ी की भरपाई करने में मदद मिलती है, जिसका फ़ॉर्म ग़ायब हो गया हो या फिर चोटिल हो गया हो.

इमेज स्रोत, ANI
इस बार भारत चैंपियन बने, इसके लिए सभी बल्लेबाज़ों और सभी पांच गेंदबाज़ों को लगातार बेहतर करना होगा.
ऐसे में टीम चयन की भूमिका भी सबसे महत्वपूर्ण होती है. टीम में ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या की भूमिका सबसे अहम होगी. उन्हें पूरे टूर्नामेंट में फ़िट रहना होगा.
वेस्टइंडीज़ की बादशाहत और 1975 से 1983 के वर्ल्ड कप के बाद, कोई भी टीम पूरी तरह से फेवरिट नहीं मानी गई है, हालांकि ऑस्ट्रेलियाई टीम ने लगातार तीन बार वर्ल्ड कप जीतने का करिश्मा दिखाया है.
लेकिन वर्ल्ड कप की सबसे बड़ी ख़ासियत यही है कि पिछले तीन वर्ल्ड कप के दौरान अलग-अलग टीमें वर्ल्ड चैंपियन बनी हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)















